गांधी के सपनों का भारत क्या आज है ? (India of My Dreams ?)

mere sapno kaa bharat

कुछ दिनों पहले एक पोस्टऑफ़िस जाना हुआ और वहाँ पर गांधी के सपनों का भारत का एक पोस्टर लगा हुआ था, जिसका हमने फ़ोटू लिया और पढ़ा और पोस्ट मास्टर साब को हमने धन्यवाद दिया कि आपने बैंगलोर में हिन्दी मॆं पोस्टर लगाया हुआ है। गांधी का सपना पढ़कर (सही में पहली बार पढ़ा था) आँखों में रोष छा गया। जो गांधी का सपना था, सब उसका उलट है आज उनके सपनों के भारत में।

आज भी गरीब लोग यह महसूस नहीं करते हैं कि भारत उनका देश है, जिसके निर्माण में उनकी आवाज का महत्व है।

ऊँचे और नीचे वर्गों में भेद और विविध संप्रदायों में पूरा मेलजोल होगा, यह भी बिल्कुल उलट ही है।

भारत में अस्पृश्यता या शराब और दूसरी नशीली चीजों के अभिशाप के लिये कोई स्थान नहीं हो सकता। एक चौराहे से दूसरी चौराहे के बीच २ या उससे ज्यादा शराब की दुकानें देखी जा सकती हैं और नशीली चीजें तो खुलेआम उपलब्ध हैं।

स्त्रियों को वही अधिकार होंगे जो पुरुषों के होंगे। शेष सारी दुनिया के साथ हमारा सम्बन्ध शान्ति का होगा। यह भी गांधी का सपना ही रह गया।

कब सच होगा भारत को आजादी दिलाने वाले गांधी का सपना ।

या फ़िर अपनों की गुलामी और गुंडागर्दी से आजादी के लिये फ़िर एक असली गांधी की दरकार है।

14 thoughts on “गांधी के सपनों का भारत क्या आज है ? (India of My Dreams ?)

  1. गांधीजी भी क्‍या गजब ढा गये, बेचारे खादी वाले कांग्रेसियों को ड्राई-डे पर दारू के लिए थोड़ी और जेब-ढीली करनी पड़ेगी…वरना इंटिपेंडेंस डे हैप्‍पी कैसे होगा ?

  2. गांधी जी के सपनो का भारत…..
    वह तो पता नहीं कहाँ है..

    पर गांधी जी की करनी का भारत यही है… जो बीज बो गए थे…. वही फसल लहरा रही है .

  3. दरकार तो यह है कि हममें से प्रत्‍येक आदमी गॉंधी बने। किन्‍तु यह जोखिम कौन उठाए। इसीलिए, गॉंधी की दरकार तो है ही, बनी भी रहेगी।

  4. जिस तरह से यह कांग्रेस सरकार देश कि जनता के बिच में जहर घोलने का काम कर रही है उससे तो आने वाले समय में हालात और खराब होगें…

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