कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बार में – 3 (महाकवि कालिदास की सात रचनाएँ भाग १)

कालिदास ने कितने ग्रन्थों की रचना की, यह भी एक विवादित प्रश़्न है। इस विवाद का कारण है संस्कृत साहित्याकाश में एक से अधिक कालिदासों का होना। राजशेखर (१० भीं शताब्दी ई.) तक कम से कम तीन कालिदास हो चुके थे – एकोऽपि जीयते हन्त कालिदासो न केनचित़्। श्रृङ्गारे ललितोद़्गारेकालिदास्त्रयी किमु॥ यह निर्विवाद रुप से […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बार में – २

          महाकवि कालिदास के बारे में और भी किवदंतियां प्रचलित हैं-           एक किंवदन्ती के अनुसार इनकी मृत्यु वेश्या के हाथों हुई। कहते हैं कि जिस विद्योत्तमा के तिरस्कार के कारण ये महामूर्ख से इतने बड़े विद्वान बने, उसकी ये माता और गुरु के समान पूजा करने लगे। ये देखकर उसे बहुत दु:ख हुआ और […]
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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १

मैंने महाकवि कालिदास का खण्डकाव्य ’मेघदूतम’ पढ़ा, और बहुत सारी ऐसी जानकारियाँ मिली जो हमारी संस्कृति से जुड़ी हुई हैं, जो कि मुझे लगा कि वह पढ़ने को सबके लिये उपलब्ध होना चाहिये। एक जनश्रुति के अनुसार कालिदास पहले महामूर्ख थे। राजा शारदानन्द की विद्योत्तमा नाम की एक विदुषी एवं सुन्दर कन्या थी। उसे अपनी […]
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चम्पू की कविता CHAMPU KI KAVITA

एक ईमेल में यह कविता आई थी, अच्छी लगी आप भी देखिये –         Pareshaan thi Champu ki wife         Non-happening thi jo uski life         Champu ko na milta tha aaram         Office main karta kaam hi kaam                 Champu ke boss bhi the bade cool         Promotion ko har baar jate the […]
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उज्जैन यात्रा, महाकाल बाबा की शाही सवारी के दर्शन… भाग – २

१७ अगस्त बाबा महाकाल की शाही सवारी का दिन, इस बार सवारी का अगला सिरा और पिछला सिरा लगभग ७ किलोमीटर लंबा था, पहले शासकीय पूजा होती है फ़िर राजा महाकाल अपनी यात्रा मंदिर से लगभग शाम ४ बजे शुरु करते हैं, वहाँ से सवारी रामघाट पहुँचती है क्षिप्रा नदी के किनारे, वहाँ पूजन कर […]
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उज्जैन यात्रा, महाकाल बाबा की शाही सवारी के दर्शन… भाग – १

      हम उज्जैन गये थे 5 दिन की छुट्टियों पर, और खासकर गये थे महाकाल बाबा की शाही सवारी के दर्शन करने के लिये। पहले ही दिन १४ अगस्त को जन्माष्टमी थी, हम अपनी धर्मपत्नी के साथ निकले भ्रमण पर, दर्शन किये गये गोपाल मंदिर के जहां गिरधर गोपाल की बहुत ही सुन्दर, मनभावन रुप […]
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15 अगस्त पर हम छुट्टी पर थे, इतने बाजू इतने सर गिन ले दुश्मन ध्यान से हारेगा तू हर बाज़ी जब खेलें हम जी जन से

15 अगस्त पर हम छुट्टी पर थे और ये पोस्ट हम छापना ही भूल गये अब पढ़ लीजिये। इतने बाजू इतने सर गिन ले दुश्मन ध्यान से हारेगा तू हर बाज़ी जब खेलें हम जी जन से यह गाना है अमिताभ बच्चन की फिल्म "मैं आजाद हूं" से है जो की सुदेश भौ्सले ने गाया […]
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टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) में परिपक्वता पर बीमा किश्तों की वापसी, क्या बहुत जरुरी है और उसकी क्या कीमत है !!

        टर्म इंश्योरेंस बीमे का सर्वोत्तम रुप है, लेकिन क्यों “टर्म इंश्योरेंस की बीमा किश्त वापसी” वाली पॉलिसी न लें, लेकिन अगर आप नहीं मरे तो जमा की गई किश्तें वापिस नहीं मिलेंगी,  एक आम सवाल है, कौन सी पॉलिसी बेहतर है, अब हम एक सरल उदाहरण लेते हैं और उसका खुद ही विश्लेषण करते […]
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टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) बहुत जरुरी है पर ये लोगों को पसंद नहीं है, क्योंकि वो इसे पैसे की बर्बादी मानते हैं, वो सब लोग गलत हैं क्यों ? आइये देखते हैं |

        टर्म इंश्योरेंस में जमा किये हुए धन से वापिस कुछ नहीं मिलता है इस कारण से ज्यादातर लोग इसे पसंद नहीं करते हैं| मेरा मानना है की यह एक मनोवैज्ञानिक कारण है क्योंकि "टर्म इंश्योरेंस की अवधि पूरा होने पर वापिस कुछ नहीं मिलता है"| और तो और अगर अवधि पूर्ण होने के बाद […]
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क्या प्राईवेट बीमा कंपनियों में निवेश करना सुरक्षित है ?

महेश सिन्हा जी ने पिछले चिट्ठे मै पूछा था कि क्या प्राईवेट बीमा क्ंपनियां सुरक्षित है निवेश करने के लिये जो कि तमाम तरह की स्कीमें बेच रहे हैं, रिटायरमेंट प्लान, पेन्शन प्लान, यूलिप इत्यादि । इस तरह की तमाम सवलों को अगर हम देखते हैं तो सबसे पहले हम यह समझते हैं कि कौन […]
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