होली अपने बेटे के साथ -[ कुछ मेरे बारे में ]- यायावर सी जिंदगी से थक गया हूँ – मेरी कविता …. विवेक रस्तोगी

यह होली मेरी दूसरी होली होगी जो मै अपने बेटे के साथ मनाऊँगा| इसके पहले होली हमने मनाई थी साथ में ३ साल पहले आज मेरा बेटा ५ साल का हो चुका है| इस वर्ष पता नहीं कि वह होली खेल भी पायेगा कि नहीं क्योंकि अभी अभी बुखार से उठा है पिछले २०-२५ दिनों से […]
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तुम्हारा इंतजार है …. कि तुम आओगे….मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

तुम्हारा इंतजार है अभी भी, कि कहीं से तुम आओगे, और मुझसे मेरा सब कुछ, चुरा कर ले जाओगे, मेरी नींद, मेरा चैन, मेरा जीवन, मुझे सुख दोगे, मुझे ज्ञान दोगे, मुझे प्यार दोगे, मुझे अपने में समा लोगे, अपने आगोश में, ले लोगे, हे बांके बिहारी !!, इंतजार हे उस “क्षण” का, जब तुम […]
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हिन्दी ब्लॉगजगत की सदाबहार टिप्पणियां बतायें और कुछ यहाँ पायें।

आज ज्ञानदत्तजी का बज्ज आया तो कुछ अच्छा मसाला मिल गया पोस्ट बनाने के लिये। कृप्या जिन लोगों की टिप्पणियों को यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है, वे बुरा न माने कि हमारी टीपणी को सदाबहार करार क्यों दिया जा रहा है। और कोई भी सज्जन यहाँ से टीपणी को कॉपी पेस्ट करने की धृष्टता […]
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व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन में “पापा कहते हैं” की समस्या (“Papa Kehte Hain” problem in Personal Finance)

    तो मैं एक पाठक से बात कर रहा था और मुझे पता चला कि उसके पति की कमाई का निवेश उनके पापा द्वारा किया जाता है। इसका कारण जानने के लिये मैं बहुत उत्सुक था और जो सबसे बड़ा कारण मुझे पता चला वह यह कि उसके पति को निवेश और और व्यक्तिगत वित्त […]
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उलझनें जिंदगी की बढ़ती जा रही हैं …. मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

इन उलझनों से निकलना चाहता हूँ, तुम्हारे पास आकर तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ, उलझनें जिंदगी की बढ़ती जा रही हैं, उलझनों में जिंदगी फ़ँसती जा रही है, ये तो बिल्कुल मकड़जालों सी हैं, जितना निकलने की कोशिश करो, उतने ही जाल कसते जा रहा हैं, जहर की तासीर बढ़ती जा रही है, जलन महसूस […]
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वित्तीय उत्पादों (ऋण) के साथ जबरदस्ती अन्य वित्तीय उत्पादों को बेचा जाना (Force Selling combined with other financial products)

वित्तीय उत्पादों (ऋण) के साथ जबरदस्ती अन्य वित्तीय उत्पादों को बेचा जाना (Force Selling combined with other financial products)     ऋण या गृह ऋण के साथ क्या कभी आपको किसी ने यूलिप खरीदने पर मजबूर किया है ? आजकल भारत के वित्तीय बाजार में यह अनैतिक बिक्री जोरों पर है। आजकल बहुत सारे लोग ये शिकायत […]
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१४११ बाघ बचाने की मुहीम – @ सभी ब्लॉगर्स, नायक, नायिकाएँ, खिलाड़ी और विशिष्ट लोग ओह माफ़ कीजियेगा अतिविशिष्ट लोग सभी को संबोधित (1411 Save Tigers Mission A message to all…)

    @ सभी ब्लॉगर्स (जिन्होंने टिप्पणी दी है और नहीं भी दी है, जिन्होंने पिछले पोस्ट  के शेर के फ़ोटो देखे हैं या नहीं देखे हैं ) , नायक, नायिकाएँ, खिलाड़ी और विशिष्ट लोग ओह माफ़ कीजियेगा अतिविशिष्ट लोग  – ये तो सब मीडिया का पब्लिसिटी स्टंट है। कुछ नहीं होने वाला है, जो मार […]
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उसे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि दुनिया के लिये तुम क्या हो.. १४११ (It does not matter Who you are…1411)

हो सकता है कि तुम दुनिया पर राज करते हो – हो सकता है कि आप बहुत खतरनाक हों – हो सकता है कि आप स्वतंत्र हों – हो सकता है कि कुछ लोग आपका हुक्म मानते हों, या पूरी दुनिया भी मानती हो – हो सकता है कि हर कोई तुम्हें प्यार करता हो […]
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जीवन बीमा को समझिये – कुछ सवाल खुद से पूछिये और खुद को जबाब दीजिये… (Simple questions for yourself on Life Insurance..)

    एलआईसी की एन्डोमेन्ट योजना और यहाँ तक की सारी योजनाएँ सचमुच बहुत अच्छी हैं ? और क्या वह सब कुछ आप पा रहे हैं जो आपको एक बीमा के रुप में किसी भी बीमा कंपनी से मिलना चाहिये ?     सवाल है कि एलआईसी योजनाएँ जैसे कि जीवन आनंद जो कि जीवन का जोखिम […]
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आखिर मैं कब तक भाग-भाग कर जिंदगी को पकड़ता रहूँगा..मेरी कविता…विवेक रस्तोगी

आखिर मैं कब तक भाग-भाग कर जिंदगी को पकड़ता रहूँगा कभी एक पहलू को छूने की कोशिश में दूसरा हाथ से निकल जाता है और बस फ़िर दूसरे पहलू को वापस अपने पास लाने की जद्दोजहद उसके समीकरण हमेशा चलते रहते हैं, इसी तरह कभी भी ये दो पहलू मेरी पकड़ में ही न आ […]
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