ऐसे ही कुछ भी, कहीं से भी यात्रा वृत्तांत भाग – ८ [बच्चों की चिल्लपों पूरी ट्रेन में, और एक ब्लॉगर से मुलाकात] आखिरी भाग

पहला भाग,  दूसरा भाग, तीसरा भाग, चौथा भाग, पाँचवा भाग, छठा भाग, सातवां भाग     ट्रेन में हमारे बेटेलाल को खेलने के लिये अपनी ही उम्र का एक और दोस्त अपने ही कंपार्टमेंट में मिल गया, और क्या मस्ती शुरु की है, दोनों एक से बढ़कर एक करतब दिखाने की कोशिश कर रहे थे। पूरा […]
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ऐसे ही कुछ भी, कहीं से भी यात्रा वृत्तांत भाग – ७ [कुछ चित्र मेरी यात्रा के, धौलपुर, उज्जैन रामघाट, महाकाल नंदीगृह और विजयपथ उपन्यास]

पहला भाग,  दूसरा भाग, तीसरा भाग, चौथा भाग, पाँचवा भाग, छठा भाग धौलपुर के कुछ फ़ोटो, जो कि हमने रिक्शे पर से अपने नये मोबाईल से खींचे।   धौलपुर स्टेशन के कुछ और फ़ोटो जिसमें हमारे “लाल” लाल रंग के कपड़ों में नजर आ रहे हैं, इन्हें श्टाईल में फ़ोटो खिंचाने का बहुत शौक है। […]
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ऐसे ही कुछ भी, कहीं से भी यात्रा वृत्तांत भाग – ६ [मोबाईल का अलार्म, मवाली दंपत्ति की असलियत सामने आई]

पहला भाग,  दूसरा भाग, तीसरा भाग, चौथा भाग, पाँचवा भाग      झांसी से ट्रेन चलने लगी, अब कंपार्टमेंट में हम तीन लोग ही बचे, मवाली दंपत्ति और मैं। मवाली श्रीमती जी के पास उनके मोबाईल पर फ़ोन पर फ़ोन आये जा रहे थे पर वे उठा नहीं रही थीं, इस पर वे उस मवाली से […]
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ऐसे ही कुछ भी, कहीं से भी यात्रा वृत्तांत भाग – ५ [“जो भक्त हो आठ हाथों वाली का, उसका क्या बिगाड़ लेंगे ये दो हाथ वाले”]

पहला भाग,  दूसरा भाग, तीसरा भाग, चौथा भाग     थोड़ी देर में ही विदिशा आया जो कि मेरी जन्मस्थली है, मुझे अच्छी तरह से याद है कि जब मैं अपने होश में पहली बार विदिशा से मालवा एक्सप्रेस से ही निकला था तब मैंने ट्रेन से उतरकर विदिशा की माटी को अपने माथे पर लगाया […]
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ऐसे ही कुछ भी, कहीं से भी यात्रा वृत्तांत भाग – ४ (निशाचर और दिनचर, रेल्वे में गार्ड का महत्व)

पहला भाग,  दूसरा भाग, तीसरा भाग     अब अपने मवाली भाईसाहब बोले कि अपनी दिनचर्या तो शाम से शुरु होती है, और सुबह खत्म होती है, हम थोड़ा चकराये कि ये भला क्या बात हुई। फ़िर वे खुलासा करके बोले कि अपना काम लेनदेन का है, सुबह सात बजे सोते हैं शाम को सात आठ […]
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ऐसे ही कुछ भी, कहीं से भी यात्रा वृत्तांत भाग – ३ [हिन्दी ब्लॉग की मार्केटिंग]

पहला भाग,  दूसरा भाग     तभी सीहोर स्टेशन आ गया और डॉक्टर साहब प्लेटफ़ार्म पर अपनी मिसेज के लिये आईसक्रीम लेने चल दिये। वे बोलीं कि हमें तो स्ट्राबेरी पसंद है, तो बस डॉक्टर साहब स्ट्राबेरी आईसक्रीम ले आये उनके लिये, आखिर १४ वीं सालगिरह जो थी शादी की।     दूसरी तरफ़ मवाली युगल की […]
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ऐसे ही कुछ भी, कहीं से भी यात्रा वृत्तांत भाग – २ [मोबाईल ट्रेकर की जानकारी साझा की]

पहला भाग पढ़ने के लिये यहाँ चटका लगाईये।     इस मवाली युगल ने ही दो सीटों को ८०० रुपये देकर अपने नाम करवा लिया था, बंदा लगता तो भाई ही था। बिल्कुल अनिल कुमार स्टाईल के बाल और फ़िल्मी अंदाज में शर्ट के दो बटन खुले हुए। और उनकी पत्नी बिल्कुल हीरोईन श्टाईल में वस्त्र […]
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ऐसे ही कुछ भी, कहीं से भी यात्रा वृत्तांत भाग – १

    सुबह उज्जैन पहुँचे तैयार हुए और फ़िर घर पर बातें कर ही रहे थे कि वापिस अपनी ट्रेन का समय हो गया, मालवा एक्सप्रेस धौलपुर के लिये। धौलपुर एक छोटा सा स्टेशन है राजस्थान राज्य का, जो कि दिल्ली भोपाल सेंट्रल लाईन पर ग्वालियर और आगरा के बीच में पड़ता है।     ट्रेन उज्जैन […]
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उलझनें जिंदगी की …. मेरी कविता …. विवेक रस्तोगी

उलझनें जिंदगी की बढ़ती ही जा रही हैं जैसे इनके बिना जीना दुश्वार हो उलझनें हों तभी प्रेम की कीमत सुलझन की कीमत पता चलती है क्यों इतने बेकाबू हो जाते हैं कुछ पल कुछ क्षण अपनी जिंदगी के कुछ बेहयाई भी छा जाती है पर फ़िर भी इम्तिहान खत्म नहीं होता कहीं झुरमुट में […]
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“ऐ टकल्या”, विरार भाईंदर की लोकल की खासियत और २५,००० वोल्ट

    हम चल दिये ५ दिन के लिये मुंबई से बाहर, बोरिवली स्टेशन से हमारी ट्रेन थी, हम ट्रेन के आने के ठीक १० मिनिट पहले प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँच गये, तो चार नंबर प्लेटफ़ार्म से ट्रेन जाती है, और इसी प्लेटफ़ॉर्म से विरार, भाईंदर की लोकल ट्रेनें भी जाती हैं। इन लोकल ट्रेन में पब्लिक […]
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