एनईएफ़टी क्या है, क्या आप इसका उपयोग करते हैं..(What is NEFT.. are you using NEFT for Fund Transfer ?)

क्या आप एनईएफ़टी (NEFT) का उपयोग करते हैं या अभी भी चेक से ही भुगतान करते हैं। किसी को भी अगर धन अंतरण करना हो तो आप क्या अपनाते हैं, चेक या एनईएफ़टी (NEFT) ? चेक अंग्रेजों के जमाने की बात हो गई, जो कि वाकई अंग्रेजों के द्वारा .. आगे पढ़ने के लिये यहाँ […]
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आईडीएफ़सी दीर्घकालीन इंफ़्रास्ट्रक्चर बॉन्ड २०१० (IDFC Long Term Infrastructure Bond 2010)

इस बार के बजट भाषण में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आयकर में लाभ की घोषणा की थी, धारा 80CCF के तहत २०,००० रुपयों तक का निवेश विशेष बुनियादी सुविधाओं वाले बॉन्ड में किया जा सकेगा। इसकी आकर्षक बात यह है कि अभी तक की जाने वाली १,००,००० रुपयों की बचत के बाद ये बचत […]
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अर..रे आओ ना ! क्यों इतनी दूरी तुमने बना रखी है… मेरी कविता .. विवेक रस्तोगी

अर..रे आओ ना ! क्यों इतनी दूरी तुमने बना रखी है.   हाँ तुम्हें पाने के लिये बहुत जतन करना पड़ेंगे हाँ बहुत श्रम करना पड़ेंगे करेंगे ना !   तुम्हें पाने के लिये दुनिया जहान से लड़ना पड़ेगा शायद युद्ध भी करना पड़ेगा करेंगे ना !   लड़ेंगे मरेंगे पर तुम्हें पाकर ही रहेंगे […]
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ओह्ह.. तो तुम आ गये … मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

ओह्ह.. तो तुम आ गये कितना इंतजार करवाया कहाँ छिपे थे, बहता नीर भी रुक ही गया था तुम्हारे लिये, पता है…. उड़ते हुए बदरा बौरा से गये थे तुम्हारे लिये, पता है…. रुकी थी वो गौरैया भी चहचहाने से तुम्हारे लिये, पता है…. हवा मंद मंद सी हुई थी, तुम्हारे लिये… अंधकार गहराने से […]
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ऊफ़्फ़ कितनी जोर से दरवाजा बंद कर रखा है…मेरी कविता…विवेक रस्तोगी

ऊफ़्फ़ कितनी जोर से दरवाजा बंद कर रखा है जरा कुंडी ढ़ीली करो जिससे हलके से धक्के से ये किवाड़ खुल जाये, कुंडी हटाना मत नहीं तो हवाएँ बहुत जालिम हैं।
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जाती है इज्जत तो जाने दो कम से कम भारत की इज्जत लुटने से तो बच जायेगी

    आज सुबह के अखबारों में मुख्य पृष्ठ पर खबर चस्पी हुई है, कि दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के दौरान ही एक बन रहा पुल गिर गया, और २७ घायल हुए।     इस भ्रष्टाचारी तंत्र ने भारत की इज्जत के साथ भी समझौता किया और भारत माता की इज्जत लुटने से का पूरा […]
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मुंबई की बस के सफ़र के कुछ क्षण..आगे..३ (श्रंखला पद्धति से टिकट मंगवाया गया) (Mumbai experience of Best Bus)

    आज घर से निकलने में तनिक १-२ मिनिट की देर हो गई, तो ऐसा लगा कि कहीं बस न छूट जाये, चूँकि  मुंबई की बस पीछे डिपो से बनकर चलती है, इसलिये हमेशा समय पर आती है। तो हम बिल्कुल मुंबईया तेज चाल से चलने लगे, जिससे बस मिल जाये और वाकई रोज जो […]
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मुंबई की बस के सफ़र के कुछ क्षण… आगे..२.. गरोदर स्त्रियाँ (Mumbai experience Best Bus)

    पिछली पोस्ट पर अरविन्द मिश्रा जी ने पूछा था कि गरोदर स्त्रियाँ कौन सी प्रजाति होती हैं, गर्भवती स्त्री को मराठी में गरोदर कहते हैं, सच कहूँ तो इसका मतलब तो मुझे भी नहीं पता था और न ही जानने की कोशिश की थी, परंतु अरविन्द जी ने पूछा तो ही पता किया।     […]
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मुंबई की बस के सफ़र के कुछ क्षण… आगे …१..सीट पर कब्जा कैसे करें (Mumbai Experience of Best Bus)

पिछली पोस्ट को ही आगे बढ़ाता हूँ, एक सवाल था “कंडक्टर को मुंबईया लोग क्या कहते हैं।” तो जबाब है – “मास्टर” । अगर कभी टिकट लेना हो तो कहिये “मास्टर फ़लाने जगह का टिकट दीजिये”, बदले में मास्टर अपनी टिकट की पेटी में से टिकट निकालेगा, पंच करेगा और बचे हुए पैसे वापिस देगा, […]
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