प्यार में बहुत उपयोगी है ३ जी तकनीक (Use of 3G Technology in Love..)

यह पोस्ट 3G life blogger contest के लिये लिखी गई है, जो कि टाटा डोकोमो द्वारा आयोजित की गई है। यह पोस्ट इंडीब्लॉगर प्रतियोगिता के लिये लिखी गई है, कृप्या अपनी वोटिंग करें । चटका लगायें। इसके पहले की पोस्ट भी देखें  – [पति की मुसीबत ३ जी तकनीक से (Problems of Husband by 3 […]
Continue reading…

 

कुछ करना चाहता हूँ केवल अपने लिये … मेरी कविता .. विवेक रस्तोगी

मुक्ति चाहता हूँ इन सांसारिक बंधनों से इन बेड़ियों को तोड़ना चाहता हूँ रोज की घुटन से निकलना चाहता हूँ अब.. जीना चाहता हूँ केवल अपने लिये कुछ करना चाहता हूँ केवल अपने लिये …
Continue reading…

 

पति की मुसीबत ३ जी तकनीक से (Problems of Husband by 3G Technology)

यह पोस्ट 3G life blogger contest के लिये लिखी गई है, जो कि टाटा डोकोमो द्वारा आयोजित की गई है। फोन पर घंटी बज उठी, तो देखा घरवाली का वीडियो कॉल है, आस पास देखा और अपनी सिगरेट ऐशट्रे में रखकर दोस्तों को बोला कि बस अभी आया, जल्दी से अपने गिलास से आखिरीघूँट  ख़त्म […]
Continue reading…

 

अकिंचन मन .. न चैट, न बज्ज, न ब्लॉगिंग … मेरी कविता .. विवेक रस्तोगी

अकिंचन मन पता नहीं क्या चाहता है कुछ कहना कुछ सुनना कुछ तो… पर कभी कभी मन की बातों को समझ नहीं पाते हैं न चैट, न बज्ज, न ब्लॉगिंग किसी में मन नहीं लगता कुछ ओर ही …. चाहता है.. समझ नहीं आता .. अकिंचन मन क्या चाहता है.. (चित्र मेरे मित्र सुनिल कुबेर […]
Continue reading…

 

इंतजार तुम्हारे आने का … मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

इंतजार तुम्हारे आने का तुम आओगे मुझे पक्का यकीं है तुमने वादा जो किया है अब कब आते हो ये देखना है तुम आने के पहले इस इंतजार में कितना सताते हो ये देखना है तुम्हारी टोह में बैठे हैं हर पल तुम्हारा इंतजार लगा रहता है बस इतना पक्का यकीं है कि तुम आओगे […]
Continue reading…

 

मशीनी युग में भी मानसिक चेतना जरुरी (Consciousness in the machine age)

    आज के मशीनी युग में हम सभी लोग पूरी तरह से मशीनों पर निर्भर हो चुके हैं, सोचिये अगर बिजली ही न हो तो क्या ये मशीनें हमारा साथ देंगी। या फ़िर वह मशीन ही बंद हो गई हो जिस पर हम निर्भर हों।     बात है कल कि सुबह ६.२५ की मेरी उड़ान […]
Continue reading…

 

कुछ नये चुटकले (Some new jokes)

टीचर : तुम क्लास में लेट क्यों आए, बाकी सारे तो पहले आ गए थे? स्टूडेंट : सर झुंड में तो कुत्ते आते हैं, शेर तो हमेशा अकेला ही आता है.. —————————————————-x———————————————– चिन्टू : वह कौन-सा मज़ाक है, जो विद्यार्थी पहले भी किया करते थे, आज भी करते हैं और क़यामत तक करते रहेंगे…? मिन्टू […]
Continue reading…

 

आधुनिक शिक्षा की दौड़ में कहाँ हैं हमारे सांस्कृतिक मूल्य (Can we save our indian culture by this Education ?)

    क्या शिक्षा में सांस्कृतिक मूल्य नहीं होने चाहिये, शिक्षा केवल आधुनिक विषयों पर ही होना चाहिये जिससे रोजगार के अवसर पैदा हो सकें या फ़िर शिक्षा मानव में नैतिक मूल्य और सांस्कृतिक मूल्य की भी वाहक है। कैथलिक विद्यालय में जाकर हमारे बच्चे क्या सीख रहे हैं – यीशु मसीह देता खुशी यीशु मसीह […]
Continue reading…

 

“हिन्दुत्व” पढ़ाने वाले भारतीय संस्कृति के विद्यालयों की कमी क्यों है, हमारे भारत् में..?

    एक् बात मन में हमेशा से टीसती रही है कि हम लोग उन परिवारों के बच्चों को देखकर ईर्ष्या करते हैं जो कॉन्वेन्ट विद्यालयों में पढ़े होते हैं, वहाँ पर आंग्लभाषा अनिवार्य है, उन विद्यालयों में अगर हिन्दी बोली जाती है तो वहाँ दंड का प्रावधान है। वे लोग अपनी संस्कृति की बातें बचपन […]
Continue reading…

 

अगर हमारे मास्साब को ७,८,१३ के पहाड़े और विज्ञान की मूल बातें न पता हों तो हमारे देश के बच्चों का भविष्य क्या होगा ..!

    खबर है थाणे महाराष्ट्र प्रदेश की (Thane civic teachers flunk surprise test) कि शिक्षा विभाग के सरकारी विद्यालयों में महकमे ने कुछ अध्यापकों से उनके विषय से संबंधित मूल प्रश्न पूछे, जैसे कि ७,८,१३ के पहाड़े और रसायन विज्ञान के मूल सूत्र जो कि वे लगभग पिछले १५-२० वर्षों से बच्चों को पढ़ाते रहे […]
Continue reading…