शंकर शर्मा की बजट चर्चा और बाजार पर रुख… (Shankar Sharma on Budget and Market)

    ऐसे ही समाचारों के चैनल बदल कर देख रहे थे कि किसी एक चैनल पर शंकर शर्मा दिखे जो कि न्यूज ऐंकर बात कर रहे थे बस अपना रिमोट वहीं रुक गया । यह बजट के पहले का विशेष साक्षात्कार था। शंकर शर्मा जो कि फ़र्स्ट ग्लोबल के प्रमुख हैं और हम वर्षों से […]
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बेचारे बैंगलोर के मच्छर भी ना अपना मच्छरपना नहीं कर पा रहे हैं… और मुंबई के मच्छर उस्ताद हैं (Bangalor & Mumbai Mosquitoes)

    जब से बैंगलोर आये हैं, पता नहीं क्यों मुंबई से तुलना की आदत लग गई है, हरेक चीज में। खैर यह तो मानवीय स्वभाव है, हमें जहाँ रहने की आदत हो जाती है और जब नई जगह जाना पड़ता है तो उस माहौल में ढ़लने वाला जो समय है वह तुलना में ही निकलता […]
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भीगी बरसातों में तुम… मेरी कविता … विवेक रस्तोगी

ओहो सावन का इंतजार नहीं करना पड़ता है आजकल बरसात को, जब चाहे बरस जाती हो बरसात और किसी अपने की सर्द यादें दिला जाती हो, भीगी बरसातों में तुम कहीं खोयी खोयी सी अपने ही अंदाज में, भिगाती हुई खुद को बरसात भी तुमको भिगोने का आनंद लेती है, सिसकियाँ आँहें भरते हुए लोग […]
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मेरी ९ वीं वैवाहिक वर्षगांठ

कल हमारे विवाह को ९ वर्ष पूर्ण हो गये, अब तो ९ वर्ष मतलब बहुत बड़ा अंक लगने लगा है, ऐसा लगता है कि बुढ़ाने की ओर तेजी से अग्रसर हैं। कैसे ये ९ वर्ष बीत गये, पता ही नहीं चला। ऐसा लगता है कि जिंदगी का बीता हर पल बस अभी तो बीता है, […]
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आज आप इतने क्यों गोरे लग रहे हो.. फ़ेयर & लवली ? (Colour Complex)

    कल ऐसे ही एक हमारे सहकर्मी ने दोपहर में भोजन के पहले हमसे पूछ डाला कि आज आप कुछ ज्यादा ही गोरे लग रहे हो, आज क्या किया है। हमने मजाक में कहा कि फ़ेयर एन्ड लवली लगाई है। तो वह मुझसे पूछने लगा कि क्या वाकई फ़ेयर एन्ड लवली लगाने से गोरे हो […]
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स्वर्ग में किसको जाने को मिलेगा ब्राह्मण, डॉक्टर या आईटी (IT) पेशेवर को… [Who will get entry in Swarg..]

स्वर्ग के द्वार पर तीन लोग खड़े थे। भगवान – सिर्फ़ एक ही अंदर जा सकता है।पहला – मैं ब्राह्मण हूँ, सारी उम्र आपकी सेवा की है। स्वर्ग पर मेरा हक है।दूसरा – मैं डॉक्टर हूँ, सारी उम्र लोगों की सेवा की है। स्वर्ग पर मेरा हक है।तीसरा – मैंने आईटी (IT) में नौकरी की है| […]
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हिन्दी का दर्द और कवि शमशेर बहादुर सिंह की शती

    आजकल बिगबोस जैसे रियलिटी कार्यक्रमों और घटिया सीरियलों के बीच कहीं भी हिन्दी साहित्य की वार्ताएँ सुनाई ही नहीं देती हैं, निजी चैनल तो बस केवल घटिया मसाला ही बेचने में लगे हैं। कोई भी चैनल हिन्दी साहित्य पर वार्ताएँ नहीं देता।     हिन्दी साहित्य वार्ता हमें मिली लोकसभा चैनल पर, कार्यक्रम का नाम […]
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प्रेम दिवस पर दो कविताएँ अपनी प्रेमिका के लिये… मेरी कविता… विवेक रस्तोगी

प्रेम दिवस याने कि प्रेम को दिखाने का दिन, प्रेम के अहसास करने का दिन, और मैं अपनी प्रेमिका के लिये याने के अपनी पत्नी को दो कविताएँ समर्पित कर रहा हूँ, सच्चे दिल से लिखी है, अपनी पीड़ा लिखी है… कृप्या और यह न कहे कि यही तो हम भी कहना चाह रहे थे […]
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कुछ पल मूँगफ़ली के दाने, भेलपुरी और बस का सफ़र, मुंबई और बैंगलोर

    ऑफ़िस से पैदल ही बाहर निकल पड़ा था, आज अकेला ही था, कोई साथ न था, या तो पहले निकल गये थे या फ़िर रुके हुए थे, मैं ही थोड़ा समय के बीच से निकल गया था। पता नहीं इन कांक्रीट के जंगलों में सोचता हुआ चला जा रहा था। आज तो वो मूँगफ़ली […]
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हाय, कैसी है तू

“हाय, कैसी है तू” “मैं भी बढ़िया हूँ, और बता क्या चल रहा है” “क्या पूना में पड़ी हुई है, आजा तू बैंगलोर शिफ़्ट हो जा” “यहाँ पर भी अच्छा जॉब मिल जायेगा, वेदर बहुत अच्छा है” “अरे यार क्या सिटी बस में घर जा रही है, कितनी खड़ खड़ की आवाजें आ रही हैं” […]
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