कुछ खत के नमूने जो मेरी यादों में हैं…

ये कुछ खत के नमूने हैं तो मेरी यादों में, जहन में हैं जो कभी मैं लिखा करता था,  क्या ऐसे ही कुछ नमूने आपको याद हैं… बताईये तो..   आदरणीय मम्मी जी एवं पापाजी, सादर चरण स्पर्श, आशा है कि आप कुशल होंगे, —————————————————————– —————————————————————– —————————————————————– आपका पुत्र ==================================== प्रिय बहन….. सदा खुश रहो, […]
Continue reading…

 

होली के बहाने होली है… होली है…

होली मौसम है रंग का, लाल पीले हरे नीले गुलाबी सभी रंगों का, जीवन में रंगों की लहलहाती फ़सलों को बाँटने का.. होली बहाना है भांग छानने का, मौका है तरन्नुम में जमने का, और तरन्नुम जमाने का,  बड़ों को भी बच्चा बनने का.. होली पर कितने ही पकवान बनते हैं, गुझिया, चकली, शक्करपारे, ठंडाई […]
Continue reading…

 

ऐश करना क्या होता है, जिंदगी की दौड़.. (What is Aish.. about life..)

    सब लोग कहते हैं ना कि ऐश करेंगे पर क्या किसी को पता है कि ऐश करना होता क्या है? नहीं तो चलो हम बताते हैं, हमें हमारे महाविद्यालय के प्रोफ़ेसर साहब ने बतायी थी।     ऐश जो सिगरेट के आगे राख होती है जिसे हम कश लेने के बाद झटक देते हैं वह […]
Continue reading…

 

गोल्ड लोन के बारे में कुछ छोटी छोटी जरुरी बातें

    अभी मैंने गोल्ड लोन के बारे में लिखा तो पाठकों की प्रतिक्रिया कुछ इस प्रकार थीं कि लोन लेना अच्छी बात नहीं है, इससे बचना चाहिये मैं भी व्यक्तिगत रुप से इस बात पर सहमत हूँ कि लोन लेना बिल्कुल अच्छी बात नहीं है और जो एक बार अगर लोन के जाल में फ़ँस […]
Continue reading…

 

गोल्ड लोन – चमक असली या नकली

    आजकल टीवी और रेडियो पर कितने ही लुभावने विज्ञापन आते हैं कि जब भी आपको रुपयों की जरुरत हो तो गोल्ड लोन लेना कितना साधारण है और एकदम और कभी भी ले सकते हैं। उतना ही महत्वपूर्ण है कि गोल्ड लोन के पीछे की सच्चाई जानना, क्या वाकई गोल्ड लोन लेना बहुत अच्छा है […]
Continue reading…

 

आदमी की धूर्तता

    कल बेटे की स्कूलबस के स्टॉप पर लेने के लिये खड़ा था, वहीं ऑटो स्टैंड भी है। बस आने में समय था तो मैं अपने मोबाईल पर ही चैटिंग करने लग गया और साथ ही ऑटो भी देख रहा था, बिल्कुल नया चकाचक ऑटो था, और चालक शकल से ही घाघ लग रहा था, […]
Continue reading…

 

दे घुमा के … घुमा के … दे घुमा के… और ऊँगली में टिंगली

ऐसा लगता है कि ये गाना भारतियों के लिये बनाया गया है कि जब खिलाड़ी प्रदर्शन न करें तो दर्शकों को इस गाने पर अमल करना चाहिये और बस शुरु हो जाना चाहिये दे घुमा के … घुमा के … दे घुमा के… विश्वकप तो लगता है कि भारत की तरफ़ से केवल २-३ खिलाड़ी […]
Continue reading…

 

बस बहुत हुआ… मेरी कविता.. विवेक रस्तोगी

बस बहुत हुआ, जीवन का उत्सव अब जीवन जीने की इच्छा क्षीण होने लगी है जीवंत जीवन की गहराइयाँ कम होने लगी हैं अबल प्रबल मन की धाराएँ प्रवाहित होने लगी हैं कृतघ्नता प्रेम के साथ दोषित होने लगी है
Continue reading…

 

मद कौन सा अच्छा भौतिक या श्रीमद…

    मद बहुत अच्छी चीज है, परंतु वह मद कैसा है इस पर निर्भर करता है कि उस मद में चूर होकर व्यक्ति कैसा व्यवहार करता है। व्यक्ति मद में आकर ही अपना व्यवहार बदलता है।     भौतिक मद से व्यक्ति की बुद्धि मदमस्त हो जाती है और वह अन्य व्यक्तियों को नुक्सान पहुँचाने लगता […]
Continue reading…

 

आज के परिपेक्ष्य में गोवर्धन पर्वत प्रसंग..

    आज श्रीमदभागवत कथा सुन रहे थे, तो उसमें एक प्रसंग था जब कृष्णजी इन्द्र के प्रकोप की बारिश से बचाने के लिये गोकुलवासियों के लिये गोवर्धन पर्वत को अपनी चींटी ऊँगली याने कि सबसे छोटी ऊँगली से तीन दिनों तक उठा लेते हैं, तो गोकुलवासी भी पर्वत को उठाने में अपने सामर्थ्य अनुसार योगदान […]
Continue reading…