घर बैठे वेद की शिक्षा

     “धर्मो रक्षति रक्षत:” अर्थात धर्म की रक्षा से ही सबकी रक्षा होती है, अगर हम धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म हमारी रक्षा करेगा ।      वेदों को बहुत करीब से जानने की बहुत ही तीक्ष्ण इच्छा थी, और वेदों को पढ़ना कहाँ से शुरू किया जाये बहुत देखा, बहुत सोचा, फ़िर कल्याण के […]
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ग्रीष्म (गर्मी) ऋतु पर निबंध

    भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा है। विश्व में यही एक देश है, जहाँ वर्षा में छ: ऋतुओं का आगमन नियमित रूप से होता है। सभी ऋतुओं में प्रकृति की निराली छ्टा होती है और जीवन के लिये प्रत्येक ऋतु का अपना महत्व होता है। वित्तगुरु वित्तीय जानकारियाँ हिन्दी भाषा में       काल-क्रम से […]
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मुँबई से बैंगलोर तक भाषा का सफ़र एवं अनुभव..

    करीबन ढ़ाई वर्ष पहल मुँबई से बैंगलोर आये थे तो हम सभी को भाषा की समस्या का सामना करना पड़ा, हालांकि यहाँ अधिकतर लोग हिन्दी समझ भी लेते हैं और बोल भी लेते हैं, परंतु कुछ लोग ऐसे हैं जो हिन्दी समझते हुए जानते हुए भी हिन्दी में संवाद स्थापित नहीं करते हैं, वे […]
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हम स्वभाव से ही तामसी होते जा रहे हैं..

यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत् । उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम् ॥ १० ॥ अध्याय १७     अर्थात – खाने से तीन घंटे पूर्व पकाया गया, स्वादहीन, वियोजित एवं सड़ा, जूठा तथा अस्पृश्य वस्तुओं से युक्त भोजन उन लोगों को प्रिय होता है, जो तामसी होते हैं ।     आहार का उद्देश्य आयु को बढ़ाना, […]
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गीता के श्लोक की बातें सरल हैं, परंतु व्यवहार में बहुत कठिन

स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे भ्रुवोः । प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ॥ २७ ॥ यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः । विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ॥ २८ ॥ अर्थात समस्त इन्द्रियविषयों को बाहर करके, दृष्टि को भौंहों के मध्य में केन्द्रित करके, प्राण तथा अपान वायु को नथुनों के भीतर रोककर और इस तरह मन, इन्द्रियों तथा बुद्धि को वश में […]
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बलगम या कफ़ खतरनाक भी हो सकता है (Sputum or Cough can be dangerous)

    हम बेटेलाल के साथ खेल रहे थे और अच्छी बात यह थी कि बेटेलाल कैरम में हमसे जीत रहे थे, तभी हमें थोड़ी खाँसी उठी, मुँह में बलगम (Sputum) था,  हम बलगम (Sputum) थूकने के लिये  उठे तो बेटेलाल बोले “डैडी, आज हार रहे हो, तो बीच में ही उठकर जा रहे हो”, हमने […]
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चाँद पूर्ण रूप में

चाँद जब रोटी सा गोल होता है, पूर्ण श्वेत, अपने पूर्ण रूप में, उसकी आभा और निखर आती है, मिलते तो रोज हैं छत पर, पर देखना तुम्हें केवल इसी दिन होता है, काश की चाँद हर हफ़्ते पूर्ण हो, महीने में एक बार तुम्हें देखना, फ़िर दो पखवाड़े उसी सुरमई तस्वीर को, सीने से […]
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रिश्तों की गर्माहट

    जब से मानव सभ्यता इस दुनिया में आई है शायद तभी से रिश्ते भी अस्तित्व में हैं, रिश्ते मतलब कि एक दूसरे से किसी भी प्रकार से जुड़ना, रिश्ता कैसा भी हो, रिश्ते में गर्माहट बहुत जरूरी है। रिश्ते भी कई प्रकार के हैं, खून के रिश्ते याने कि रिश्तेदार, दोस्त जो साथ पढ़ते […]
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बचपन की परिपक्वता..

    परिवार गर्मी की छुट्टियों में घर गया हुआ है, यही दिन होते हैं जब हम अकेले होते हैं और बेटेलाल अपने दादा दादी और नाना नानी का भरपूर स्नेह पाते हैं। बेटेलाल सुबह से रात तक अपने हमउम्र दोस्तों के साथ खेलने में व्यस्त होते हैं, वहाँ उनकी भरपूर मंडली है, और यहाँ बैंगलोर […]
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आधुनिक संचार क्रांति एवं संचार के नए आयाम, इंटरनेट, ई-मेल, डॉट कॉम (वेबसाइट) – निबंध

    प्रगति कि पथ पर मानव बहुत दूर चला आया है। जीवन के हर क्षेत्र में कई ऐसे मुकाम प्राप्त हो गये हैं जो हमें जीवन की सभी सुविधाएँ, सभी आराम प्रदान करते हैं। आज संसार मानव की मुट्ठी में समाया हुआ है। जीवन के क्षेत्रों में सबसे अधिक क्रांतिकारी कदम संचार क्षेत्र में उठाए […]
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