प्रेमपत्र.. मेरी कविता

वे प्रेमपत्र जो हमने एक दूसरे को लिखे थे कितना प्यार उमड़ता था उन पत्रों में तुम्हारा एक एक शब्द कान में लहरी जैसा गूँजता रहता था   पहला प्रेमपत्र तब तक पढ़ता था जब तक नये शब्द ना आ जायें तुम्हारे प्रेमपत्रों से ऊर्जा, संबल और शक्ति मिलते थे कई बातें और शब्द तो […]
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आधुनिक शिक्षा अध्ययन .. (Ways of Modern Education..)

    शिक्षा अध्ययन करने के तरीकों में भारी बदलाव आ गया है । पहले अध्ययन के लिये कक्षा में जाना अनिवार्य होता था, पर अब तकनीक ने सब बदल कर रख दिया है। अधिकतर अध्यापन अब ऑनलाइन होने लगा है। किताबों की जगह पीडीएफ फाईलों ने ले ली है।     पहले जब किताबों से […]
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वो एक रंग की कमीज..

    कमीज खरीदने की जरूरत महसूस होने लगी थी, कंपनी बदली थी, पहले वाली कंपनी में जीन्स टीशर्ट भी रोज चल जाती थी, परंतु जिस कंपनी में आये थे, वहाँ सप्ताह में ४ दिन औपचारिक कपड़े पहनने का रिवाज था और जब लगातार पिछले २ वर्षों से जीन्स से ही गुजारा चल रहा था तो […]
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वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी भारतीयों के लिये..

    हिन्दी दिवस हमें क्यों मनाने की जरूरत पड़ी, ये बात समझ से परे है, हमने तो आजतक अंग्रेजी दिवस या किसी और भाषा का दिवस मनाते नहीं देखा । यह ठीक है कि भारत पर कभी ब्रतानिया साम्राज्य शासन किया करता था, परंतु हमने आजाद होने के बाद भी अपनी भाषा का सम्मान वापिस […]
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मैं झूठ क्यों बोलने लगा हूँ

मैं झूठ क्यों बोलने लगा हूँ कारण ढूँढ़ रहा हूँ, पर जीवन के इन रंगों से अंजान हूँ, बोझ हैं ये झूठ मेरे मन पर..   ऐसे गाढ़े विचलित रंग, जीवन की डोर भी विचलित, मन का आकाश भी, और तेरा मेरा रिश्ता भी..   तुमसे छिपाना मेरी मजबूरी, मेरी कमजोरी, मेरी लाचारी, हासिल क्या […]
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जीवन के तीन सच

क्राउड मैनेजमेंट     बेटेलाल के मनोरंजन के लिये पास ही गये थे, तो पता चला कि उस जगह वहीं पास के आई.टी. पार्क का सन्डे फ़ेस्ट चल रहा है और प्रवेश भी केवल उन्हीं आई.टी.पार्क वालों के लिये था, पार्किंग फ़ुल होने के कारण, पार्किंग आई.टी.पार्क में करवाई गई, वहाँ पर भी अव्यवस्था का बोलबाला […]
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