उज्जैन उज्जयिनी महाकाल महाकालेश्वर महामृत्युँजय जाप जल एवं दुग्ध अभिषेक भस्मारती दर्शन (Ujjain Mahakal Mahakaleshwar Mahamrityunjaya Jaap Bhasma Aarti)

    कालों का काल महाकाल के दर्शन करने उज्जैन दूर दूर से भक्त आते हैं, उज्जयिनी और अवन्तिका नाम से भी यह नगरी प्राचीनकाल में जानी जाती थी। स्कन्दपुराण के अवन्तिखंड में अवन्ति प्रदेश का महात्म्य वर्णित है। उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर को मंगल गृह का जन्मस्थान माना जाता है, और यहीं से कर्क रेखा […]
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रामायण के सीताजी स्वयंवर के कुछ प्रसंग (Some context of Sitaji Swyvamvar from Ramayana)

    आज सुबह रामायण के कुछ प्रसंग सुन रहे थे, बहुत सी बातें अच्छी लगीं और शक भी होता कि वाकई में रामायण में ऐसा लिखा हुआ है या ये अपने मन से ही किसी चौपाई का अर्थ कुछ और बताकर जनता को आकर्षित कर रहे हैं, अगर हमें ये जानना है कि सब […]
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दिव्य-नदी शिप्रा (Divine River Kshipra Ujjain)

    अपनी प्राचीनतम, पवित्रता एवं पापनाशकता आदि के कारण प्रसिद्ध उज्जयिनी की प्रमुख नदी शिप्रा सदा स्मरणीय है। यजुर्वेद में शिप्रे अवेः पयः पद के द्वारा इस नदी के स्मरण हुआ है। निरूक्त में शिप्रा कस्मात ? इस प्रश्न को उपस्थित करके उत्तर दिया गया है कि – शिवेन पातितं यद रक्तं तत्प्रभवति, तस्मात। अर्थात शिप्रा क्यों कही जाती […]
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मोक्षप्रदा तीर्थ नगरी उज्जयिनी (Ujjain is the place of Salvation)

    तीर्थ शब्द का शास्त्रीय व्युत्पत्ति है – तीर्यते अनेनेति अथवा तरति पापादिकं यस्मादिति – जिससे पापादि से मुक्ति मिलती है। अथवा जिससे पार किया जाये। इनके अनुसार तीर्थ का अर्थ है पार करने वाला । पापादि से छुड़ानेवाले नदी, सरोवर, मन्दिर, पवित्र-स्थल, दिव्यभूमि आदि तीर्थ कहे जाते हैं। इनमे स्नान-दान, दर्शन, स्पर्शन, अवलोकन-आवास आदि से पवित्रता प्राप्त होती है, […]
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