विराम – मेरी कविता – विवेक रस्तोगी

भले मैं बोल रहा हूँ हँस रहा हूँ पर अंदर तो खाली खाली सा हूँ कुछ तो है जो खल रहा है कुछ तो है मन और दिल कहीं और है तन तम में कहीं और है याद तो बहुत कुछ है पर वो यादें कहीं कोने में सिमटी सी अपने आप को सँभाले हुए […]
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मोर्निग सोशल नेटवर्किये

मोर्निग सोशल नेटवर्किये सुबह उठे और सोच रहे थे कि आज कुछ पुराने लेख जो क्रेडिट कार्ड और डेरिवेटिव पर लिख रहा था उन्हें पूरा लिख दूँगा, परंतु सुबह उठकर हमने मोबाईल हाथ में क्या ले लिया जुलम हो गया, फेसबुक और ट्विटर तो अपने अपडेट हमेशा ही करते रहते हैं, किस किस ने क्या […]
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