गूगल की चैट विन्डो की अनुवाद सेवा में अब आंग्ल भाषा से हिन्दी में अनुवाद भी उपलब्ध है..

मैंने अभी कुछ दिन पहले एक पोस्ट लिखी थी क्या आपने गूगल की इस अनुवाद सेवा के बारे में सुना है, देखिये….

अब इसमें आंग्ल भाषा से हिन्दी का बोट भी जुड़ गया है जिससे आपको कोई भी अन्य विन्डो खोलना ही नहीं पड़ेगी जब भी किसी शब्द का हिन्दी में अर्थ चाहिये सीधे चैट कीजिये और हिन्दी में अर्थ पाईये। इस बोट का एड्रेस है – en2hi@bot.talk.google.com

en2hi

जल्दी से यह जोड़ लीजिये अपने जीमेल में और किसी भी शब्द का अनुवाद आप करवा पायेंगे केवल एक चैटिंग विन्डो से।

7 thoughts on “गूगल की चैट विन्डो की अनुवाद सेवा में अब आंग्ल भाषा से हिन्दी में अनुवाद भी उपलब्ध है..

  1. उस दिन भी समझ में नहीं आया था .. आज भी नहीं समझ सकी .. हमें करना क्‍या होगा .. इसपर एक पोस्‍ट लिखें !!

  2. @संगीता जी – चैट विन्डो में जहाँ Search, add, or invite लिखा रहता है, वहाँ बोट का एड्रेस लिख दें और Invite to Chat par चटका लगायें। फ़िर एक नया विन्डो खुलेगा, जिसमें आपको Send Invites पर चटका लगाना होगा। बस जैसे मेरा नाम आपको चैट विन्डो में दिखता है वैसे ही en2hi दिखने लगेगा। बतायें अगर आप इसमें सफ़ल हो जाती हैं तो।

  3. विवेक जी मैने लगाया है । मगर सही काम नहीं करता सभी कुछ हिन्दी मे नहीं लिखता। वैसे जानकारी बहुत अच्छी है

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मोबाईल लेना है पर बहुत भ्रम है कि कौन सा लेना चाहिये… आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार है…..।

१ जनवरी से मोबाईल के क्षैत्र में क्रान्ति आने वाली है, क्योंकि १ जनवरी से नंबर पोर्टेबिलिटी शुरु होने जा रही है।

अभी हमारे पास टाटा इंडिकोम का मोबाईल और नंबर है पर अब हम एमटीएनएल की सर्विसेस लेना चाहते हैं, क्योंकि उनकी बात करने की दरें अभी सबसे कम है और इंटरनेट उपयोग करने के लिये भी।

अब सीडीएमए से जीएसएम में हमारा नंबर तो बदल जायेगा परंतु मोबाईल तो हमें नया खरीदना ही होगा, क्योकि अभी जो मोबाईल हमारे पास है वह केवल सीडीएमए टेक्नोलॉजी का है और जीएसएम का समर्थन नही करता है।

बजट – कम से कम, क्योंकि अपनी ही जेब हल्की होने वाली है  🙂

अब नया मोबाईल खरीदना है तो सोचा कि इसमे क्या क्या सुविधाएँ होनी चाहिये –

१. मोबाईल जीएसएम होना चाहिये
२. बैटरी बैक अप अच्छा होना चाहिये
३. इंटरनेट एकसेस कर सकते हों
४. ईमेल क्लाईंट संस्थापित कर सकते हों
५. कैमरा कम से कम २ मेगा पिक्सल होना चाहिये
६. लेपटॉप् से कनेक्ट करके इंटरनेट एक्सेस कर सकते हों
७. एफ़.एम. रेडियो
८. गाने सुन सकते हों
९. वोईस रिकोर्डर भी हो

१०. हिन्दी सपोर्ट कर सकता हो, अगर ब्लॉग उस पर लिख सकते हों तो सोने पे सुहागा, फ़िर तो मोबाईल से ही ब्लॉग ठेल दिया करेंगे 🙂

अगर ये चीजें हों तो अतिउत्तम –
१. ३जी तकनीक
२. वाई फ़ाई तकनीक
३. फ़ुल कीबोर्ड

अगर आप ऐसा कोई मोबाईल उपयोग करते हों या ऐसे मोबाईल के बारे में जानते हों तो कृप्या मार्गदर्शन करें। आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार है।

17 thoughts on “मोबाईल लेना है पर बहुत भ्रम है कि कौन सा लेना चाहिये… आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार है…..।

  1. शुक्र है आप इत्ते पे रुक गए विवेक भाई मुझे तो लगा कहेंगे जिसमें
    एक छोटा सा डायनिंग रूम, ड्राईंग रूम,किचेन हो।

    जिसमें बैठ के आप कम पेट्रोल में बहुत दूर तक जा सकें

    जिसमें से एक साथ सैंडविच और सरसों का साग और मक्के की रोटी मिले

    जिसमें …..आदि आदि की फ़ैसिलिटी वाला ..

  2. @अजय भाई, इतने पर ही रुकना पड़ा नहीं तो वाकई जो सुविधाएँ आप गिनवा रहे हैं काश वो मिल जाती तो फ़िर तो मजे ही मजे थे..

  3. @प्रमोद जी,

    लेना तो पड़ेगा, बस कौन सा लेना है यही समझ में नहीं आ रहा है बहुत सारे ब्लॉगर बंधु इस तरह के मोबाईल का उपयोग कर रहे होंगे, बस मार्गदर्शन की आस है। क्योंकि ये हमारी व्यावसायिक जरुरत है।

  4. सुबह हो गई है …. जग जाइये…. शायद आप सपना देख रहे थे….. कम बजट में इतना कुछ …. यह तो वही बात हुई कि भैया आठ आने में पांच किलो दाल दे दो…. ही ही ही ही ही ….

    वैसे हम पता कर रहे हैं… मालूम चलते ही बता देंगे…

  5. @महफ़ूज भाई,
    काश कि ये सपना होता और कभी न टूटने वाला होता, तो कम बजट क्या किसी बजट की जरुरत ही नहीं पड़ती, जैसे दाल का भाव उतना हो गया है आज जितना किसी जमाने में एक तोले सोने का भाव हुआ करता था, इसलिये अठन्नी में पांच किलो दाल शायद उस समय तो मिल ही जाती 🙂

    परंतु अब सपना टूट गया है और इस वास्तविकता की दुनिया में अपनी ही जेब हल्की होने वाली है, इसलिये जल्दी से पता करिये और मालूम चलते ही पहली फ़ुरसत में इधर टिप्पणी कर दीजिये।

  6. हाँ मोबाइल सस्ता मिल जायेगा क्योंकि यही बाजार ठंडा है वरना दाल आटें के भाव तो गरम हैं . जर्रोरत का सामान लें अभी तो लालच बुरी बलाय

  7. Rastogiji.Mobile zaroorat ke hissab se liye jaate hai.Jaise-Agar aap Delhi ki Blueline mein safar karte hon,aap apni car se safar karte hon,ya aap koi karobaar mein hon,…ya grahani hon…ya bas UNKO sms kana ho….:-)

  8. Try for Nokia E series. You'll find almost all the things which you want.. First check that it is having Symbian OS or general Nokia OS..

    All the best.. 🙂

  9. आपको मोबाइल में फोन, कैमरा, लेपटाप, इपोड सब सभी चाहिये.. करो ज्यादा का इरादा.. हम तो १२०० रु वाला हैंडसेट इस्तेमाल करते है.. क्योकि हर तिरसे महिने खोते है..

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सूर्यपुत्र महारथी दानवीर कर्ण की अद्भुत जीवन गाथा “मृत्युंजय” शिवाजी सावन्त का कालजयी उपन्यास से कुछ अंश – २८ [अश्वत्थामा से मेरी निकटता और कुछ असंयमित बातें पाण्डवो से ….]

     राजप्रसाद से युद्धशाला बहुत दूर थी, इसलिए हम कुछ दिन बाद युद्धशाला में ही रहने लगे। अब राजप्रासाद से हमारा सम्बन्ध टूट गया था। वर्ष में एक बार शारदोत्सव के लिए हम राजभवन जाया करते। वह भी युवराज दुर्योधन के आग्रह के कारण। उसने और अमात्य वृषवर्मा ने हमारी अत्यधिक सहायता की थी। उसके निन्यानबे भाई थे, लेकिन अकेले दुर्योधन को छोड़कर और किसी ने कभी मेरा हालचाल नहीं पूछा था। मुझको भी औरों के प्रति कोई आकर्षण नहीं था। उन सबके नाम कितने विचित्र थे! दुर्मर्ष, दुर्मुख, अन्त्यनार । यों तो मुझको एक और व्यक्ति भी अच्छा लगा था । वह था अश्वत्थामा। गुरु द्रोण का पुत्र । कितना सरल और ऋजु स्वभाव था उसका ! इतनी छोटी-सी अवस्था में ही धर्म, आत्मा, पराक्रम, प्रेम आदि विषयों पर वह कितने अधिकार से बोलता था ! अपन असमस्त अतिरिक्त समय मैं उसके साथ चर्चा करने में बिताता था। उसको मेरा केवल कर्ण नाम ही विदित था। मैं कौन हूँ, कहाँ का हूँ, यहाँ किस लिए आया हूँ, इस सम्बन्ध में उसने मुझसे कभी पूछ्ताछ नहीं की थी। इसीलिए वह मुझको सबसे अधिक अच्छा लगा था।

     एक दिन मैंने सहज ही उससे पूछा, “तुम्हारा नाम अश्वत्थामा तनिक विचित्र-सा है, तुमको नहीं लगता ?”

    छोटे बालक की तरह खिलखिलाकर हँसता हुआ वह बोला, “तुम ठीक कह रहे हो। यह नाम मुझे भी खटकता है। लेकिन जब मैं अपने नाम के सम्बन्ध में लोगों से पूछता हूँ, तब वे क्या कहते हैं, जानते हो ?”

   “और क्या कहेंगे ? तुम घोड़े की तरह रोबीले दिखाई पड़ते हो, ऐसा ही कुछ कहते होंगे ।“

    “नहीं। ये लोग कहते हैं कि जन्म लेते ही मैं घोड़े की तरह हिनहिनाया था। और इसीलिए मेरा नाम अश्वत्थामा रखा गया है। लेकिन मुझे नहीं जँचती यह बात। कोई छोटा शिशु घोड़े की तरह हिनहिनाये – यह कभी सम्भव है क्या ? परन्तु सच बात तो यह है कि मुझको अपना नाम अच्छा लगता है। क्योंकि मेरे पिताजी मुझको ’अशू’ कहते हैं। लेकिन जब मैं अकेला होता हूँ तभी कहते हैं। सबके सामने तो वे मुझको अश्वत्थामा ही कहते हैं।“

    उसकी संगति में मेरे दिन बड़े मजे में बीत रहे थे। वह मेरे कानों के कुण्डलों को छूकर कहता, “कर्ण, तुम्हारे ये कुण्डल दिन-ब-दिन और अधिक सुनहले रंग के होते जा रहे हैं। नगर के किस सुवर्णकार के पास जाकर इनपर यह सुनहला वर्क चढ़वाते हो ?”

    “मेरे इन कुण्डलों को रँगनेवाला सुवर्णकार कौन है, यह मुझे भी भला कहाँ मालूम है ! नहीं तो मैं उससे अवश्य कहता कि मेरे मित्र अश्वत्थामा को भी सुनहले कुण्डलों की एक जोड़ी दे दो। बड़ा अच्छा है यह ।“

    वह हँसकर कहता, “नहीं भाई, अपने कुण्डलों को तुम अपने ही पास रखो। कानों में सुनहले कुण्डल देखकर कोई चोर मुझ-जैसे पर्णकुटी में सोने वाले ऋषिकुमार का कान ही काटकर ले जायेगा। फ़िर तो न कुण्डल रहेंगे न कान।“ हम दोनों खिलखिलाकर हँस पड़ते और अपने-आपको भूल जाते। मैं सदैव मन में सोचा करता कि गुरु द्रोण का यह पुत्र कितना निष्पाप और निराग है। परन्तु उसके पिता कितने गम्भीर और शान्त हैं। उनके मन की थाह ही नहीं मिलती है। या कि उत्तरदायित्व मनुष्य को प्रौढ़ बना देता है ? य कि कुल लोग जन्म से ही प्रौढ़ होते हैं ? वह युधिष्ठिर नहीं है क्या – सदैव गम्भीर। क्या मजाल जो कभी भूलकर भी हँसे ? परन्तु इस शाला के सभी शिष्य उसका कितना सम्मान करते हैं ! और उसका भाई अर्जुन तो जैसे सबका प्राण ही है। जहाँ देखो वहाँ अर्जुन। इस अश्वत्थामा पर भी उतना प्रेम नहीं होगा जितना कि गुरु द्रोण उस अर्जुन पर करते हैं। अर्जुन को वे इतना क्यों मानते हैं ? वैसे देखा जाये तो अश्वत्थामा के बराबर श्रेष्ठ युवक युद्धशाला में कोई और नहीं था। लेकिन उस अर्जुन के अतिरिक्त यहाँ और किसी का सम्मान नहीं था। किसी व्यक्ति का इतना महत्व बढ़ा देना कहाँ तक उचित है ! इससे वह व्यक्ति क्या उन्मत्त नहीं हो जायेगा ? वह कौन-सी कसौटी है, जिसपर खरा उतरने के कारण अर्जुन को गुरुदेव ने अपने इतने समीप कर लिया है ? अनेक बार मेरे मन में यह इच्छा हुई थी कि अश्वत्थामा से यह प्रश्न पूछूँ, लेकिन बड़े संयम से मैंने वह बात टाल दी थी। कहीं इसमें वह अपने पिता का अपमान न समझ ले। इसलिए वह प्रश्न मैं इससे कभी नहीं पूछ सकता था।

6 thoughts on “सूर्यपुत्र महारथी दानवीर कर्ण की अद्भुत जीवन गाथा “मृत्युंजय” शिवाजी सावन्त का कालजयी उपन्यास से कुछ अंश – २८ [अश्वत्थामा से मेरी निकटता और कुछ असंयमित बातें पाण्डवो से ….]

  1. मृत्युंजय से लिए अंशों को पढ़ कर बहुत अच्छा लग रहा है …… वैसे ये पुस्तक मेरी पढ़ी हुई है पर जितनी भी बार इसके प्रसंगों को पढ़ता हूँ लगता है नया ही पढ़ रहा हूँ …… आपका आभार है …..

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कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १७

हुतवहमुखे सम्भृतम़् – यह तेज का विशेषण है अर्थात तारकासुर के वध के लिये देवताओं की प्रार्थना पर महादेव ने अपने वीर्य को पार्वती में आधान किया, जब वे उसको धारण करने में समर्थ न हुई तो उन्होंने अग्नि के मुख में रख दिया। इसी कथा की ओर महाकवि कालिदास ने

यहाँ संकेत किया है। इसके बाद जब अग्नि भी सहन न कर सकी तो उसे गंगा में तथा गंगा ने उसे सरकण्डों में डाल दिया। इस प्रकार स्कन्द की उत्पत्ति हुई। इसीलिये इसे पावकि, अग्निभू कहा जाता है।

यद्यपि महाभाष्य तथा कौटिल्य अर्थशास्त्र में स्कन्द का उल्लेख मिलता है, परन्तु स्कन्द की उत्पत्ति की कथा पूर्णरुप से सर्वप्रथम वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड अ. ३६-३७ में मिलती है, जहाँ विश्वामित्र ने इस कथा को राम और लक्ष्मण को सुनाया है। महाभारत के वन पर्व, शल्य पर्व तथा अनुशासन पर्व में भी यह कथा आयी है। महाभारत में स्कन्द के नाम की सार्थकता इस प्रकार बतायी है –
स्कन्नत्वात्स्कन्दतां प्राप्तों गुहावासाद़् गुहोऽभवत़्।
अर्थात वीर्य के स्खलित होने के कारण वे स्कन्द कहलाये तथा गुहा में निवास करने के कारण गुह कहलाये।
पुत्रप्रेमणा – मयूर कार्तिकेय का वाहन माना जाता है और पार्वती अपने कानों में कमल की पंखुड़ी धारण करती थीं, परन्तु पुत्र कार्तिकेय से स्नेह रखने के कारण वे मयूर के गिरे हुये पंख को कानों में धारण करती हैं।
महाभारत वनपर्व अ. २०८ श्लोक ८-१० के अनुसार राजा रन्तिदेव ने गोमेध यज्ञ किया था, उसमें दो सहस्त्र गायों की बलि दी गय़ी। उनके विपुल रक्त प्रवाह ने एक नदी का रुप ले लिया, जिसे लोग चर्मण्वती कहते थे, आजकल उसे चम्बल कहा जाता है।
रन्तिदेव की कीर्ति के सम्बन्ध में अनेक कथायें महाभारत के शान्तिपर्व, द्रोणपर्व, वनपर्व में वर्णित हैं। ये संस्कृति के छोटे पुत्र तथा दशपुर के राजा थे। ये दानदाता तथा यज्ञकर्ता के रुप में प्रसिद्ध थे, सपरिवार भूखे रहकर भी ये अतिथियों को दान देकर उनका सम्मान करते थे। महाभारत शान्तिपर्व अ. २९ में यह कथा विस्तृत रुप में वर्णित है तथा भागवत पुराण स्क. ९ अ. २१ में भी वर्णित है।

6 thoughts on “कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १७

  1. हमेशा की तरह उम्दा!!

    हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    कृप्या अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य का एक नया हिन्दी चिट्ठा शुरू करवा कर इस दिवस विशेष पर हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार का संकल्प लिजिये.

    जय हिन्दी!

  2. आपका हिन्दी में लिखने का प्रयास आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है. आपके इस प्रयास के लिए आप साधुवाद के हकदार हैं.

    आपको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.

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अगर मुख्यमंत्री का वरदहस्त है तो कोई क्या कर सकता है, न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी|

आखिरकार सभरवाल सर के हत्यारे बेगुनाह साबित कर छुटवा लिये गये। भले ही उन्हें टी.वी. पर सर के साथ भद्दी भाषा में बात करते हुए दिखाया गया हो, जान से मारने की धमकी देते हुए दिखाया गया हो, हमारी पहुँच कहां तक है ये भी कहते हुए दिखाया गया हो। पर उनका कोई बाल भी बांका कर सकता है क्या, क्योंकि हमारे माननीय मुख्यमंत्री का वरदहस्त है उनके ऊपर।

टीस इसलिये उठी कि मैं भी उसी माधव महाविद्यालय में पढ़ा हूँ और इस गंदी राजनीति को बहुत पास से देखा है। जहां एक प्रोफ़ेसर दूसरे प्रोफ़ेसर के लिये षड़्यंत्र रचता है वो भी छात्र राजनीति के द्वारा। जिस दिन यह घटना हुई, ठीक उसके एक दिन पहले मैं रायपुर से भोपाल के लिये ट्रेन में था और अपने मित्रों को यही बता रहा था कि माधव महाविद्यालय में तो हरेक छात्र नेता है, और कोई भी कुछ भी कर सकता है, और अब चुनाव हैं कुछ भी हो सकता है। शायद किसी की जान भी जा सकती है शायद किसी प्रोफ़ेसर की भी क्योंकि वहां के छात्र बहुत ही उच्चश्रंखल हैं, उद्दंड हैं, जो कि वहीं के गुरुओं द्वारा अपना वर्चस्व बनाने के लिये बना दिये गये हैं। पर मुझे यह पता नहीं था कि जो मैं बोल रहा हूँ वही अगले सत्य होने वाला है। सभरवाल सर ऐसे नहीं थे और उन्हें चुनाव की देखरेख के लिये नियुक्त किया गया था और वे किसी के दबाब में नहीं आते थे, पहले तो छात्र नेताओं ने उन्हें हटवाने की बहुत कोशिश की परंतु कामयाब नहीं हो पाये तो उनकी हत्या कर डाली।

सारे सबूत होते हुए भी हत्यारे बेगुनाह छूट गये और कोई भी कुछ भी नहीं कर पाया। शायद उज्जैन की जनता ही इंसाफ़ करे, नहीं तो ये लोग अब भाजपा में किसी प्रतिष्ठित पद पर बैठा दिये जायेंगे और कोई भी कुछ भी नहीं कर पायेगा, और न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी।

10 thoughts on “अगर मुख्यमंत्री का वरदहस्त है तो कोई क्या कर सकता है, न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी|

  1. न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी-आदत है उसे..चिन्ता न करें!!

  2. ये लोग अब भाजपा में किसी प्रतिष्ठित पद पर बैठा दिये जायेंगे और कोई भी कुछ भी नहीं कर पायेगा, और न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी।

    मैं ने तो हत्यारों को पार्टी ही नहीं चुने हुए पदों पर भी बैठे देखा है।

  3. विवेक जी अब तो ऐसे वाकया हर प्रदेश मे हो रहे हैं पता नहीं न्याय की देवी की आँखों से ये युगों से बन्धी पट्टी उतरेगी भी कि नहीं आभार्

  4. माननिय मुख्यमंत्रीजी ने फ़ैसले के बाद कहा है कि हम तो पहले ही कहा रहा कि ई सब लोग हत्यारा नही ना है. बोलिये अब का करियेगा? (स्टाईल लालूजी)

  5. भारत मै अब धीरे धीरे शॆतानो का राज होता जा रहा है, अगर इस न्याय की देवी ने अभी भी पट्टी नही खॊली तो फ़िर एक नरक बन जायेगा हमारा भारत महान….

  6. vivekji,
    hame nyaay tantra par bharosa rakhna hi hota he/ yahi hamare liye aavashyak ho jata he. ise hamari 'vidambana'kah le yaa kuchh bhi..sach kya he kyaa nahi, ham aap apne drashtikon se dekhte he..kabhi kabhi man rota bhi he, kintu jo jeeta vahi sikandar mana jaataa he/ bharosa to rakhanaa hoga kam se kam UPARVAALE par/ vnha nyaay ka matlab sirf nyaay hi hota he/

  7. पूरे देश में न्याय का यही हाल है और भाजपा ही क्यों सभी पार्टियों में यही स्थिति है .

  8. ईमेल द्वारा प्राप्त टिप्पणी

    Really its a shame that culprits of a day light murder case are set free and some say taht evidence of them of being present there is not clear.TV footage is enough evidence.shame to every peaceloving people of INdia if he does not raise his voice against this
    Dr.bhoopendra
    Rewa M.P

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कुल्लू मनाली और बर्फ़ के पहाड़ों की सैर

हमारा एकदम घूमने का कार्यक्रम बन गया और हम दिल्ली में थे तो घूमने के लिये विकल्प भी बहुत थे क्योंकि हम उत्तर भारत में कहीं भी घूमने जा सकते थे। हमें और हमारे परिवार के मन में बर्फ़ के पहाड़ देखने की बहुत इच्छा थी तो एकदम कार्यक्रम बनाया गया कुल्लू मनाली का।
अपने ट्रेवल एजेंट से हमने दिल्ली से मनाली तक का वोल्वो बस का टिकट करवा लिया और टाईम तो था नहीं कुछ भी प्लान करने के लिये, कि कहां रुकेंगे क्या क्या घूमेंगे कैसे घूमेंगे। हमारे ट्रेवल एजेंट ने हमें आइडिया दिया कि आप मनाली में उतर कर बस स्टेंड से थोड़ा आगे जायेंगे तो माल रोड या फ़िर किसी और रोड पर होट्ल में मोलभाव कर लीजियेगा पर हमने सोचा कि कुछ अपने परिचित भी हैं जो कि यह जगह घूम आये हैं उनसे भी राय मशविरा कर लिया जाये और इस तरह से हमें चंडीगढ़ के एक ट्रेवल एजेंट का मोबाईल नंबर मिल गया और हमने उससे पूछा कि कुल्लू मनाली कितने दिन में घूम सकते हैं, तो उसने हमें ३ रात और ४ दिन का पैकेज बताया और हम भी उस पैकेज पर सहमत हो गये क्योंकि हमारे दिल्लीवाले ट्रेवल एजेंट ने पहले ही बोल दिया था कि सीजन चल रहा है और होटल भी बिल्कुल पैक होंगे अच्छा होगा कि आपको कोई पैकेज मिल जाये। तो हमने भी यह पैकेज फ़ाइनल कर घूमने जाने का फ़ैसला किया।
वोल्वो बस दिल्ली से मनाली के लिये जनपथ कनाट प्लेस पर होटल इंपीरियल के पास के पेट्रोल पंप से मिलती है। हमें समझ में नहीं आया कि पेट्रोल पंप से सवारी बैठाने की व्यवस्था क्यों। वैसे तो इन बसों को मजनूँ के टीले से चलना चाहिये पर शायद ये वोल्वो बसें दिल्ली ट्राफ़िक को ठेंगा दिखा रही थीं या फ़िर सब मिलीभगत थी। आखिरकार ५.०० बजे शाम के रिपोर्टिंग टाईम देने के बाद बस ७.०० बजे चल दी, बीच में एक अच्छे होटल पर रुकी जहाँ पर रात का खाना खाया गया और फ़िर जब सुबह नींद खुली तो देखा कि सड़क के साथ साथ विहंगम नदी चल रही थी और कोई बहुत बड़ा शहर नदी के उस पार था। नदी “व्यास” थी और शहर था “कुल्लू”। फ़िर सुबह ९.३० बजे हम लोग मनाली पहुंच गये।

7 thoughts on “कुल्लू मनाली और बर्फ़ के पहाड़ों की सैर

  1. are yaatraa thodee see to shuru kar hee lete..khair kal padenge…waise ham bhee apne parivaar ke saath nikalne ke mood mein hain..magar jaisa ki aapne bataya wahaan to pehle hee house full hai..soch rahe hain ki ..landsdawn ya dalhausee chala jaaye…

  2. भई यह पोस्ट तो आप ने बस मै ही समेट दी… चलिये अगली कडी का इंतजार है.अजी जनपथ की ही कोई फ़ोटू डाल देते

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