बच्चों के शरीर के विकास के लिये न्यूट्रिशियन्स

लगभग सभी माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे हरेक चीज में आगे हैं फिर चाहे वह पढ़ाई लिखाई हो या खेल हो। यह बात मुझे अच्छी तरह से तब समझ में आई जब मैं पिता बना। बच्चों को अपनी उम्र के मुताबिक, बच्चों के शरीर के विकास के लिये न्यूट्रिशियन्स सही मात्रा में मिलें, […]
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मरना क्या होता है, अजीब सा प्रश्न है

मरना क्या होता है, अजीब सा प्रश्न है, परंतु बहुत खोज करने वाला विषय भी है क्योकि सबको केवल जीवन का अनुभव होता है, मरने का नहीं। सोचता हूँ कि काश मरने का अनुभव रखने वाले भी इस दुनिया में बहुत से लोग होते तो पता रहता कि क्या क्या तकलीफें होती हैं, जीवन से […]
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प्रकृति के बीच Real Togetherness कैसे ढ़ूँढ़ें

हम आधुनिक युग में इतने रम गये हैं कि आपस के रिश्तों में इतनी दूरियाँ हो गई हैं जो हमें पता ही नहीं चलती हैं, Real Togetherness हम भूल चुके हैं, जब हम आपस में समय बिताते थे,प्रकृति के अनूठे वातावारण में एक दूसरे के साथ घूमने जाते थे, खेलते थे और जीवन को सही […]
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सिगरेट पीती आँटी को विस्मय से देखते हमारे बेटेलाल

    आज हम सिगरेट के बारे में बात करेंगे । कल जब ऑफिस से घर के लिये निकले तो सूरज अपने शाम के चरम पर था, जैसे कोई दिया बुझने से पहले जमकर लौ देता है, जैसे कि सप्ताहांत के दो दिनों में सूरज अपने न निकलने का मलाल निकाल रहे हों, या फिर बादलों […]
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चोकोस के साथ खुलजाये बचपन (Kelloggs Chocos)

बचपन हमेशा ही हर किसी के लिये अनूठा होता है और हमेशा ही हम अपना बचपन हम भूल जाते हैं, वही बचपन हम हमारे बच्चों में हमेशा ही ढ़ूँढ़ते हैं। चाहते हैं कि हम अपने बच्चे के बचपन को उसके साथ वापस से जियें, कुछ बातों की हमेशा ही हमें अपने पालकों से शिकायत रहती […]
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बीमारी के कारण अवकाश के लिये प्राचार्य महोदय को प्रार्थना पत्र

   पढ़ाई में सब कुछ करना पड़ता है, जब सरकारी विद्यालय में पढ़ते थे तब हमारे विषय में यह भी था कि प्राचार्य महोदय को बीमारी का कारण अवकाश के लिये पत्र लिखो। हम वाकई तभी पत्र लिखना सीखे थे और लगता था कि संप्रेषण का कितना अच्छा माध्यम है, पर कभी यह समझ नहीं […]
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स्वस्थ बच्चा ही खुशियों से भरा घर बना सकता है (A healthy child makes a happy home!)

    मुझे मेरा बचपन की बहुत सारी चीजें याद नहीं, पर मम्मी और पापा मेरा बहुत ही ख्याल रखते थे, शायद दुनिया में कोई ऐसे माता पिता होंगे जो बच्चों का ध्यान नहीं रखते होंगे, टमाटर खाओगे तो खून बढ़ेगा, गाजर भी सेहत के लिये अच्छी होती है, आँवले से आँखों की रोशनी तेज होती […]
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आटा, सब्जी, प्रेमकपल और पुलिसचौकी

कल शाम की बात है, बेटेलाल स्कूल से आ चुके थे तो अचानक गुस्से से आवाज आई “आटा आज भी आ गया ?” “सब्जी आ गई”, हम सन्न !! बेचारे क्या करते, अपने काम में मगन आटे का ध्यान एक सप्ताह से ना था, इधर पास के पंसेरी से १ किलो आटे का पैकेट लाकर […]
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पैसे पेड़ पर उगते हैं पता बता रहे हमारे बेटे लाल…

जब हम घर पर रहते हैं तो बेटेलाल को हम ही सुबह उठाते हैं, और कुछ संवाद भी हो जाते हैं, कुछ दिनों पहले महाराज अपनी एक किताब गुमा आये और अब बोल रहे हैं कि पैसे दे दीजिये हम नई किताब खरीद लायेंगे। अपनी आदत के अनुसार हमने कह दिया “पैसे पेड़ पर नहीं […]
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परिवार में क्या अब तो फ़िल्मों में भी कोई सीख नहीं मिलती ।

    कल सोने ही जा रहे थे तभी ना जाने क्या सूझी और बुद्धुबक्सा चालू कर लिया और जीअफ़लाम पर फ़िल्म आ रही थी, बलराज साहनी और निरूपमा राय इसके मुख्य कलाकार थे और उनके तीन बच्चे बड़ा बेटा रवि, मंझली बेटी और छोटा बेटा राजा के इर्दगिर्द घूमती कहानी ने पूरी फ़िल्म देखने पर […]
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