मेरा छोटा आसमान

मुझे मच्छर बचपन से ही पसंद थे, क्योंकि मेरे लिये तो ये छोटे से हैलीकॉप्टर थे जो मेरे इर्द गिर्द घूमते रहते थे। हैलीकॉप्टर तो केवल कभी कभी आसमान में दिखते थे, मुझे याद है जब होश सँभाला था और पहली बार हैलीकॉप्टर देखा था तो वो किचन और बाथरूम के बीच एक जाल डला […]
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मरना क्या होता है, अजीब सा प्रश्न है

मरना क्या होता है, अजीब सा प्रश्न है, परंतु बहुत खोज करने वाला विषय भी है क्योकि सबको केवल जीवन का अनुभव होता है, मरने का नहीं। सोचता हूँ कि काश मरने का अनुभव रखने वाले भी इस दुनिया में बहुत से लोग होते तो पता रहता कि क्या क्या तकलीफें होती हैं, जीवन से […]
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अनजान

मैं पता नहीं कितनी बातों से अपनी जिंदगी में अनजान हूँ, यही सोचता रहता हूँ। अपनी कल्पनाओं में पता नहीं क्या क्या अनजाना से बुनता रहता हूँ, मैं हर घटना और हर वस्तु के बारे में अनजान हूँ और अनजान हूँ तभी तो मैं उनके प्रति जानने के लिये जिज्ञासु हूँ। मैं हर नकारात्मक और […]
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प्रेम केवल जिस्मानी हो सकता है क्या दिल से नहीं ?

प्रेम में अद्भुत कशिश होती है, प्रेम क्या होता है, प्रेम को क्या कभी किसी ने देखा है, प्रेम को केवल और केवल महसूस किया जा सकता है.. ये शब्द थे राज की डायरी में, जब वह आज की डायरी लिखने बैठा तो अनायास ही दिन में हुई बहस को संक्षेप में लिखने की इच्छा […]
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जितना खूबसूरत है प्यार, उतना ही गमगीन भी

    जीवन के तेड़े मेड़े रास्ते रतन को हमेशा से ही पसंद थे, हमेशा ही अपने जीवन में कुछ न कुछ रोमांचक करने की इच्छा इसके जीवन में नये रंग भर देती थी, एक बार कुछ ऐसा करते हुए ही रतन एक खूबसूरत आँखों के बीच फँस गया और जीवन के उस खूबसूरत मोड़ पर […]
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जीवन के प्रति नकारात्मक रुख

    थोड़ा बीमार था, और बहुत कुछ आलस भी था, आखिर रोज रोज शेव बनाना कौन चाहता है, उसकी दाढ़ी के बालों के मध्य कहीं कहीं सफेदी उसकी उम्र की चुगली कर रही थी, वह बहुत सारी बातों से अपने आप को कहीं अंधकार में विषाद से घिरा पाता। कहीं भी उसे न प्यार मिलता […]
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स्पर्श की संवेदनशीलता (BringBackTheTouch)

    पहले हम लोग एक साथ बड़ा परिवार होता था, पर अब आजकल किसी न किसी कारण से परिवार छोटे होने शुरू हो गये हैं, पहले परिवार में माता पिता का भी एक अहम रोल होता था, परंतु आजकल हम लोग अलग छोटे परिवार होते हैं, और अपनी छोटी छोटी बातों पर ही झगड़ पड़ते […]
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खोह, वीराने और सन्नाटे

    जिंदगी की खोह में चलते हुए वर्षों बीत चुके हैं, कभी इस नीरव से वातावरण में उत्सव आते हैं तो कभी दुख आते हैं और कभी नीरवता होती है जो कहीं खत्म होती नजर नहीं आती। कहीं दूर से थोड़ी सी रोशनी दिखते ही लपककर उसे रोशनी की और बढ़ता हूँ, परंतु वह रोशनी […]
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