कार्पोरेट्स में लिंग भेदभाव पर नुक्कड़ नाटक gender discrimination in corporate world

यह नुक्कड़ नाटक अभी ड्रॉफ्ट मोड में है, अभी इसमें कई सुधार किये जाने हैं, अगर आपको लगता है कुछ और भी बिंदु जोड़े जा सकते हैं, तो अवश्य बतायें । (सर्वाधिकार सुरक्षित) जीवन से भेदभाव हटाना है, जीवन से भेदभाव हटाना है, भेदभाव ही जड़ है काम न होने देने की जीवन के कुरूक्षैत्र […]
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जीवन का पेड़ धड़धड़ाती बेपरवाह बहती सी नदी के बीच कहीं बियाबान जंगल में

अपने ही बनाये हुए सपनों के महल में ऐसा घबराया सा घूम रहा हूँ, कब कौन से दरवाजे से मेरे सपनों का जनाजा निकल रहा होगा, भाग भाग कर चाँद तक सीढ़ीयों से चढ़ने की कोशिश भी की, पर मेरे सपनों की छत कांक्रीट की बनी है किसी विस्फोट से टूटती ही नहीं। दम भी […]
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समाज में आवारा हवाओं के रुख

(स्टेज पर हल्की रोशनी और, एक कोने में फोकस लाईट जली होती हैं और खड़ी हुई लड़की बोलती है)     मैं एक लड़की जिसे इस समाज में कमजोर समझा जाता है, और वहीं पाश्चात्य समाज में लड़की को बराबर का समझ के उसकी सारी इच्छाओं का सम्मान किया जाता है। जब से घर से बाहर […]
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बेटी तू कितना भी विलाप कर ले, तुझे मरना ही होगा (नाटक)

माँ और उसकी कोख में पल रही बेटी के मध्य संवाद  पार्श्व में स्वरघोष के साथ ही बताया जाता है – ( जैसे ही बहु के माँ बनने की सूचना मिली परिवार खुशियों से सारोबार था, परिवार में उत्सव का माहौल था। उनके घर में वर्षों बाद नये सदस्य के परिवार में जुड़ने की सूचना जो मिली थी, परिवार रहता […]
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