मुंबई का सफ़र २३/११/२०१० भाग – १ (Mumbai Travel 23/11/2010 – Part – 1)

    किसी निजी कार्य की वजह से कई दिनों बाद वापिस मुंबई जाना हुआ, जी हाँ मुंबई जो कि माटुँगा रोड से कोलाबा तक कहलाता है (अगर मैं गलत हूँ तो सुधारियेगा)। मैं रहता हूँ कांदिवली में और कार्यालय है मालाड़ में, जो कि मुंबई महानगरी के उपनगर कहलाते हैं। जब बोरिवली या कांदिवली से […]
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कल १२ अगस्त है, मीटर जाम का

कल १२ अगस्त है, और कल मीटर जाम का दिन है, हम लोग ऑटो टैक्सी का उपयोग नहीं करेंगे, हमने आज भी नहीं किया। आज हमने कल १२ अगस्त के लिये बस से ऑफ़िस आने जाने का ड्राय रन कर लिया। बस से आना जाना सफ़लतापूर्वक रहा। कल देखते हैं कि कैसा मिजाज रहता है […]
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झाबुआ कॉलेज जाते समय दो तालाब और भी बहुत सारी यादें…. मेरे किस्से … विवेक रस्तोगी

    कॉलेज में पहले वर्ष में ही कॉलेज की हवा लग गयी, झाबुआ जी हाँ यह मध्यप्रदेश में एक आदिवासी क्षैत्र है और यहाँ के भील भिलाले बहुत प्रसिद्ध हैं। पहले भी एक पोस्ट लिखी है यहाँ चटका लगाकर देख सकते हैं “झाबुआ के भील मामा”।     अपने कॉलेज जाते समय बीच में दो तालाब […]
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मुंबई में हवस, हो सकता है कि गलती लड़्की की ही हो।

सीन १ – ऑफ़िस से निकलते हुए     ऑफ़िस से निकले, गलियारे से होते हुए पैसेज में आये, वहाँ चार लिफ़्ट हैं बड़ी बड़ी, २५ लोग तो आराम से आ जायें इतनी बड़ी, पर हम साधारणतया: आते जाते समय सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करते हैं, जिससे मन को शांति रहती है कि चलो कुछ तो […]
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९वीं कक्षा में चुंबन, 7 वर्ष के भतीजे के दोस्त की गर्लफ़्रेंड [kiss in 9th Class, Grilfriend of 7 year old boy]

    आज सुबह दिन की शुरुआत कोई खास नहीं थी पर फ़िर भी कुछ लम्हें लिखना चाहूँगा, सुबह ऑफ़िस के लिये घर से निकले तो बहुत तेज बारिश शुरु हो गई, और हम ऑटो लेकर निकल पड़े ऑफ़िस की ओर। रास्ते में याद आ गई पुरानी कुछ बातें जो कि एक साथी के साथ हमने […]
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मेरे घर में चोरी और भारत के लोकतंत्र का मजाक नक्सलवादियों का भारत बंद आज

    आज सुबह सुबह घर (उज्जैन) से माताजी का फ़ोन आया कि बेटा आज एक दुर्घटना हो गई, तुम्हारा कमरे में पीछे से चोर घुस गये और लॉकर में से समान ले गये। अब हम सुबह सुबह नींद में कुछ समझ ही नहीं पाये ।     फ़िर पूरा वाकया बयान किया कि सुबह पौने पाँच […]
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“सन्ध्या-सुन्दरी” कविता सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ रचित “कविश्री” से

दिवसावसान का था समय, मेघमयआसमान से उतर रही है वह सन्ध्या-सुन्दरी परी-सी धीरे धीरे धीरे। तिमिराञ्चल में चञ्चलता का नहीं कहीं आभास, मधुर मधुर है दोनों उसके अधर, किन्तु जरा गम्भीर, – नहीं है उनमें हास-विलास,। हँसता है तो केवल तारा एक गूँथा हुआ उन घँघराले काले-काले बालों से, हृदयराज्य की रानी का वह करता […]
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“बादल राग” कविता सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ रचित “कविश्री” से

निर्दय विप्लव की प्लावित माया – यह तेरी रण-तरी, भरी आकांक्षाओं से, घन भेरी-गर्जन से सजग, सुप्त अंकुर उर् में पृथ्वी के, आशाओं से नव जीवन की, ऊँचा कर सिर, ताक रहे हैं, ऐ विप्लव के बादल !                                            फ़िर फ़िर बार बार गर्जन, वर्षण है मूषलधार, हृदय थाम लेता संसार, सुन-सुन घोर वज्र हुंकार। […]
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भारत बंद करने से क्या होगा ? जिम्मेदार लोगों को बंद करो ! मैं इसका विरोध करता हूँ !!

    भारत बंद को राजनैतिक दलों ने जनता को अपनी ताकत बताने का हथियार बना दिया है, और टी.वी. पर देखकर ही पता चल रहा था कि राजनीति में अब केवल और केवल गुंडों का ही अस्तित्व है, क्या आम आदमी ऐसा कर सकता है ?? पुतला बनाकर जलाना टायर जलाना बीच सड़क पर डंडा […]
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“मुझे स्नेह क्या मिल न सकेगा” कविता सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ रचित “कविश्री” से

मुझे स्नेह क्या मिल न सकेगा ? स्तब्ध दग्ध मेरे मरु का तरु क्या करुणाकर, खिल न सकेगा ?                  जग दूषित बीज नष्ट कर,                  पुलक-स्पन्द भर खिला स्पष्टतर,                  कृपा समीरण बहने पर क्या,                  कठिन हृदय यह हिल न सकेगा ? मेरे दुख का भार, झुक रहा, इसलिए प्रति चरण रुक रहा, […]
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