कार्पोरेट्स में लिंग भेदभाव पर नुक्कड़ नाटक gender discrimination in corporate world

यह नुक्कड़ नाटक अभी ड्रॉफ्ट मोड में है, अभी इसमें कई सुधार किये जाने हैं, अगर आपको लगता है कुछ और भी बिंदु जोड़े जा सकते हैं, तो अवश्य बतायें । (सर्वाधिकार सुरक्षित)

जीवन से

भेदभाव हटाना है, जीवन से भेदभाव हटाना है,

भेदभाव ही

जड़ है काम न होने देने की

जीवन के

कुरूक्षैत्र में एक होकर आगे बढ़ना है,

जीवन में

सबका महत्व एक हो

कोई किसी से

कम न समझा जाये

सबकी दिमागी

ताकतों को समझा जाये

अनंत आकाश को

मिलजुलकर पार करना है

चारों तरफ

घनघोर अंधकार है

हर तरफ

भेदभाव है, भेदभाव है,

भेदभाव है,

भेदभाव है,

भेदभाव है,

भेदभाव है,

इंटरव्यू लेते हुए जाते दो नर (Male) कर्मचारी, आपस में बात करते हुए –

पहला – आज हमें जिस स्किल के लिये इंटरव्यू लेना है, वह नीच (Niche) स्किल है, तो हमें बहुत सी प्रश्नों को गहराई से पूछना होगा।

दूसरा – हाँ वैसे भी हमें नीच स्किल के रिसोर्सेज मिलते किधर हैं, उन्हें कोई न कोई प्रोजेक्ट एकदम से खींच लेता है

पहला – हाँ भई वेटिंग चलती है उनकी तो, तभी तो अब कई दिनों बाद हम रिक्रूटमेंट के लिये इंटरव्यू लेने आये हैं। और दोनों हँसते हुए इंटरव्यू लेने के लिये एक केबिन में जाते हैं।

 

(बाहर इंटरव्यू देने के लिये 2 लोग बैठे हैं) (एक लड़का, एक लड़की, दोनों हाथ में अपने कागजों की फाईल लिये हुए नर्वस हैं, परन्तु अपने आप को कॉन्फीडेन्ट दिखाने की कोशिश कर रहे हैं)

 

इंटरव्यू के लिये पहले लड़की को बुलाया जाता है –

पहला इंटरव्यूर – So You have good experience in the required technology, when you have worked last on this technology.

लड़की – Currently I am working on this technology.

इंटरव्यूर – Tell me about yourself.

लड़की – My name is Reshma Singh, I have been completed my engineering in Computer Science and M.Tech. from Allahabad. I am having experience more than 6 Years and worked deeply in the required technology about 6 years, I have completed 4 project successfully end to end. I am having good understanding on Technical and Functional for this domain. I am good at communication with client and I have managed client directly in my all projects.

 

(कुछ और भी प्रश्न पूछे जाते हैं… जिन्हें हम प्रतीकात्मक रूप से दिखा सकते हैं)

 

इंटरव्यूर – Ok fine, please be seated outside and wait. Please ask other one to come.

लड़का अंदर आता है, और इंटरव्यूर उसे बैठने को कहते हैं।

इंटरव्यूर – your CV shows that you have not much experience in the required technology. When did you worked last on this technology.

लड़का – I have worked enough and 2 Years back I have worked on this technology.

इंटरव्यूर– Tell me about yourself.

लड़का – My name is Ran Vijay Singh, I have completed my engineering in Electronics. I am having 5 Years’ experience, I have worked on the required technology around 2 years, and I have completed 1 project successfully. I am good at communication with client so I can manage client.

 

(कुछ और भी प्रश्न पूछे जाते हैं… जिन्हें हम प्रतीकात्मक रूप से दिखा सकते हैं)

इंटरव्यूर – Ok fine, please be seated outside and wait.

 

दोनों इंटरव्यूर आपस में बात करते हैं –

पहला – तो सर

आपको कौनसा केनडीडेट इस पोजीशन के लिये अच्छा लगा ?

दूसरा – वैसे तो लड़की, जो स्किल हमें चाहिये उसका उसे पूरा पता है और अच्छा खासा अनुभव भी है, कॉन्फीडेन्ट भी है, क्लाईंट को हैंडल भी किया हुआ है, जिसकी हमें बहुत जरूरत है और खास बात कि लड़की का कम्यूनिकेशन बहुत अच्छा है, और एम.टेक. भी है, और स्किल पर अभी भी काम कर रही है।

पहला – हाँ बात तो सही कह रहे हो, लड़के के पास अनुभव भी कम है और उसने इस स्किल पर काम भी दो वर्ष पहले किया था, हाँ बस उसका एक ही प्लस प्वाईंट है कि वह मेल केन्डीडेट है, तो वह नाईट शिफ्ट में भी कम्फर्टेबल होगा।

दूसरा – पर लड़की भी तो नाईट शिफ्ट में आ सकती है, अब यूएस का क्लाईंट है तो उसी के समय से काम भी करना होगा, और वैसे भी 5-6 महीने की ही बात है तब तक हमें इस प्रोजेक्ट के लिये हमें उनके टाईम पर सपोर्ट करना है, उसके बाद के स्टेज के लिये तो हमें अपने भारतीय समय पर ही काम करना है।

पहला – हाँ वह तो है, पर पता नहीं लड़की 6 महीने भी तो नाईट शिफ्ट में आयेगी या नहीं, वैसे भी हमारा प्रोजेक्ट बहुत क्रिटिकल है, और हम ज्यादा छुट्टियाँ अफोर्ड नहीं कर सकते।

दूसरा – पर सर, हम साथ में एक बैकअप भी तैयार कर लेंगे, तो हमें भी कोई परेशानी नहीं होगी, और पीछे से सपोर्ट करने के लिये रेशमा होगी ही। तब तक क्लाईंट भी कम्फर्टेबल हो जायेगा और कॉन्फीडेन्ट भी।

पहला – वह तो है ही, पर हमें शायद लड़के को ही लेना चाहिये कम से कम उसके ज्यादा नाटक नहीं होंगे, उसने भी स्किल पर काम किया हुआ है और धीरे धीरे सीख ही लेगा।

दूसरा – नहीं सर, लड़के को रिक्रूट करना प्रोजेक्ट के लिये बहुत बड़ा रिस्क होगा।

पहला – हाँ मैं भी जानता हूँ पर बताओ कल शादी होगी तब भी उसे छुट्टी चाहिये होगी

दूसरा – सर, वह तो लड़का भी लेगा

पहला – नाईट

शिफ्ट में लड़की की सुरक्षा का भी बड़ा प्रश्न है

दूसरा – सर, वह तो हमारी कंपनी देती ही है, तो उसकी भी कोई समस्या नहीं है।

पहला – फिर शादी के बाद तो आपको पता ही है, बहुत सारी जिम्मेदारियाँ आ जाती हैं और लड़कियाँ ज्यादा छुट्टियाँ लेने लगती हैं।

दूसरा – सर जिम्मेदारियाँ तो लड़के पर आती हैं, वह भी उतनी ही छुट्टी ले सकता है जितनी लड़की ले सकती है।

पहला – तो फिर बताओ क्या करें, लड़की शादी के बाद मेटरनिटी लीव्स पर भी जायेगी।

दूसरा – सर वह तो मौलिक अधिकार है, और हमारी कंपनी की पॉलिसी भी।

 

दोनों प्रतीकात्मक रूप से मौन बहस करते रहते हैं –

 

सूत्रधार कहता है – यह लड़ाई सदियों से चलती आ रही है, हमेशा ही नारी को कम करके आँका गया है, और आदमी भले ही न फिट हो सकता हो पर केवल सुरक्षा और अन्य दूसरे कारणों से हमेशा ही बाजी मारता रहा है, पर हमारी कंपनी जेंडर डिस्क्रिमिनेशन के खिलाफ है और हमेशा ही अच्छे स्किल वाले रिसोर्सेस को ही हायर करती है, हम आज 21 वीं सदी में पहुँचकर भी अगर यही सोचेंगे तो हमारे समाज का कुछ नहीं हो सकता, हम कब अपनी रूढ़िवादी सोच से आगे बढ़ेंगे, कब हम हमारे दिमागों की जंजीरों को तोड़ेंगे और कब हम इस मुक्त गगन के तले प्रकृति की तरह व्यवहार करना सीखेंगे, जैसे प्रकृति स्त्री पुरुष का भेदभाव नहीं करती, वैसे ही हम इंसान कब भेदभाव करना छोड़ेंगे। हमारी कंपनी स्त्री पुरुष को भेदभाव को वैचारिक तौर पर ही खत्म करना चाहते हैं। हमने अपनी सारी पॉलिसियाँ भी अपनी इसी प्रकार से बनाई हैं कि सबको बराबर का अधिकार मिले और जिसके पास स्किल हो वह आगे बढ़े।

 

हम बड़े

तुम बड़े

सब बड़े

जग बड़े

जीवन में

चहुँ और

कहीं भी

कभी भी

न हम भेदभाव

करें

सही को

पहचानें

और आगे बढ़ें

 

2 thoughts on “कार्पोरेट्स में लिंग भेदभाव पर नुक्कड़ नाटक gender discrimination in corporate world

  1. हनुमान जयन्ती की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल रविवार (05-04-2015) को "प्रकृति के रंग-मनुहार वाले दिन" { चर्चा – 1938 } पर भी होगी!

    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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