अमेरिका का व्यापार जो अब बाहर जा रहा है केवल H1B वीजा न देने के कारण

दुनिया में बहुत कुछ बदल रहा है, पर उस बदलाव का लोगों को अहसास ही नहीं होता है, जो जोर शोर से बाहर आता है, केवल वही पता चलता है।
 
ट्रम्प ने H1B के लिये बहुत सी सख्तियाँ की हैं, तो असर सीधे उनके व्यापार पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका के नंबर एक बैंक के पास काम करने के लिये तकनीकी और विषय विशेषज्ञ लोगों की भयंकर कमी है, और जो हैं वे काम को सँभाल नहीं पा रहे हैं। कंपनियों या बैंकों का मुख्य काम होता है व्यापार बढ़ाना और उनके मालिक लोग यह सुनिश्चित भी करते हैं।

 
तो उस बैंक का भारत के साथ डाटा के लिये संधि नहीं है, परंतु ब्रिटेन के साथ है, तो उन्होंने अब अपना पूरा एक बड़ा तकनीकी सेटअप लंदन से तकरीबन १५० माईल्स की दूरी के एक छोटी जगह पर लगाया है, ब्रिटेन में वीसा को लेकर कोई समस्या नहीं है। तकनीकी और विषय विशेषज्ञ अधिकतर भारत और चीन के होते हैं।
 
अब हालत यह है कि अमेरिका की खुद की बड़ी कंपनियाँ, अमेरिका से बाहर जाकर अपने व्यापार का ध्यान रख रही हैं, व्यापार का बड़ा हिस्सा अमेरिका से ही आता है, पर बैकबोन इंफ्रास्ट्रक्चर को मैंटेनेंस वीजा की मजबूरी में अब अमेरिका के बाहर हो रहा है। यह भी ट्रम्प की नीतियों पर कुठाराघात है, क्योंकि अमेरिकियों को नौकरी नहीं मिल रही, तथा जो काम अमेरिका में हो रहा था वह अब ब्रिटेन से हो रहा है, तो अमेरिका के लोकल लोगों को रोजगार की समस्या से औऱ ज्यादा दो चार होना पड़ेगा।
 
केवल इसी चक्कर में अब भारत में भी अमेरिका के कई बड़े बैंक अपना सेटअप बढ़ाने में लगे हैं, और उनके लिये अभी की मनपसंदीदा लोकेशनों में गुड़गाँव, पूना, कोचीन और कोलकाता शामिल है, बैंगलोर की महँगाई उनको बैंगलोर आने से रोक रही है। इसके चलते भारत में बहुत से नये शहरों को फायदा होगा।

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