जब आप निवेश करते हैं, तो उसे सरल ही रखें। वही करें जो बिल्कुल सरल और स्पष्ट है, बफ़ेट सलाह देते हैं – जटिल प्रश्नों के लिये जटिल उत्तर देने की कोशिश मत करिये।
| जिस व्यापार को आप नहीं समझते हैं, उसमें कभी भी निवेश न करें। |
जब आप निवेश करते हैं, तो उसे सरल ही रखें। वही करें जो बिल्कुल सरल और स्पष्ट है, बफ़ेट सलाह देते हैं – जटिल प्रश्नों के लिये जटिल उत्तर देने की कोशिश मत करिये।
| जिस व्यापार को आप नहीं समझते हैं, उसमें कभी भी निवेश न करें। |
सुन्दरकाण्ड से कुछ चौपाईयाँ..
दो० – कपि के ममता पूँछ पर सबहि कहउँ समुझाइ।
तेल बोरि पट बाँधि पुनि पावक देहु लगाई॥ २४ ॥
मैं सबको समझाकर कहता हूँ कि बंदर की ममता पूँछ पर होती है। अत: तेल में कपड़ा डुबोकर उसे इसकी पूँछ में बाँधकर फ़िर आग लगा दो॥ २४ ॥
पूँछहीन बानर तहँ जाइहि। तब सठ निज नाथहि लइ आइहि॥
जिन्ह कै कीन्हिसि बहुत बड़ाई। देखउँ मैं तिन्ह के प्रभुताई॥ १ ॥
जब बिना पूँछका यह बंदर वहाँ (अपने स्वामी के पास) जायेगा, तब यह मूर्ख अपने मालिक को साथ ले आयेगा। जिनकी इसने बहुत बड़ाई की है, मैं जरा उनकी प्रभुता (सामर्थ्य) तो देखूँ ॥ १ ॥
बचन सुनत कपि मन मुसकाना। भै सहाय सारद मैं जाना ॥
जातुधान सुनि रावन बचना। लागे रचैं मूढ़ सोइ रचना॥ २ ॥
यह वचन सुनते ही हनुमानजी मनमें मुसकराये [और मन ही मन बोले कि ] मैं जान गया, सरस्वतीजी [इसे ऐसी बुद्धि देने में] सहायक हुई हैं। रावण के वचन सुनकर मूर्ख राक्षस वहीं (पूँछ में आग लगाने की) तैयारी करने लगे।
रहा न नगर बसन घृत तेला। बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला॥
कौतुक कहँ आए पुरबासी। मारहिं चरन करहिं बहु हाँसी॥ ३ ॥
[पूँछ के लपेटने में इतना कपड़ा और घी-तेल लगा कि] नगर में कपड़ा, घी और तेल नहीं रह गया। हनुमानजी ने ऐसा खेल किया कि पूँछ बढ़ गयी (लम्बी हो गयी) । नगरवासी लोग तमाशा देखने आये। वे हनुमानजी को पैर से ठोकर मारते हैं और उनकी बहुत हँसी करते हैं ॥ ३ ॥
बाजहिं ढोल देहिं सब तारी। नगर फ़ेरि पुनि पूँछ प्रजारी॥
पावक जरत देखि हनुमंता। भयौ परम लघुरुप तुरंता॥ ४ ॥
ढोल बजते हैं, सब लोग तालियाँ पीटते हैं। हनुमानजी को नगर में फ़िराकर, फ़िर पूँछ में आग लगा दी। अग्नि को जलते हुए देखकर हनुमानजी को तुरंत ही बहुत छोटे रुप में हो गये ॥ ४ ॥
निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारीं। भईं सभीत निसाचर नारीं ॥ ५ ॥
बन्धन से निकलर वे सोने की अटारियों पर चढ़े। उनको देखकर राक्षसों की स्त्रियाँ भयभीत हो गयीं।। ५ ॥
आदतन आज सुबह नित्यकर्म के पहले घर का दरवाजा खोला, अखबार के लिये और जैसा कि रोज होता है अखबार नहीं आया। आदत है तब भी रोज देखने की आत्मसंतुष्टि के लिये, तो छज्जे पर थोड़ा सा बाहर निकल कर देख लिया, वहाँ किसी के सिसक सिसक कर रोने की आवाज आ रही थी, थोड़ा ध्यान से देखा तो वहीं बिजली के खंभे के पास तिरंगे में लिपटा गणतंत्र था जो कि शायद कोहरा घना होने का इंतजार कर रहा था।
मैं चुपचाप अंदर अपने घर में आ गया, कि कहीं गणतंत्र मेरे पास आकर मेरे पास आकर रोना ना सुनाना शुरु कर दे, मेरी घिग्घी बँधी हुई है, और गणतंत्र के सिसक सिसक कर रोने के कारणों के बारे में सोच रहा हूँ, अगर आप को पता चले कि भारत का बूढ़ा गणतंत्र क्यों सिसक सिसक कर रो रहा है.. तो मुझे अवश्य बताईये।
“प्रविसे नगर कीजै सब काजा, ह्रदय राखी कौसलपुर राजा…।”
“देखो… मैं अपने पापा के यहाँ स्वतंत्र विचारों से पली-बढ़ी हूँ। मुझे ये दकियानूसी तरीके ठीक नहीं लगते।”
हम में से अधिकतर लोगों के लिये शेयर बाजार भूलभुलैया ही है। ७००० से भी ज्यादा शेयरों में से कौन से शेयर में निवेश करें जो कि फ़ायदा दें… और कैसे शेयर बाजार में निवेश करके पैसा कमाया जाये ? कौन सा शेयर खरीदें ? किसकी राय मानें ? कौन सी कूटनीति का अनुसरण करें ?
अगर आप ऐसे निवेशक हैं जो कि शेयर ब्रोकर, सेन्सेक्स क्रेश, म्यूचयल फ़ंड्स, डे ट्रेडिंग, बाजार की टाइमिंग, मरे हुए शॆयर (Penny Stocks), ऑप्शन्स, हाईटेक, तेजी से बड़्ने वाली कंपनियों के कारण अपना धन गँवा चुके हैं, तो आपको वारेन बफ़ेट के निवेश सिद्धांत और पद्धति के बारे में जरुर जानना चाहिये।
बफ़ेट ने निवेश में अपने सिद्धांतो पर अड़िग रहकर बीज से विशाल पेड़ बनाया। आप भी एक अच्छे निवेशक बन सकते हैं और लंबी अवधि में शेयर बाजार से धन कमा सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब आप उनके मूल सिद्धांतों और उनके अनुशासन, धैर्य और मानसिक अवस्था को अपनायें।
वारेन बफ़ेट को एक सेंट भी अपने परिवार से नहीं मिली। आज केवल अपने खुद के निवेश के दम पर वे अरबों डालरों के मालिक हैं। पर कभी भी किसी भी बिजनेस स्कूल में बफ़ेट के बारे में, उनके निवेश सिद्धांतो के बारे में न ही पढ़ाया गया और न ही इस बारे में बताया गया है। या यह भी कह सकते हैं कि महानतम निवेशक को शैक्षणिक विश्व ने उपेक्षित किया है।
मुझे उम्मीद है कि आप बफ़ेट के निवेश के उदाहरणों की उपेक्षा नहीं करेंगे। मुझे लगता है कि आप लोग उनके सिद्धातों और पद्धति के बारे में सोचेंगे और अपनाने का प्रयत्न करेंगे। खासकर कि जब आपका निवेश में पुराना अनुभव अच्छा नहीं रहा हो।
बफ़ेट के निवेश सिद्धांत में सबसे महत्वपूर्ण है कि निवेश में लंबे समय तक बने रहें। इन सिद्धांतो में हैं –
इन सिद्धांतो के साथ ही कुछ और भी सिद्धांत हैं जो कि आपको एक अच्छा निवेशक बना सकते हैं। आखिर अच्छे परिणाम की उपज अच्छे निवेश सिद्धांत ही होते हैं।
बफ़ेट कहते हैं – एक अच्छे व्यापार को खोजो जिसका प्रबंधन भी अच्छा हो, और उस कंपनी के शेयर उचित दाम पर खरीदें, फ़िर उसको जीवन भर के लिये अपने पास रखें।
आज की ताजा खबर बैंगलोर में ४ ब्लॉगर्स और एक पाठक का मिलन हुआ ।
४ ब्लॉगर थे –
देव कुमार झा
मनीषा जी
विवेक रस्तोगी
हर्ष रस्तोगी
१ पाठक – हमारी धर्मपत्नी वाणी
बहुत सारे ज्वलंत मुद्दों पर बातें हुईं, और सौहार्दपूर्ण तरीके से बैंगलोर में ब्लॉगर मिलन संपन्न हुआ।
ज्वलंत मुद्दों में शामिल थे –
भाजपा द्वारा कर्नाटक बंद और आम जनता की तकलीफ़
भ्रष्टाचार
मुंबई
उड़नतश्तरी समीर लाल जी की कृति – “देख लूँ तो चलूँ”
दक्षिण भारत में हिन्दी
ए.टी.एम. से पैसे निकालने में हुई गड़बड़ी
ब्लॉग वार्ता
जिन ब्लॉगर्स का जिक्र हुआ इस छोटे से मिलन में वे हैं –
उड़नतश्तरी समीर लाल जी, घुघुती बासुती जी, प्रवीण पाण्डे जी, प्रशांत प्रियदर्शी जी PD, अभिषेक कुमार।
फ़ोटो कल देवकुमार झा जी द्वारा प्रकाशित किया जायेगा तब इस पोस्ट में भी लगा देंगे 🙂
थोड़े दिनों पहले रद्दीवाले को अखबार के लिये बोलने गया था, तो वहाँ पुरानी किताबें भी लगी रहती हैं, तो हम एक नजर देख लेते थे, और हर बार एक न एक किताब अच्छी मिल जाती थी इस बार किताब पर नजर पड़ी,
Book Name : “How Buffett does it, 24 Simple Investing Strategies from the World’s Greatest Value Investor”
Written by “James Pardoe”
Publication: Tata Mcgraw-Hill
यह एक बहुत ही पतली सी किताब है, लेखन ने वारेन बफ़ेट के सिद्धांतो को २४ कूटनितियों में विभक्त किया है, जो कि सभी निवेशकों को अवश्य पढ़ना चाहिये। अभी कुछ दिन पहले क्रॉसवर्ल्ड गया था तो वहाँ वारेन बफ़ेट की कोई मोटी सी किताब रखी थी, जो कि अभी की बेस्ट सैलर भी है, नाम भूल गया, अब अगली बार जाऊँगा तो अवश्य ही खरीदूँगा, उस समय इसलिये नहीं खरीदी क्योंकि अभी पढ़ने के लिये बहुत सारी किताबों का स्टॉक पड़ा है।
इस किताब को पढ़कर निवेश करने के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला, सोच रहा हूँ कि इसी बारे में आगे कुछ पोस्टें लिखी जायें।
अभी जो अधूरी रखी है –
Cashflow Quadrant
अभी रखी हुई किताबों में हैं जो कि पढ़ना बाकी हैं –
Retire Young Retire Rich
The Black Swan
बोधिपुस्तक पर्व की १० किताबें
In the Wonderland of Investment
General Insurance
Life Insurance
पानीपत
सूचि बहुत लंबी है, परंतु इतनी किताबें अभी पंक्ति में हैं।
विकृत मानसिकता जिसे मैं साधारण शब्दों में कहता हूँ मानसिक दिवालियापन या पागलपन, वैसे विकृत मानसिकता के लिये कोई अधिकृत पैमाना नहीं है, अनपढ़ और पढ़ेलिखे समझदार कोई भी हो जरूरी नहीं है कि उनकी मानसिकता विकृत नहीं हो।
और ऐसे ही कुछ उदाहरण मैंने हिन्दी ब्लॉगजगत में देखे पोस्ट पढ़कर पहली बार में ही विकृत मानसिकता का दर्जा मैंने दे दिया। अब यहाँ ब्लॉगर भी बहुत पढ़े लिखे हैं, और जिनके पास बड़ी बड़ी डिग्री है, वे हिन्दी ब्लॉगिंग की प्रगति में महति योगदान निभाने में अपनी जीवन ऊर्जा लगा रहे हैं। धन्य हैं वे ब्लॉगवीर और वीरांगनाएँ जो यह सोचते हैं कि वे हिन्दी लिख रहे हैं तो हिन्दी समृद्ध हो रही है, वाह ब्लॉगरी विकृत मानसिकता।
जितना समय दूसरे ब्लॉगर की टांग खींचने उनकी टिप्पणियों में अनर्गल पोस्ट लिखने में लगा रहे हैं उतना समय अगर किसी अच्छे विषय पर या अपनी दिनचर्या से कोई एक अच्छा सा पल लिखने में लगाते तो शायद उससे पाठक ज्यादा आकर्षित होते। परंतु कैसे स्टॉर ब्लॉगर बनें और कैसे ब्लॉगरों की टाँग खींचे ये सब प्रपंच कोई इन विकृत मानसिकता वाले ब्लॉगर्स से सीखें।
अपन तो अपने में ही मगन हैं, किसी की दो और दो चार में अपना कोई योगदान नहीं है, फ़िर भले ही वे दो और दो पाँच ही क्यों हो रहे हों, पर फ़िर भी पढ़े लिखों की विकृत मानसिकता नहीं देखते बनती। इससे अच्छा है कि … (अब भला मैं ये क्यों लिखूँ, वे खुद ही समझ लें।)