क्या मैं रिस्क याने कि जोखिम लूँ !!

पूरे ब्लॉग में जोखिम को रिस्क (Risk) ही पढ़ें, आजकल सभी लोग रिस्क शब्द को समझते ही हैं।

पूरा जीवन ही आजकल केलकुलेटेड रिस्क है और किसी भी समय किसी असफलता वाले काम में सफलता भी मिल सकती है तो आपको ऐसा क्या रोकता है कि आप रिस्क नहीं लेना चाहते।

हम चाहे या ना चाहे पर हर समय अपने जीवन में जोखिम लेते रहते हैं। भले ही वह छोटा हो या बड़ा रिस्क हो। भले आप घर से बाहर निकले या रास्ता क्रॉस कर रहे हो, आप ट्रेन से उतरे हो या फ्लाइट से उतरे हो, आप किसी एलिवेटर पर हो या लिफ्ट में हो, सबकी अपनी-अपनी रिस्क है। केवल घर के बाहर ही रिस्क नहीं है घर में भी बहुत सारे जोखिम हैं जैसे कि सीढ़ी से पैर फिसल जाना, बाथरूम में स्लिप हो जाना, दुर्घटनावश अपने आप को जला देना या कुछ और।

यह अलग बात है कि हम इन सब के बारे में साधारणतया सोचते नहीं हैं। हमें भगवान को धन्यवाद करना चाहिये, अगर हम हर रिस्क के बारे में सोचेंगे तो हम कोई काम ही नहीं कर पायेंगे और रिस्क हम इसलिए ले पाते हैं क्योंकि हम बचपन से जिस माहौल में पले बढ़े होते हैं, वहाँ यह रोजमर्रा की बातें होती हैं। हमें पता होता है की किसी भी कार्य की करने की सफलता और असफलता का प्रतिशत कितना होगा। हमारे अंदर आत्मविश्वास होता है, लेकिन जब हम किसी नए काम को करने जाते हैं तब आत्मविश्वास नहीं होता है, और इसी कारण से कई लोग नई चीजें करने से कतराते हैं। सभी लोग अपने कंफर्ट जोन में रहना चाहते हैं, जब तक उनको यह बात समझ में आती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। क्योंकि वे अपने शुरूआत के दिनों में रिस्क ले सकते थे, वो वे समय खो चुके होते हैं और वे रिस्क लेने से शायद अपने जीवन को और अच्छी तरीके से जी सकते।

जरूरत से ज्यादा सोचना और जरूरत से ज्यादा विश्लेषण करना और जोखिम तीनों हमारे अच्छे भविष्य को मार देते हैं। हमेशा सोचते हैं कि हमें क्या नुकसान होगा, जबकि हमें यह सोचना चाहिए कि हमें फायदा क्या होगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हम कोई बहुत बड़ा जोखिम ले लें और केवल भगवान से प्रार्थना करते रहें कि हमें सफलता दिलवा देना। किसी भी काम को करने से पहले कुछ विश्लेषण करना बहुत जरूरी होता है कि आप किस तरीके की कठिनाइयों से गुजरने वाले हैं।

आपको बुद्धिमानी से समझना होगा कि अगर कुछ गलत हो रहा है तो आपको उसकी कितनी कीमत देना पड़ेगी। साथ ही यह भी सोचना होगा कि अगर वह काम हो गया तो उससे आपको कितना फायदा होगा, तो ही आप सकारात्मक रूप से सोच पायेंगे कि अगर कार्य में सफलता मिली तो आपको कितना फायदा होगा और अगर असफलता मिली तो कितना नुकसान होगा और उसके बाद आप वह काम इत्मिनान से कर सकते हैं।

जीवन में कभी भी किसी गणितीय समीकरण से नहीं चला जा सकता है, जितना आप विश्लेषण करेंगे, उतनी ही आपकी समझ विकसित होती जायेगी। आप गलतियां जरूर करेंगे असफल भी होंगे, लेकिन वह सफलता का एक महत्वपूर्ण बिंदु होगा आप को सीखने के लिए और समझने के लिए। अगर आप हमेशा ही हारने से डरते रहेंगे तो आप कभी भी अपनी हिम्मत को जुटा नहीं पायेंगे।

कई बार आपको ऐसा लगता है यह काम मुझे कर लेना चाहिये। यह मैं बहुत अच्छे से कर सकता हूँ और इस का रिस्क मैं समझता हूँ और यह भी हो सकता है कि उस काम में जो आपको रिस्क नहीं लग रहा हो, वह भी रिस्क हो, तो आपको उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आपको वह काम विश्लेषण करके कर ही लेना चाहिये। जो आज अपने जीवन में सफल हैं, उन लोगों ने इस तरह के काम कभी ना कभी किये ही हैं।

कभी-कभी हम जीवन में ऐसी परिस्थितियों को भी देखते हैं जहाँ पर हमारे खोने के लिए कुछ नहीं होता, तो वहाँ पर आप अपना सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। रिस्क लें और अपने भविष्य के लिए पथ प्रशस्त करें।

जीवन में आगे बढ़ना है तो रिस्क तो लेना ही पड़ेगा, लेकिन अगर आप रिस्क नहीं ले रहे हैं तो आप अपने जीवन का सबसे बढ़ा रिस्क लिया हुआ है।

One thought on “क्या मैं रिस्क याने कि जोखिम लूँ !!

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *