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About Vivek Rastogi

मैं २००६ से हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहा हूँ, और वित्त प्रबंधन मेरा प्रिय विषय है। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसे आप https://youtube.com/financialbakwas देख सकते हैं।

तनख्वाह आमदनी सैलेरी कंपनसेशन या कॉस्ट

तनख्वाह याने कि जो तन खा जाती हो और आमदनी याने कि जहाँ से आमद होती है, सैलेरी आंग्लभाषा के शब्द से हमें कुछ समझ नहीं आया, अब कंपनशेसन कहा जाता है मतलब कि मुआवजा भी समझ जा सकता है और ईनाम भी, केवल शब्द का हेरफेर है। ऐसे ही कई जगह इसे कॉस्ट कहा जाता है मतलब कि लागत, हम हमारे मालिकान को कितना कमाकर देंगे। अब लगभग सारी जगहों पर शब्दों को बैलेन्स शीट के हिसाब से उपयोग किया जाता है। आजकल इसका कुछ हिस्सा वैरियेबल हो गया है जो कि वर्षभर के किये गये कार्य-संपादन के बाद कुछ राशि इसके नाम पर भी दी जाती है, जिससे कि सेवक खुश रहे और अगले वर्ष भी काम करता रहे।

 

केवल शब्द से कुछ नहीं होता, शब्द कोई भी हो पर सबका मतलब एक ही होता है और सबकी जिंदगी में इसका एक ही महत्व होता है, आदिकाल से ही इन शब्दों का महत्व वही है जो आज है और भविष्य में रहेगा। इस संख्या का हर वर्ष बढ़ौत्तरी होते रहना भी जरूरी है, जब इस संख्या में ठहराव आने लगे या फिर संख्याएँ बहुत ही धीमे से बदल रही हों तो समझ जाना चाहिये कि कहीं कुछ समस्य़ा है और हमें उस समस्या का समाधान ढ़ूँढ़ने के लिये तत्पर होना चाहिये।

 

जब हम राशि के काँटो पर चढ़ते हैं तो पहले की संख्याएँ जो कि होती तो समान ही हैं परंतु वे पूरी राशि को भार देती हैं, राशि को बड़ा होने में मददगार होती हैं, उन संख्याओं के ऊपर कूद लो, फाँद लो परंतु असर बेअसर ही होता है, पहली संख्या तो इतनी ढ़ीठ होती है कि हिलती ही नहीं, पता नहीं कौन सी चक्की का आटा खाकर बैठी होती है, दूसरी संख्या किसी की सरकती है तो किसी की नहीं और कभी कभी केवल एक ही संख्या बढ़ती है तो कभी तो वह भी पहली संख्या जैसी ढ़ीठ हो जाती है। अब हाँ उसके आगे की संख्याओं की बात करें तो वे फलेक्सिबल होती हैं, वे सरकने में इतना नाटक नहीं करती हैं। उनको कितना भी घुमा लो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है।

 

हे तनख्वाह! तुम्हारा इंतजार केवल मुझे नहीं, मेरे अलावा कई लोगों को होता है, तुम एक नहीं कई सपने तोड़ती फोड़ती हो, पता नहीं कितने सपनों को सपनों में ही बदल देती हो, हे आमदनी देवी! आप आद्य देवी हो, पर ये महँगाई देवी! जो कि नई नवेली देवी हैं और बाजार में आई हैं, ये आप पर भारी पड़ रही हैं, ये नई देवी की बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज है कि आप इसका मुकाबला ही नहीं कर पा रही हैं, तो आप अपना प्रताप बढ़ायें और आमदनी पर पलने वालों पर कृपा बरसायें।

साप्ताहिक भागमभाग की थकान के बाद कुछ सुकून के पल परिवार के संग

सप्ताह में पाँच दिन के काम के बाद दिमाग को आराम की बहुत ही सख्त जरूरत होती है, आराम करने के भी सबके अपने अपने तरीके होते हैं, कोई केवल दिन भर घर में ही रहना पसंद करता है तो कोई घर पर रहकर दिनभर टीवी देखना तो कोई मोबाईल या लेपटॉप पर गेम्स खेलना पसंद करता है। हम केवल और केवल परिवार के साथ समय व्यतीत करना पसंद करते हैं।
परिवार में हमारी घरवाली और बेटेलाल के साथ हम रहते हैं। सप्ताहांत में अपने दैनिक कार्यों के अलावा जो हमारे कार्य में जुड़ा होता है वह है बेटेलाल को भी साथ में सैर पर बगीचे में ले जाना, साथ में खेलना, बाजार से जरूरत के सामान और सब्जी लाना। घर पर आकर फटाफट तैयार होना और फिर आपस में खेलना, कभी कैरम तो कभी लूडो तो कभी ताश और कभी पहेली। कभी हम बेटेलाल को कहानी सुनाते हैं तो कभी बेटेलाल हमें कहानी सुनाते हैं।
रविवार को बेहतरीन दिन बिताने के लिये हम सुबह से पूरे परिवार के साथ घर के सारे काम निपटाने लगते हैं जिससे साथ में ज्यादा से ज्यादा वक्त बिता पायें और आपस में और करीब आ
पायें। अभी कुछ सप्ताह पहले ऐसे ही एक रविवार को हमने सुबह पोहा नाश्ते में बनाया जो कि हमारे घर का सबसे ज्यादा पसंदीदा नाश्ता है। तैयारी मैंने और बेटेलाल ने की घरवाली ने फाईनल टच दिया। और फिर साथ में नाश्ता करने के बाद हमने साथ में चाणक्य सीरियल देखा और फिर भारत एक खोज।
अब हमारे बेटेलाल लूडो ला चुके थे और हम दोनों लूडो खेलने बैठ गये साथ ही दाल बाफले की तैयारी चल रही थी, जिसका आटा बहुत ज्यादा पतला नहीं मला जाता है तो कट्ठा आटा हमेशा हम ही मलते हैं, हमने अपने महाविद्यालयीन दिनों में बहुत आटा मला है, जिससे हमें आटा मलने की जबरदस्त प्रेक्टिस हो गई है। बाफले के लिये आटे के लिये गोले बनवाये और फिर इलेक्ट्रॉनिक केतली में पानी उबाल उबाल कर बड़े भगोने में डालने लगे जो कि गैस पर रखा था, उबालने के बाद बाफले को सुखाकर तंदूर में पका लिया, तब तक दाल और चटनी भी लगभग तैयार थी और साथ ही बैंगन का भर्ता भी तैयार था।
जब खाना तैयार हो गया तो हमने छत पर चटाई बिछाई और खाने का सामान छत पर ले चले और खिली धूप में परिवार के साथ आनंद से खाना खाया, खाने के बाद थोड़े बाफलों को कूटकर शक्कर पीसकर उसमें मिलाकर मीठा भी बना लिया गया। अब समय था आराम करने का, तो अपनी किताब शेखर एक जीवनीली और परिवार को सुनाने लगे, इस उपन्यास में पात्रों को इस प्रकार से लिखा गया है कि बड़े तो बड़े, बच्चे भी इससे बँध जाते हैं। तकिया लगा कर लेट गये, भरे पेट थोड़े ही देर में नींद ने आ घेरा, तो छत पर दोपहर की नींद ली गई।
शाम को फिर पैदल ही बगीचे में घूमने गये और साथ में फिल्म देखी। इस तरह से पूरा दिन अपने परिवार के साथ बिताकर पूरे सप्ताह की थकान उतारी गई। परिवार के साथ समय बिताने और उसका अनुभव साझा करने के लिये यह पोस्ट हमने हाऊसिंग.कॉम के लिये लिखी है।

नई शुरूआत मोटो ई के साथ

    हमेशा दुनिया में आदमी को नया सीखने की चाहत होती है, और हर कोई नई तकनीक को अपनाना चाहता है जिससे वह भी सभ्य समाज में जाना जाये और उसकी समाज में अच्छी पहचान बने । समाज में उसे जाना जाये और कोई भी नई तकनीक में विशेषज्ञता हासिल हो तो समाज हमेशा से ही उन व्यक्तियों को अलग ही पहचान देता है। जब से मोबाईल आम हाथों में आया है या यूँ कहें कि विलासिता की श्रेणी से मोबाईल हर व्यक्ति के जीवन की जरूरत बन गई है तब से मोबाईल क्षैत्र मे क्रांति आ गई है। पहले मोबाईल फोन कुछ ज्यादा ही भारी होते थे, जो कि केवल मैसेज और कॉल करने तक ही सीमित थे। पर जब इसी मोबाईल में कुछ और सुविधाएँ आ गईं तब से मोबाईल में एक से एक फीचर आने लगे।

    मेरे पास 13 वर्ष पहले एक मोटोरोला का फोन था जिसमें कुछ ज्यादा फीचर नहीं थे परंतु हाँ उसकी बैटरी जबरदस्त थी, फिर तो मैंने कई मोबाईल बदले जिसमें इंटरनेट तक की सुविधा थी, पर उसमें सारा मजा इसलिये किरकिरा हो जाता था कि किसी भी मनचाही जगह पर हम क्लिक नहीं कर सकते थे। अब हमने सोचा कि कीपैड के साथ वाले मोबाईल को त्याग कर मोटोरोला का नया मोटो ई स्मार्टफोन से टचस्क्रीन की दुनिया में प्रवेश करने का फैसला किया, इसमें हमें टच का मजा लेने को मिलेगा जो कि आज हर दूसरे व्यक्ति के पास होता है और हमें लगा था कि हम तकनीक की दुनिया में पिछड़ने लगे हैं।
    हम अपने मोबाईल पर एन्ड्रॉयड के नये एप्प के मजे ले पायेंगे, नये नये गेम्स के मजे ले पायेंगे, फिल्में देख पायेंगे और सबसे मजे की बात कि हम ये सब केवल टच करके कर पायेंगे, जीपीएस का बेहतरीन उपयोग कर पायेंगे और बड़ी स्क्रीन का मजा ले पायेंगे, रंग तो मोबाईल की स्क्रीन पर बेहतरीन दिखेंगे ही, मैं तो यह सब सोचकर ही रोमांचित हूँ कि मेरे पास टच स्क्रीन का फोन होगा। जिस पर मैं घर पर वाई फाई को भी कनेक्ट कर पाऊँगा, बहुत सारे गेम्स जो दूसरे लोग अपने टच स्क्रीन वाले मोबाईल पर खेलते हैं, और मैं उनको देखकर लालायित होता रहता था, अब मैं भी खेल पाऊँगा। अब मुझे किसी भी तरह की सुविधा के लिये तरसना नहीं  पड़ेगा। 
    इसमें 8 जीबी आँतरिक मैमोरी है और इसमें दो सिम लग सकती हैं, जिससे मैं दो फोन रखने की असुविधा से भी बच पाऊँगा।  5 मेगापिक्सल के कैमरा होने से कम से कम अब मुझे अपना कैमरा साथ में नहीं रखना होगा, गाने या वीडियो रखने
के लिये 32 जीबी की बाहरी मैमोरी तक का समर्थन है। इसमें 1 जीबी रैम होने से मुझे हर एप्प में अधिकतम रफ्तार मिलेगी और फोन हैंग भी नहीं होगा और मैं इससे वीडियो भी रिकार्ड कर पाऊँगा। इसमें एक्सेलेरोमीटर, लाईट सेन्सर और प्रोक्सीमिटी सेन्सर होने से मेरे इस टच स्क्रीन फोन का मजा दोगुना हो जायेगा। फोन का वजन मेरे पहले वाले फोन से बहुत कम है और इसकी बनावट भी बहुत अच्छी है।
    इतने बेहतरीन फीचर्स वाला फोन अगर मिल जाये तो इससे बेहतर बात क्या हो सकती है। जिंदगी में हमें बदलाव के लिये हमें प्रयास करने चाहिये और मैं बदलाव लाऊँगा अपनी जिंदगी में मोटो ई टच स्क्रीन फोन से।  #ChooseToStart with the new Moto E!

जीवन का पेड़ धड़धड़ाती बेपरवाह बहती सी नदी के बीच कहीं बियाबान जंगल में

अपने ही बनाये हुए सपनों के महल में ऐसा घबराया सा घूम रहा हूँ, कब कौन से दरवाजे से मेरे सपनों का जनाजा निकल रहा होगा, भाग भाग कर चाँद तक सीढ़ीयों से चढ़ने की कोशिश भी की, पर मेरे सपनों की छत कांक्रीट की बनी है किसी विस्फोट से टूटती ही नहीं। दम भी घुटता है पर कहीं से निरंतर ही ठंडी बयार आने से हमेशा ही सपनों के सच होने का भरोसा दिला देते हैं। इस जंजाल से निकलने के लिये कई बार छुप्पा में, कभी अक्षरों तो कभी शब्दों के पीछे, पर इन्होंने भी मेरा साथ न दिया, जब कोई और बुलाये तो झट से ये उधर चले गये, कभी मैंने तुम पर इसीलिये ऐतबार न किया।
ढ़ूँढ़ता ही रह जाऊँगा जीवन की कुछ सीढ़ियाँ, कभी सीढ़ियाँ ही टूटी मिलीं तो कभी रास्ते टूटे मिले, कभी छत नहीं मिली और अगर मिली भी तो आसमां में चाँद तारे न मिले, जिसने जैसा आसमां दिखाया बस हमेशा वैसा ही आसमां हमने देखा, हम अपना आसमां कब बनायेंगे, कब हम अपनी छत पर अपनी ही सीढ़ियों से जायेंगे, और कब हम शब्दों को अपना बना पायेंगे, सदियों तक इंतजार करेंगे, पर यह भी सत्य है कि इंतजार से कुछ नहीं मिलता, केवल और केवल हमें यही लगता है कि अपने लिये अपनी दुनिया खुद ही गढ़नी होगी।
जब दुनिया गढ़ने भी बैठे और जिसको हमने उस दुनिया का खुदा बनाने की ठानी, उसने हमारी दुनिया का खुदा बनने के लिये पहले तो राजीनामा कर लिया पर अब वह खुद ही अनिश्चितता के दौर से निकल रहा दिखाई देता, किसी दूसरी दुनिया से आने पर भी वहीं की टीस उसे इस दुनिया को मिटाने पर मजबूर कर रही है। जब खुदा खुद ही खुदी के राह पर निकल पड़े तो जीवन के पेड़ धड़धड़ाती बेपरवाह बहती सी नदी के बीच कहीं बियाबान जंगल में खड़ा दिखाई देता है, जहाँ दूर उसे दुनिया तो दिखती है, दुनिया को वह भी दिखता है, पर नदी नहीं, दुनिया तो इधर से उधर जाने के लिये पुलिया का इस्तेमाल करती है, पेड़ के पास खड़े होकर अपनी शक्ल के साथ कई जगह वाहवाही भी लूटते हैं, पर पेड़ के संघर्ष का कोई भी कहीं भी जिक्र नहीं करता, न उसकी भावनाओं को समझता।
बस खुश हूँ तो यूँ कि कुछ पक्षियों ने मेरी शाख पर घोंसले बना रखे हैं, केवल उनके लिये मैं इस प्रकृति से संघर्षरत हूँ, उनके शाख पर खेलने से जीवन की कुछ चीजों पर पड़े जालों को कभी झाड़ने की जरूरत ही नहीं आन पड़ी, जाले तो तब ही झाड़े जाते हैं जब वस्तु को या तो उपयोग करना हो या वह उपयोगहीन हो गई हो। जीवन में आगे बढ़ने की सीढ़ियाँ अब भी ढ़ूँढ़ रहा हूँ, जब कोई मेरी सीढ़ी को सहारा दे तो शायद मैं ज्यादा जज्बे से बेपरवाह होकर मंजिल पर चढ़ाई कर पाऊँगा, नहीं तो सपनों के महल को भरभराते देर ही कितनी लगती है।

जीवन में सफलता के लिये पहली बार मुँबई परिवार के साथ जाने का कठिन निर्णय

    जीवन में सफलता के लिये घर का अहम रोल होता है। घर वह होता है जहाँ हमारे माता पिता साथ रहते हैं और प्यार होता है। घर केवल चार दीवारी नहीं होता, चार दीवारी तो मकान होता है, जहाँ न अपने होते हैं और न ही प्यार होता है। मकान में लोग केवल रहते हैं पर घर में लोग जीवन को मजे लेते हुए जीते हैं। बचपन से ही इस शहर से उस शहर घूमते रहे पर कभी मकान में नहीं रहे, हमेशा पापा मम्मी के साथ घर में रहे, जहाँ भी जाते हम शहर के उस मौहल्ले या कॉलोनी में रच बस जाते। जब दूसरे शहर जाने का समय होता तो आँखें भीग आती थीं, फिर से एक नये शहर में जिंदगी शुरू करना बहुत कठिन होता है, फिर से अपने मित्र बनाना, पड़ोसियों से तालमेल बैठाना। यही अनुभव जीवन भर काम भी आता है, हम लोग इंसान को पहचानने लगते हैं। जीवन के कटु पलों से हम अपने में बहुत सी बातें सीख जाते हैं और वक्त के पहले ही काफी बड़े हो जाते हैं।
    जब तक घर में मम्मी पापा के साथ रह सकते थे रहे, फिर हमें नौकरी के चलते मुँबई अपने परिवार के साथ आना पड़ा, कुछ दिन अकेले ही व्यतीत किये और मुँबई को जाना समझा, मुँबई सपनों का शहर है, बचपन से ही फिल्मों को देखते हुए बड़े हुए हैं, और हम मुँबई को फिल्मनगरी के नाम से जानते हैं, ऐसा लगता था कि जब मुँबई जायेंगे तो फिल्मी कलाकार हमारा स्वागत करने सड़क पर उतर आयेंगे, खैर सपने तो सपने ही होते हैं। मुँबई संघर्ष का दूसरा नाम है, जहाँ रहने के लिये ठिकाना ढ़ूँढ़ना उतना ही मुश्किल है जितना कि मुँबई लोकल में अपने आप के जगह ढ़ूँढ़ पाना। पर हाउसिंग.कॉम ने हमारा काम बेहद ही आसान कर दिया। लेपटॉप पर ही फोटो देखकर, जगह के बारे में जान लेते थे और फिर वहाँ फ्लैट देखने जाना है या नहीं यह निर्णय करते थे।
    हमने अपने जीवन में परिवार याने कि घरवाली और बेटेलाल के साथ पहली बार अपनी जड़ से अलग होने की मजबूरी में सोची थी, हमें घर चलाने का अनुभव तो बिल्कुल भी नहीं था, पर हाँ घर में रहते हुए बहुत कुछ सीखा था, और नये शहर में जाना, जहाँ पूरा शहर ही अपने लिये अनजान है, जब नौकरी ही वहाँ करनी थी तो रहना भी वहीं था, यह मेरे जीवन का सबसे
बड़ा निर्णय था, जीवन में अपने कैरियर के लिये आगे बढ़ने के लिये मैंने यह कठिन निर्णय ले लिया।
    पहली बार परिवार के साथ बाहर रहने जा रहे थे, तो घर के सारे समान की सूचि बनाई गई उसके लिये बजट भी बनाया गया, और फिर एक एक करके हम धीरे धीरे सारी चीजों को व्यवस्थित तरीकों से करते गये और हमारा घर एक सप्ताह में ही जम गया, जब रहने लगे तो जिन जिन चीजों के बारे में लगता कि नहीं है तो अपनी सूचि में जोड़ते जाते और सप्ताहांत में जाकर ले आते, इस प्रकार से हमारे पास घर में जरूरत की लगभग सारी चीजें हो गईं। और वह सूचि अब हमेशा हम अपने साथ ही रखते हैं, किसी भी नई जगह जाने पर यह सूचि बड़े काम
की होती है। और इसी एक निर्णय के कारण हम अच्छी प्रगति भी कर पाये।

घर पहुँचने की खुशी बयां नहीं की जा सकती है

    हम जीवन मे संघर्ष करते हैं, अपने लिये और अपने परिवार के लिये । सब खुश रहें, सब जीवन के आनंद साथ लें । जब हम संघर्ष करते हैं तब और जब हम संघर्ष कर किसी मुकाम पर पहुँच जाते हैं तब भी घर जाने का अहसास ही तन और मन में स्फूर्ती भर देता है। घर जाने का मतलब कि हम हमारी कामकाजी थकान से रिलेक्स हो जाते हैं और अपने लिये नई ऊर्जा का
संचार करते हैं। घर पर अपने परिवार से मिलने की खुशी हमेशा ही रहती है।
 
    मैंने जब से नौकरी करनी शुरू की तब से ही हमेशा मेरे काम में घूमना शामिल रहा, कभी ज्यादा दिनों को लिये तो कभी कम दिनों के लिये तो कभी सुबह जल्दी जाकर देर रात तक वापिस घर आना। नौकरी के शुरूआती दिनों में जब मेरी शादी नहीं हुई थी तब भी मैं घर जाने पर बहुत खुश होता था। घर जाने का सुकून कुछ और ही होता था, माँ पिताजी को देखकर ही
सारी थकान मिट जाती थी, उनके साथ मिलकर उनकी हँसी, उनकी डाँट, उनका प्यार सबमें अपना अलग ही अपनापन लगता था। घर पहुँचने का इंतजार इसलिये भी रहता था कि बाहर कोई बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई तो सबसे पहले घर पर परिवार के साथ बाँटने में ही मजा आता था। मेरे बगीचे के पौधे और उनके फल फूलों के बीच मैं अपने आप को सातवें आसमान पर पाता था।
    जब शादी हुई तो भी नौकरी में यात्राएँ चलती ही रहीं और अब घर आने के लिये घरवाली जो कि हमारे जीवन में सबसे अच्छी दोस्त भी होती है, उसके साथ ज्यादा समय बिताने के लिये भी और बहुत सी बातें साझा करने के लिये भी मन उतावला रहता था। ऐसा लगता था कि बस अभी पंख लग जायें और अभी मैं घर पहुँच जाऊँ, कई बार मैं बहुत से उपहार लेकर घर जाता था, तो भी ऐसा लगता था कि बस उपहार खरीदते ही घर पहुँच जाऊँ और झट से उपहार घर पर सबको दे दूँ।
    जैसे जैसे जिम्मेदारियाँ बढ़ती गईं अपने कैरियर में भी आगे बड़ते गये, देश के साथ ही विदेश की भी यात्राएँ होने लगीं, अब कुछ हजार किमी की जगह कई हजार किमी दूर हवाईजहाज में बैठकर आना जाना होता था और परिवार के साथ केवल वीडियो चैटिंग पर ही बात किया करते थे, देख सकते थे पर वह अहसास नहीं होता था जो घर पर होता था, जब भी मैं वापिस भारत अपने घर के लिये निकलता था, तो बस ऐसा लगता था कि अब मेरी सारी थकान मेरे बेटे की हँसी से ही मिट जायेगी, मेरा बेटा मेरी गोद में आकर मुझे बहुत सारा प्यार करेगा, और फिर डैडी डैडी आवाज लगाकर बस मेरे आगे पीछे घूमता रहेगा। फिर मेरे साथ अपने गेम्स खेलने की जिद भी करेगा और मैं बेटे के साथ इन सारी बातों को यादकर ही खुश हो लेता था, घर जाने की खबर ही मन में स्फूर्ति भर देती है। आज भी शाम के घर पहुँचने का इंतजार इसलिये ही होता है कि घरवाली और बेटा, मैं दोनों के खिलखिलाते चेहरे देखकर ही सारे दिन की थकान छूमंतर हो जाती है।
यह पोस्ट हमने हाउसिंग.कॉम के लिये लिखी है।

अगर मुझे मेरी कार बेचनी होती तो क्विकर नेक्सट के फायदे बहुत हैं

    कार सबका सपना होता है, कभी मेरा भी था । बीतते समय के साथ हम चीजों के लायक हो जाते हैं याने कि नालायक से लायक हो जाते हैं। हाँ पहले कभी कार वाकई हर किसी के लिये सपना होता था पर आजकल तो कार खरीदना बहुत ही आसान हो गया है, अब तो कोई भी कार लोन पर खरीद सकता है, पहले तो कार लोन मिलना भी बैंक से मुश्किल होता था, पर आजकल तो निजी फाइनेंस कंपनियों के बाजार में आने से लोन का मिलना बहुत ही आसान हो गया है।
    जब मैं बैंगलोर में था तब थोड़े दिन तो मैंने बिना किसी वाहन के अपना काम चलाया, कभी वोल्वो में तो कभी किसी सहकर्मी से लिफ्ट लेकर, पर ऐसा सब कैसे कितना दिन चलता तो आखिरकार वाहन खरीदने का निश्चय कर ही लिया गया और फिर शुरू हुआ दौर कि कौन सा वाहन लिया जाये, चार पहिया या दो पहिया । पर बैंगलोर के यातायात ने हमें चार पहिया न खरीदने को मजबूर कर दिया और दो पहिया वाहन खरीदा गया । मजे की बात यह रही कि बैंगलोर में दो पहिया वाहन खरीद कर हम वाकई मजे में रहे।
    पर जब हम बैंगलोर से अब गुड़गाँव आये, तो पहले दस दिन में ही पता चल गया कि यहाँ अपना काम दो पहिया वाहन से काम नहीं चलने वाला है, यहाँ तो चार पहिया वाहन ही खरीदना होगा, इसलिये पहले चार पहिया वाहन चलाना सीखा गया और साथ ही नई कार कौन सी खरीदी जाये, उसके लिये बाजार में, दोस्तों से बहुत चर्चा की गई । फिर क्विकर पर भी देखा गया कि कोई अच्छी सी कार मिल जाये परंतु उस समय हमें कोई कार नहीं मिली। तो आखिरकार हमने बाजार से ही नई कार खरीद ली और अब कार चलाते हुए लगभग 8 महीने हो गये हैं और लगभग 8000 किमी कार चला भी चुके हैं, अब फिर से नई कार ही खरीदने की सोच रहा हूँ कि अगर क्विकर पर बेचूँगा तो इस कार के मुझे कितने रूपये मिलेंगे, मैंने क्विकर पर जाकर सबसे पहला अपना एकाऊँट लॉगिन किया और अपनी कार की जानकारी डालकर MSP देखा कि सबसे अच्छा क्या भाव मिल सकता है और फिर हम क्विकर पर विज्ञापन लगा देते हैं।
    क्विकर नेक्सट की खूबी यह है कि अपना मोबाईल नंबर सार्वजनिक नहीं होता है नंबर की निजता बनी रहती है और कोई भी खरीददार केवल चैट के जरिये बिना अपना मोबाईल नंबर सार्वजनिक किये बिना ही संपर्क कर सकते हैं। चैट की खूबी यह है कि अपने समय के अनुसार आप चैट का जबाब दे सकते हैं, पर फोन आने पर हमें अपने कार्य में विघ्न उत्पन्न होता है।  हम कोई बात फोन पर करने के बाद भूल भी जाते हैं, क्विकर पर चैट का इतिहास हमेशा हमारे पास उपलब्ध रहता है, तो मैं तो केवल हरेक के द्वारा माँगी गई जानकारी को कॉपी पेस्ट ही करता । जब भी कोई फोटो के लिय बोलता तो उसी समय कार के सामने जाकर फोटो खरीद कर भेज देता।
    हाँ मैंने नई कार सेडान पसंद की है, पर कौन सी अभी यह राज है, क्योंकि अभी बाजार में और भी नई कारें आ रही हैं, तो
अपने को चुनने का और मौका मिल जायेगा।

बच्चों को सुलाने के लिये क्या क्या नहीं करना पड़ता है

    बच्चों को शौच निवृत्ति सीखने में समयलगता है और इसका प्रशिक्षण उन्हें घर में ही दिया जाता है, पर अगर बच्चे बहुत ही
छोटे हों तो शौच निवृत्ति का प्रशिक्षण देना मुश्किल ही नहीं असंभव है, पुराने जमाने किसी भी तरह की अन्य सुविधा उपलब्ध नहीं थी तो पोतड़ों से ही काम चलाना पड़ता था, तो बच्चों की और माँ की नींद पूरी ही नहीं हो पाती थी, और अगर सोते समय बच्चे ने शौच कर दी तो फिर माँ के लिये और भी मुश्किल होती थी क्योंकि फिर से बच्चे को सुलाना ही एक बहुत बड़ा काम होता है।
    आधुनिक तकनीक ने हमें पेम्पर डाइपर के रूप में उपहार दिया है, डाइपर बच्चों के शौच निवृत्त होने पर भी उन्हें गंदगी में अपनी नई तकनीक के कारण अहसास ही नहीं होने देता है और वे अपने खेलने में या सोने में व्यस्त रहते हैं। इस तरह से बच्चे और माँ अपना सोना, खेलना बिना किसी अनचाही बाधा के निरंतर रखते हैं।
    बच्चों को सुलाना भी एक बहुत बड़ा काम है, कुछ लोगों को बहुत मजा आता है तो कुछ को चिढ़, पर हाँ बच्चे के माता पिता कभी नहीं चिढ़ते आखिरकार वह बच्चा भी तो उनका ही है, बच्चे को सुलाने के लिये बहुत जतन करने पड़ते हैं, मैं अपने बेटे को अपने गले लगाकर कंधे पर लेकर उसे कभी लोरी सुनाता था तो कभी अपने मनपसंदीदा गाना जिससे मेरे बेटे को गाने के बारे में समझ भी आ जाये, कहा जाता है कि बचपन में या गर्भ में बच्चे जिन बातों को सुनते हैं उसके प्रति उनका विशेष लगाव होता है, इसीलिये मैं कभी कभी मंत्र भी सुनाया करता था।

बेटे को अपने हाथ से थपकी देते समय ध्यान रखता था कि मेरी हथेली थोड़ी से पिरामिड जैसी हो, जिससे बेटे का पिया हुआ दूध बाहर न आ जाये, पिरामिड जैसी हथेली से थपथपाने से पीठ पर जब थपथपाहट होती है तो थप्प करके आवाज आती है और हवा साथ होती है, जिससे बच्चे को आराम का अहसास होता है। बेटे को लोरी, गाने और मंत्र सुनकर बहुत ही सुकून की नींद आती थी। मैंने जब भी बेटे को ऐसे सुलाया तो देखा कि बेटा बिल्कुल शांत हाथ पैर सीधे करके सोता था और अपनी पूरी नींद करके ही उठता था।
    कई बार दोनों हाथों की गोदी में लेकर बारी-बारी से दायें बायें हिलाकर सुलाया, इससे बेटा झूले का आनंद प्राप्त कर सो
जात था, या फिर खुद ही आलथी पालथी में बैठ गये और बेटे को गोदी में लिटा लिया और सिर पर ओर बालों को एक हाथ से सहलाते रहे और दूसरे हाथ से धीरे धीरे सीने पर थपथपाते रहे, अगर लगता है कि पैर में दर्द है तो पैरों को हल्के हाथों से दबा दिया जिससे बेटा कभी भी आधी नींद में पैर के दर्द के कारण नहीं उठता था, बहुत ही आराम से प्रसन्न मुद्रा में सोते रहता था । मैंने जब भी बेटे को ऐसे सुलाया तो कई बार नींद में उसे किलकारी मारते तो कभी हँसते देखा।
पेम्पर डाइपर लगाकर कैसे बच्चे कैसे खुश रहते हैं, यह इस वीडियो में देख सकते हैं –
 

पाँच काम बिल्कुल बेफिकर उमरभर करना चाहता हूँ

    हर कोई चाहता है कि हमेशा बेफिकर उमरभर रहे पर ऐसा होता नहीं है, सब जगह मारामारी रहती है, कोई न कोई फिकर हमेशा जान को लगी ही रहती है, और उस फिकर की फिकर में हम अपने जीवन में जो कुछ करना चाहते हैं, वो सब भूल जाते हैं या यूँ भी कह सकते हैं कि पेट की आग के आगे अपने शौकों को तिलांजली देनी पड़ती है । काश कि हम जीवनफर
बेफिकर रहें तो मैं ये पाँच काम बिल्कुल बेफिकर उमरभर करना चाहता हूँ, जिससे मुझे ये पाँच काम बहुत ही महत्वपूर्ण लगते हैं और ये मेरे लिये हमेशा ही प्राथमिकता भी रही है।
1. गैर सरकारी संगठन शुरू करना – महाकाल के क्षैत्र उज्जैन में एक गैर सरकारी संगठन की स्थापना करना, जिसकी मुख्य गतिविधियाँ हों – 
 
अ.     बच्चों की ऊर्जा को सकारात्मक रूख देना, जिससे बच्चे अपनी ऊर्जा का उपयोग अपनी मनपसंदीदा गतिविधियों में कर पायें और अपने शौक को पहचान कर जुनून में बदल पायें।
आ.  आधुनिक श्रम केक्षैत्र में हमारे आजकल के नौजवान खासकर गाँव के नौजवान जो इंजीनियरिंग या कोई और
पढ़ाई नहीं कर पाये, उनकी प्रतिभा को निखारकर उन्हें आधुनिकतम तकनीक के बारे में जानकारी देना और उनका मार्गदर्शन करना, जिससे वे अपने जीवन स्तर को उच्चगुणवत्ता के साथ जी पायें और समाज को नई दिशा दे पायें।
इ.   निजी वित्त से संबंधित परिसंवाद गाँव गाँव आयोजित करना जिससे छोटी जगहों के लोग भी आजकल बाजार में उपलब्ध जटिल वित्तीय उत्पादों में निवेश कर पायें और एजेन्टों द्वारा किसी भी तरह के उत्पादों के खरीदे जाने से बच सकें।

2. किताबें पढ़ना – किताबें पढ़ने के बहुत शौक है, हर वर्ष बहुत सारी किताबें खरीद लेता हूँ, और नई किताबें अधिकतर तभी लेती हूँ जब पास में रखी किताबें पढ़ चुका होता हूँ, कोशिश रहती है कि महीने में कम से कम एक किताब तो पढ़ ही ली जायें,
मुझे हिन्दी की साहित्यिक किताबें पढ़ना बहुत भाता है, अभी हाल ही में लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी
सरदार और आचार्य विष्णु प्रभाकर की जीवनी का प्रथम भाग पंखहीन पढ़ा है, अभी तक की पढ़ी गई किताबों में सर्वश्रेष्ठ किताब सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय की शेखर एक जीवनी लगी । 

3.   कहानी और नाटक लिखना लिखना अपने आप को अंदर से जानना होता है और जब कोई हमें पढ़ता है तो वह हमें अंदर तक जान लेता है, हम क्या बताना चाहते हैं, कैसे शब्दों को ढ़ालते हैं, पात्रों को कैसे रचते हैं, कैसे हम पाठक को अपनी भाषाशैली से और विभिन्न सामाजिक उदाहरणों से प्रभावित करते हैं, कई पाठकों के लिये कुछ किताबें उनके जीवन की धुरी हो जाती हैं, इस तरह की कहानियाँ और नाटक मैं अपने पाठकों के लिये लिखना चाहता हूँ। 
4. महाकाल की आरती के नित्य दर्शन करना – जब होश सँभाला तब पाया कि बाबा महाकाल की अनन्य भक्ति में कब मैं घुलमिल गया हूँ, कब ये मेरी जीवनशैली में इतना घुलमिल गया कि मैं उस भक्ति में पूरा डूब चुका हूँ, पता ही नहीं चला। मेरे जीवन के इस दौर में भी मैं भले ही उज्जैन से इतनी दूर हूँ पर बाबा महाकालेश्वर में मन इतना रमा हुआ है कि मैंने कब बाबा महाकाल का ब्लॉग बना दिया और फिर उस ब्लॉग पर फोटो भी गाहे बगाहे अपलोड करता रहता हूँ कि मेरे साथ ही साथ उनको भी दर्शन हों जो महाकाल से जुड़ना चाहते हैं। महाकाल की आरती बहुत ही भव्य और आनंदमयी होती हैं, मैं अपना तन मन सब भूल जाता हूँ, कई वर्षों पहले संझा आरती में लगभग रोज ही मैं बाबा महाकाल की आरती में घंटे बजाता था, और निश्चय ही यह सौभाग्य बाबा महाकाल की असीम कृपा के कारण ही मुझे प्राप्त हुआ होगा। हालांकि आजकल भक्तों को यह सेवा करना निषेध कर दिया गया है। 
5. हैकर बनना – जब डायलअप इंटरनेट का दौर था, तब हमने पहली बार हैकिंग की शुरूआत की थी, चुपके से दूसरे के घर से उसका आई.पी. लेते थे और फिर हमारे पास एक हैकिंग सॉफ्टवेयर था जिससे हम उसके कम्प्यूटर को नियंत्रित कर लेते थे, और हमारा मित्र बेबस सा देखता रह जाता था। हैकिंग में बहुत कुछ नया करने को है, जिससे हम आधुनिक सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने में सहयोग कर सकते हैं। 
 

आसुस जेनफोन मोबाईल जिसमें हैं मेरी वेलेन्टाइन के सारे गुण

    सभी को ऐसी प्रेमिका चाहिये होती है जो दुनिया से जुदा हो, अलग हो, सुन्दर हो, अप्रितम हो, दिलकश हो, नाजनीन हो, पतली हो, लंबे बाल हों और भी न जाने क्या क्या !! वक्त बदल रहा है वैसे ही प्रेमिका की परिभाषा भी बदल रही है और कुछ
लोग तो हर वेलन्टाईन पर नयी प्रेमिका के साथ दिखाई देते हैं, खैर जो है उसे वैसा ही रहने देते हैं, हम दुनिया को बदलने की कोशिश न ही करें, क्योंकि यह नितांत व्यक्तिगत मामला है और हमें उस बारे में बात नहीं करनी चाहिये, क्योंकि वाकई यह बात कुछ लोगों के ऊपर बिल्कुल सटीक होती है।
 वैसे मेरी नई प्रेमिका है आसुस जेनफोन A601CG Gold और इसके मुख्य पाँच कारण हैं – 

1.    सुनहरा रंग – जी हाँ सुनहरा रंग आखिर दिखने में अच्छा लगता है, दूर से ही आकर्षण पैदा करता है, कहीं भी दूर से ही कोई भी देखकर पहचान सकता है। और मुझे तो दूर से ही देखकर लगने लगता है कि वाह मेरी प्रेमिका मुझे दिख रही है, और वह भी बिल्कुल केवल मेरी क्योंकि इस रंग का कोई और फोन कहीं भी किसी के पास मिलेगा ही नहीं और दूसरे की प्रेमिका से रश्क तभी होता है जब उसमें कुछ खास होता है। और कोई भी देखकर ही कहे कि भाई ये तो उसकी प्रेमिका है। 

2.    पतला और अच्छा दिखना – मोबाईल तो वही अच्छा होता है जिसे कोई भी परिचित देखे और कम से कम एक बार अपने हाथ में लिये बिना न रह सके, और अपरिचित लालच भरी नजरों से देखता रहे, कि एक बार जेब में हम मोबाईल रखें तो वह केवल इस बात का इंतजार करता रहे कि कब ये जेब से फोन निकाले और कब उसके दर्शन हों। आसुस जेनफोन को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह तकनीक और बनावट का एक सम्पूर्ण मिश्रण है। 

3.    13 एवं 2 मेगापिक्सेल का कैमरा – जब मैं तैयार होऊँ तो मैं कैसा दिखूँगा, वह मैं कैमरे की नजरों से देखना पसंद करता हूँ, और जब मैं किसी का भी फोटो खींचू तो कम से कम पिक्सेल टूटें और फोटो सुस्पष्ट, दोष रहित हो । वीडियो चैटिंग में तो यह किसी भी तरह से बेमिसाल होगा, लोग मेरी वीडियो क्वालिटी देखकर ही सोचते रहेंगे कि मैं आखिरकार कौन सा फोन उपयोग में लाता हूँ कि मेरी वीडियो इतनी साफ है

 4.    16 जीबी आंतरिक और 64 जीबी बाहरी मैमोरी – आजकल बहुत ही बड़े बड़े एप्प बाजार में आ रहे हैं, और बाहरी मैमोरी में स्टोर होने से फोन की गति अत्यंत धीमी हो जाती है, पर इस फोन में 16 जीबी आंतरिक मैमोरी होने से फोन की गति तीव्र रहती है, और किसी भी कार्यवाही की प्रतिक्रया काफी तेज होती है। यहाँ तक कि इस फोन की स्क्रीन 6 इंच है पर किसी भी एप का गतिप्रदर्शन लाजबाब होता है

 5.    3300 mAh बैटरी और 3 जी – आजकल की भागती दौड़ती जिंदगी में जैसे हम अपने आप को सोकर चार्ज करते हैं वैसे ही फोन को भी उसकी जरूरत होती है, पर हमारी बैटरी से इस फोन की बैटरी जबरदस्त ताकतवर है और 6 इंच का फोन और लगातार 3 जी के उपयोग होने के बावजूद इसकी बैटरी काफी चलती है और कभी भी बीच में धोखा नहीं देती है। 

    जब इतनी जबरदस्त मोबाईल फोन रूपी मेरी प्रेमिका होगी तो अपना रंग और ढंग भी बदल जायेगा, दुनिया देखेगी कि वो देखो आसुस जेनफोन A601CG Gold उसकी वेलेन्टाइन है।

हम यह फोन यहाँ http://www.flipkart.com/asus से खरीदने वाले हैं ।