खोया हुआ मोबाईल वापिस मिला, मुम्बई की ईमानदारी की “जय हो”

दो दिन पहले हमारा खोया हुआ मोबाईल वापिस मिल गया। हमारे  सेमसंग मोबाईल में हमने ट्रेकर चालू किया हुआ था और जैसे उसमें नई सिम डाली गई हमारे पास उस नये नंबर से एस.एम.एस. आ गया। हमने फ़ोन करके उससे कहा कि ये तो हमारा मोबाईल है जो थोड़े दिनों पहले लापता हो गया था। तो उसने हमसे टाईम और जगह फ़िक्स कर हमारा मोबाईल वापिस कर दिया। बस हमें हमारा १जीबी का मेमोरी कार्ड नहीं मिला और मोबाईल में एक भी नंबर नहीं मिला, बस मोबाईल मिल गया वही बड़ी बात है। एस.एम.एस. और फ़ोटो वह देख/पढ़ नहीं पाया क्योंकि हम ये हमेशा पासवर्ड के जरिये सुरक्षित रखते हैं। क्योंकि हमारा यह मानना है कि ये दो चीजें मोबाईल में निजी होती हैं और इन्हें सुरक्षित रखना चाहिये तो ये दोनों चीजें हमें सुरक्षित मिलीं।

 

वह एक आटो वाला था जिसे मेरा मोबाईल उसके आटो में पड़ा मिला जो किन्हीं अज्ञात लोगों द्वारा फ़ेंका गया था। उसमें न सिम थी और न ही कोई मोबाईल नंबर।

 

आखिर क्या है यह सेमसंग मोबाईल ट्रेकर –

सेमसंग मोबाईल में मोबाईल ट्रेकर फ़ोन सिक्यूरिटीज में होता है जिसमें आप कोई भी दो मोबाईल नंबर फ़ीड कर सकते हैं, जब भी सिम बदलेगी तो हमेशा एक एस.एम.एस. इन दो मोबाईल नंबरों पर चला जायेगा और आपको पता चल जायेगा कि कौन आपके मोबाईल का उपयोग कर रहा है, अब वो भले ही कितने ही सिम बदल ले, आपको हर नंबर पता होगा क्योंकि आपके पास उतनी ही बार एस.एम.एस. आ जायेगा। है ना कमाल की सुविधा।

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चिन्डोगु.कोम http://www.chindogu.com आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है।

इन अविष्कारों को करने वाले कोई बहुत बड़े वैज्ञानिक नहीं हैं परंतु रोजमर्रा की परेशानियों से निपटने के लिये लोगों ने कुछ उपाय करना शुरु किये और बिना कापीराईट के आपस में उसकी विधी बताना शुरु किया, और एक संस्था बनाई अंतर्राष्ट्रीय चिन्डोगु सोसायटी। ये लोग अभी तक ६०० से ज्यादा अविष्कार कर चुके हैं। कुछ अविष्कारों के चित्र देखिये।








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अगर मुख्यमंत्री का वरदहस्त है तो कोई क्या कर सकता है, न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी|

आखिरकार सभरवाल सर के हत्यारे बेगुनाह साबित कर छुटवा लिये गये। भले ही उन्हें टी.वी. पर सर के साथ भद्दी भाषा में बात करते हुए दिखाया गया हो, जान से मारने की धमकी देते हुए दिखाया गया हो, हमारी पहुँच कहां तक है ये भी कहते हुए दिखाया गया हो। पर उनका कोई बाल भी बांका कर सकता है क्या, क्योंकि हमारे माननीय मुख्यमंत्री का वरदहस्त है उनके ऊपर।

टीस इसलिये उठी कि मैं भी उसी माधव महाविद्यालय में पढ़ा हूँ और इस गंदी राजनीति को बहुत पास से देखा है। जहां एक प्रोफ़ेसर दूसरे प्रोफ़ेसर के लिये षड़्यंत्र रचता है वो भी छात्र राजनीति के द्वारा। जिस दिन यह घटना हुई, ठीक उसके एक दिन पहले मैं रायपुर से भोपाल के लिये ट्रेन में था और अपने मित्रों को यही बता रहा था कि माधव महाविद्यालय में तो हरेक छात्र नेता है, और कोई भी कुछ भी कर सकता है, और अब चुनाव हैं कुछ भी हो सकता है। शायद किसी की जान भी जा सकती है शायद किसी प्रोफ़ेसर की भी क्योंकि वहां के छात्र बहुत ही उच्चश्रंखल हैं, उद्दंड हैं, जो कि वहीं के गुरुओं द्वारा अपना वर्चस्व बनाने के लिये बना दिये गये हैं। पर मुझे यह पता नहीं था कि जो मैं बोल रहा हूँ वही अगले सत्य होने वाला है। सभरवाल सर ऐसे नहीं थे और उन्हें चुनाव की देखरेख के लिये नियुक्त किया गया था और वे किसी के दबाब में नहीं आते थे, पहले तो छात्र नेताओं ने उन्हें हटवाने की बहुत कोशिश की परंतु कामयाब नहीं हो पाये तो उनकी हत्या कर डाली।

सारे सबूत होते हुए भी हत्यारे बेगुनाह छूट गये और कोई भी कुछ भी नहीं कर पाया। शायद उज्जैन की जनता ही इंसाफ़ करे, नहीं तो ये लोग अब भाजपा में किसी प्रतिष्ठित पद पर बैठा दिये जायेंगे और कोई भी कुछ भी नहीं कर पायेगा, और न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी।

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मेरा नया ब्लोग “बैंकों के बारे में जानकारी”

मैंने एक नया ब्लोग शुरु किया है “बैंकों के बारे में जानकारी”।

मेरी कोशिश है कि आम जनता को बैंकों के बारे में उनका ज्ञानवर्धन कर सकूँ।

ओम भैया (ओम व्यास ओम) अब स्कूटर पर नहीं देखेंगे।

अक्सर ओम भैया (ओम व्यास ओम) फ़्रीगंज में सुबह अपने दफ़्तर जाते वक्त मामा पान पर मिल जाते थे अपनी सफ़ेद स्कूटर पर, पर अब ओम भाई कभी स्कूटर पर नहीं दिखेंगे यह उज्जैन के लिये अपूरणीय क्षति है, उनके छोटे भाई संजय व्यास मेरे अच्छे मित्रों में से हैं। भगवान शोकसंतप्त परिवार को इस गहन वेदना को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।

नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए सबसे अच्छी पत्रिका “मेजिक पोट” (MagicPot)

यह बच्चों के लिये सबसे अच्छी पाक्षिक पत्रिका है। यह एक अद्भुत पत्रिका है जिससे मजे से ओर आसानी से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को सीख सकते हैं। विशेष रूप से नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए। इस पत्रिका में ऐसी बहुत सी गतिविधियाँ हैं जिससे बच्चे का दिमाग तेज होगा जैसे कि डॉट जोड़ना, रंग भरना, नैतिक कहानियाँ, महाकाव्य ओर भी बहुत कुछ। इसमें चित्र पहेलियाँ हैं जिसमें अंतर बताना है।


हर पहेली के नीचे मेजिकपोट में एक नोट दिया रहता है कि इस पहेली या अभ्यास से बच्चों को क्या लाभ है। यह पत्रिका रंगीन है ओर बच्चों के मन को जो जो भाता है वह सब कुछ इसमें हैं। पत्रिका में सबसे अच्छी चीज है, चित्रों के समूह में से एक अलग चित्र को बच्चों को चयन करने को देते हैं।


कुल मिलाकर बच्चों के लिये सबसे बेहतरीन पत्रिका, ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ चटका लगाइये। यह हिन्दी में नहीं इंग्लिश में है अगर इसका हिन्दी वर्जन भी होता तो शायद इससे अच्छी कोई पत्रिका नहीं हो सकती थी।