दोस्त बहुत हैं पर गहरे दोस्त कम ही होते हैं, एक के बारे में लिखो तो दूसरे दोस्तों को बुरा लग सकता है, परंतु हम फिर भी अपने एक गहरे दोस्त के बारे में लिखते हैं, हमें पता है कि हमारे अन्य गहरे दोस्त हमारी बातों को ध्यान से पढ़ेंगे और हमें और ज्यादा प्यार करेंगे। अन्य दोस्तों की मैं कह नहीं सकता हूँ जिसमें से कुछ लोग तो बुरा भी मान जायेंगे और कुछ हौसलाफजाई करेंगे। Continue reading यारों का यार हमारा सरदार
बस बड़ा हो जाऊँ
आज ऑफिस से आते आते कुछ ऐसे विचार मन में आये कि हमेशा ही हम बड़े होने की बात सोचते हैं, परंतु कभी भी कितने भी बड़े हो जायें पर हमें खुद पर यकीन ही नहीं होता है, कि अब भी हम कोई काम ठीक से कर पायेंगे, हमेशा ही असमंजस की स्थिती में रहते हैं। उसी से एक कविता लिखने का प्रयास किया है, मुझे लगता है कि और अच्छा लिखा जा सकता है, परंतु भविष्य में इसको कभी संपादित कर दिया जायेगा।
बस बड़ा हो जाऊँ
जब मैं दस का था
तब भी यही सोचता था
बारह का हुआ तो लगा
कि अभी भी छोटा हूँ
पंद्रह खत्म कर सोलह में लगा
तो सोचा अब बड़ा हो गया
पर मैं कोई काम
एक बार में ठीक से नहीं कर पाता
सोचा
अभी छोटा ही हूँ
खामखाँ में लग रहा है
कि बड़ा हो गया हूँ
इसी प्रक्रिया के तहत
जब इक्कीस का हुआ
तो भी चीजें ठीक नहीं हो पाती थीं
फिर लगा जैसे उमर बढ़ रही है
साथ ही कठिनाईयाँ भी बढ़ रही हैं
फिर तीस का हुआ
पैंतीस का भी हुआ
इकतालिस अभी गया है
तेजी से बयालिस भाग रहा है
बड़ा पता नहीं कब होऊँगा
जब छोटा था,
तब सोचा नहीं था
बड़ा भी होना पड़ेगा,
कैसी मजबूरी है हमारी
बिना किसी जतन के
हम बस बढ़ते ही जाते हैं
छोटा था तो बचपन था
बचपन में मैं खुद को
कितना जी लेता था
अब बड़ा हो गया हूँ
पर गलतियों में
नासमझी में, सबमें
अब भी खुद को
कठिनाई में ही पाता हूँ
अब न सोचूँगा
कि कब बढ़ा होऊँगा
अब सोचता हूँ
सारा जीवन गलतियों में ही निकाल दिया।
रिलायंस जिओ का टेलीकॉम युद्ध
आज सुबह रिलायंस जिओ के प्लॉन समाचार पत्र में पढ़े तो देखकर ही दिमाग चकरघिन्नी हो गया। अब लगा कि रिलायंस जिओ, आईडिया एयरटेल की दुकानों पर भारी पड़ने वाला है, और रिलायंस जिओ का टेलीकॉम युद्ध शुरू हो गया है जो बाकी के सभी ऑपरेटर्स को बहुत भारी पड़ने वाला है, क्योंकि जिओ का सारा इन्फ्रास्ट्रक्चर नया है और उनकी कॉस्ट कम है, और बाकी के लोग हाथी हो चुके हैं। यहाँ तक कि इनके प्लॉन से अब ब्रॉडबैंड कंपनियों तक की बैंड बजने की उम्मीद है।
परसों ही ऑफिस के केन्टीन में लाईन से बैठे मोबाईल ऑपरेटर्स के डेस्कों पर गया और पूछने लगा कि अभी जो प्लॉन है, उससे मेरा काम नहीं चल रहा है। ज्यादा वाला प्लॉन बता दो, जिसमें लोकल और एस.टी.डी. दोनों ज्यादा हों, डाटा जितना है उतना ही चलेगा।
पहली डेस्क वोदाफोन जो अभी मेरा नेटवर्क ऑपरेटर है –
उनके प्लॉन देखे, तो कोई प्लॉन जमा ही नहीं, कहीं न कहीं कोई न कोई ट्रिक, ज्यादा कॉल्स तो डाटा प्लॉन में कमी, और डाटा ज्यादा तो कॉल में कमी। हमने कहा यार तुम लोग तो लूटने में ही लगे हो, और कितना निचोड़ोगे जनता को, Continue reading रिलायंस जिओ का टेलीकॉम युद्ध
बच्चों के शरीर के विकास के लिये न्यूट्रिशियन्स
लगभग सभी माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे हरेक चीज में आगे हैं फिर चाहे वह पढ़ाई लिखाई हो या खेल हो। यह बात मुझे अच्छी तरह से तब समझ में आई जब मैं पिता बना। बच्चों को अपनी उम्र के मुताबिक, बच्चों के शरीर के विकास के लिये न्यूट्रिशियन्स सही मात्रा में मिलें, हमें इसका ध्यान रखना जरूरी है। बच्चों का शारीरिक विकास ठीक तरीके से हो रहा है उसके लिये कुछ चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं, जैसे कि शारीरिक विकास के पड़ाव, इन्फेक्शन से लड़ने के लिये इम्यूनिटी (शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता) और उम्र के हिसाब से होने वाली सक्रियता। तो बच्चों को चाहिये एक सम्पूर्ण स्वस्थ आहार जो कि शारीरिक क्रियाकलापों की सक्रियता में मदद करे।
एक सम्पूर्ण स्वस्थ आहार जिससे बच्चे को सही मात्रा में कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन्स, फैट्स और विटामिन मिलते हैं। वैसे भी छोटे बच्चों के लिये घर में बना भोजन ही न्यूट्रीशियन्स का मुख्य स्रोत होता है। परंतु आजकल लगभग सभी माता पिता की यही शिकायत होती है कि बच्चा कुछ चुनी हुई चीजें ही खाता है, हमारी आधुनिक जीवन के जीने के तरीका भी बच्चों को चुनी हुई चीजों को खाना सिखलाता है जैसे कि आजकल की भागती दौड़ती जिंदगी में हम जंक फूट, रेडी टू ईट फूड खाते हैं, खाने की क्वालिटी के साथ समझौता करते हैं, मिलावटी खाना खाते हैं, वह सभी चीजें खाते हैं जो नहीं खाना चाहिये और इसी कारण बच्चों को सही मात्रा में न्यूट्रीशियन्स नहीं मिल पा रहे हैं।
बच्चों को सारी चीजें खाने की आदत डालनी चाहिये खासकर घर में बनी चीजों की चाहे जैसे कि रोटी दाल, दाल चावल, दाल खिचड़ी, हरी सब्जियाँ, बिरयानी, दाल बाटी, लिट्टी चोखा। साथ ही बच्चों को ज्यादा कैलोरी वाली चीजें भी खिलानी चाहिये जैसे कि पनीर, मिठाईयाँ, काजू करी, हरेक चीज में घी दीजिये, अंडा पीली बॉल के साथ खाना है। क्योंकि बच्चे ज्यादा खेलते हैं तो उनको ज्यादा कैलोरी की जरूरत भी होती है। आप देख सकते हैं अपने बच्चों को कि वो एक जगह तो बैठेंगे ही नहीं और हमेशा इधर से उधर घूमते ही रहेंगे।
अगर बच्चा खाने में मीनमेख निकालता है तो इसका मतलब भी यही है कि वह कुछ चीजें या तो खाना ही नहीं चाहता है या फिर उनको उस समय खाने से बचना चाहता है। इसके लिये बच्चों को अपने साथ बातों में लगाकर उनको खाना खिलायें, हो सके तो कभी कभार अपने हाथों से खिलायें, प्यार से बात करके खिलायें। हर बार डाँटने या मारने से काम नहीं चलेगा।
एक बात और ध्यान रखें कि केवल खाने से ही सब कुछ बच्चों को नहीं मिल जायेगा, उसके लिये उन्हें कुछ अतिरिक्त चीजें सीमित मात्रा में भी साथ में देनी होंगी, सप्लीमेंट जैसे कि हॉर्लिक्स ग्रोथ + जो कि बच्चों को शारीरिक विकास में न्यूट्रीशियन्स की कमी को पूरा कर भरपूर सहयोग करता है।
पर ध्यान रखें सप्लीमेंट केवल भोजन में न मिलने वाले न्यूट्रीशियन्स की कमियों को पूरा करता है। सप्लीमेंट को भोजन के रूप में नहीं खाया जा सकता है। हमें यह भी नहीं भूलना नहीं चाहिये कि सबसे ज्यादा न्यूट्रीशियन्स घर के खाने में ही मिलते हैं, बाजार के खाने में नहीं मिलते हैं। सप्लीमेंट को हमेंशा डॉक्टर की सलाह से ही लेना ठीक रहता है।
कला, साहित्य और राजनीति
कला, साहित्य और राजनीति तीनों पृथक कलायें हैं परन्तु इसके घालमेल से व्यक्ति सफलता के चरम शिखर तक जा पहुँचता है। संघर्ष हर कोई करता है, योग्यता भी हर किसी में होती है। निसंदेह कुछ लोगों को छोड़कर जो कि अपवाद होते हैं। परन्तु जो केवल एक ही चीज पकड़कर आगे बढ़ता है वह हमेशा ही संघर्ष करता रहता है। यह विचार कुछ लोगों में गफलत जरूर पैदा कर सकता है।
वैसे ही जब मैं किसी एक और विचार को सुन रहा था, जब एक वरिष्ठ साहित्यकार जो कि किसी बड़े सम्मान से नवाजे जा चुके थे और उन्होंने अपना घर पर पार्टी का आयोजन किया, तो सबसे पहले उनके घर पर एक बड़ी साहित्यकारा नेत्री पहुँच गईं, और उन दोनों की गुफ्तगू चल रही थी, साहित्यकार महोदय मद्यपान और धूम्रपान कर रहे थे, और सामने के सोफे पर ही नेत्री बैठी थीं। एक बात हमें बहुत मुद्दे की लगी, जब नेत्री ने कहा कि यह मुकाम आपने बहुत संघर्ष से पाया है, तब साहित्यकार महोदय कहते हैं कि नहीं आप गलत हैं, असल में आज जिस मुकाम पर मैं हूँ केवल अपनी चालाकी के कारण, तो नेत्री जी उनकी बात से असहमत थीं, तो साहित्यकार महोदय ने उनको कहा कि आप क्या सभी लोग असहमत होंगे परंतु सच यही है कि मैं केवल अपनी चालाकी के कारण यहाँ तक पहुँचा। Continue reading कला, साहित्य और राजनीति
डाटसन रेडी गो
डाटसन मेरी पुरानी यादों में है, जब मैं अपने बचपन के दिन याद करता हूँ तो डाटसन का नाम मेरे जहन में आता है जैसे कि कारों में कभी एम्बेसेडर नाम होता था। डाटसन तब बदला जब इसे निसान ने खरीदा और भारत में आने का फैसला किया। डाटसन कार अपनी विलासितापूर्ण कारों के लिये जाना माना नाम था और आज भी जाना जाता है।
हमेशा ही जब भी कम दामों के सेगमेंट में कोई भी कार बाजार में लांच होती है तो मेरे लिये हमेशा ही यह देखने का आकर्षण होता है कि इस नयी कार में ऐसा कौन सा फीचर है जो मेरी कार में नहीं है, और इसी तरह से हम कारों के बारे में जानते हैं और नयी तकनीकों को बेहतरीन तरीके से जान पाते हैं। जब मैंने कार ली थी तब भी मैंने डाटसन लेने की सोची थी, परंतु उस समय कुछ और समस्याओं के चलते में डाटसन की कार नहीं खरीद पाया था।
जब मैंने डाटसन की रेडी गो के बारे में देखा और जाना तो पाया कि कई मायनों में रेडी गो डाटसन की कार अपने आप में इस सेगमेंट में कई कारों को पीछे छोड़ती है। डाटसन रेडी गो कार अपने आप में इस सेगमेंट में पहली कार है जो कि कॉम्पेक्ट अर्बन क्रॉस और हैचबैक दोनों ही विशेषताओं के साथ उपलब्ध करवाई गयी है। डाटसन रेडी गो कार 2.5 लाख से 3.5 लाख के अलग अलग दामों में अलग अलग वेरियेंट में उपलब्ध है।
डाटसन रेडी गो 0.8 लीटर इंजिन, 3 सिलेंडर में है जो कि ईंधन भी कम खाता है और 5 गीयर हैं।
हाई ग्राऊँड क्लियरेन्स –
डाटसन रेडी गो का हाई ग्राऊँड क्लियरेन्स कार को बड़े स्पीड ब्रेकर्स और कच्ची सड़को पर चलना आसान बनाते हैं, कई जगह सड़के के किनारे थोड़े ऊँचे होते हैं जिससे कार में साईड में नीचे की तरफ नुक्सान हो जाता है या तो डैंट पड़ जाता है या फिर स्क्रेच पड़ जाते हैं, तो हाई ग्राऊँड क्लियरेन्स से कार को विशेष सुरक्षा मिलती है।
ड्राईव कम्पयूटर –
लगातार कार के कम्प्यूटर में औसत ईंधन खपत बताता रहता है, कितने किलोमीटर चलने के बाद ईँधन भरवाना पड़ेगा और कितना ईँधन बचा है, यह सब लगातार आँखों के सामने दिखता रहता है।
शिफ्ट इंडिकेटर –
हमेशा ही कार में गियर बदलने के लिये संशय ही रहता है, तो यहाँ कम्प्यूटर ड्राईवर की सहायता के लिये है जिससे कि ड्राईवर को हमेशा ही पता रहेगा कि कब गियर बदलना है, कम्प्यूटर गियर बदलने के लिये ड्राईवर को इंडिकेट कर देता है।
एक और खास विशेषता कार में होनी चाहिये वातानुकुलन याने की ए.सी., ए.सी. को पूरी कार को ठंडा करने की क्षमता रखना चाहिये। मैं हमेशा ही कार के सारे काँच बंद कर हमेशा ही ए.सी. चालू करके कार चलाता हूँ, कई कारों में ए.सी. को ज्यादा पर चलाना पड़ता है तभी कार में बैठी पीछे सीट की सवारी को हवा पहुँच पाती है, परंतु डाटसन रेडी गो में यह ध्यान रखा गया है कि 50 प्रतिशत हवा पीछे सीट पर बैठी सवारी को मिले इसके लिये 89सीसी के कम्प्रेशर का उपयोग किया गया है।
जैसा कि पहले बताया भारत में यह पहली अर्बन क्रॉसओवर कार है तो मुझे यह जानने की और ज्यादा इच्छा है कि यह कार हमें और क्या क्या सुविधाएँ देती है। और उम्मीद करते हैं कि जल्दी ही एक टेस्ट ड्राईव हमें लेने को मिलेगी।
Fun. Freedom. Confidence. The ultimate Urban Cross – Datsun redi-GO – the capability of a crossover with the convenience of a hatchback.
हॉर्लिक्स में मौजूद माईक्रो न्यूट्रिशियन
हम हमेशा ही ब्लॉगर मीट के लिये तैयार रहते हैं, इंडीब्लॉगर मीट के तीन चार दिन पहले ही पता चला कि रविवार को विवांता ताज, जो कि महात्मा गाँधी सड़क पर है, रखा गया है। अभी बेटेलाल के विद्यालय की गर्मियों की छुट्टियों के कारण वे भी इस ब्लॉगर मीट में जाने को तैयार थे। हम दोनों ब्लॉगर चल पड़े, ब्लॉगर मीट के लिये घर से, और बिल्कुल समय से 4 बजे पहुँच भी गये।
हॉर्लिक्स ने यह ब्लॉगर मीट इंडीब्लॉगर के साथ रखी थी, जिसका नाम था The Horlicks Immunity Indiblogger Meet और जिसका हैशटैग #Immunity4Growth रखा गया था। जैसे ही हम मीटिंग में पहुँचे तो हमें अनूप और रैने से मिलने का अवसर मिला और जाने पहचाने पुराने ब्लॉगर, जो कि ब्लॉग में और ब्लॉगर मीट में मिलते ही रहते हैं। Continue reading हॉर्लिक्स में मौजूद माईक्रो न्यूट्रिशियन
धरती का स्वर्ग श्रीनगर कश्मीर की यात्रा
श्रीनगर का नाम लेते ही कश्मीर का ध्यान आ जाता है, कश्मीर धरती का स्वर्ग कहा जाता है, श्रीनगर कश्मीर की यात्रा की इच्छा बहुत है, जब पिछली बार भी कार्यक्रम बना तो भी मैं वहाँ नहीं जा पाया था, मैं केवल तीन दिन में ही कश्मीर का आनंद लेना चाहता हूँ। पर्यटन का जो आनंद और अनुभव श्रीनगर में ले सकते हैं वह शायद ही दुनिया में कहीं और मिल सकता है। मैं केवल तीन दिन में ही श्रीनगर का पर्यटन कर लेना चाहता हूँ।
बैंगलोर से श्रीनगर की सीधी उड़ान है बस दिल्ली में रूकती हुई जाती है, मैं हमेशा ही जेट एयरवेज Jet Airways से यात्रा करना पसंद करता हूँ, और श्रीनगर में रुकने के लिये मैं विवांता डल व्यू जो कि ताज ग्रुप का होटल है, वहाँ रूकना पसंद करूँगा। विवांता से डल लेक का रूप सौंदर्य देखने का स्वार्गिक आनंद कुछ और ही है। जब अपने कमरे की बालकनी में खड़े होकर डल लेक को निहारते हुए अपनी सुबह और शाम बितायें तो बात ही कुछ और है। Continue reading धरती का स्वर्ग श्रीनगर कश्मीर की यात्रा
जख्म इतना भी गहरा न दिया करो
कुछ लाईनें जो ट्विटर पर लिख दी थीं, तो सोचा कि अपने ब्लॉग पर लिख दें ताकि सनद रहे कि हमने ही लिखी थीं –
ये भी मत सोचकर मतवाला होना कि,
हवा तुम्हारे कहने से ही चलेगी,
कभी हमारे बारे में भी सोचना,
कि तुम्हें पता न हो हम तूफानों में ही खेलते हैं।
जब से मैं जंगली जैसा रहने लगा हूँ,
मेरे नाखून ही मेरे हथियार हैं,
अब मुझपे झपट्टा मारने के पहले,
सौ बार सोच जरूर लेना।
तेरे हर सवाल का जबाब हम देंगे,
तेरे हर दर्द का जबाब हम देंगे,
जब हम तुझे दर्द देंगे तो निशां रह जायेंगे,
दर्द से सारी जिंदगी तड़पते रहोगे।
जख्म इतना भी गहरा न दिया करो कि,
हम खुद ही कुरेद के नासूर बना लें,
ताकि याद रख सकें कि,
एक दिन तुमसे बदला लेना है।
वक्त का क्या है,
वक्त की अपनी चाल है,
हमारा क्या है,
हमारी चाल वक्त बिगाड़ता है।
अभी मैं भले तुम्हें कोयला लगता हूँ पर,
ध्यान रखना हीरा कोयला ही बनता है।
कार से बैंगलोर से उज्जैन यात्रा
सिहंस्थ के दौरान हमें अपने गृहनगर उज्जैन जाना तय कर रखा था, परंतु आखिरी मौके पर पता चला कि कुछ ऐसी अड़चनें हैं कि हम सिंहस्थ के दौरान उज्जैन नहीं जा पायेंगे, तो हमने सिंहस्थ के पहले ही आने का निर्णय लिया। सबसे बड़ी अड़चन यह थी कि हमने अपने ट्रेन के आरक्षण सिंहस्थ की दिनांक के मद्देनजर उन दिनों में करवा रखे थे, और 4 महीने पहले ही जिस दिन आरक्षण खुले उसी दिन सुबह करवा लिये थे। नहीं तो एक भी घंटा अगर लेट करते तो वेटिंग के ही टिकट मिलते हैं। हमने मन बनाया कि इस बार 3 अप्रैल को उज्जैन में ही अपने माता पिता के साथ अपने जन्मदिन पर रहें। कार से बैंगलोर से उज्जैन सड़क मार्ग से जाने का मन तो पहले ही था।
31 मार्च को शाम को आखिरकार अचानक ही कार्यक्रम बना कि कल सुबह याने कि 1 अप्रैल को कार से ही बैंगलोर से पूना होते हुए उज्जैन जाया जाये। 31 मार्च को हमने सोचा था कि जल्दी सो जायेंगे परंतु उसी दिन टी 20 के विश्वकप में भारत और वेस्टैंडीज का सेमीफाईनल था Continue reading कार से बैंगलोर से उज्जैन यात्रा