कल हमारे विवाह को ९ वर्ष पूर्ण हो गये, अब तो ९ वर्ष मतलब बहुत बड़ा अंक लगने लगा है, ऐसा लगता है कि बुढ़ाने की ओर तेजी से अग्रसर हैं।
कैसे ये ९ वर्ष बीत गये, पता ही नहीं चला। ऐसा लगता है कि जिंदगी का बीता हर पल बस अभी तो बीता है, और अगर संख्या देखी जाये तो ९ हो गई ।
हालांकि वैवाहिक वर्षगांठ हमने शायद चौथी बार साथ में मनाई है, बाकी पाँच बार अकेले अकेले 🙁
कल छत पर चाँद देख रहा था, चाँद पूरा था क्योंकि कल पूर्णिमा थी और इतना सुंदर चाँद बहुत दिनों बाद देख रहा था, समझ में नहीं आ रहा था कि कौन सा चाँद ज्यादा सुन्दर है, मेरा या सबका 🙂
कटाक्ष तो वैवाहिक जीवन का आम हिस्सा है, जैसे कि अब हम ये संवाद बड़ी ही आसानी से बोल सकते हैं,
“तुम्हें ९ साल से झेल रहा हूँ”
“अब तो आदत हो जानी चाहिये ९ साल से देख रही हो”
वैवाहिक वर्षगांठ पर परिजनों और प्रेमी मित्रों से बात कर दिल गुलजार हो गया।
उम्मीद है कि आगे की वर्षगांठें भी ऐसे ही आनंद से निकलेंगी और प्रेम अमर रहेगा।
