शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 20
Volume आखिर Market का Attendance Register क्यों कहलाता है?
शुक्रवार की सुबह मैं अपने स्टडी रूम में बैठा था। सामने PC Terminal खुला हुआ था। तीन मॉनिटर पर अलग-अलग charts चल रहे थे। एक स्क्रीन पर Nifty, दूसरी पर कुछ शेयर और तीसरी पर watchlist खुली हुई थी।
बेटेलाल बगल वाली कुर्सी पर बैठे स्क्रीन को बहुत ध्यान से देख रहे थे।
आज उनकी नजर candles पर नहीं थी।
वे नीचे दिख रही रंग-बिरंगी लंबे-छोटे बार को देख रहे थे।
कुछ देर बाद उन्होंने पूछा —
“डैडी, ये candles तो समझ आ गईं।”
“अच्छी बात है।”
“लेकिन इनके नीचे ये खंभे जैसे क्या बने हैं?”
मैं मुस्कुराया।
“आखिरकार तुम Volume तक पहुँच ही गये।”
Volume आखिर होता क्या है?
मैंने स्क्रीन पर zoom किया।
“देखो बेटेलाल।”
“हाँ।”
“Volume का मतलब है — किसी समय अवधि में कितने shares खरीदे और बेचे गये।”
“मतलब?”
“जितना ज्यादा Volume, उतने ज्यादा लोग उस शेयर में भाग ले रहे हैं।”
Attendance Register
मैंने कहा —
“Volume को मैं हमेशा Attendance Register कहता हूँ।”
बेटेलाल हँस पड़े।
“स्कूल वाला?”
“बिल्कुल।”
“क्यों?”
“मान लो स्कूल में कोई भाषण हो रहा है।”
“हाँ।”
“अगर सिर्फ पाँच बच्चे बैठे हैं तो उसका प्रभाव कितना होगा?”
“कम।”
“और अगर पूरा स्कूल मौजूद हो?”
“तो बात अलग होगी।”
“बस यही Volume है।”

Candle और Volume का रिश्ता
मैंने chart पर एक बड़ी हरी candle दिखाई।
“अगर बड़ी हरी candle के साथ Volume भी बड़ा हो?”
“तो?”
“मतलब बहुत सारे लोग खरीदारी में शामिल हैं।”
“और अगर बड़ी candle है लेकिन Volume कम है?”
“तो थोड़ा सावधान रहना चाहिए।”
Traffic वाला उदाहरण
“मान लो सुबह-सुबह सड़क खाली है।”
“हाँ।”
“और एक कार 100 की स्पीड से निकल जाए।”
“तो?”
“कोई बड़ी बात नहीं।”
“लेकिन वही स्पीड अगर भारी ट्रैफिक में दिखाई दे?”
“तो मामला अलग है।”
“बस यही Volume समझो।”
Breakout में Volume
बेटेलाल ने पूछा —
“डैडी, लोग Volume को इतना महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?”
मैंने एक chart खोला।
“मान लो कोई शेयर कई दिनों से 100 रुपये के ऊपर नहीं जा पा रहा।”
“हाँ।”
“फिर एक दिन 100 के ऊपर निकल गया।”
“तो Breakout।”
“सही।”
“लेकिन असली सवाल है।”
“क्या?”
“उस Breakout के समय Volume कितना था?”
दो प्रकार के Breakout
पहला
Breakout
कम Volume
“यह नकली भी हो सकता है।”
दूसरा
Breakout
High Volume
“यह ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।”
बेटेलाल बोले —
“मतलब भीड़ भी साथ आनी चाहिए।”
“Exactly.”

Volume और Panic
मैंने दूसरी स्क्रीन पर chart खोला।
“अब यह देखो।”
“अचानक भारी गिरावट।”
“हाँ।”
“और साथ में बहुत ज्यादा Volume।”
“मतलब?”
“कई लोग घबराकर बेच रहे हैं।”
Volume और Time Frame
बेटेलाल बोले —
“क्या Volume भी Time Frame के हिसाब से बदलता है?”
मैं मुस्कुराया।
“बहुत अच्छा सवाल।”
“5 Minute chart का Volume अलग कहानी सुनाता है।”
“Daily chart का अलग।”
“Weekly chart का अलग।”
“Long Term निवेशक Daily और Weekly Volume ज्यादा देखते हैं।”
Volume हमेशा सही नहीं होता
“लेकिन एक बात याद रखना।”
“क्या?”
“Volume भगवान नहीं है।”
दोनों हँस पड़े।
“मतलब?”
“सिर्फ Volume देखकर Trade नहीं करना चाहिए।”
“तो?”
“Candle.”
“Trend.”
“Support.”
“Resistance.”
“Time Frame.”
“और Volume.”
“सबको साथ देखना पड़ता है।”
असली सीख
PC Terminal पर candles लगातार बन रही थीं।
Volume bars ऊपर-नीचे हो रही थीं।
मैंने कहा —
“याद रखना बेटेलाल…”
“क्या?”
“Candle बताती है कि Price कहाँ गया।”
“हाँ।”
“लेकिन Volume बताता है कि उस यात्रा में कितने लोग साथ थे।”
कुछ देर दोनों चुप रहे।
बेटेलाल अब Volume bars को अलग नजर से देख रहे थे।
उन्हें वे सिर्फ रंगीन खंभे नहीं लग रहे थे।
वे market में शामिल लोगों की भीड़ दिखाई देने लगी थी।
फिर उन्होंने पूछा —
“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”
मैंने terminal पर Volume indicator बंद करते हुए कहा —
“अगले भाग में समझेंगे — Support और Resistance वास्तव में होते क्या हैं, और क्यों Market बार-बार कुछ खास स्तरों पर जाकर रुक जाता है।”
क्रमशः…
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