एक ही शेयर अलग-अलग चार्ट में अलग क्यों दिखता है?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 19

एक ही शेयर अलग-अलग चार्ट में अलग क्यों दिखता है?

शुक्रवार की सुबह है।

रात की बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया था। मैं अपने स्टडी रूम में बैठा था। सामने डेस्क पर बड़ा मॉनिटर लगा था, जिसमें trading terminal खुला हुआ था।

स्क्रीन पर दर्जनों charts दिखाई दे रहे थे। कहीं हरी candles बन रही थीं, कहीं लाल।

सामने बेटेलाल अपनी कुर्सी खींचकर बैठ गये थे।

वे काफी देर से स्क्रीन को घूर रहे थे।

फिर अचानक बोले —

“डैडी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।”

मैं मुस्कुराया।

“शेयर बाजार में यह बहुत सामान्य स्थिति है।”

दोनों हँस पड़े।

बेटेलाल बोले —

“नहीं सच में।”

“क्या हुआ?”

“अभी मैंने इसी शेयर का 5 मिनट का chart देखा तो वह नीचे जा रहा था।”

“हाँ।”

“फिर Daily chart देखा तो ऊपर जा रहा था।”

“हाँ।”

“और Weekly chart में तो वह और भी मजबूत दिख रहा है।”

“तो आखिर सच कौन बोल रहा है?”

मैं मुस्कुराया।

“तीनों।”

Time Frame आखिर होता क्या है?

मैंने terminal पर एक chart खोला।

“देखो बेटेलाल, market वही है।”

“हाँ।”

“लेकिन तुम उसे किस खिड़की से देख रहे हो, यह बदल जाता है।”

मैंने खिड़की की तरफ इशारा किया।

“अगर तुम बारिश को एक मिनट देखो तो क्या दिखेगा?”

“कुछ बूंदें।”

“अगर एक घंटा देखो?”

“अच्छी बारिश।”

“और पूरा दिन देखो?”

“मौसम का अंदाजा लग जाएगा।”

“बस यही Time Frame है।”

1 Minute Chart

मैंने chart बदलते हुए कहा —

“यह सबसे छोटा और सबसे शोर वाला chart है।”

“मतलब?”

“यह market का heartbeat है।”

“कौन देखता है इसे?”

“Scalpers।”

“जो कुछ मिनटों में trade करते हैं।”

5 Minute Chart

“यह Intraday traders का पसंदीदा chart है।”

“क्यों?”

“क्योंकि इसमें noise थोड़ा कम हो जाता है।”

15 Minute Chart

“यह थोड़ा शांत स्वभाव का chart है।”

“मतलब?”

“यह trend को थोड़ा साफ दिखाता है।”

1 Hour Chart

मैंने अगला chart खोला।

“अब चीजें और स्पष्ट दिखने लगती हैं।”

“यह कौन देखता है?”

“Swing traders।”

Daily Chart

मैंने स्क्रीन पर Daily chart खोला।

“अब असली कहानी शुरू होती है।”

बेटेलाल ध्यान से देखने लगे।

“अरे! यह तो 5 मिनट वाले chart से बिल्कुल अलग दिख रहा है।”

मैंने कहा —

“क्योंकि Daily chart बाजार का मूड दिखाता है।”

“5 Minute chart बाजार का शोर।”

Weekly Chart

मैंने Weekly chart खोला।

बेटेलाल कुछ सेकंड तक उसे देखते रहे।

“यह तो और भी साफ दिख रहा है।”

“बिल्कुल।”

मैंने कहा —

“Weekly chart कई बार निवेशकों का सबसे अच्छा दोस्त होता है।”

Monthly Chart

मैंने अंतिम chart खोला।

“और यह?”

बेटेलाल हँस पड़े।

“यह तो पूरा इतिहास लग रहा है।”

मैंने कहा —

“Long Term Investors यही देखते हैं।”

पेड़ वाला उदाहरण

स्टडी रूम की खिड़की से बाहर आम का पेड़ दिखाई दे रहा था।

मैंने उसकी तरफ इशारा किया।

“अगर तुम एक घंटे तक पेड़ को देखो तो क्या दिखाई देगा?”

“हवा में हिलती शाखाएँ।”

“एक महीने तक देखो?”

“नई पत्तियाँ।”

“एक साल तक देखो?”

“पेड़ कितना बढ़ा।”

“बस यही Time Frame का खेल है।”

सबसे बड़ी गलती

बेटेलाल बोले —

“तो नए लोग कहाँ गलती करते हैं?”

मैंने कहा —

“Long Term निवेश करते हैं।”

“हाँ।”

“लेकिन दिन भर 5 Minute chart देखते रहते हैं।”

दोनों हँस पड़े।

मैंने कहा —

“फिर छोटी-सी गिरावट देखकर डर जाते हैं।”

कौन क्या देखे?

मैंने terminal पर एक नोट लिख दिया।

Intraday Trader

5 Minute

15 Minute

Swing Trader

1 Hour

Daily

Positional Investor

Daily

Weekly

Long Term Investor

Weekly

Monthly

कुछ देर दोनों चुप रहे।

स्क्रीन पर candles लगातार बनती रहीं।

मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“गलत chart नहीं होता।”

“गलत Time Frame होता है।”

“मतलब?”

“अगर तुम एक आम के पेड़ से पाँच मिनट में आम की उम्मीद करोगे…”

“तो निराश ही होगे।”

मैं मुस्कुराया।

“और यही गलती अधिकांश निवेशक करते हैं।”

बेटेलाल अब स्क्रीन को अलग नजर से देख रहे थे।

उन्हें पहली बार समझ आया कि एक ही शेयर अलग-अलग कहानी नहीं सुना रहा था।

वह बस अलग-अलग समय की कहानी सुना रहा था।

फिर उन्होंने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने terminal पर Volume indicator लगाते हुए कहा —

“अगले भाग में समझेंगे — Volume आखिर market का attendance register क्यों कहलाता है, और बिना Volume देखे trade करना कितना खतरनाक हो सकता है।”

क्रमशः…

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