हमने अपनी संपत्ति के लिए वसीयत बनाई है… लेकिन अपने इलाज के लिए?
“गरिमापूर्ण मृत्यु के लिए जिंदा वसीयत (Living Will)।”
“जिंदा वसीयत” आखिर होती क्या है?
मैंने इसके बारे में पढ़ा तो लगा कि यह विषय हममें से बहुत से लोगों के लिए जानना जरूरी है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति को अचानक ऐसा ब्रेन स्ट्रोक या दुर्घटना हो जाती है कि वह खुद बोलने, समझने या निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है।
वह ICU में है। Ventilator लगा है। कई तरह के life-support systems चल रहे हैं।
डॉक्टरों को लगता है कि बीमारी से ठीक होना और वापस आने की कोई वास्तविक संभावना नहीं है।
अब सवाल है—आखिर फैसला कौन करेगा?
पत्नी?
बच्चे?
भाई?
डॉक्टर?
और अगर परिवार के लोगों की राय अलग-अलग हो तो?
यहीं आती है Living Will, जिसे कानूनी भाषा में Advance Medical Directive (AMD) कहा जाता है।

यह संपत्ति वाली Will नहीं है।
यह उस समय के लिए आपकी पहले से लिखी हुई इच्छा है, जब भविष्य में आप खुद अपनी medical treatment के बारे में बोलने या निर्णय लेने की स्थिति में न हों।
आप पहले से बता सकते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में आप किस प्रकार का life-sustaining treatment चाहते हैं और किन परिस्थितियों में उसे जारी नहीं रखना चाहते।
भारत में इस विचार को 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक मान्यता दी। कोर्ट ने माना कि व्यक्ति की autonomy, dignity और medical treatment को स्वीकार या अस्वीकार करने की इच्छा को महत्व दिया जाना चाहिए।
लेकिन 2018 की प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि practically इसे लागू करना आसान नहीं था।
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया को सरल किया। Advance Medical Directive को दो गवाहों की मौजूदगी में बनाया जा सकता है और उसे notary या gazetted officer से attest कराया जा सकता है। इसकी copy नामित व्यक्ति, family physician और स्थानीय custodian के पास रखी जा सकती है।
और अब महाराष्ट्र ने अप्रैल 2026 में इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है।
राज्य ने urban local bodies के स्तर पर Living Will के records को digitally preserve करने की व्यवस्था शुरू की है। Municipal Commissioners और Municipal Councils/Nagar Panchayats के Chief Officers को custodian की भूमिका दी गई है। यानी कागज पर लिखी इच्छा को उस समय ढूंढना आसान हो सके, जब उसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो।
लेकिन इस पूरी कहानी को समझने के लिए मार्च 2026 का Harish Rana case शायद सबसे महत्वपूर्ण है।
Harish Rana 2013 में एक दुर्घटना के बाद वर्षों से permanent vegetative state में थे। मेडिकल बोर्डों ने पाया कि उनकी स्थिति irreversible थी और जिस clinically assisted nutrition and hydration से उनका जीवन चल रहा था, उससे underlying brain damage ठीक होने की कोई संभावना नहीं थी।
11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए life-sustaining treatment हटाने की अनुमति दी।
लेकिन यहां एक बहुत महत्वपूर्ण बात है—
सुप्रीम कोर्ट ने “मृत्यु की अनुमति” नहीं दी।
Court ने यह भी स्पष्ट किया कि treatment हटाने का मतलब patient को छोड़ देना नहीं है।
उसे उचित palliative और end-of-life care मिलनी चाहिए, ताकि treatment हटाने की प्रक्रिया में दर्द, तकलीफ और असम्मान न हो।
यानी सवाल यह नहीं है कि—
“जीवन चाहिए या मृत्यु?”
सवाल कहीं ज्यादा कठिन है—
“जब इलाज से जीवन वापस नहीं आ रहा हो, केवल मृत्यु की प्रक्रिया को टाल रहा हो, तब मरीज की अपनी इच्छा क्या थी?”
और शायद इसी वजह से Living Will महत्वपूर्ण है।
हम अपने बच्चों के लिए property की Will बनाते हैं।
Bank accounts के nominee बनाते हैं।
Insurance लेते हैं।
Retirement corpus बनाते हैं।
लेकिन शायद एक चीज भूल जाते हैं—
अगर किसी दिन हम खुद अपने बारे में फैसला लेने की स्थिति में न रहें, तो हमारे शरीर और इलाज के बारे में फैसला कौन करेगा?
Living Will शायद मृत्यु की तैयारी नहीं है।
यह उससे ज्यादा परिवार को एक कठिन निर्णय से बचाने की तैयारी है।
क्योंकि उस समय हमारे अपने लोग भावनाओं से टूटे होंगे।
एक तरफ उम्मीद होगी—
“शायद ठीक हो जाए…”
दूसरी तरफ डॉक्टर कह रहे होंगे—
“Recovery की संभावना बहुत कम है।”
और बीच में होंगे ICU के बिल, लगातार treatment, machines और परिवार का मानसिक संघर्ष।
ऐसे समय में अगर मरीज की अपनी स्पष्ट इच्छा पहले से लिखी हुई हो, तो कम से कम परिवार को यह सवाल नहीं सताएगा—
“वह खुद क्या चाहता था?”
मेरे लिए Living Will की सबसे खूबसूरत परिभाषा शायद यही है—
यह मृत्यु को बुलाने का दस्तावेज नहीं है। यह उस समय अपनी आवाज़ को सुरक्षित रखने का दस्तावेज है, जब शायद हम खुद बोल नहीं पाएंगे।
और शायद हमें अपनी financial planning के साथ एक और planning शुरू करनी चाहिए—
Life Planning.
आपने इस विषय के बारे में पहले सुना था?
और क्या आपको लगता है कि 50 की उम्र के बाद Will की तरह Advance Medical Directive पर भी परिवार में बातचीत होनी चाहिए?
मैंने सोच लिया है, कि इस विषय पर परिवार में बात करेंगे और कोई राजी हो न हो, मैं अपने लिए तो यह will बना ही सकता हूँ।
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