शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 29
Open Interest आखिर क्या होता है, और Futures Market के बड़े खिलाड़ी इससे Market का मूड कैसे पढ़ते हैं?
मैं PC Terminal के सामने बैठा था।
सामने तीनों मॉनिटर पर अलग-अलग charts खुले हुए थे।
बेटेलाल भी अपनी कुर्सी पर बैठे हुए Nifty का chart देख रहे थे।
कुछ देर तक स्क्रीन को घूरने के बाद अचानक बोले —
“डैडी, ये TV वाले बार-बार Open Interest की बात क्यों करते हैं?”
मैं मुस्कुराया।
“अच्छा… आज Futures Market की भीड़ गिनना सीखते हैं।”
“हैं जी?”
“हाँ जी।”
“और डरने की जरूरत नहीं है।”
बेटेलाल हँस पड़े।
“नाम सुनकर लग रहा है जैसे बैंक में Fixed Deposit खुलवाने आए हों।”
मैं भी हँस पड़ा।
“असल में Open Interest का मतलब है — Futures और Options Market में अभी कितने Contracts खुले हुए हैं।”
“मतलब?”
मैंने चाय की चुस्की ली।
“मान लो हमारी कॉलोनी में रविवार को क्रिकेट टूर्नामेंट हो रहा है।”
“हाँ।”
“और 20 टीमों ने अपना नाम लिखवा दिया।”
“हाँ।”
“तो Tournament में Interest रखने वाली 20 टीमें मौजूद हैं।”
“अगर 5 टीमें नाम वापस ले लें तो?”
“फिर 15 बचेंगी।”
“बस यही Open Interest है।”
बेटेलाल अब थोड़ा समझने लगे थे।
“मतलब Market में कितने लोग अभी भी खेल में बने हुए हैं?”
“बिल्कुल।”

मैंने स्क्रीन पर OI Data खोला।
“अब याद रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात।”
“क्या?”
“Price अकेले पूरी कहानी नहीं बताता।”
“फिर?”
“Price के साथ Open Interest भी देखो।”
मैंने कागज पर चार बातें लिखीं।
“अगर Price ऊपर जा रहा है और Open Interest भी बढ़ रहा है…”
“तो?”
“मतलब नई खरीदारी आ रही है।”
“Bullish संकेत माना जा सकता है।”
“अच्छा।”
“अगर Price नीचे जा रहा है और Open Interest बढ़ रहा है?”
“तो?”
“मतलब नई Short Positions बन रही हैं।”
“Bearish संकेत माना जा सकता है।”
बेटेलाल ध्यान से सुन रहे थे।
“और अगर Price ऊपर जा रहा है लेकिन OI कम हो रहा है?”
“मतलब पुराने Short Sellers अपनी Position बंद कर रहे हैं।”
“इसे Short Covering कहते हैं।”
“ओह!”
“और अगर Price नीचे जा रहा है और OI भी घट रहा है?”
“तो Long Unwinding हो सकती है।”
बेटेलाल कुछ सेकंड सोचते रहे।
फिर बोले —
“डैडी, ये तो बहुत उलझा हुआ लग रहा है।”
मैं हँस पड़ा।
“शुरू में सबको ऐसा ही लगता है।”
“लेकिन धीरे-धीरे यह Traffic Signal जैसा आसान लगने लगता है।”
मैंने कहा —
“Price सिर्फ गाड़ी की दिशा बताता है।”
“Volume गाड़ी की Speed बताता है।”
“और Open Interest बताता है कि सड़क पर कितनी गाड़ियाँ मौजूद हैं।”
बेटेलाल मुस्कुराये।
“मतलब Market में सिर्फ Price देखकर काम नहीं चलता।”
“बिल्कुल।”
“भीड़ कितनी बड़ी है, यह भी जानना जरूरी है।”
कुछ देर कमरे में शांति रही।
मॉनिटर पर Nifty के Futures Chart के साथ Open Interest के आंकड़े बदल रहे थे।
मैंने धीरे से कहा —
“याद रखना बेटेलाल…”
“क्या?”
“Price हमें बताता है कि Market कहाँ जा रहा है।”
“हाँ।”
“लेकिन Open Interest हमें बताता है कि उस दिशा में कितने लोग विश्वास करके पैसा लगा रहे हैं।”
बेटेलाल मुस्कुराये।
“मतलब Market सिर्फ कीमतों का खेल नहीं है…”
“भीड़ की मनोविज्ञान का भी खेल है।”
मैं भी मुस्कुराया।
“और समझदार Investor वही है जो भीड़ को देखकर भी भीड़ का हिस्सा नहीं बनता।”
कुछ देर बाद बेटेलाल बोले —
“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”
मैंने Option Chain खोलते हुए कहा —
“अगले भाग में समझेंगे — Delivery Percentage आखिर क्या होता है, और इससे कैसे पता चलता है कि सिर्फ Trading हो रही है या बड़े खिलाड़ी वास्तव में शेयर जमा कर रहे हैं।”
क्रमशः…
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