शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 27
“Bollinger Bands आखिर क्या हैं, और Market कभी सिकुड़ता तो कभी फैलता क्यों दिखाई देता है?”
बेटेलाल कुछ ज्यादा ही उत्सुक दिखाई दे रहे थे।
वे काफी देर से एक chart को घूर रहे थे।
फिर अचानक बोले —
“डैडी, ये chart के ऊपर और नीचे दो और लाइनें क्यों बनी हुई हैं?”
मैं मुस्कुराया।
“अच्छा… आज Bollinger Bands की बारी आ गई।”
“हैं जी?”
“हाँ जी।”
“नाम से तो लगता है कोई विदेशी क्रिकेट खिलाड़ी हो।”
दोनों हँस पड़े।
मैंने chart zoom किया।
“देखो बेटेलाल, बीच वाली लाइन तो Moving Average होती है।”
“हाँ, ये तो समझ आ गया।”

“और उसके ऊपर और नीचे जो दो लाइनें दिखाई देती हैं, वही Bollinger Bands हैं।”
“इनका काम क्या है?”
“ये Market की सांसों की तरह हैं।”
“मतलब?”
“जब Market शांत होता है, तो ये Bands सिकुड़ जाते हैं।”
“और जब Market में हलचल बढ़ती है, तो ये फैलने लगते हैं।”
बेटेलाल बोले —
“मतलब जैसे गुब्बारा?”
“बिल्कुल।”
“अगर हवा कम है तो गुब्बारा छोटा।”
“और ज्यादा हवा भर दो तो फैल जाएगा।”
“बस यही Bollinger Bands हैं।”
मैंने chart की तरफ इशारा किया।
“देखो, यहाँ Bands बहुत पास-पास आ गए हैं।”
“हाँ।”
“इसे Bollinger Squeeze कहते हैं।”
“मतलब?”
“मतलब Market अभी शांत है और बड़ी चाल आने की तैयारी कर सकता है।”
“ओह!”
“और जब Bands बहुत फैल जाते हैं?”
“तो Volatility बढ़ गई है।”
“मतलब Market तेज सांस ले रहा है?”
मैं मुस्कुराया।
“वाह बेटेलाल, अब तुम खुद उदाहरण देने लगे हो।”
उन्होंने फिर पूछा —
“डैडी, अगर Price ऊपर वाले Band को छू ले तो क्या बेच देना चाहिए?”
मैं हँस पड़ा।
“यही गलती नए लोग करते हैं।”
“मतलब?”
“ऊपरी Band छूने का मतलब यह नहीं कि Market तुरंत नीचे आएगा।”
“और नीचे वाले Band को छूने का मतलब यह नहीं कि तुरंत ऊपर जाएगा।”
“फिर?”
“Trend भी देखना पड़ता है।”
“Volume भी।”
“Price Action भी।”
मैंने एक तेजी वाला chart खोला।
“देखो, Strong Uptrend में Price कई बार लगातार ऊपर वाले Band के पास चलता रहता है।”
“मतलब Band छूना हमेशा reversal नहीं होता?”
“बिल्कुल।”
“कई बार वह ताकत का संकेत भी होता है।”
मैंने कहा —
“याद रखना बेटेलाल…”
“क्या?”
“Bollinger Bands भविष्य नहीं बताते।”
“फिर?”
“वे सिर्फ बताते हैं कि Market इस समय कितना शांत है और कितना बेचैन।”
बेटेलाल मुस्कुराये।
“मतलब Market भी इंसानों की तरह कभी आराम करता है और कभी भागने लगता है।”
मैं भी मुस्कुराया।
“और समझदार Investor वही है जो Market की सांसों की गति समझ ले।”
फिर बेटेलाल बोले —
“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”
मैंने VWAP Indicator chart पर लगाते हुए कहा —
“अगले भाग में समझेंगे — VWAP आखिर क्या होता है, और बड़े Institutions इसे इतना महत्व क्यों देते हैं।”
क्रमशः…
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