तुम हो मेरे जीवन का आधार प्रिये…मेरी कविता…विवेक रस्तोगी

तुम हो तो सब कुछ है जीवन में,

तुम हो तो सब सुख है प्रिये,

तुम हो तो मैं हूँ प्रिये,

तुम हो तो हर क्षण हर्ष का है प्रिये,

तुम मेरी कविता तुम मेरी आराधना,

तुम ही मेरी प्रियतमा,

तुम ही मेरी जीवनसंगिनी प्रिये,

तुम हो मेरे जीवन का आधार प्रिये,

अर्पण प्यार तुम्हें है प्रिये..

16 thoughts on “तुम हो मेरे जीवन का आधार प्रिये…मेरी कविता…विवेक रस्तोगी

  1. आपकी कविता के भाव बहुत सुन्दर है
    हम तो किसी को भाव बताते फ़वि बने
    और फिर हास्य फ़वि बने……न जाने कवि कब बनेगें

  2. तुम हो मेरे जीवन का आधार प्रिये,
    अर्पण प्यार तुम्हें है प्रिये..

    आज के दिन के लिये सटीक

  3. यार इसे ही कापी पेस्ट करके अपनी वाली को पढा देता हू
    कहुन्गा – सुर्फ़ तुम्हारे लिये

    बस कापी राइट या कविता चोरी मे मत घेर लेना.

  4. तुम ही मेरा चौका ,तुम ही मेरे बर्तन .क्या मेरा क्या तेरा सब तुझको ही अर्पन ,तुम ही मेरा नाश्ता तुम ही मेरा खाना ,तुझसे ही यह जीवन है जाना ,तुमसे मेरे कपड़े तुमसे मेरे लत्ते , मै एक अकेला गुलाम ,तुम बाकी सब पत्ते । धन्य हो धन्य हो ।

  5. लग रहा है भाभीजी ने धमकिया दिया होगा

    ब्‍लॉगिंग रूपी सौत को दी जानी होगी सजा

    परन्‍तु आपने धर्मपत्‍नी आराधना कर एक

    ऐसा रास्‍ता दिया है खोल

    सबकी पत्नियां कहेंगी

    हमें भी चाहिए

    अपने पति से

    ऐसे ही बोल।

  6. बड़ी खुशकिस्मत हैं भाभी जी…इतनी सुन्दर कविता लिखी है,आपने…और आपकी वाणी में सुनकर तो जरूर उनका रंग हाथों में थामे गुलाब सा ही सुर्ख हो गया होगा…ढेरों शुभकामनाएं आप दोनों को…

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