शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 24
RSI आखिर कैसे बताता है कि Market ज्यादा गर्म हो गया है या ज्यादा ठंडा?
तीनों मॉनिटर पर अलग-अलग charts खुले हुए थे।
सामने बेटेलाल बैठे मोबाइल और मॉनिटर के बीच अपनी गर्दन ऐसे घुमा रहे थे जैसे किसी क्रिकेट मैच में थर्ड अंपायर का फैसला देख रहे हों।
कुछ देर बाद उन्होंने स्क्रीन की तरफ इशारा किया।
“डैडी, ये chart के नीचे जो एक अलग लाइन चल रही है, ये क्या है?”
मैंने मुस्कुराकर कहा —
“अच्छा… आखिरकार तुम RSI तक पहुँच ही गये।”
“हैं जी?”
“हाँ जी।”
“और आज हम Market का Thermometer समझेंगे।”
बेटेलाल तुरंत सीधे होकर बैठ गये।
“Market को भी बुखार होता है क्या?”
मैं हँस पड़ा।
“कई बार इतना तेज बुखार होता है कि लोग बिना सोचे-समझे खरीदने लगते हैं।”
“और कभी-कभी इतना डर जाता है कि लोग अच्छी कंपनियाँ भी बेच देते हैं।”
“बस यही RSI पकड़ने की कोशिश करता है।”
मैंने chart zoom किया।
“RSI का पूरा नाम है Relative Strength Index।”
बेटेलाल बोले —
“नाम तो किसी इंजीनियरिंग की किताब जैसा लग रहा है।”
“नाम भूल जाओ। काम समझो।”
मैंने स्क्रीन की तरफ इशारा किया।
“यह Indicator हमें बताता है कि हाल के दिनों में खरीदारी ज्यादा मजबूत रही है या बिकवाली।”
“मतलब Buyers और Sellers की ताकत?”
“बिल्कुल।”
मैंने चाय की चुस्की ली।
“देखो बेटेलाल, जब तुम्हें बुखार होता है तो डॉक्टर क्या करते हैं?”
“Thermometer लगाते हैं।”
“क्यों?”
“ताकि पता चल सके कि शरीर सामान्य है या नहीं।”
“बस RSI भी वही काम करता है।”
बेटेलाल अब ध्यान से सुन रहे थे।
मैंने कहा —
“RSI हमेशा 0 से 100 के बीच रहता है।”
“मतलब 150 नहीं जाएगा?”

“नहीं।”
“और -20 भी नहीं आएगा।”
दोनों हँस पड़े।
मैंने chart पर RSI की लाइन दिखाई।
“सामान्यतः लोग दो स्तर सबसे ज्यादा देखते हैं।”
“कौन से?”
“70 और 30।”
“अब ये नया झंझट क्या है?”
मैं मुस्कुराया।
“अगर RSI 70 के ऊपर चला जाए, तो Market को Overbought माना जाता है।”
“मतलब?”
“मतलब हाल में खरीदारी बहुत ज्यादा हो चुकी है।”
“और 30?”
“RSI अगर 30 के नीचे आ जाए तो उसे Oversold माना जाता है।”
“मतलब लोगों ने बहुत ज्यादा बेच दिया है।”
“बिल्कुल।”
बेटेलाल कुछ सेकंड सोचते रहे।
फिर बोले —
“तो RSI 70 के ऊपर गया नहीं कि बेच दो?”
मैं मुस्कुराया।
“यही गलती करके लोग अपना नुकसान करते हैं।”
“मतलब?”
“Strong Uptrend में RSI कई दिनों तक 70 के ऊपर रह सकता है।”
“ओह।”
“और Strong Downtrend में कई दिनों तक 30 के नीचे।”
मैंने मॉनिटर पर एक तेजी वाला chart दिखाया।
“देखो, यहाँ RSI लगभग दो हफ्ते 70 के ऊपर रहा।”
“अगर कोई पहले दिन ही बेच देता तो?”
“तो बाकी की पूरी तेजी मिस कर देता।”
बेटेलाल बोले —
“मतलब RSI अकेला फैसला नहीं करता।”
मैंने कहा —
“शाबाश।”
“यही बात समझनी है।”
“RSI अकेला Indicator नहीं है।”
“Trend भी देखो।”
“Volume भी देखो।”
“Support Resistance भी देखो।”
“और फिर RSI देखो।”
बेटेलाल ने फिर पूछा —
“डैडी, सब लोग 70 और 30 की बात करते हैं। लेकिन ये 50 बीच में क्यों बना रहता है?”
मैं मुस्कुराया।
“बहुत अच्छा सवाल।”
मैंने स्क्रीन पर RSI के 50 level की तरफ इशारा किया।
“50 को Market का Balance Point समझो।”
“मतलब?”
“50 के ऊपर Buyers थोड़े मजबूत।”
“50 के नीचे Sellers थोड़े मजबूत।”
“जैसे कुश्ती में कोई एक पहलवान थोड़ा भारी पड़ रहा हो।”
“बिल्कुल।”
बेटेलाल अब RSI को पहले से अलग नजर से देख रहे थे।
उन्होंने पूछा —
“तो बड़े Investors भी RSI देखते हैं?”
मैंने कहा —
“कुछ देखते हैं, कुछ नहीं देखते।”
“लेकिन समझदार Investors Indicator के पीछे की Psychology जरूर समझते हैं।”।
कुछ देर कमरे में शांति रही।
सिर्फ मॉनिटर पर बदलती candles और चाय की हल्की खुशबू थी।
फिर मैंने कहा —
“याद रखना बेटेलाल…”
“क्या?”
“RSI भविष्य नहीं बताता।”
“फिर?”
“यह सिर्फ बताता है कि Market इस समय कितना उत्साहित है या कितना डरा हुआ है।”
बेटेलाल ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।
शायद पहली बार उन्हें समझ आया था कि RSI कोई जादुई खरीदने-बेचने का बटन नहीं है, बल्कि Market की भावनाओं को मापने वाला एक उपकरण है।
फिर उन्होंने पूछा —
“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”
मैं मुस्कुराया।
“अगले भाग में समझेंगे — Divergence आखिर क्या होती है, और क्यों कई बार Price ऊपर जाता है लेकिन Indicator नीचे आने लगता है।”
क्रमशः…
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