शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 30
Delivery Percentage आखिर क्या होता है, और इससे कैसे पता चलता है कि सिर्फ Trading हो रही है या बड़े खिलाड़ी शेयर जमा कर रहे हैं?
बेटेलाल आज सुबह से ही कुछ ज्यादा व्यस्त दिखाई दे रहे थे।
वे मोबाइल में किसी शेयर का डेटा देख रहे थे।
फिर अचानक बोले —
“डैडी, ये Delivery Percentage क्या होता है?”
मैं मुस्कुराया।
“अच्छा… आज पता लगाते हैं कि बाजार में सिर्फ शोर हो रहा है या कोई सचमुच सामान खरीदकर घर ले जा रहा है।”
बेटेलाल हँस पड़े।
“हैं जी?”
मैंने कहा —
“मान लो सब्जी मंडी में पूरे दिन 100 लोग आए।”
“हाँ।”
“उनमें से 80 लोगों ने सिर्फ दाम पूछे और चले गए।”
“हाँ।”
“लेकिन 20 लोग सच में सब्जी खरीदकर घर ले गए।”
“मतलब असली ग्राहक सिर्फ 20 हुए।”
“बिल्कुल।”
“बस शेयर बाजार में भी ऐसा ही होता है।”

मैंने स्क्रीन पर एक शेयर का डेटा खोला।
“पूरे दिन जितने शेयरों की Trading हुई, उनमें से कितने शेयर सचमुच Demat Account में Delivery के लिए गए, उसी का प्रतिशत Delivery Percentage कहलाता है।”
बेटेलाल अब ध्यान से सुन रहे थे।
“मतलब Intraday वाले अलग और Delivery वाले अलग?”
“बिल्कुल।”
“Intraday वाले दुकान देखकर निकल गए।”
“और Delivery वाले सामान लेकर घर चले गए।”
दोनों हँस पड़े।
मैंने चाय की चुस्की ली।
“अब असली बात सुनो।”
“क्या?”
“अगर किसी शेयर में Volume भी बढ़ रहा है और Delivery Percentage भी बढ़ रहा है…”
“तो?”
“संभव है कि बड़े खिलाड़ी धीरे-धीरे शेयर जमा कर रहे हों।”
“मतलब Accumulation?”
“वाह!”
“अब तुम Market की भाषा सीखने लगे हो।”
बेटेलाल मुस्कुराए।
“और अगर Volume बहुत ज्यादा है लेकिन Delivery Percentage कम है?”
“तो समझो कि ज्यादातर Trading सिर्फ Intraday की हो रही है।”
“मतलब ज्यादा शोर है?”
“हाँ।”
“लेकिन जरूरी नहीं कि असली निवेश भी हो रहा हो।”
“कई बार कोई खबर आती है, TV वाले चिल्लाते हैं, Volume अचानक बढ़ जाता है।”
“हाँ।”
“लेकिन Delivery Percentage कम रहता है।”
“मतलब?”
“मतलब लोग सिर्फ तेजी का मजा ले रहे हैं, सामान घर नहीं ले जा रहे।”
दोनों हँस पड़े।
कुछ देर बाद बेटेलाल बोले —
“डैडी, क्या सिर्फ Delivery Percentage देखकर शेयर खरीद लेना चाहिए?”
मैं हँस पड़ा।
“अगर इतना आसान होता तो पूरा Dalal Street करोड़पति होता।”
“फिर?”
“Trend देखो।”
“Volume देखो।”
“Price Action देखो।”
“Support Resistance देखो।”
“और फिर Delivery Data देखो।”
बेटेलाल कुछ सेकंड सोचते रहे।
फिर बोले —
“मतलब Volume गाड़ी की स्पीड है…”
“हाँ।”
“और Delivery Percentage यह बताता है कि कितने लोग सच में यात्रा पर निकले हैं।”
मैं मुस्कुराया।
“बिल्कुल।”
“और यही कारण है कि Smart Money अक्सर शोर से दूर चुपचाप काम करती है।”
मॉनिटर पर candles धीरे-धीरे बदल रही थीं।
मैंने कहा —
“याद रखना बेटेलाल…”
“क्या?”
“हर बड़ी Volume का मतलब बड़ी खरीदारी नहीं होता।”
“कई बार सिर्फ भीड़ शोर कर रही होती है।”
“और समझदार Investor भीड़ की आवाज नहीं, पैसों की दिशा सुनता है।”
बेटेलाल मुस्कुराए।
“मतलब Market में सिर्फ यह मत देखो कि कितने लोग चिल्ला रहे हैं…”
“यह भी देखो कि कौन सच में पैसे लगाकर घर सामान ले जा रहा है।”
मैं भी मुस्कुराया।
“और यही फर्क Trader और Investor के बीच होता है।”
कुछ देर कमरे में शांति रही।
फिर बेटेलाल बोले —
“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”
मैंने स्क्रीन पर Gap Up और Gap Down वाला chart खोलते हुए कहा —
“अगले भाग में समझेंगे — Gap Up और Gap Down आखिर क्यों बनते हैं, और कई बार बाजार रातों-रात उछल या गिर क्यों जाता है।”
क्रमशः…
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