Breakout और Fake Breakout में फर्क कैसे पहचानें, ताकि झूठे Signal में फँसने से बच सकें?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 32

Breakout और Fake Breakout में फर्क कैसे पहचानें, ताकि झूठे Signal में फँसने से बच सकें?

गुरुवार की सुबह रात की हल्की बारिश के बाद मौसम बड़ा सुहावना था। स्टडी रूम की खिड़की से आती ठंडी हवा और चाय की खुशबू पूरे कमरे में फैल रही थी। मैं अपने PC Trading Terminal के सामने बैठा था। तीनों मॉनिटर पर अलग-अलग शेयरों के Charts खुले हुए थे।

बेटेलाल आज सुबह से ही काफी उत्साहित थे।

उन्होंने मोबाइल पर एक शेयर दिखाते हुए कहा—

“डैडी… देखिए, ये शेयर आखिरकार Resistance तोड़ गया।”

मैंने मुस्कुराकर पूछा—

“और तुमने खरीद लिया?”

“हाँ… लेकिन आधे घंटे बाद वापस नीचे आ गया।”

मैं हल्का सा हँसा।

“बधाई हो।”

बेटेलाल चौंक गए।

“किस बात की?”

“तुम्हारा पहला Fake Breakout हो गया।”

दोनों हँस पड़े।

मैंने Chart Zoom किया।

“देखो बेटेलाल, Breakout का मतलब होता है कि कीमत किसी महत्वपूर्ण Resistance या Range के ऊपर निकल जाए।”

“मतलब अब तेजी आएगी?”

“ज़रूरी नहीं।”

“क्यों?”

“क्योंकि हर Breakout असली नहीं होता।”

मैंने स्क्रीन पर दो Charts खोले।

पहले Chart में Price कई दिनों से एक ही Range में घूम रहा था।

फिर एक दिन बड़ी हरी Candle बनी।

Volume भी सामान्य से काफी अधिक था।

Price Resistance के ऊपर बंद हुआ।

मैंने कहा—

“इसे Healthy Breakout कह सकते हैं।”

बेटेलाल ने सिर हिलाया।

फिर मैंने दूसरा Chart खोला।

उसमें भी Price थोड़ी देर के लिए Resistance के ऊपर गया था।

लेकिन Volume बहुत कम था।

कुछ ही देर बाद Candle वापस Resistance के नीचे बंद हो गई।

“और ये?”

मैंने पूछा।

बेटेलाल तुरंत बोले—

“यही Fake Breakout है?”

“बिल्कुल।”

मैंने  कहा—

“इसे Bull Trap भी कहते हैं।”

“मतलब?”

“Market तुम्हें विश्वास दिलाता है कि तेजी शुरू हो गई है।”

“लोग खरीद लेते हैं।”

“और फिर Market वापस नीचे आ जाता है।”

“यानी Trap?”

“बिल्कुल।”

बेटेलाल ने पूछा—

“तो असली Breakout पहचानें कैसे?”

मैंने उँगलियों पर गिनाना शुरू किया।

“पहली बात…”

“Volume बढ़ा होना चाहिए।”

“दूसरी…”

“Closing Resistance के ऊपर होनी चाहिए, सिर्फ Shadow नहीं।”

“तीसरी…”

“अगर अगले दिन भी Price ऊपर टिक जाए तो Signal और मजबूत माना जाता है।”

“और चौथी?”

“धैर्य।”

बेटेलाल मुस्कुराए।

“मतलब सबसे कठिन काम।”

“हाँ।”

“Market में पैसा कमाना मुश्किल नहीं है…”

“लेकिन जल्दी पैसा कमाने की कोशिश सबसे महंगी पड़ती है।”

दोनों हँस पड़े।

मैंने एक और उदाहरण दिखाया।

“मान लो स्कूल का गेट खुला।”

“हाँ।”

“कुछ बच्चे बाहर निकले और तुरंत वापस अंदर चले गए।”

“मतलब?”

“यह Fake Breakout है।”

“और अगर पूरी क्लास बाहर निकल जाए और वापस न आए?”

“तो असली Breakout।”

“वाह!”

बेटेलाल हँस पड़े।

उन्होंने पूछा—

“डैडी, क्या बड़े Investors भी Fake Breakout में फँस जाते हैं?”

मैंने कहा—

“अनुभवी Investors कम फँसते हैं, क्योंकि वे Confirmation का इंतज़ार करते हैं।”

“और नए लोग?”

“उन्हें डर रहता है कि कहीं मौका छूट न जाए।”

“इसे FOMO कहते हैं।”

“Fear Of Missing Out.”

बेटेलाल ने सिर हिलाया।

“लगता है मैं भी FOMO का शिकार हो गया था।”

मैं मुस्कुराया।

“हर Investor कभी न कभी होता है।”

कमरे में कुछ देर शांति रही।

मॉनिटर पर Candles बन रही थीं।

एक शेयर Resistance के पास खड़ा था।

मैंने धीरे से कहा—

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“Breakout देखकर उत्साहित मत होना।”

“पहले पूछना…”

“Volume क्या कह रहा है?”

“Trend क्या कह रहा है?”

“और Price उस Level के ऊपर टिक भी रहा है या नहीं।”

बेटेलाल मुस्कुराए।

“मतलब Market में सबसे महंगी चीज़ जल्दीबाज़ी है।”

मैंने भी मुस्कुराकर कहा—

“और सबसे धारदार हथियार धैर्य।”

फिर बोले—

“डैडी… अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने Chart पर Retracement दिखाते हुए कहा—

“अगले भाग में समझेंगे — Pullback क्या होता है, और समझदार Investors Breakout के बाद तुरंत नहीं, बल्कि Pullback का इंतज़ार क्यों करते हैं।

क्रमशः…

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