आज सुबह मित्र से बात हो रही थी, तो उन्होंने उनके दो सहकर्मियों के लिये बात करी, जिन्हें मदद की दरकार है –
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गाजर का हलवा
गाजर का हलवा बचपन से ही बहुत पसंद है। गाजर के हलवे के लिये हम हमेशा ही सर्दियों का इंतजार करते थे, सर्दियों में गरमा गरम गाजर का हलवा स्वादिष्ट लगता है, कहते हैं कि गाजर खाने से खून भी बढ़ता है और आँखों की रोशनी भी बढ़ती है। हलवा तो वैसे भी कोई भी हो, हमेशा ही मुँह में पानी ले आता है। यह अलग बात है कि हलवे को बनाने में बहुत समय लगता है और इसमें जबरदस्त कैलोरी भी होती हैं।
मानसिक परेशानी
कुछ बातें जो हमें परेशान करती हैं, हमेशा ही दिमाग में घूमती ही रहती हैं। और हम उनके अपने दिमाग में घूमते रहने से ओर ज्यादा परेशान हो जाते हैं। दिन हो या रात हो, जाग रहे हों या सो रहे हों, बस वही बातें दिमाग में कहीं न कहीं घूमती रहती हैं। कई बार यह बड़ी मानसिक परेशानी की वजह हो जाती है। हम चाहे कुछ भी कर रहे हों, पर हमेशा ही वह परेशानी हमारे दिमाग में घूमती ही रहती है। दिमाग शांत नहीं रहता, हमेशा ही अशांत रहता है। दिमाग में जैसे कोई फितूर घुस गया हो।
गुस्सा, क्रोध व गालियों का शिकार
क्या आपने कभी सोचा है कि समाज में अधिकतर लोग गुस्सा, क्रोध व गालियों का शिकार क्यों होते हैं, कोई भी बचपन से गुस्सा, क्रोध या गालियों का आदतन नहीं होता है। यह हमारे आसपास की सामाजिक व्यवस्था के कारण हम सीख जाते हैं। गुस्सा, क्रोध व गालियों में बहुत आत्मनिर्भरता है, जब गुस्सा क्रोध आयेगा तभी आपके मुँह से गालियों की बरसात होगी। गुस्सा आना न आना केवल और केवल आपके ऊपर निर्भर करता है।
ब्लॉग के लिये विषय ही याद न रहना
मैं जब ब्लॉग लिखता हूँ तो ब्लॉग के लिये विषय कभी ढूँढ़ता नहीं, बल्कि उस समय जो भी मेरे मन मस्तिष्क में चल रहा होता है, उसी विचार पर ब्लॉग लिख देता हूँ। कई बार ऐसा भी होता है कि हम किसी विषय पर चिंतन कर रहे होते हैं और उससे निकलने के लिये हमें कई बार लिखना होता है तो वह खुद के विचार ब्लॉग के रूप में प्रकट होते हैं।
नीरस जीवन, दार्शनिकता और लालसा का अंत
कई बार मुझे लगता है कि मैं कुछ ज्यादा ही दार्शनिक हो जाता हूँ। दार्शनिक मतलब कि दर्शन की बात करने वाला, और कई बार ऐसा होता है कि मुझे खुद ही दर्शन समझ नहीं आता या फिर मैं दार्शनिकों से भागने की कोशिश करता हूँ, शायद यह मूड पर निर्भर करता है। मैं दार्शनिक प्रोफेशनल से नहीं हूँ तो यह मेरा शौकिया शगल भी हो सकता है। Continue reading नीरस जीवन, दार्शनिकता और लालसा का अंत
जीवन के वे दौर जो हमें पसंद नहीं
कई बार हमारे जीवन में ऐसा भी दौर आता है जब हम उसे पसंद नहीं करते, परंतु यह हमारी मर्जी पर निर्भर नहीं करता कि हम उसे दौर से न गुजरें। यह एक प्रक्रिया है, जिससे निकलना जरूरी होता है, भले दिन में लाख बार चिंता में रहें, भले करोड़ों बार आशा की नई किरण के बारे में सोचें, जो होना होता है,उसके लिये शायद हम ही जिम्मेदार होते हैं। Continue reading जीवन के वे दौर जो हमें पसंद नहीं
सफलता और असफलता घबराना क्यों
एंटरप्रेन्योरशिप के लिये आइडिया
अपने आइडिया लिखने आने चाहिये, अच्छी तरह से उन्हें प्रस्तुत भी करना आना चाहिये, पर एंटरप्रेन्योरशिप में आइडिया अगर केवल 1 पेज का भी हो, तो भी बहुत कुछ हो जाता है। इसी को फॉलो करते हुए कल बेटेलाल ने एक आइडिया जनरेशन किया, शुरुआत है, आगे बात तो बननी ही है, किसी न किसी आइडिया को हिट तो होना ही है, बस उसके पहले बहुत सारे आइडिया सोचने होंगे, लिखने होंगे, तभी तो अनुभव आयेगा।
कोरोना से बचकर रहना होगा
811 Kotak में अपने नाम से 5 मिनिट में नया एकाउंट खुलवाया
SIP से पैसा निकाला जाना चाहिये?
Vivek Rastogi
Kajal Kumarइसलिये हमेशा ही परपेचुअल करवानी चाहिये, फिर जब मर्जी हो बंद कर दो
Vivek Rastogi
Rounak Jainवाह, ऐसे कमेंट बहुत खुशी देते हैं