Category Archives: शेयर बाज़ार

अच्छी कंपनी पहचानते कैसे हैं?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 3

अच्छी कंपनी पहचानते कैसे हैं?

शाम का समय था। बाहर हल्की हवा चल रही थी। पड़ोस में कहीं प्रेशर कुकर की सीटी बज रही थी और ड्राइंग रूम में टीवी पर कोई एक्सपर्ट बहुत तेज़ आवाज़ में चिल्ला रहा था — “ये स्टॉक अगले तीन महीने में डबल हो सकता है!”
बेटेलाल पूरे ध्यान से टीवी देख रहे थे। फिर अचानक बोले —
“डैडी… ये लोग हर दूसरे शेयर को मल्टीबैगर क्यों बोलते हैं?”

मैंने आईपैड को नीचे रखा और मुस्कुराया।
“क्योंकि टीवी पर सपना बेचना आसान है बेटेलाल… लेकिन असली निवेश करना मुश्किल।”

बेटेलाल थोड़ा और पास खिसक आये।

और बोले – “तो फिर अच्छी कंपनी पहचानते कैसे हैं?”

मैंने अपनी ब्लैक कॉफी उठाई और कहा —
“देखो, शेयर खरीदने से पहले सबसे बड़ी गलती लोग ये करते हैं कि वो सिर्फ शेयर देखते हैं… कंपनी नहीं।”

“मतलब?”

“मतलब अगर किसी दुकान के बाहर बहुत भीड़ लगी हो, तो क्या सिर्फ भीड़ देखकर तुम दुकान खरीद लोगे?”

“नहीं।”

“तो फिर लोग सिर्फ भागते हुए शेयर देखकर पैसा क्यों लगा देते हैं?”

बेटेलाल हल्का सा हँसे और बोले — “क्योंकि सबको जल्दी अमीर बनना है।”

मैंने कहा — “और शेयर बाज़ार जल्दी अमीर बनने वालों को सबसे जल्दी सबक सिखाता है।”

कुछ पल कमरे में खामोशी रही। घर के बाहर चिल्ड्रन पार्क से बच्चों के खेलने की आवाज़ आ रही थी।

मैंने धीरे से कहा —
“अच्छी कंपनी पहचानने का पहला तरीका है — समझो कि कंपनी करती क्या है।”

बेटेलाल तुरंत बोले — “हैं जी?”

मैं हँस पड़ा।

“हाँ जी। अगर तुम्हें कंपनी का बिज़नेस ही समझ नहीं आता, तो सिर्फ किसी यूट्यूबर के भरोसे पैसा लगाना खतरनाक है।”

मैंने टेबल पर रखे मखाने के बिस्किट का डिब्बा उठाया।

“मान लो कोई कंपनी बिस्किट बनाती है। अब सोचो — क्या लोग रोज़ बिस्किट खाते हैं?”

“हाँ।”
“क्या आने वाले दस साल में भी खाएँगे?”
“हाँ।”
“बस। इसका मतलब बिज़नेस समझने में आसान है।”

फिर मैंने कहा —
“लेकिन अगर कोई कंपनी ऐसा काम कर रही हो जिसका नाम समझने में ही पाँच मिनट लग जाएँ, तो पहले सीखो… फिर निवेश करो।”

बेटेलाल अब ध्यान से सुन रहे थे।

“डैडी, लोग हमेशा कहते हैं कि कंपनी के ‘फंडामेंटल’ अच्छे होने चाहिए। ये फंडामेंटल क्या होता है?”

मैंने कहा —
“फंडामेंटल मतलब कंपनी की असली सेहत।”

“जैसे?”

“जैसे डॉक्टर पहले आदमी की रिपोर्ट देखता है — ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट… वैसे ही निवेशक कंपनी की रिपोर्ट देखते हैं।”

“और उसमें क्या देखते हैं?” बेटेलाल ने पूछा

मैंने उंगलियों पर गिनाना शुरू किया —
“कंपनी लगातार पैसा कमा रही है या नहीं… उस पर बहुत कर्ज़ तो नहीं… उसकी बिक्री बढ़ रही है या नहीं… और सबसे जरूरी — कंपनी का मालिक/प्रमोटर ईमानदार है या नहीं।”

बेटेलाल बोले — “मतलब मालिक या प्रमोटर को भी देखना पड़ता है?”

मैंने तुरंत कहा —
“सबसे ज्यादा वही देखना पड़ता है।”

मैंने कहा – याद है एक मेरे मित्र जो कहते हैं कि फलां कंपनी का प्रमोटर चोर है, इसमें पैसा मत लगाना, तो उनका कहने का मतलब यही होता है कि वे ईमानदार नहीं हैं।

टीवी पर अचानक किसी घोटाले की खबर फ्लैश हुई।

मैंने स्क्रीन की तरफ इशारा किया —
“देखो, खराब बिज़नेस से ज्यादा नुकसान खराब मालिक करवाता है।”

बेटेलाल कुछ सेकंड तक चुप रहे।

फिर बोले —
“लेकिन डैडी, छोटे निवेशक को कैसे पता चलेगा कि मालिक अच्छा है या नहीं?”

मैंने कहा —
“बहुत आसान तरीका है। देखो कि कंपनी सालों से क्या कर रही है, और आज क्या बोल रही है।”

“मतलब?”

“अगर कोई कंपनी हर साल बड़े-बड़े वादे करे लेकिन नतीजे कमजोर हों, तो सावधान रहो।”

फिर मैंने हँसते हुए कहा —
“आजकल कुछ कंपनियाँ बिज़नेस कम करती हैं… प्रेजेंटेशन ज्यादा बनाती हैं।”

बेटेलाल हँस पड़े।

मैंने आगे कहा —
“याद रखना बेटेलाल, शेयर बाज़ार में कहानी बेचना आसान है… लेकिन लगातार मुनाफा कमाना मुश्किल।”

बाहर अब हल्का अंधेरा होने लगा था। घरवाली रसोई से आवाज़ लगा रही थी —
“कॉफी फिर से गरम करनी पड़ेगी क्या?”
मैंने जवाब दिया — “बस दो मिनट!”

फिर मैं बेटेलाल की तरफ मुड़ा।
“एक और जरूरी चीज़ समझो।”

“क्या?”

“अच्छी कंपनी का शेयर हमेशा सस्ता नहीं होता।”

बेटेलाल तुरंत बोले — “हैं जी?”
मैंने कहा —
“लोग सोचते हैं 20 रुपये वाला शेयर सस्ता है और 3000 वाला महँगा। जबकि सच इसका उल्टा भी हो सकता है।”

“कैसे?”

मैंने कहा —
“अगर 20 रुपये वाली कंपनी खराब है, कर्ज़ में डूबी है और बिज़नेस खत्म हो रहा है… तो वो महँगी है, चाहे भाव छोटा हो।”

“और 3000 वाला?”

“अगर कंपनी शानदार है, लगातार बढ़ रही है और भविष्य मजबूत है… तो वो सस्ती हो सकती है, चाहे कीमत बड़ी लगे।”

बेटेलाल अब धीरे-धीरे असली बात समझने लगे थे।

उन्होंने पूछा —
“तो डैडी, क्या सिर्फ सस्ता शेयर देखकर खरीदना गलत है?”

मैंने मुस्कुराकर कहा —
“बिल्कुल। शेयर बाज़ार में ‘सस्ता’ और ‘महँगा’ सिर्फ भाव से तय नहीं होता… गुणवत्ता से तय होता है।”

कमरे में अब हल्की पीली रोशनी जल चुकी थी। टीवी अब म्यूट पर चल रहा था लेकिन नीचे लाल-हरी लाइनें लगातार भाग रही थीं।

मैंने धीरे से कहा —
“याद रखना बेटेलाल… अच्छा निवेश वही है जहाँ तुम्हें रात में नींद भी अच्छी आये।”

वो कुछ देर तक चुप बैठे रहे। फिर बोले —
“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने मुस्कुराकर कहा —
“अगले भाग में समझेंगे — लोग नुकसान में शेयर क्यों बेच देते हैं और मुनाफे वाले शेयर जल्दी क्यों बेच देते हैं।”

क्रमशः…

#sharemarket
#learnstock
#investment
#betelal
#financialbakwas

ये शेयर ऊपर-नीचे आखिर होता क्यों है?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 2

“ये शेयर ऊपर-नीचे आखिर होता क्यों है?”

सुबह का समय था। बाहर हल्की धूप निकल चुकी थी। ड्राइंग रूम में टीवी म्यूट पर चल रहा था और नीचे स्क्रीन पर लाल अक्षरों में लिखा आ रहा था — “मार्केट में भारी गिरावट”

बेटेलाल सामने लैपटॉप खोले बैठा था। चेहरे पर वही चिंता थी जो बोर्ड परीक्षा के रिज़ल्ट वाले दिन बच्चों के चेहरे पर होती है।

“डैडी…” उसने धीरे से कहा, “कल जो शेयर मैंने खरीदा था, आज नीचे क्यों चला गया?

मैंने चाय का कप उठाया और मुस्कुराया।

“बस? इतनी सी बात से डर गये?”

“इतनी सी बात?” बेटेलाल लगभग चौंक पड़े।
“सुबह उठते ही पाँच हज़ार का लॉस दिखा रहा है अकाउंट में!”

मैं हल्का सा हँसा।

“यही तो शेयर बाज़ार है बेटेलाल। यहाँ आदमी पहले पैसा नहीं खोता… पहले उसकी नींद जाती है।”

कुछ पल के लिए कमरे में हल्की खामोशी रही। बाहर से पक्षियों के चहचहाने की आवाज़ आ रही थी, जिससे मन हमेशा ही प्रफुल्लित रहता है।

मैंने कहा,
“देखो, सबसे पहले ये समझो कि शेयर की कीमत ऊपर-नीचे क्यों होती है। इसका सीधा जवाब है — मांग और आपूर्ति।” 

बेटेलाल थोड़ा आगे झुक गये और बोले “हैं जी!”

मैंने समझाना शुरू किया और कहा “हाँ जी!”

“मान लो मोहल्ले में अचानक सबको आम पसंद आने लगे। लेकिन आम सीमित याने लिमिटेड हैं। अब लोग ज्यादा खरीदेंगे तो आम की कीमत बढ़ेगी या घटेगी?”

“बढ़ेगी,” बेटेलाल ने तुरंत कहा।

“बस यही शेयर बाज़ार है।”

मैंने आगे कहा,
“अगर लोगों को लगता है कि कोई कंपनी भविष्य में अच्छा करेगी, तो लोग उसके शेयर खरीदने लगते हैं। खरीदने वाले ज्यादा हुए तो शेयर ऊपर जाएगा। अगर डर फैल गया कि कंपनी का भविष्य खराब है, तो लोग बेचने लगेंगे। बेचने वाले ज्यादा हुए तो शेयर नीचे आएगा।”

बेटेलाल ध्यान से सुन रहे थे।

“लेकिन डैडी,” उसने पूछा, “लोग अचानक डरते क्यों हैं?”

मैंने टीवी की तरफ इशारा किया।

“क्योंकि बाजार सिर्फ नंबर नहीं देखता। बाजार खबरें भी देखता है… राजनीति भी… युद्ध भी… बारिश भी… और कभी-कभी तो सिर्फ अफवाह भी।”

“मतलब?”

“मतलब अगर किसी बड़ी कंपनी का मालिक अचानक इस्तीफा दे दे, तो लोग डर सकते हैं। अगर सरकार कोई नया नियम ले आए, तो भी बाजार हिल सकता है। अगर दुनिया में कहीं युद्ध हो जाए, तब भी शेयर नीचे आने लगते हैं।”

बेटेलाल थोड़ा सोच में पड़ गये, और बोले बहुत सारे फैक्टर्स को मार्केट कंसीडर करता है।

मैंने कहा,
“शेयर बाज़ार दुनिया का सबसे बड़ा डर और उम्मीद मापने वाला थर्मामीटर है।”

तभी बिजली हल्की सी गई और इन्वर्टर की बीप सुनाई दी।

मैंने हँसते हुए कहा,
“देखा? अभी अगर बिजली दो घंटे चली जाए तो तुम्हारा मूड खराब हो जाएगा। ठीक वैसे ही बाजार का मूड भी बदलता रहता है।”

बेटेलाल अब मुस्कुराने लगे और पूछा,
“डैडी, ये लोग ‘बुल मार्केट’ और ‘बियर मार्केट’ क्यों बोलते हैं?”

मैंने कहा,
“अच्छा, कभी बैल को हमला करते देखा है?”

बेटेलाल बोले – “हाँ।”

मैंने कहा – “वह अपने सींग नीचे से ऊपर मारता है। इसलिए जब बाजार ऊपर जाता है तो उसे बुल मार्केट कहते हैं।”

बेटेलाल ने आगे पूछा – “और बीयर?”

मैंने कहा – “भालू अपने पंजे ऊपर से नीचे मारता है। इसलिए जब बाजार गिरता है तो उसे बीयर मार्केट कहते हैं।”

बेटेलाल अचानक हँस पड़े और बोले –  “मतलब पूरा बाजार जानवरों पर चल रहा है?”

फिर बोले ये बीयर और बुल लोगों को क्यों बोलते हैं।

मैंने कहा – जो बाजार की आने वाली गिरावट को पहचानता है तो वह ऊपर भाव से शेयर बेचना शुरू कर देता है, यह कहलाते हैं बीयर याने कि मंदेड़िए।

और जो बाजार की ऊपर जाने वाली चाल समझते हैं, तो वे शेयर खरीदकर मार्केट को ऊपर ले जाते हैं, याने कि डिमांड बनाते हैं, जिससे शेयर के भाव बढ़ते हैं, ये कहलाते हैं बुल याने कि तेजड़िये।

मैं भी हँस पड़ा।

“कभी-कभी तो इंसानों से ज्यादा समझदार वही लगते हैं।”

बाहर अब धूप और तेज हो चुकी थी। मैंने कहा, “जरा पर्दा खींच दो, स्क्रीन पर चमक पड़ रही है।”

बेटेलाल पर्दा खींचते हुए बोले,
“तो डैडी, क्या हर गिरता शेयर खराब होता है?”

मैंने तुरंत कहा,
“नहीं। यही सबसे बड़ी गलती लोग करते हैं।”

मैंने टेबल पर रखा थर्मस उठाई।

“अगर कल यही बोतल 1000 रुपये की थी और आज 700 में मिल रही है, तो क्या बोतल खराब हो गई?”

बेटेलाल बोले –

“नहीं।”

“तो फिर अच्छी कंपनी का शेयर नीचे आने पर लोग घबराते क्यों हैं?”

बेटेलाल अब खुद ही जवाब समझने लगे थे।

मैंने कहा,
“क्योंकि बाजार में लोग कीमत देखते हैं, मूल्य नहीं।”

कुछ पल दोनों चुप रहे।

दूर कहीं किसी घर से आरती की आवाज़ आने लगी थी।

मैंने धीरे से कहा,
“याद रखना बेटेलाल, बाजार रोज़ तय करता है कि शेयर की कीमत क्या है… लेकिन समय तय करता है कि उसकी असली कीमत क्या थी।”

वह कुछ सेकंड तक चुप बैठा रहा।

फिर बोला,
“तो डैडी, क्या मुझे रोज़ अपना पोर्टफोलियो नहीं देखना चाहिए?”

मैं हँस पड़ा।

“अगर तुमने खेत में बीज बोया है, तो क्या हर घंटे मिट्टी खोदकर देखोगे कि पौधा निकला या नहीं?”

बेटेलाल बोले – “नहीं।”

मैंने कहा – “बस वही निवेश है।”

फिर मैंने थोड़ा गंभीर होकर कहा,

“आजकल मोबाइल ऐप्स ने निवेश आसान कर दिया है। लेकिन एक नई बीमारी भी दे दी है — हर पाँच मिनट में पोर्टफोलियो देखने की बीमारी।”

बेटेलाल हँसते हुए बोले,
“वो तो मुझे भी हो गई है।”

“ज्यादातर नए निवेशकों को होती है,” मैंने कहा।
“लेकिन याद रखो — बाजार का शोर जितना ज्यादा सुनोगे, निर्णय उतने खराब होते जाएंगे।”

अब कमरे में हल्की शांति थी।

टीवी पर एंकर अभी भी तेजी से कुछ बोल रहा था, लेकिन आवाज़ म्यूट थी।

मैंने कहा,
“कभी-कभी शेयर बाज़ार हमें कंपनी से ज्यादा खुद के बारे में सिखाता है। हमें पता चलता है कि हम कितने लालची हैं… कितने डरपोक हैं… और कितने अधीर हैं।”

बेटेलाल अब शायद पहली बार शेयर बाज़ार को सिर्फ पैसे की जगह मानवीय व्यवहार की तरह समझ रहे था।

उसने आखिर में पूछा,
“डैडी, तो अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने मुस्कुराकर कहा,

“अगले भाग में हम समझेंगे — लोग शेयर चुनते कैसे हैं, और आखिर ‘अच्छी कंपनी’ पहचानने का पहला तरीका क्या होता है।”

क्रमशः…

#sharemarket

#learnstock

#investment

#betelal

#financialbakwas

शेयर बाज़ार आखिर है क्या?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 1

“शेयर बाज़ार आखिर है क्या?”

सुबह का समय था। ड्राइंग रूम में खिड़की से हल्की हवा आ रही थी। चाय की भाप ऊपर उठ रही थी और सामने बेटेलाल मॉनिटर में लाल-हरी लाइनें देखकर परेशान हो रहा था।

“डैडी,” उसने अचानक पूछा, “ये शेयर बाज़ार आखिर है क्या? लोग कहते हैं यहाँ पैसा बनता भी है और डूबता भी है। सच क्या है?”

मैं मुस्कुराया। “बेटेलाल, शेयर बाज़ार अपने आप में कोई जादू नहीं है। यह बस दुनिया का सबसे बड़ा भरोसे का बाज़ार है।”

“भरोसे का बाज़ार?” बेटेलाल ने आश्चर्य से पूछा।

“हाँ,” मैंने कहा, “मान लो तुम्हारे मोहल्ले में एक आदमी मिठाई की दुकान खोलता है। दुकान अच्छी चलती है, लेकिन उसे बड़ा कारखाना बनाना है। उसके पास पूरे पैसे नहीं हैं। अब वह क्या करेगा?”

बेटेलाल बोले – “कर्ज़ लेगा?”

मैंने कहा – “वह एक रास्ता है। लेकिन दूसरा रास्ता यह है कि वह लोगों से कहे — ‘आप मेरे व्यापार में थोड़ा पैसा लगाओ और बदले में इस दुकान में आपका हिस्सा होगा।’ यही हिस्सा शेयर कहलाता है।”

बेटेलाल अब थोड़ा समझने लगे।

मैंने आगे कहा, “जब कोई कंपनी अपने छोटे-छोटे हिस्से लोगों को बेचती है, तो वही शेयर बाज़ार में ट्रेड होते हैं। यानी जिसने शेयर खरीदा, वह उस कंपनी के छोटे से हिस्से का मालिक बन गया।”

“तो क्या मैं भी बड़ी कंपनियों का मालिक बन सकता हूँ?” बेटेलाल ने उत्साह से पूछा।

“बिल्कुल,” मैंने कहा, “अगर तुम किसी कंपनी का एक शेयर भी खरीदते हो, तो तकनीकी रूप से तुम उसके हिस्सेदार हो।”

बेटेलाल ने तुरंत मोबाइल उठाया। “तो लोग फिर डरते क्यों हैं?”

मैंने चाय का कप नीचे रखते हुए कहा, “क्योंकि लोग शेयर नहीं खरीदते… लोग सपने खरीदते हैं। और सपनों की कीमत रोज़ बदलती है।”

कुछ पल के लिए बेटेलाल शांत हो गये।

मैंने आगे समझाया — “देखो, बाज़ार में हर दिन लाखों लोग अपनी उम्मीद और डर लेकर आते हैं। अगर लोगों को लगता है कि कंपनी भविष्य में अच्छा करेगी, तो उसके शेयर ऊपर जाते हैं। अगर डर लगता है कि नुकसान होगा, तो शेयर नीचे आने लगते हैं।”

“यानी यह सिर्फ गणित नहीं, निवेशकों के इमोशन भी हैं?”

“बिल्कुल,” मैंने कहा, “शेयर बाज़ार आधा अर्थशास्त्र है और आधा मनोविज्ञान।”

बाहर अब धूप और तेज हो चुकी थी। हमने कहा पंखा थोड़ा तेज कर लो।

बेटेलाल ने पूछा, “लेकिन डैडी, टीवी वाले हर समय ‘मार्केट क्रैश’, ‘रिकॉर्ड हाई’, ‘बुल रन’ क्यों बोलते रहते हैं?”

मैं हँस पड़ा। “क्योंकि डर और लालच सबसे ज्यादा बिकते हैं। समाचार चैनलों को पता है कि आदमी सनसनी देखता है, उसे कुछ शांत तरीके से बताया जायेगा तो उसे वह मजा नहीं आयेगा, जो मजा सनसनी देखने, सुनने में आता है।”

फिर बेटेलाल बोले “तो डैडी, क्या शेयर बाज़ार जुआ है?”

मैंने गंभीर होकर कहा, “नहीं! जुआ वह है जहाँ परिणाम का कोई आधार नहीं होता। लेकिन शेयर बाज़ार में कंपनी का व्यापार, मुनाफा, भविष्य, तकनीक, प्रबंधन — सब कुछ मायने रखता है।”

बेटेलाल हतप्रभ होते हुए, फिर आगे पूछने लगे “फिर लोग नुकसान क्यों करते हैं?”

मैने गर्दन सामने मॉनिटर की और देखते हुए कहा “क्योंकि वे बिना समझे भीड़ के पीछे भागते हैं।”

मैंने बाहर लगे आम के पेड़ की ओर इशारा किया।
“देखो उस पेड़ को। अगर कोई आदमी रोज़ उसकी जड़ खोदकर देखे कि फल आया या नहीं, तो पेड़ मर जाएगा। निवेश भी ऐसा ही है। अच्छे निवेश को समय चाहिए।”
बेटेलाल बहुत ध्यान से सुन रहे था।

मैंने कहा, “दुनिया के बड़े निवेशक शेयर को सिर्फ नंबर नहीं मानते। वे उसे व्यापार समझते हैं। अगर तुम किसी कंपनी का शेयर खरीद रहे हो, तो खुद से पूछो — क्या मैं इस कंपनी का छोटे हिस्से का मालिक बनना चाहता हूँ?”

“लेकिन डैडी,” उसने पूछा, “इतनी सारी कंपनियों में सही कंपनी पहचानें कैसे?”

मैं मुस्कुराया। “यही तो सीखने की यात्रा है। शेयर बाज़ार पैसे से पहले धैर्य सिखाता है।”

फिर मैंने बेटेलाल को एक बहुत ही सरल सा उदाहरण दिया।
“मान लो दो दुकानदार हैं। पहला रोज़ जोर-जोर से चिल्लाता है कि उसकी दुकान सबसे अच्छी है। दूसरा चुपचाप ही अपनी दुकान चला रहा है, लेकिन हर साल उसका व्यापार बढ़ रहा है। समझदार निवेशक किसे चुनेगा?”

“दूसरे को,” बेटेलाल ने तुरंत कहा।

“बस यही शेयर बाज़ार का पहला सिद्धांत है। शोर नहीं, गुणवत्ता यानी क्वालिटी देखो।”

मैंने आगे कहा, “भारत में करोड़ों लोग अब शेयर बाज़ार में आ रहे हैं। मोबाइल ऐप्स ने निवेश आसान बना दिया है। लेकिन आसान चीज़ें अक्सर खतरनाक भी होती हैं। क्योंकि अब लोग ज्ञान से ज्यादा ‘टिप्स’ पर भरोसा करने लगे हैं।”

“यानी व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी?” बेटेलाल हँस पड़े।

“बिल्कुल,” मैंने भी हँसते हुए कहा, “आजकल हर दूसरा आदमी खुद को मार्केट गुरु समझता है।”

फिर मैं थोड़ा गंभीर हुआ।
“याद रखना बेटेलाल, शेयर बाज़ार में सबसे बड़ा हथियार जानकारी नहीं, अनुशासन है। यहाँ कई लोग तेज़ी से पैसा कमाते हैं, लेकिन टिकते वही हैं जो अपने लालच पर नियंत्रण रखते हैं।”

बेटेलाल ने धीरे से पूछा, “तो क्या एक आम आदमी भी अमीर बन सकता है?”

मैंने शांत स्वर में कहा, “हाँ। लेकिन रातों-रात नहीं। शेयर बाज़ार खेत की तरह है, कैसीनो की तरह नहीं। यहाँ बीज बोना पड़ता है, इंतज़ार करना पड़ता है, और हर मौसम की मार भी झेलना पड़ती है।”

कुछ देर दोनों मौन रहे।
दूर कहीं से मंदिर की घंटी सुनाई दी और शंख के आवाज भी आई।

बेटेलाल ने आखिर में पूछा, “डैडी, तो अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “अगले भाग में हम समझेंगे — शेयर की कीमत ऊपर-नीचे क्यों होती है, और आखिर ये ‘बुल’ और ‘बीयर’ कौन होते हैं जिनसे पूरा बाजार डरता है।”

क्रमशः…

इसे आप हमारे ब्लॉग mykalptaru . Com पर भी पढ़ सकते हैं।

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #mykalptaru

NVIDIA की कहानी

NVIDIA दुनिया की पहली 4 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बन गई है! जी हाँ, यह वही कंपनी है जिसकी शुरुआत 1993 में एक छोटे से गेमिंग ग्राफिक्स स्टार्टअप के तौर पर हुई थी, और आज यह ऐपल, गूगल और मेटा जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ चुकी है। इस सफलता के पीछे हैं इसके को-फाउंडर और सीईओ जेन्सन हुआंग, जिनकी यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।

ये वो दो तस्वीरें हैं—एक पुरानी, जिसमें वे एक साधारण इंजीनियर की तरह काम करते दिख रहे हैं, और दूसरी हाल की, जिसमें वे आत्मविश्वास से भरे स्टेज पर खड़े हैं, उनके हाथ पर NVIDIA का टैटू गर्व से नजर आ रहा है।

1993 में, जेन्सन और उनके दोस्तों ने एक डेनी’s रेस्टोरेंट में मिलकर इस कंपनी की नींव रखी, बिना किसी बड़े कनेक्शन या फंडिंग के। शुरुआत में तो उनका पहला प्रोडक्ट फेल हो गया, और कंपनी 30 दिन के अंदर दिवालिया होने वाली थी। लेकिन जेन्सन ने हार नहीं मानी—उन्होंने आधी टीम को निकालकर जोखिम उठाया और एक नई ग्राफिक्स चिप, RIVA 128, पर दांव लगाया। यह दांव चल गया और बाकी इतिहास है!

लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब जेन्सन ने AI के भविष्य को देखा। उन्होंने CUDA नामक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म बनाया, जो गेमिंग चिप्स को साइंटिफिक सुपरकंप्यूटर में बदल देता था। शुरुआत में इस पर कोई कमाई नहीं हुई, और निवेशक नाराज थे, लेकिन जेन्सन ने 10 साल तक मेहनत की। आज, अमेजन, गूगल, मेटा और टेस्ला जैसी कंपनियाँ NVIDIA के चिप्स पर निर्भर हैं, क्योंकि हर बड़ी AI सफलता CUDA पर बनी है।

NVIDIA में $1000 का निवेश 2015 में आज $350,000 हो गया है—35,000% की ग्रोथ!

2030 की तूफानी रैली के लिये तैयार हैं आप?

अगर अभी तक आपने अपने निवेश को शेयर बाजार या म्युचुअल फंड्स से दूर रखा है, तो आप आने वाली तूफानी रैली को मिस करने जा रहे हैं, मेरे विश्लेषण के मुताबिक बहुत सी कंपनियों की असली वैल्यू अनलॉक ही नहीं हुई है।

या यूँ कहें कि बैलेंस शीट में बहुत सी चीजें जुड़ने वाली हैं, जो कंपनियों के शेयर में तूफानी रैली लाने वाले हैं। मैं किसी सेक्टर पर बात नहीं कर रहा, यह एक ओवरऑल बड़ा रैला आने वाला है।

तो अभी भी सही समय है, आपको निवेश करने के लिये, जो मैं देख पा रहा हूँ, उसके मुताबिक रियल एस्टेट का बाजार बहुत ज्यादा बूम कर चुका है, अब यहाँ से 20-30% भाव अगले 4-5 साल में अलग अलग कारणों से गिरेंगे।

2030 में nifty50 बहुत ही कंजरवेटिव एप्रोच के साथ मैं 35000 के आसपास देखता हूँ, और खुले दिल से लगभग 48 से 50 हजार के आसपास। अगर जो आज इस गाड़ी में बैठ गया, यकीन मानिये कि पछतायेंगे नहीं।

शेयर कौन से लेना है पूछने की जरूरत नहीं nifty 100 के सारे शेयर निवेश के लायक हैं, शेयर समझ नहीं आता तो top 100 nifty या index फंड्स में निवेश कर सकते हैं। मैं हमेशा small व midcap पर बुलिश रहता हूँ, क्योंकि जो कंपनियां 200 करोड़ की हैं, वे 5 साल में 2000 करोड़ की हो सकती हैं। ऐसे कई उदाहरण पिछले 5 साल के हैं, पकी पकाई मैं नहीं देने वाला, बस बाजार में बिलबोर्ड देखिये, आंखें कान खुले रखिये, सब सामने दिखता है। छुपा हुआ कुछ नहीं।

#sharemarket

1. बाजार की sentiment और crowd psychology

बाजार की sentiment और crowd psychology को समझना बहुत जरूरी होता है।

बाजार की sentiment निवेशकों और market participants की emotions, attitudes, और news व market data के analysis से प्रभावित होती है। यह एक powerful force है जो बाजार को positive या negative दिशा में ले जा सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि dominant sentiment optimistic है या pessimistic। Market sentiment को समझने में crowd psychology को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह बताता है कि एक group में लोग बिना किसी pre-planned coordination के collectively बाजार के behavior को कैसे influence कर सकते हैं।

Market movements crowd psychology से प्रभावित हो सकते हैं, जैसे कि rally के दौरान लोग FOMO (fear of missing out) के कारण invest करते हैं या market crash के समय panic में selling करते हैं। जो लोग इन dynamics को deeply समझते हैं, वे खबरों पर बाजार की overreactions का advantage उठाकर contrarian positions ले सकते हैं। इसके अलावा, वे extreme market sentiment के indicators को identify करके अपने trades के timing को improve कर सकते हैं।

(Emotional) भावनात्मक discipline बनाए रखना जरूरी है।

ट्रेडिंग की दुनिया में emotional management बहुत जरूरी है। जीत का thrill बहुत exciting हो सकता है, जबकि हार का pain बहुत crushing हो सकता है। Emotional discipline बनाए रखने के लिए calm और balanced approach चाहिए, जिसमें impulsive reactions के बजाय systematic decision-making को priority दी जाए। Mindfulness meditation जैसी techniques का practice और ट्रेडिंग decisions पर regular reflection, जैसे journal या ट्रेडिंग डायरी रखना, discipline बनाए रखने में help कर सकता है। इसके अलावा, ट्रेडिंग के लिए clear guidelines बनाना, जैसे केवल pre-determined risk/reward ratio के साथ trades शुरू करना या specific technical indicators को follow करना, focus बनाए रखने और emotional influence को minimize करने में help कर सकता है।

TechnicalAnalysis #sharepathshala

मल्टीबैगर स्टॉक की कहानी: ₹1 लाख से सिर्फ ₹5,340 बचे

मल्टीबैगर स्टॉक की कहानी: ₹1 लाख से सिर्फ ₹5,340 बचे! क्या आपने कभी सोचा कि एक स्टॉक जो आसमान छू रहा था, कैसे एक साल में ज़मीन पर आ गिरा?

Gensol Engineering की हैरान करने वाली यात्रा –

2019 में Gensol Engineering का स्टॉक मात्र ₹21 पर था। फिर शुरू हुआ इसका शानदार सफर! नवंबर 2019 से फरवरी 2024 तक इसने 6,457% का रिटर्न दिया और स्टॉक की कीमत ₹1,377 के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। अगर किसी ने 2019 में इसमें ₹1 लाख लगाए होते, तो 2024 तक वो ₹65.57 लाख बन चुके होते! ये था एक सच्चा मल्टीबैगर स्टॉक, जिसने निवेशकों को मालामाल कर दिया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। फरवरी 2024 के बाद शुरू हुआ इसका पतन। हाल की कुछ खबरों और मार्केट सेंटीमेंट्स के चलते ये स्टॉक सिर्फ 4 महीनों में 94.66% गिरकर ₹73.42 पर आ गया। यानी, अगर किसी ने अपने ₹1 लाख इसके पीक पर लगाए होते, तो आज उनके पास सिर्फ ₹5,340 बचे होते! ये एक ऐसी रियलिटी है, जो हर निवेशक को स्टॉक मार्केट की रिस्की नेचर के बारे में सोचने पर मजबूर करती है।

Gensol Engineering एक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी है, जो सोलर इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, और कंस्ट्रक्शन (EPC) सर्विसेज में काम करती है। इसका मार्केट कैप आज ₹282 करोड़ है, और पिछले 5 सालों में इसने 250% रिटर्न दिया है, भले ही हाल की गिरावट ने निवेशकों को निराश किया हो। लेकिन सवाल ये है—क्या ये स्टॉक फिर से उठ सकता है, या ये अब और नीचे जाएगा?

सीख क्या है? स्टॉक मार्केट में हाई रिटर्न्स के साथ हाई रिस्क भी आता है। मल्टीबैगर स्टॉक्स का लालच आकर्षक होता है, लेकिन बिना रिसर्च और सही टाइमिंग के निवेश करना आपके पैसे को डुबो सकता है। हमेशा कंपनी के फंडामेंटल्स, मार्केट ट्रेंड्स, और न्यूज़ को ट्रैक करें। डायवर्सिफिकेशन और रिस्क मैनेजमेंट आपके पोर्टफोलियो को ऐसे क्रैश से बचा सकते हैं।

क्या आपने कभी ऐसा स्टॉक देखा, जो आसमान से ज़मीन पर आ गिरा? या क्या आप Gensol Engineering के फ्यूचर को लेकर ऑप्टिमिस्टिक हैं?

StockMarket #Investing #GensolEngineering #Multibagger #FinanceTips #Hindi

रिलायंस इंडस्ट्री का analysis

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयर में पिछले एक हफ्ते से मजबूत वॉल्यूम्स देखने को मिल रहे हैं, जो निवेशकों के बीच बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है।

1. पिछले हफ्ते के मजबूत वॉल्यूम्स और निवेशक गतिविधि

पिछले एक हफ्ते में रिलायंस के शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम्स में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। यह आमतौर पर बड़े संस्थागत निवेशकों (इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स) जैसे FIIs (Foreign Institutional Investors), DIIs (Domestic Institutional Investors), म्यूचुअल फंड्स, या बड़े रिटेल निवेशकों की भागीदारी का संकेत देता है।

  • FIIs की भागीदारी: हाल के डेटा के अनुसार, FIIs भारतीय मार्केट में चुनिंदा ब्लू-चिप स्टॉक्स में अपनी पोजीशन बढ़ा रहे हैं। रिलायंस, जो मार्केट कैप के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी कंपनी है, FIIs के लिए आकर्षक विकल्प हो सकती है। इसका कारण कंपनी का डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल (O2C, रिटेल, टेलीकॉम, और न्यू एनर्जी) और स्थिर फाइनेंशियल परफॉर्मेंस है।
  • DIIs और म्यूचुअल फंड्स: DIIs, खासकर म्यूचुअल फंड्स, रिलायंस में अपनी होल्डिंग्स को मजबूत कर रहे हैं, क्योंकि यह लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए एक सेफ बेट माना जाता है। हाल की तिमाही में रिलायंस का EBITDA मार्जिन 18% तक बढ़ा है, जो निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है।
  • रिटेल निवेशक: रिलायंस के शेयर की कीमत में हाल की गिरावट (52-सप्ताह के हाई 1608.95 रुपये से करीब 21% नीचे) ने रिटेल निवेशकों को आकर्षित किया है। RSI (Relative Strength Index) के 30 से नीचे होने का संकेत देना कि स्टॉक ओवरसोल्ड जोन में है, ने भी रिटेल निवेशकों को खरीदारी के लिए प्रेरित किया होगा।

कुल मिलाकर, वॉल्यूम्स में बढ़ोतरी से लगता है कि बड़े और छोटे दोनों तरह के निवेशक इस स्टॉक में एक्टिव हैं, खासकर कीमत में हाल की करेक्शन के बाद।

2. MACD परफॉर्मेंस

MACD (Moving Average Convergence Divergence) एक मोमेंटम इंडिकेटर है, जो शेयर की कीमत के ट्रेंड और संभावित रिवर्सल को दर्शाता है। रिलायंस के डेली चार्ट पर MACD का विश्लेषण निम्नलिखित है:

  • वर्तमान स्थिति: रिलायंस का MACD हाल ही में नेगेटिव जोन में रहा है, जो शेयर की कीमत में पिछले कुछ महीनों की गिरावट (जुलाई 2024 के हाई से 21% नीचे) को दर्शाता है। हालांकि, पिछले हफ्ते के मजबूत वॉल्यूम्स के साथ MACD लाइन सिग्नल लाइन के करीब आ रही है, जो एक संभावित बुलिश क्रॉसओवर का संकेत दे सकता है।
  • संभावित बुलिश सिग्नल: अगर MACD लाइन सिग्नल लाइन को क्रॉस करती है और पॉजिटिव जोन में जाती है, तो यह शेयर में शॉर्ट-टर्म बुलिश मोमेंटम का संकेत होगा। यह खासकर तब हो सकता है, अगर वॉल्यूम्स इसी तरह मजबूत रहते हैं।
  • सावधानी: MACD अभी भी पूरी तरह से बुलिश नहीं है, इसलिए निवेशकों को चार्ट पर कन्फर्मेशन (जैसे कि बुलिश क्रॉसओवर) का इंतजार करना चाहिए।

3. चार्ट पैटर्न विश्लेषण

रिलायंस के डेली और वीकली चार्ट पर कुछ दिलचस्प पैटर्न्स उभर रहे हैं, जो शेयर के भविष्य के मूवमेंट के बारे में संकेत देते हैं:

  • हैमर कैंडल और ट्वीजर बॉटम: हाल ही में डेली चार्ट पर एक हैमर कैंडल बना है, जो बुलिश रिवर्सल का संकेत देता है। यह पैटर्न बेयरिश सेंटीमेंट्स के कमजोर पड़ने और बुलिश मोमेंटम की शुरुआत का संकेत देता है।
  • सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स:
    • सपोर्ट: 1220-1250 रुपये के बीच मजबूत सपोर्ट जोन है। यह लेवल हाल ही में री-टेस्ट हुआ है, और शेयर इस जोन से ऊपर ट्रेड कर रहा है।
    • रेजिस्टेंस: पहला रेजिस्टेंस 1350 रुपये के आसपास है। अगर शेयर यह लेवल तोड़ता है, तो अगला टारगेट 1650 रुपये तक हो सकता है, जैसा कि कुछ ब्रोकरेज फर्म्स ने सुझाया है।
  • 200-डे EMA: रिलायंस का शेयर वर्तमान में अपने 200-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो लॉन्ग-टर्म बेयरिश सेंटीमेंट को दर्शाता है। हालांकि, मजबूत वॉल्यूम्स और बुलिश पैटर्न्स इसे जल्द ही इस लेवल के ऊपर ले जा सकते हैं।

4. निवेशकों के लिए सुझाव

  • शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स: अगर MACD बुलिश क्रॉसओवर दिखाता है और शेयर 1350 रुपये के रेजिस्टेंस को तोड़ता है, तो शॉर्ट-टर्म में 1450-1500 रुपये का टारगेट देखा जा सकता है। स्टॉप लॉस 1220 रुपये के नीचे रखें।
  • लॉन्ग-टर्म निवेशक: रिलायंस का डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल और न्यू एनर्जी, रिटेल, और जियो जैसे सेगमेंट्स में ग्रोथ की संभावनाएं इसे लॉन्ग-टर्म के लिए आकर्षक बनाती हैं। मौजूदा कीमत को एक अच्छा एंट्री पॉइंट माना जा सकता है, खासकर अगर आप SIP मोड में निवेश करना चाहते हैं।
  • सावधानी: शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

रिलायंस के शेयर में पिछले हफ्ते के मजबूत वॉल्यूम्स FIIs, DIIs, और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं। MACD अभी नेगेटिव जोन में है, लेकिन बुलिश क्रॉसओवर के संकेत दिख रहे हैं। चार्ट पर हैमर केंडल रिवर्सल की संभावना को मजबूत करते हैं। अगर शेयर 1350 रुपये का रेजिस्टेंस तोड़ता है, तो यह शॉर्ट-टर्म में तेजी दिखा सकता है। हालांकि, निवेशकों को MACD और चार्ट पैटर्न्स में कन्फर्मेशन का इंतजार करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह विश्लेषण केवल जानकारी के उद्देश्य से है और निवेश सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

ITC का demerger

ITC याने की Indian Tobacco Company का demerger हो रहा है। कई लोगों को पता नहीं कि डीमर्जर क्या होता है।

डीमर्जर एक कॉर्पोरेट एक्शन है जिसमें एक बड़ी कंपनी अपने एक या अधिक व्यवसायों को अलग करके नई कंपनियाँ बनाती है। ये नई कंपनियाँ फिर स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। इसके अपने फायदे और नुकसान होते हैं।

क्यों किया जाता है डीमर्जर?

  • फोकस बढ़ाने के लिए: कंपनी अपने मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकती है।
  • मूल्य बढ़ाने के लिए: अलग-अलग व्यवसायों का मूल्य, जब वे एक साथ होते हैं, उससे अधिक हो सकता है जब वे अलग हों।
  • विकास के लिए: अलग-अलग कंपनियाँ तेजी से बढ़ सकती हैं।

डीमर्जर के फायदे:

  • निवेशकों के लिए: निवेशकों को अलग-अलग कंपनियों में निवेश करने का मौका मिलता है।
  • कर्मचारियों के लिए: कर्मचारियों को नए अवसर मिल सकते हैं।
  • ग्राहकों के लिए: ग्राहकों को बेहतर सेवा मिल सकती है।

डीमर्जर के नुकसान:

  • लागत: डीमर्जर कम्पनी के लिये एक महंगी प्रक्रिया है।
  • जोखिम: डीमर्जर से कंपनी के शेयर की कीमत कम हो सकती है।

डीमर्जर से क्या होगा?

  • एक नई कंपनी: ITC होटल्स नाम से एक नई कंपनी बनेगी।
  • शेयरधारकों को लाभ: मौजूदा ITC शेयरधारकों को नई कंपनी के शेयर भी मिलेंगे।
  • बिजनेस में वृद्धि: दोनों कंपनियों को अपने-अपने क्षेत्र में बढ़ने का मौका मिलेगा।

कब होगा प्रभावी?
यह डीमर्जर 6 जनवरी 2025 से प्रभावी होगा।


आपके लिए क्या मतलब है?

6 जनवरी को सुबह 9 बजे से 9.45 तक ITC और ITC Hotels का स्पेशल ट्रेडिंग सेशन होगा और इसमें दोनों शेयरों की प्राइज डिस्कवरी की जाएगी।

और फिर जो भी प्राइस डिस्कवर होगा, उससे 10 बजे से ट्रेडिंग शुरू हो जायेगी।

आईटीसी लिमिटेड के प्रत्येक शेयरधारक को मूल समूह ITC में उनके द्वारा रखे गए प्रत्येक 10 शेयरों के लिए आईटीसी होटल्स का एक शेयर दिया जाएगा।

आईटीसी के होटल बिजनेस की कुल संपत्ति 30 सितंबर, 2024 के अंत में 7,818.4 करोड़ रुपये थी। इसी अवधि के अंत में आईटीसी के कुल शुद्ध मूल्य का 9.5% था। आईटीसी होटल्स का बुक वैल्यू प्रति शेयर 37.57 रुपये प्रति शेयर है। अब देखते हैं कि ITC और ITC Hotels का क्या प्राइस डिस्कवर होता है।

फ़ोटो से आपको clearity मिल जायेगी।

1 करोड़ या 90 लाख रुपये शेयर बाजार में कैसे गंवा देते हैं?

इतनी खबरें आती हैं कि फलाना ने 1 करोड़ या 90 लाख रुपये शेयर बाजार में गंवा दिये, मुझे तो आज तक समझ ही नहीं आया कि ऐसे कैसे गंवा सकते हैं, अपन ने तो कभी नहीं गंवाये, उल्टे कुछ गुना ज्यादा ही हो गये।

ऐसा ये लोग करते क्या हैं, यही समझ नहीं आया।

कल ही किसी से बात हो रही थी, तो वे बोले कि शेयर बाजार भयंकर रिस्की है, हमने कहा जहाँ रिस्क होगा वहीं रिवार्ड भी होगा, बिना रिस्क के रिवार्ड कैसा?

पता नहीं क्यों दुनिया को शेयर बाजारबसे रातभर में अमीर बनना है, भाई अनुशासन से शेयर बाजार के पैसे भरे समुंदर से समय समय पर एक लोटा निकालते जाओ, अब अगर बाल्टी भरकर निकालने जाओगे तो समुंदर आपकी बाल्टी ही साथ ले जायेगा। इधर बाल्टी लोटे को पैसे का पर्यायवाची समझें।

हमने कहा कि मैं जब से शेयर बाजार में आया हूँ, तबसे केवल एफडी के ब्याज से डबल कमाने की सोची, जब एफडी पर 9% ब्याज मिलता थाज़ तब भी शेयर बाजार से 18% साल का कमाने की सोचते थे, हालांकि यह अलग बात है कि शेयर बाजार ने कुछ सालों में 50% से ज्यादा रिवार्ड भी दिया, कुछ में 100% भी दिया।

आज भी अपना शेयर बाजार से लाभ हमें 18% ही कमाना है, पर तब भी यह 24% से नीचे जा ही नहीं पाता। हम कोई कठिन चीज नहीं करते, बस फोकस रहता है, जैसे ही प्रॉफिट मिले वह हाथ से जाना नहीं चाहिये। बिजली की तेजी से मौका ले लेना है, यहाँ सेकंड में खेल हो जाते हैं।

जैसे कल creditacc में अपनी नजरें जमी हुई थीं, सुबह सुबह एक बेहतरीन ट्रेड मिली, अपनी एंट्री हुई 873 के आसपास और बस 15-18 मिनिट में ही अपना प्रॉफिट बुक करने का टार्गेट 927 जो कि अपने 15 मिनिट के चार्ट पर 200dma का टारगेट से ऊपर था, परंतु हमें प्रोफिट ट्रेल किया, वरना भाव तो हमने 937 भी देखा था। अब हमने एक शेयर पर कमाई की ₹54 की जो कि लगभग 6% होता है। पर ऐसे मौके रोज नहीं आते। आते भी हैं तो पकड़ नहीं पाते।

मेरे कई दोस्त कहते हैं कि यार तुम हमको भी ऐसे टिप बता दिया करो, पर मैं उनको समझाते थक गया कि भाव सेकंड का गेम है, आप जब तक खुद नहीं सीखोगे तब तक शेयर बाजार से कमा ही नहीं सकते, टिप्स बिजनेस पर ध्यान न दो, अपना स्किल बढ़ाओ।

साल का 18% कमाना भी बहुत आसान है, वह भी निफ्टी 50 के शेयर से, आपको 200 dma को पकड़ना है, और जैसे ही 200 dma के नीचे लगातार 7 लाल केंडल मिल जायें, वह शेयर खरीद लो, और अपना प्रॉफिट बुकिंग का टारगेट 3% या 200 dma रख लें, अगले 3 से 30 दिन में आपको यह प्रॉफिट मिलना तय है। बस अपने नियमों को न भूलें।

सबकी अपनी अपनी स्ट्रेटेजी होती है, हम सिंपल रखते हैं, बाजार से पैसा बनाना बहुत आसान है, बस अनुशासन में रहें, नियमों का पालन करें, दिमाग को स्थिर रखें, इसके लिये सुबह रोज 1 घँटा ध्यान करें।

18% साल का कमाने के लिये आपको केवल 1.5% महीना कमाना है, बहुत आसान है। पर सबसे पहले अपने आक्रामक दिमाग को शांत रखिये।

ऐसी बातें और भी आगे पोस्ट में करते रहेंगे।