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शेयर बाज़ार आखिर है क्या?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 1

“शेयर बाज़ार आखिर है क्या?”

सुबह का समय था। ड्राइंग रूम में खिड़की से हल्की हवा आ रही थी। चाय की भाप ऊपर उठ रही थी और सामने बेटेलाल मॉनिटर में लाल-हरी लाइनें देखकर परेशान हो रहा था।

“डैडी,” उसने अचानक पूछा, “ये शेयर बाज़ार आखिर है क्या? लोग कहते हैं यहाँ पैसा बनता भी है और डूबता भी है। सच क्या है?”

मैं मुस्कुराया। “बेटेलाल, शेयर बाज़ार अपने आप में कोई जादू नहीं है। यह बस दुनिया का सबसे बड़ा भरोसे का बाज़ार है।”

“भरोसे का बाज़ार?” बेटेलाल ने आश्चर्य से पूछा।

“हाँ,” मैंने कहा, “मान लो तुम्हारे मोहल्ले में एक आदमी मिठाई की दुकान खोलता है। दुकान अच्छी चलती है, लेकिन उसे बड़ा कारखाना बनाना है। उसके पास पूरे पैसे नहीं हैं। अब वह क्या करेगा?”

बेटेलाल बोले – “कर्ज़ लेगा?”

मैंने कहा – “वह एक रास्ता है। लेकिन दूसरा रास्ता यह है कि वह लोगों से कहे — ‘आप मेरे व्यापार में थोड़ा पैसा लगाओ और बदले में इस दुकान में आपका हिस्सा होगा।’ यही हिस्सा शेयर कहलाता है।”

बेटेलाल अब थोड़ा समझने लगे।

मैंने आगे कहा, “जब कोई कंपनी अपने छोटे-छोटे हिस्से लोगों को बेचती है, तो वही शेयर बाज़ार में ट्रेड होते हैं। यानी जिसने शेयर खरीदा, वह उस कंपनी के छोटे से हिस्से का मालिक बन गया।”

“तो क्या मैं भी बड़ी कंपनियों का मालिक बन सकता हूँ?” बेटेलाल ने उत्साह से पूछा।

“बिल्कुल,” मैंने कहा, “अगर तुम किसी कंपनी का एक शेयर भी खरीदते हो, तो तकनीकी रूप से तुम उसके हिस्सेदार हो।”

बेटेलाल ने तुरंत मोबाइल उठाया। “तो लोग फिर डरते क्यों हैं?”

मैंने चाय का कप नीचे रखते हुए कहा, “क्योंकि लोग शेयर नहीं खरीदते… लोग सपने खरीदते हैं। और सपनों की कीमत रोज़ बदलती है।”

कुछ पल के लिए बेटेलाल शांत हो गये।

मैंने आगे समझाया — “देखो, बाज़ार में हर दिन लाखों लोग अपनी उम्मीद और डर लेकर आते हैं। अगर लोगों को लगता है कि कंपनी भविष्य में अच्छा करेगी, तो उसके शेयर ऊपर जाते हैं। अगर डर लगता है कि नुकसान होगा, तो शेयर नीचे आने लगते हैं।”

“यानी यह सिर्फ गणित नहीं, निवेशकों के इमोशन भी हैं?”

“बिल्कुल,” मैंने कहा, “शेयर बाज़ार आधा अर्थशास्त्र है और आधा मनोविज्ञान।”

बाहर अब धूप और तेज हो चुकी थी। हमने कहा पंखा थोड़ा तेज कर लो।

बेटेलाल ने पूछा, “लेकिन डैडी, टीवी वाले हर समय ‘मार्केट क्रैश’, ‘रिकॉर्ड हाई’, ‘बुल रन’ क्यों बोलते रहते हैं?”

मैं हँस पड़ा। “क्योंकि डर और लालच सबसे ज्यादा बिकते हैं। समाचार चैनलों को पता है कि आदमी सनसनी देखता है, उसे कुछ शांत तरीके से बताया जायेगा तो उसे वह मजा नहीं आयेगा, जो मजा सनसनी देखने, सुनने में आता है।”

फिर बेटेलाल बोले “तो डैडी, क्या शेयर बाज़ार जुआ है?”

मैंने गंभीर होकर कहा, “नहीं! जुआ वह है जहाँ परिणाम का कोई आधार नहीं होता। लेकिन शेयर बाज़ार में कंपनी का व्यापार, मुनाफा, भविष्य, तकनीक, प्रबंधन — सब कुछ मायने रखता है।”

बेटेलाल हतप्रभ होते हुए, फिर आगे पूछने लगे “फिर लोग नुकसान क्यों करते हैं?”

मैने गर्दन सामने मॉनिटर की और देखते हुए कहा “क्योंकि वे बिना समझे भीड़ के पीछे भागते हैं।”

मैंने बाहर लगे आम के पेड़ की ओर इशारा किया।
“देखो उस पेड़ को। अगर कोई आदमी रोज़ उसकी जड़ खोदकर देखे कि फल आया या नहीं, तो पेड़ मर जाएगा। निवेश भी ऐसा ही है। अच्छे निवेश को समय चाहिए।”
बेटेलाल बहुत ध्यान से सुन रहे था।

मैंने कहा, “दुनिया के बड़े निवेशक शेयर को सिर्फ नंबर नहीं मानते। वे उसे व्यापार समझते हैं। अगर तुम किसी कंपनी का शेयर खरीद रहे हो, तो खुद से पूछो — क्या मैं इस कंपनी का छोटे हिस्से का मालिक बनना चाहता हूँ?”

“लेकिन डैडी,” उसने पूछा, “इतनी सारी कंपनियों में सही कंपनी पहचानें कैसे?”

मैं मुस्कुराया। “यही तो सीखने की यात्रा है। शेयर बाज़ार पैसे से पहले धैर्य सिखाता है।”

फिर मैंने बेटेलाल को एक बहुत ही सरल सा उदाहरण दिया।
“मान लो दो दुकानदार हैं। पहला रोज़ जोर-जोर से चिल्लाता है कि उसकी दुकान सबसे अच्छी है। दूसरा चुपचाप ही अपनी दुकान चला रहा है, लेकिन हर साल उसका व्यापार बढ़ रहा है। समझदार निवेशक किसे चुनेगा?”

“दूसरे को,” बेटेलाल ने तुरंत कहा।

“बस यही शेयर बाज़ार का पहला सिद्धांत है। शोर नहीं, गुणवत्ता यानी क्वालिटी देखो।”

मैंने आगे कहा, “भारत में करोड़ों लोग अब शेयर बाज़ार में आ रहे हैं। मोबाइल ऐप्स ने निवेश आसान बना दिया है। लेकिन आसान चीज़ें अक्सर खतरनाक भी होती हैं। क्योंकि अब लोग ज्ञान से ज्यादा ‘टिप्स’ पर भरोसा करने लगे हैं।”

“यानी व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी?” बेटेलाल हँस पड़े।

“बिल्कुल,” मैंने भी हँसते हुए कहा, “आजकल हर दूसरा आदमी खुद को मार्केट गुरु समझता है।”

फिर मैं थोड़ा गंभीर हुआ।
“याद रखना बेटेलाल, शेयर बाज़ार में सबसे बड़ा हथियार जानकारी नहीं, अनुशासन है। यहाँ कई लोग तेज़ी से पैसा कमाते हैं, लेकिन टिकते वही हैं जो अपने लालच पर नियंत्रण रखते हैं।”

बेटेलाल ने धीरे से पूछा, “तो क्या एक आम आदमी भी अमीर बन सकता है?”

मैंने शांत स्वर में कहा, “हाँ। लेकिन रातों-रात नहीं। शेयर बाज़ार खेत की तरह है, कैसीनो की तरह नहीं। यहाँ बीज बोना पड़ता है, इंतज़ार करना पड़ता है, और हर मौसम की मार भी झेलना पड़ती है।”

कुछ देर दोनों मौन रहे।
दूर कहीं से मंदिर की घंटी सुनाई दी और शंख के आवाज भी आई।

बेटेलाल ने आखिर में पूछा, “डैडी, तो अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “अगले भाग में हम समझेंगे — शेयर की कीमत ऊपर-नीचे क्यों होती है, और आखिर ये ‘बुल’ और ‘बीयर’ कौन होते हैं जिनसे पूरा बाजार डरता है।”

क्रमशः…

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