झगड़ा न करना डर नहीं, समझदारी है (Don’t Fight, its understanding not fear)

    कल ऑफिस जाते समय एक लाल बत्ती पर हम रुके हुए थे, बगल में थोड़ी जगह खाली थी, और उसके बाद फिर एक कार खड़ी हुई थी, हम आराम से सुबह सुबह के उल्लासित जीवन का दर्शन कर रहे थे, कई सारे लोग आज भी सुबह पूजा करते हैं और उसके बाद तिलक लगाकर ही घर से निकलते हैं, लाल, पीला, सफेद रंग के तिलक अमूमन देखने को मिलते हैं, किसी के माथे पर गोल तो किसी के माथे पर लंबा टीका लगा हुआ दिखता है, तिलक या टीका कौन सी ऊँगली से लगाया जाये, इसके ऊपर कुछ दिनों पहले पढ़ रहा था, तो उसमें हर उँगली का अलग अलग महत्व बताया गया था, जैसे कि मध्यमा से तिलक लगाने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं, और अनामिका से तिलक लगाने पर शत्रुओं का नाश होता है, शायद यह ज्ञान हमारे पूर्वजों के पास रहा हो, परंतु अब लोग इन सब विषयों में रूचि नहीं लेते हैं तो इस तरह से यह ज्ञान भी लुप्त होता जायेगा।
महिला चालक
 
    सुबह ऑफिस जाते समय कुछ लोग हर्षित प्रफुल्लित रहते हैं, और कुछ लोग तनाव में, तनाव भले ही फिर कल के अधूरे काम को हो या फिर ऑफिस देरी से जाने का, पर कुछ लोग तनाव में ही जीने लगते हैं, लाल बत्ती पर भी ऐसे लोगों को हार्न बजाते हुए देखा जा सकता है, हार्न बजाने की स्टाईल भी अलग अलग होती हैं, उससे भी कई बार उनके तनाव का स्तर पता चलता है, जो हार्न को देर तक एक साथ दबाकर रखे और फिर बार बार हार्न को दबाकर छोड़े निश्चित ही उसके तनाव का स्तर बहुत ही ज्यादा है, और मैं समझता हूँ ऐसे तनावग्रस्त व्यक्ति को ऑफिस की बजाय घर वापिस चला जाना चाहिये।
    
    
    कुछ लोग हमेशा ही मोबाईल पर बात करते हुए दिखते हैं, पता नहीं कितनी बातें करते हैं इनकी बातें ही कभी खत्म नहीं होतीं हैं, कार चलाते वक्त भी एक हाथ में स्टेरिंग रहेगा और एक हाथ में मोबाईल और जब गियर बदलना होता है तो मोबाईल को कान और कंधों के बीच दबा लेते हैं, ऐसा लगता है जैसे कि उनकी गर्दन को किसी ने जोर से दबाकर कंधे से लगा दिया हो, मैंने अधिकतर ही कार चलाते हुए स्त्रियों को मोबाईल का उपयोग करते हुए देखा है, और कार की तेज रफ्तार को पाने के लिये बेचारे एक्सीलेटर को बेरहमी से कुचलते हुए भी…
लाल बत्ती पर सोचता हुआ व्यक्ति
    ओह बात जहाँ से शुरू हुई वह तो पूरी हुई ही नहीं, उस खाली जगह में एक मैडम जी अपनी बिल्कुल नई चमचमाती हुई गाड़ी घुसाने की असफल सी कोशिश में लगी हुईं थीं, उनके स्टेरिंग को सँभालने के तरीके से ही पता चल रहा था कि अभी नई नई चालक हैं और कुछ भी कर सकती हैं, हम अपने बैकमिरर से उनकी नाकाम कोशिश देख ही रहे थे, हम उन्हें चाहकर भी जगह नहीं दे सकते थे क्योंकि हमारी गाड़ी भी फँसी हुई खड़ी थी और कोई आगे करने की गुँजाईश भी नहीं थी, तभी बगल से आवाज आई तो देखा कि उन मैडम ने हमारी खड़ी कार में आगे आने के चक्कर में खरोंचे मार दी हैं, जो कि हमको साईज मिरर से दिख रहा था, और वो मैडम अब अपनी चालक सीट पर से उचक उचक कर हमारी कार पर आई खरोंच देखने की कोशिश कर रही थीं, हम अपने दिमाग को शांत करने की पूरी कोशिश कर रहे थे, गुस्सा तो बहुत जोर का आ रहा था परंतु सोचा कि गुस्सा करके हासिल क्या होगा, और हम अपनी सीट बेल्ट को हथकढ़ी मानकर जकड़कर बैठ गये।
    
    दरअसल हमारे एक पारिवारिक मित्र हैं, जो कि आगरा में रहते हैं और वे डॉक्टर दंपत्ति हैं, अभी हाल ही में जब हम आगरा गये थे तब उनसे मिलने जाना हुआ, अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय उन्होंने हमारे लिये निकाला, और खूब बातें हुईं, तब उनकी यह नसीहत हमें बहुत अच्छी लगी कि कार में कोई टक्कर मार जाये तो भी चुपचाप बैठे रहो, क्योंकि हमें पता नहीं कि दूसरा किस मूड में हो और क्या आदमी है, पता चला कि मारपीट में अपना ही नुक्सान हो गया, चलो सामने वाले से कोई मारपीट न हो, झगडा ही हो गया तो अपने दस मिनिट भी खराब हुए और पता चला कि अपना रक्तचाप भी बढ़ गया तो वही अपना नुक्सान हो गया, यह डर नहीं समझदारी है ।

एटीएम कार्ड के बिना एटीएम से पैसे कैसे निकालें (Withdrawl Money from ATM without using ATM Card)

     एटीएम कार्ड के बिना एटीएम से पैसे निकालना अविश्वसनीय सी बात लगती है, परंतु तकनीकी युग में नई तकनीक विस्तार से अब बहुत कुछ संभव हो गया है, और हम इस सुविधा का उपयोग भारत में बहुत ही अच्छी तरह से कर सकते हैं, क्योंकि भारत में अभी भी पैसे एक जगह से दूसरी जगह भेजना एक दुष्कर कार्य की श्रेणी में आता है, हमें जब कुछ पैसे घर या बाहर अपने परिवार या परिचित को भेजने होते हैं, तब खासकर यह सुविधा बहुत ही फायदेमंद है।
 
    इसी वर्ष के आरंभ में बैंक ऑफ इंडिया और इंडसइंड बैंक ने एटीएम कार्ड के बिना एटीएम से पैसे निकालने की यह सुविधा अपने ग्राहकों को दी थी, अभी हाल ही में आईसीआईसीआई बैंक ने भी यह सुविधा अपने ग्राहकों
को दी, हालांकि जितना विज्ञापन और हल्ला आईसीआईसीआई बैंक ने किया उतना बैंक ऑफ इंडिया और इंडसइंड बैंक ने यह सुविधा शुरू करते समय नहीं किया था।
 
 
यह कार्य कैसे करता है –
 
  1. ग्राहक के पास इंटरनेट सुविधा उपलब्ध होना चाहिये
  2. ग्राहक के पास मोबाईल होना चाहिये
  3. ग्राहक को अपने अकाऊँट में लॉगिन करना होता है
  4. ग्राहक को कैश बैनीफीशयरी में अपना या / और जिन्हें पैसे निकालने हैं, उन्हें पंजीकृत करना होगा, जिसमें
    नाम, मोबाईल नंबर, ईमेल एवं पता देना होता है
  5. जब भी आपको पैसे निकालने हैं तो इंटरनेट बैंकिंग में ए.टी.एम. निकास सुविधा में जाकर, बैनीफीशयरी चुनें और रकम का उल्लेख करें
  6. जैसे ही आप कन्फर्म कर देंगे तो बैनीफीशयरी के मोबाईल पर एक कोड आ जायेगा
  7. अब वह बैनीफीशयरी उल्लेखित ए.टी.एम. पर जाकर अपना मोबाईल नंबर, कोड और रकम डालकर पैसे बिना कार्ड के निकाल सकता है
ध्यान रखने की बातें –
 
बैनीफीशयरी रकम को 14 दिन तक निकाल सकता है, अगर बैनीफीशयरी 14 दिन में रकम नहीं निकालता है या गलत सूचना ए.टी.एम. में प्रविष्ट करता है तो रकम वापिस से अकाऊँट में जमा हो जाती है ।
 
कैसे लाभ उठायें –
 
– अगर घर पर पैसे भेजने हों तो अपने माता पिता को बैनीफीशयरी के रूप में पंजीकृत कर लें और  वे आराम से अपने शहर से पैसे निकाल सकते हैं।
– अगर आप कहीं बाहर घूमने जा रहे हैं और साथ में ए.टी.एम. कार्ड रखने का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं तो अपने को बैनीफीशयरी बनाकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
– अगर आपके पुत्र या पुत्री कहीं दूर रहते हैं तो बैनीफीशयरी में उनको जोड़कर उन्हें सीधे ए.टी.एम. से पैसे निकाल सकते हैं, और उन्हें ए.टी.एम. कार्ड भी नहीं रखना होगा।
 

हेल्थी हार्ट पैकेज और अस्पताल से आई बीमारी (Healthy Heart Package and got Fever)

शनिवार को ह्रदय के लिये हेल्थी हार्ट पैकेज के लिये हमने 2 सप्ताह पहले से ही अस्पताल से बुकिंग करवा रखी थी, 12-14 घंटे खाली पेट आने के लिये कहा गया था और जिस दिन न खाना हो उसी दिन खूब खाने पीने की इच्छा होती है। इस पैकेज में लिपिड प्रोफाइल, ईसीजी, टीएमटी एवं डॉक्टर का परामर्श शामिल था। यह पैकेज गुङगाँव शहर के तथाकथित अच्छे अस्पतालों में शुमार पारस अस्पताल मे था, इसके पहले यही चैकअप 1 वर्ष पहले बैंगलोर में वहाँ के जानेमाने क्लीनिक वीटालाईफ में करवाया था, तो वीटालाईफ ने पूरा चैकअप करनें में लगभग 1 घंटे से भी कम समय लिया थी, हम यहाँ भी यही सोच कर गये थे कि फटाफट चैकअप हो जायेगा, तो अन्य काम निपटा लेंगे।
सुबह 8.45 पर हम पारस अस्पताल में घुसे, अस्पताल की भव्यता देखते हुए लगा कि हमें यहाँ अच्छी सुविधाएँ मिलेंगी, हम जब स्वागतकक्ष पर पहुँचे तो बिना अभिवादन ही, हमें बताया गया कि आपका आज का पैकेज के लिये कोई बुकिंग नहीं है, (अहसान जताते हुए) पर फिर भी हम आपका पैकेज ले रहे हैं, और हमें कहा गया कि आप बेसमेंट वाले तल पर चले जाइये वहाँ केवल जाँच वालों के लिये स्वागत कक्ष है, हम दूसरे स्वागत कक्ष में आये तो उन्होंने एक फॉर्म भरने को दिया गया कि यह रजिस्ट्रेशन फॉर्म है, इस वक्त समय हुआ था लगभग सुबह 9 बजे, और फॉर्म भरने के बाद हमें बैठने के लिये कह दिया गया, हम बैठ गये, लगभग 9.30 बजे एस.एम.एस. आया कि हम अब पारस अस्पताल के रजिस्टर्ड पैशेन्ट (कस्टमर) हो गये हैं। लगभग 10 बजे हमें लिपिड प्रोफाईल के लिय रक्त निकालने के लिये बुलाया गया, हम कहे भई ये दिल्ली है, अभी एक घंटे में तो केवल रक्त की ही जाँच हुई है, अब ईसीजी और टीएमटी में पता नहीं कितना समय ये लोग लगायेंगे, हमें कहा गया कि अब आपके ईसीजी और टीएमटी टेस्ट ऊपर वाले तल पर होंगे।

हम चले ऊपर वाले तल पर, वहाँ पर हर तरफ अफरा तफरी का माहौल था, हम वहाँ के स्वागत कक्ष पर जाकर बोले कि ईसीजी और टीएमटी जाँच कहाँ होंगी तो हम बतायी हुई दिशा के कमरे की और बढ़ चले, वहाँ नर्स ने हमें बैठाकर रक्तचाप जाँचा और रजिस्टर में हमारा नंबर चढ़ाती हुई बोलीं कि आप बैठ जाईये और डॉक्टर से पहले परामर्श कर लीजिये, अब हम कल शाम के भूखे, भूखे पेट आदमी का दिमाग बहुत जल्दी घूमता है, शायद यह बात अस्पताल वालों को पता नहीं, 15 मिनिट बाद ही हम धड़धड़ाते हुए टीएमटी वाले रूम में घुस गये और डॉक्टर से पूछा कि कितना समय लगेगा, तो उन्होंने इत्मिनान से हमारा कागज देखते हुए कहा कि कम से कम 2 घंटे और लगेंगे, और तीन घंटे से कुछ खाया हुआ नहीं होना चाहिये, हमने कहा अब तो 11.30 हो चुके हैं और हमने कल शाम 7 बजे से कुछ नहीं खाया है, तो डॉक्टर बोला कि हम कुछ नहीं कर सकते इतना समय तो लगेगा ही, हमने कहा कि हमें बहुत जोर से भूख लगी है हम तो खाना खाने जा रहे हैं, तो वे बोले कि ठीक है फिर आप 3 बजे दोपहर को आ जाईये, हमने कहा कि वो सब तो ठीक है, यह बताईये कि जब हम सुबह से आये हैं तो पहला नंबर तो हमारा आना चाहिये, आप लोग पैसे तो फाईव स्टार वाले लेते हो और सुविधओं के नाम पर सब गोल, हमने उन्हें बताया कि पिछले वर्ष ही हमने बैंगलोर में यही चैकअप करवाया था पर उनके यहाँ सारा सिस्टम ऑटोमैटिक था, और केवल एक घंटे में सारे चैकअप हो चुके थे, तो बोला कि इसके लिये यह सही जगह नहीं, आप प्रशासन विभाग के पास जाकर बाद करिये।
खैर हम घर के लिये निकले तो एक और आश्चर्य था कि गाड़ी की पार्किंग के लिये 20 रू. शुल्क वसूला गया, पार्किंग शुल्क अस्पताल में यह हमने पहली बार देखा, पता नहीं इस बदलती दुनिया में और क्या क्या देखना बाकी रह गया है, सुविधाओं के नाम पर शुल्क और सुविधाएँ गायब । घर गये जमकर बिरयानी खाई और आराम किया, फिर से 3 बजे अस्पताल पहुँचे तो देखा कि दरवाजे के बीचों बीच जवान डॉक्टर लोग गप्पें हाँक रहे हैं, और आने वाले लोगों को परेशानी हो रही है, हमने तुरंत वहाँ खड़े डॉक्टरों से बोला कि आपको हँसी ठट्ठा करना ही है तो साईड में होकर करिये, यह आपका कॉलिज नहीं है, कि कहीं पर भी खड़े होकर हँसी ठट्ठा करने लग गये, वहीं पास में प्रशासनिक विभाग का कोई बंदा खड़ा था, वह हमें घूर कर देख रहा था, वहीं वे सारे डॉक्टर नजरों को नीचे झुकाकर तत्परता से गायब हो गये।

हमने अपनी बची हुई जाँच ईसीजी और टीएमटी करवाया, ईसीजी के समय पर्दा खिंचा रहने का फायदा भी उठाया और मोबाईल से एक सेल्फी ले लिया, घर आते समय ही दिमाग का सूचना तंत्र शरीर गिरा होने की सूचना दे रहा था, लगा कि सुबह से कुछ ज्यादी ही थकान हो गयी होगी, इसलिये या फिर मर्दानी फिल्म देखकर सर चढ़ गया है, घऱ आकर शाम को हॉलीवुड वाली अवतार आ रही थी, तब जाकर मूड ठीक हुआ, पर हमारे थर्मामीटर ने बताया कि तापमान 99.8 है जो कि सामान्य से ज्यादा था, तो यह हैल्थी हार्ट पैकेज का उपहार था, क्योंकि अस्पताल में हाइजीनिक वातावरण नहीं था।

अब 5 दिन हो गये हैं अभी भी बुखार है, और भी जाँचें करवा ली हैं, सब सामान्य है, केवल वाइरल है, बस दवाई लेकर ऑफिस जा रहे हैं।

फाइनेंशियल बकवास (FinancialBakwas)

हमने यूट्यूब पर फाइनेंशियल बकवास नाम से नया चैनल शुरू किया है, जिसमें पर्सनल फाईनेंस से संबंधित बातों को वीडियो या प्रेजेन्टेशन के माध्यम से बताने का एक प्रयास है ।

अभी तक हमने यहाँ 5 वीडियो अपलोड किये हैं, आप भी देखिये और बताईये कि आगे आप और क्या सुनना चाहते हैं । मैं इस चैनल में मुख्यत: बात करूँगा –
1. म्यूचअल फंड
2. जीवन बीमा
3. मेडीक्लेम
4. दुर्घटना बीमा
5. शेयर बाजार
6. निवेश के तरीके
7. सेवानिवृत्ति की योजना
8. क्रेडिट कार्ड
9. टैक्स में बचत
10. कैसे अच्छे उत्पाद चुनें
11. अपने धन के सही तरीके से कैसे उपयोग करें

एल आई सी या टर्म इन्श्योरेन्स और आवर्ती जमा LIC or Term Insurance and Recurring Deposit in Hindi

 

त्योहारों पर म्यूचयल फंड उपहार में दें Gift Mutual Funds On Festivals (Hindi)

म्यूचअल फंड क्या होता है What is Mutual Fund in Hindi

म्यूचअल फंड योजनाओं के प्रकार हिन्दी में Mutual Fund Type of Schemes In Hindi

म्युचअल फंड योजनाओं के प्रकार एवं संरचना – हिन्दी Types of Mutual Funds and Structure in Hindi

 

उज्जैन उज्जयिनी महाकाल महाकालेश्वर महामृत्युँजय जाप जल एवं दुग्ध अभिषेक भस्मारती दर्शन (Ujjain Mahakal Mahakaleshwar Mahamrityunjaya Jaap Bhasma Aarti)

    कालों का काल महाकाल के दर्शन करने उज्जैन दूर दूर से भक्त आते हैं, उज्जयिनी और अवन्तिका नाम से भी यह नगरी प्राचीनकाल में जानी जाती थी। स्कन्दपुराण के अवन्तिखंड में अवन्ति प्रदेश का महात्म्य वर्णित है। उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर को मंगल गृह का जन्मस्थान माना जाता है, और यहीं से कर्क रेखा भी गुजरती है। महाकालेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में दक्षिणमुखी होने के कारण प्रमुख स्थान रखता है, महाकालेश्वर मंदिर में अनेकों मंत्र जप जल अभिषेक एवं पूजा होती हैं। महाकालेश्वर में ही महामृत्युँजय जाप भी होता है।
महाकाल
महाकाल
 

महामृत्युँजय जाप –

    महामृत्युँजय जाप में महाकालेश्वर प्रशासन द्वारा 11,000 रू का शुल्क निर्धारित है, जिसमें पंडे 11 या 21 पंडितों से जाप करवाते हैं, मंत्र का जाप जिसके लिये किया जाता है उस व्यक्ति को या तो वहाँ उपस्थित रहना होता है या फिर फोन पर भी उस व्यक्ति से संकल्प ले लिया जाता है, जिस दिन सवा लाख मंत्र जाप पूरे होते हैं, उस दिन भी उस व्यक्ति से फोन पर ही जाप की पूर्णता करवा ली जाती है। जाप की पूर्णता के दिन पंडितों को दान दक्षिणा भी देना होती है। जब भी महामृत्युँजय जाप करवायें ध्यान रखें महाकाल मंदिर के काऊँटर पर ही रसीद कटवायें नहीं तो पंडे पुजारी आपकी जेब काट लेंगे।
 

महाकाल अभिषेक –

    जल एवं दुग्ध अभिषेक महाकालेश्वर को होते हैं, आप अपने साथ भी जल या दुग्ध ले जा सकते हैं या फिर मंदिर के पास ही दुकानों पर लोटों में जल व दुग्ध उपलब्ध रहता है, ध्यान रखें पोलिथीन की थैली से दूध या जल चढ़ाना मना है, इसलिये किसी बर्तन का ही उपयोग करें।
 

महाकाल भस्मारती दर्शन –

    महाकालेश्वर में रोज सुबह 4 बजे भस्मारती होती है, जिसमें भस्म से महाकाल ज्योतिर्लिंग को स्नान करवाया जाता है, पूरे ब्रह्मांड में राजा महाकाल ही भस्म से नहाते हैं, भस्मारती का उद्देश्य महाकालेश्वर का सुबह जागरण होता है, भस्मारती के लिये ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है जिसका कोई शुल्क नहीं है, भस्मारती के पहले हरिओम जल चढ़ाना है तो आपको शुद्ध होकर धोती पहनकर लोटे में जल लेकर जाना होता है, अगर बहुत भीङ है तो ध्यान रखें कि सुबह थोङा जल्दी लाईन में लगें, क्योंकि आजकल लगभग 2000 दर्शनार्थियों को प्रवेश दिया जाता है। कोशिश करें कि ऑनलाईन ही आप भस्मारती की बुकिंग करवा लें, अगर न करवा पायें तो मंदिर के काऊँटर पर फॉर्म जमा करवाकर भी भस्मारती का पास ले सकते हैं, ऑनलाईन बुकिंग के बाद पास का प्रिंट जरूर ले लें और साथ में अपना एवं साथ के दर्शनार्थियों के मौलिक (original) फोटो आई.डी. जरूर रख लें, भस्मारती में फोटो आई.डी. के बिना प्रवेश नहीं दिया जाता है।
महाकालेश्वर जायें और अगर भस्मारती के दर्शन नहीं किये तो ये जान लें कि महाकालेश्वर का जागृत स्वरूप देखने से आप वंचित रह गये।

रामायण के सीताजी स्वयंवर के कुछ प्रसंग (Some context of Sitaji Swyvamvar from Ramayana)

    आज सुबह रामायण के कुछ प्रसंग सुन रहे थे, बहुत सी बातें अच्छी लगीं और शक भी होता कि वाकई में रामायण में ऐसा लिखा हुआ है या ये अपने मन से ही किसी चौपाई का अर्थ कुछ और बताकर जनता को आकर्षित कर रहे हैं, अगर हमें ये जानना है कि सब बातें सत्य है या नहीं तो उसके लिये रामायण पाठ करना होगा, और उसकी हर गूढ़ बात को समझना होगा, यहाँ जानने से तात्पर्य रामायण सुनाने वाले पर प्रश्न चिह्न लगाना नहीं है बल्कि श्रद्धालुओं को सहज ही सारी बातें स्वीकार करने से है, क्योंकि श्रद्धालुओं को उस ग्रंथ का ज्ञान नहीं है।
 
जो बातें अच्छी लगीं, उसके बारे में –
 
    जब रामजी अपने भाईयों के साथ सीताजी के स्वयंवर में पहुँचे, तो जैसा कि सर्वविदित है कि सीताजी के स्वयंवर में भगवान परशुराम के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ानी थी, जब जग के सारे राजा धनुष ही नहीं उठा पाये, तो प्रत्यंचा की तो बात दूर की रही, तब रामजी को उनके गूरूजी ने कहा- जाओ राम इस धनुष को उठाओ और तोड़ दो, इस धनुष ने कई सरों को झुका दिया है, इसलिये इस धनुष का टूटना जरूरी है, और भगवान राम ने धनुष को खिलौने की तरह तोड़ दिया।

    धनुष टूटते ही बहुत हो हल्ला हुआ, और स्वयंवर की शर्त के मुताबिक सीताजी को रामजी को वरमाला पहनानी थी, यहाँ पर एक और बात अच्छी लगी कि पहले के जमाने में केवल वरमाला हुआ करती थी और केवल स्त्री ही पुरूष को माला पहनाकर वर लिया करती थी, उस समय आज की तरह वधुमाला को प्रचलन नहीं था, कि वधु भी वर को माला पहनाये, पहले जब स्त्री माला पुरूष के गले में पहनाती थी तो उसे वरमाला या जयमाला कहा जाता था, कई चीजें कालांतर में हमारी सांस्कृतिक व्यवस्था में जुड़ती गईं।

जब सीताजी रामजी की तरफ जयमाला लेकर बढ़ रही थीं तब सीताजी ने मन ही मन प्रार्थना की – प्रभु, कोई ऐसा प्रसंग उपस्थित करें कि मैं आपको जयमाला पहना पाऊँ, तभी सीताजी ने लक्ष्मण की तरफ देखा और आँखों में ही प्रार्थना की कि रामजी लंबे हैं तो कुछ ऐसा उपक्रम करें कि मैं आसानी से रामजी को जयमाला पहना दूँ, लक्ष्मणजी ने आँखों में ही सीता माँ की आज्ञा स्वीकार कर ली और जब सीताजी रामजी के करीब आईं, तभी लक्ष्मणजी रामजी के चरणों में गिर पढ़े, जैसे ही रामजी लक्ष्मणजी को उठाने के लिये झुके, उसी समय सीताजी ने रामजी को जयमाला पहनाकर वरण कर लिया, रामजी ने लक्ष्मणजी से पूछा – लक्ष्मण चरण वंदन का यह भी कोई समय है, तो लक्ष्मणजी का जबाब था – प्रभू, बड़े भैया के चरण वंदन के लिये कोई समय तो निर्धारित नहीं है, चरण वंदना तो दिन में कभी भी और कितनी भी बार की जा सकती है, बात सही है और हमें भी अपने जीवन में यह अपनाना चाहिये।

दिव्य-नदी शिप्रा (Divine River Kshipra Ujjain)

    अपनी प्राचीनतम, पवित्रता एवं पापनाशकता आदि के कारण प्रसिद्ध उज्जयिनी की प्रमुख नदी शिप्रा सदा स्मरणीय है। यजुर्वेद में शिप्रे अवेः पयः पद के द्वारा इस नदी के स्मरण हुआ है। निरूक्त में शिप्रा कस्मात ? इस प्रश्न को उपस्थित करके उत्तर दिया गया है कि शिवेन पातितं यद रक्तं तत्प्रभवति, तस्मात। अर्थात शिप्रा क्यों कही जाती है इसका उत्तर था शिवजी के द्वारा जो रक्त गिराया वही यहाँ अपना प्रभाव दिखला रहा है नदी के रूप में बह रहा है, अतः यह शिप्रा है।
    शिप्रा और सिप्रा ये दोनों नाम अग्रिम ग्रन्थों में प्रयुक्त हुए हैं। इनकी व्युत्पत्तियाँ भी क्रमशः इस प्रकार प्रस्तुत हुई है – ‘शिवं प्रापयतीति शिप्रा और सिद्धिं प्राति पूरयतीत सिप्रा और कोशकारों ने सिप्रा को अर्थ करधनी भी किया। तदनुसार यह नदी उज्जयिनी के तीन ओर से बहने के कारण करधनीरूप मानकर भी सिप्रा नाम से मण्डित हुई। उन दोनों नामों को साथ इसे क्षिप्रा भी कहा जाता है। यह उसके जल प्रवाह की द्रुतगति से सम्बद्ध प्रतीत होता है। स्कन्दपुराण में शिप्रा नदी का बड़ा माहात्म्य बतलाया है। यथा
नास्ति वत्स ! महीपृष्ठे शिप्रायाः सदृशी नदी।
यस्यास्तीरे क्षणान्मुक्तिः कच्चिदासेवितेन वै।।
    हे वत्स ! इस भू-मण्डल पर शिप्रा के समान अन्य नदी नहीं है। क्योंकि जिसके तीर पर कुछ समय रहने से, तथा स्मरण, स्नानदानादि करने से ही मुक्ति प्राप्त हो जाती है।
    वहीं शिप्रा का उत्पत्ति के सम्बन्ध में कथा भी वर्णित है, जिसमें कहा गया है कि विष्णु की अँगुली को शिव के द्वारा
काटने पर उसका रक्त गिरकर बहने से यह नदी के रूप में प्रवाहित हुई। इसीलिये विष्णु-देहात समुत्पन्ने शिप्रे
! त्वं पापनाशिनी इत्यादि पदों से शिप्रा की स्तुती की गई है। वहीं अन्य प्रसड़्ग से शिप्रा को गड़्गा भी कहा गया है। पञचगङ्गाओं में एक गङ्गा शिप्रा भी मान्य हुई है। अवन्तिका को विष्णु का पद कमल भी कहना नितान्त उचित है। कालिकापुराण में शिप्रा की उत्पत्ति – मेधातिथि द्वारा अपनी कन्या अरून्धती के विवाह-संस्कार के समय महर्षि वसिष्ठ को कन्यादान का सङ्कल्पार्पण करने के लिये शिप्रासर का जो जल लिया गया था, उसी के गिरने से शिप्रा नदी बह निकली बतलाई है। शिप्रा का अतिपुण्यमय क्षेत्र भी पुराणों में दिखाया है
    वर्तमान स्थिति के अनुसार शिप्रा का उद्गम म.प्र. के महू नगर से 11 मील दूर स्थित एक पहाड़ी से हुआ है और यह मालवा में 120 मील की यात्रा करती हुई चम्बल (चर्मण्वती) में मिल जाती है। इसका सङ्गम-स्थल आज सिपावरा  के नाम से जाना जाता है, जो कि सीतामऊ (जिला मन्दसौर) और आलोट के ठीक 10-10 मील के मध्य में है। वहाँ शिप्रा अपने प्रवाह की
विपुलता से चम्बल में मिलने की आतुरता और उल्लास को सहज ही प्रकट करती है।
    उज्जयिनी शिप्रा के उत्तरवाहिनी होने पर पूर्वीतट पर बसी है। यहीं ओखलेश्वर से मंगलनाथ तक पूर्ववाहिनी है। अतः सिद्धवट और त्रिवेणी में भी स्नान-दानादि करने का माहात्म्य है।

मोक्षप्रदा तीर्थ नगरी उज्जयिनी (Ujjain is the place of Salvation)

    तीर्थ शब्द का शास्त्रीय व्युत्पत्ति है – तीर्यते अनेनेति अथवा तरति पापादिकं यस्मादिति जिससे पापादि से मुक्ति मिलती है। अथवा जिससे पार किया जाये। इनके अनुसार तीर्थ का अर्थ है पार करने वाला । पापादि से छुड़ानेवाले नदी, सरोवर, मन्दिर, पवित्र-स्थल, दिव्यभूमि आदि तीर्थ कहे जाते हैं। इनमे स्नान-दान, दर्शन, स्पर्शन, अवलोकन-आवास आदि से पवित्रता प्राप्त होती है, ये भगवत्प्राप्ति में सहायक होते हैं तथा इनके सम्पर्क से मनुष्य के पाप अज्ञातरूप से नष्ट हो जाते हैं। तीर्थों की पुण्यता क्यों है ? इसके बारे में कहा गया है कि
प्रभावातत्भुताद् भूमेः सलिलस्य च तेजसा।
परिग्रहान्मुनीनां च तीर्थानां पुण्यता स्मृता।।
    भूमि के अद्भुत प्रभाव से, जल के तेज से तथा मुनिगणों के परिग्रह से तीर्थों की पुण्यता होती है।
    तीर्थ अनेक प्रकार के कहे गये हैं उनमें भूमि से सम्बद्ध पुण्यस्थान भौमतीर्थ और भगवान के दिव्य-विग्रहों का वास जहाँ हो वे नित्यतीर्थ कहलाते हैं।
    उज्जयिनी इस दृष्टि से भौमतीर्थ भी है और नित्यतीर्थ भी। क्योंकि इसकी भूमि में सृष्टि के आरम्भकाल से ही दिव्य पावन-कारिणी शक्ती रही है। इस भूमि की पुण्यवत्ता के कारण ही यहाँ दिव्य देव-विग्रहों का, विश्णुदेहोद्भूता शिप्रा आदि अन्य नदियों का और तपस्वी-सन्तों का निवास रहा है। यही क्यों ? स्कन्दपुराण के अनुसार तो यहाँ पद-पद पर तीर्थ विराजमान हैं। अवन्ति-खण्ड में यह भी कहा गया है कि महाकाल-वन स्वयं भगवान शिव ने वास किया था, अतः उनके प्रभाव से यहाँ की समस्त भूमि नित्यतीर्थ बन गई । वायुपुराण, लिड्गपुराण, वराहपुराण आदि भी उनसे साक्षात् सम्बन्ध है।

क्रेडिट कार्ड की लेट पेमेन्ट फीस से कैसे बचा जाये (How to avoid Late Payment Fees on Credit Card)

    क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का उपयोग करना भी एक कला है, जो कि हमारे वित्तीय जीवन (Financial Life) के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण है। कई लोग क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना बंद कर देते हैं क्योंकि जब वे खर्च करते हैं और क्रेडिट कार्ड से भुगतान करते हैं तो उन्हें लगता है कि नगद (Cash) तो उनकी जेब से जा नहीं रहा, और क्रेडिट कार्ड का भुगतान बाद में करना है, पर वे यह

नहीं सोचते कि भुगतान तो उन्हें ही करना है, उनके द्वारा खर्च किये गये क्रेडिट कार्ड का भुगतान (Payment) और कोई नहीं करेगा, और अगर निश्चित समय अवधि के अंदर भुगतान नहीं किया जाता है तो उसके देरी से भुगतान के शुल्क (Late Payment Fees) भी भुगतने होंगे और बकाया राशि (Outstanding Amount) पर ब्याज (Interest) भी देय होगा। ब्याज इतना भारी होता है कि इसे भुगतने के बाद क्रेडिट कार्ड धारक (Credit Card Holder) हमेशा याद रखता है, 2 प्रतिशत मासिक याने कि 24 प्रतिशत सालाना, कई क्रेडिट कार्ड कंपनियां 3 प्रतिशत मासिक भी लेती हैं।

क्रेडिट कार्ड हो या डेबिट कार्ड पिन जरूरी (Credit Card or Debit Card pin is mandatory now)

  लेट पेमेन्ट फीस से बचें (Avoid Late Payment Fees) –
    क्रेडिट कार्ड कंपनियां अपने ग्राहक को 50 दिन के क्रेडिट की सुविधा देती हैं, अगर आप निश्चित देय तिथि तक भुगतान नहीं कर पाते हैं तो ब्याज के अतिरिक्त देरी से भुगतान शुल्क (Late Payment Fees) भी देय होती है, क्रेडिट कार्ड के लेट पेमेन्ट फीस से बचने के कुछ उपाय
  1. अपने बचत खाते से क्रेडिट कार्ड को लिंक करें जिससे देय तिथि पर अपने आप भुगतान (Auto Debit Facility) हो जाये ।
  2. अगर आप अपने बैंकखाते से लिंक नहीं करना चाहते तो आखिरी भुगतान तिथि के 3 दिन पहले क्रेडिट कार्ड कंपनी को NEFT से भुगतान (Outstanding payment to Credit Card Bank) कर दें।
  3. अगर चैक (Cheque) से भुगतान कर रहे हैं तो चैक जल्दी ही जमा कर दें, क्योंकि चैक क्लियरिंग (Clearing) में ज्यादा समय लगता है।
  4. अपनी डायरी, मोबाइल में क्रेडिट कार्ड पैमेन्ट के लिये चेतावनी का संकेत (Reminder Alarm) लगा लें ।
     इन उपायों के बावजूद भी अगर लेट पेमेन्ट फीस लग जाती है तो क्रेडिट कार्ड कस्टमर केयर (Credit Customer Care) से बात करें और उन्हें विश्वास दिलवायें कि यह पहली बार हुआ है और आगे से ऐसा नहीं होगा, और वाकई अगर पहली बार आपके साथ यह हुआ है तो आपके क्रेडिट कार्ड पर लगायी गई लेट पेमेन्ट फीस सौ फीसदी आपके खाते में क्रेडिट हो जायेगी।
    लेकिन अगर आप हमेशा ही भुगतान में देरी करते हैं तो लेट पेमेन्ट फीस का भुगतान करने को तैयार रहिये । और हाँ लेट पेमेन्ट फीस आपकी क्रेडिट स्कोर याने कि हिस्ट्री (Credit Score) भी खराब करता है ।

व्याकुलता – चिंतन

    व्याकुलता इंसान को जितनी जल्दी कमजोर बनाती है, उतनी ही जल्दी व्याकुलता से मन को ताकत मिल जाती है। जब भी कोई दिल दहलाने वाली खबर हमें लगती है, हम व्याकुल हो उठते हैं, मन कराहने लगता है, दिमाग काम करना बंद कर देता है और तत्क्षण हम निर्णय लेने की स्थिती में नहीं होते, मन की स्थिती डांवाडोल हो चुकी होती है, आँखों को वस्तुएँ एक से ज्यादा लगने लगती हैं, क्योंकि उस समय हमने कुछ ऐसे सुन लिया होता है जो कि हम सुनना नहीं चाहते, और हम कुछ बुरा सपने में भी नहीं सोच सकते।
    यह सत्य है कि हमारे मन में कई बार अपनों के ही लिये कुछ बुरे ख्याल मन में आते रहते हैं, और कोई भी इस क़टु सत्य को नकार नहीं सकता है, उस समय हमारा मन सोचता है कि कैसे उस समय उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से निपटा
जायेगा। इन सारी चीजों को सोचते समय हम विचलित नहीं होते, वरन् हम अपने आप को दृढ कर रहे होते हैं।
    जीवन में इस तरह के क्षण हरेक की जिंदगी में आते हैं, जिसे हर व्यक्ति अपने अपने तरीके से अपनी क्षमता के अनुसार संचालित करता है, हमारा दिमाग दो भागों में बँटा होता है, जिसमें बायें तरफ का दिमाग बहुत ही ज्यादा सक्रिय रहता है, जिसमें हम तरह तरह की बातें सोचते रहते हैं, विचारों को बुनते गुनते रहते हैं। वहीं दायीं तरफ का दिमाग हमारे शारीरिक प्रबंधन का कार्य करता है। सोते समय हमारा बायीं तरफ का दिमाग आराम करता है और दायीं तरफ का दिमाग सोते समय बायीं तरफ केदिमाग का कार्य करता है, अधिकतर बीमारियों के उत्पन्न होने की वजह भी बायीं तरफ का दिमाग होता है। व्याकुलता बायें हिस्से से ही नियंत्रित होती लगती है।
    व्याकुलता याने कि वह स्थिती जिसमें कि हमारा काबू हमारे ऊपर नहीं होता है, हम अपना नियंत्रण खो देते हैं, हम ऐसी कोई खबर सुनने के बाद अपने ऊपर किसी को भी हावी हो जाने देते हैं, हमें अगर कोई भी इस समय सहारा देता है खासकर वह जो कि हमारे बहुत नजदीकी हो, जिसका हमारी जिंदगी में बहुत महत्व हो, तो हमारी व्याकुलता कुछ हद तक कम हो जाती है।
ये विचार मैंने अपने अनुभव के आधार पर लिखे हैं ।