पासपोर्ट बनवाने के चक्कर में घनचक्कर… सरकारी दफ़्तर… वेबसाईट पर कानून कुछ ओर और दफ़्तरों में कुछ और ?

    हमें यकायक सूझी कि चलो अपना खत्म हो चुका पासपोर्ट का नवीनीकरण करवा लिया जाये। पहले हमने पासपोर्ट की आधिकारिक वेबसाईट पर जाकर जानकारी ली और फ़िर कुछ चीजों में संशय था तो एक एजेन्ट घर के पास ही है, उसके पास चले गये कि आपसे पासपोर्ट बनवायेंगे बताईये क्या क्या लगेगा, तो सबसे पहले उसने अपनी फ़ीस बताई जो कि लगभग २००० रुपये थी और पासपोर्ट की अलग १००० रुपये, और तमाम तरह के कागजात भी बोले गये। हम तो हक्के बक्के रह गये कि वेबसाईट पर तो इतना सब कुछ नहीं दे रखा है फ़िर यह नये कागजात कहाँ से आ गये।

नवीनीकरण की प्रक्रिया में लगने वाले कागज वेबसाईट के अनुसार

१. पुराना पासपोर्ट

२. एड्रेस प्रूफ़ (कोई भी एक और राशन कार्ड के साथ एक और पते का सबूत)

यह पासपोर्ट की आधिकारिक साईट पर दे रखा है –

a) Proof of address (attach one of the following):

Applicant’s ration card, certificate from Employer of reputed companies on letter head, water /telephone /electricity bill/statement of running bank account/Income Tax Assessment Order /Election Commission ID card, Gas connection Bill, Spouse’s passport copy, parent’s passport copy in case of minors. (NOTE: If any applicant submits only ration card as proof of address, it should be accompanied by one more proof of address out of the above categories).

३. शादी का प्रमाणपत्र

    हम तीनों चीजें साथ में लेकर गये फ़िर भी दो दिन धक्के खाने के बाद भी पासपोर्ट अधिकारी कहते हैं कि एड्रेस प्रूफ़ एक ओर चाहिये हमने कहा कि वेबसाईट पर तो एक ही प्रूफ़ की आवश्यकता बताई गई है, जो कि हम साथ में लाये हैं, तो बोलते हैं कि वहीं बनवा लो, यहाँ तो यह कागज भी चाहिये। हम बेरंग वापिस आ गये।

वहाँ लाईन में खड़े लोगों से बतियाया तो पता चला कि कागजात के ऊपर जितनी बहस इनसे करो ये लोग केस उतना ही खराब कर देते हैं, यहाँ तो पूरी तरह से इनकी दादागिरी चलती है। वह भी सभ्य भाषा में…

    अगर एड्रेस प्रूफ़ दो चाहिये तो वेबसाईट पर भी लिखना चाहिये कि उसके बिना काम नहीं होगा। हाँ मानते हैं कि पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया बहुत संवेदनशील है, पर इसके लिये ही तो पोलिस वेरिफ़िकेशन भी होता ही है।

    वहाँ पर बहुत सारे लोगों से बातें हुई जो कि हमारी तरह ही पासपोर्ट की लाईन में लगे हुये थे, तो पता चला कि अगर सीधे आओ तो कम से कम ये लोग ३-४ चक्कर तो लगवाते ही हैं, फ़िर ऑनलाईन पासपोर्ट का आवेदन क्यों पासपोर्ट की आधिकारिक वेबसाईट पर रखा गया है, यह समझ में नहीं आया, सीधे सीधे लिख देना चाहिये कि एजेन्ट के द्वारा आओ तो काम जल्दी हो जायेगा।

    अगर पासपोर्ट के कागजात की प्रक्रिया पूर्ण हो भी जाये तो उसके बाद पोलिस वेरिफ़िकेशन में भी पोलिस की जेब गरम किये बिना आपका काम नहीं होता है, वे लोग फ़ाईल ही दबा देते हैं।

    पासपोर्ट कार्यालय में भीड़ देखकर और काम करने वालों को देखकर बेहद गुस्सा आ रहा था, या तो ऑनलाईन सेवा से कम लोगों को बुलाना चाहिये या फ़िर और भी लोगों को कागजात को जाँचने के लिये लगाना चाहिये, और जो भी कागजात की कमी है वह एक बार में ही बता देना चाहिये, असल में होता यह है कि जब काऊँटर पर अधिकारी कागजात जाँचते हैं तो जहाँ भी पहला कागजात अपूर्ण पाया जाता है, वे अधिकारी वहीं रुक जाते हैं आगे के कागजात की जाँच ही नहीं करते हैं।

    सरकारी दफ़्तर की मनमानी का शिकार आखिर हम हो ही गये हैं। पासपोर्ट नवीनीकरण की प्रक्रिया इतनी जटिल बनाई हुई है जिसे कि सरल बनाने की आवश्यकता है, क्योंकि पहले ही पासपोर्ट है। अब इच्छा है कि विदेश मंत्रालय से संपर्क करके इसके बारे में ज्यादा जानकारी ली जाये। और भी कोई तरीका हो तो बतायें। क्या आर.टी.आई. दायर की जा सकती है ?

जीवन का उद्देश्य क्या है ? (Confusing…)

    आखिर इस जीवन का उद्देश्य क्या है, कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है। यह प्रश्न मेरे अंतर्मन ने मुझसे पूछा तो मैं सोच में पड़ गया कि वाकई क्या है इस जीवन का उद्देश्य… ?

    सबसे पहले मैं बता दूँ कि मैं मानसिक और शारीरिक तौर पर पूर्णतया स्वस्थ हूँ और मैं विषाद या उदासी की स्थिती में भी नहीं हूँ, बहुत खुश हूँ। पर रोजाना के कार्यकलापों और जीवन के प्रपंचों को देखकर यह प्रश्न अनायास ही मन में आया।

    थोड़ा मंथन करने के बाद पाया कि मुझे इस प्रश्न का उत्तर नहीं पता है, कि जीवन का उद्देश्य क्या है, क्या हम निरुद्देश्य ही जीते हैं, हम खाली हाथ आये थे और खाली हाथ ही जाना है।

    जैसे कि मैंने बचपन जिया फ़िर पढ़ाई की, मस्तियाँ की फ़िर नौकरी फ़िर शादी, बच्चे और अब धन कमाना, और बस धन कमाने के लिये अपनी ऐसी तैसी करना। थोड़े वर्ष मतलब बुढ़ापे तक यही प्रपंच करेंगे फ़िर वही जीवन चक्र जो कि मेरे माता-पिता का चल रहा है वह होगा और जिस जीवन चक्र में अभी मैं उलझा हुआ हूँ, उस जीवन चक्र में उस समय तक मेरा बेटा होगा।

    यह सब तो करना ही है और इसके पीछे उद्देश्य क्या छिपा है, कि परिवार की देखभाल, उनका लालन पालन, बच्चों की पढ़ाई फ़िर अपनी बीमारी और फ़िर सेवानिवृत्ति और फ़िर अंत, जीवन का अंत। पर फ़िर भी इस जीवन में हमने क्या किया, यह जीवन तो हर कोई जीता है। समझ नहीं आया।

    यह सब मैंने अपने गहन अंतर्मन की बातें लिख दी हैं, मैं दर्शनिया नहीं गया हूँ, केवल व्यवहारिक होकर चिन्तन में लगा हुआ हूँ, और ये चिन्तन जारी है, जब तक कि जीवन का उद्देश्य मिल नहीं जाता है।

इंडिब्लॉगर पर वोट कैसे दें ? (Tutorial for Voting on Indiblogger)

    मैंने पिछली पोस्ट [आखिर हिन्दी ब्लॉगर वोट देने में इतने कंजूस क्यों हैं ?] लिखी थी तो कुछ ईमेल और टिप्पणियों से मुझे लगा कि बहुत सारे ब्लॉगर्स को पता ही नहीं है कि इंडिब्लॉगर में वोट कैसे दिया जाता है।

    इंडिब्लॉगर में वोट देने के लिये पहले अपने ब्लॉग को इंडिब्लॉगर पर साइन अप  करवाना होता है, फ़िर मानवीय प्रक्रिया से इसे अनुमोदित किया जाता है।

    इसमें आप पहले इंडिब्लॉगर की साईट पर जायें फ़िर साईन इन करें और फ़िर इंडिवाईन पर चटका लगायें और बायीं तरफ़ Trending Topics में प्रतियोगिताओं की जानकारी दी होती है। जैसे कि अभी नया टॉपिक है ३ जी लाईफ़ ब्लॉगर कॉन्टेस्ट, पर चटका लगायें, तो आपको इस प्रतियोगिता की सारी प्रविष्टियाँ दिखने लगेंगी।

    फ़िर जिस पोस्ट को वोट देना हो उस पोस्ट के नीचे बटन दिखाई देगा [View post to Promote] । इस पर चटका लगाने से पोस्ट नई विन्डों में खुल जायेगी, उसे पढ़ने के बाद वापिस इंडिब्लॉगर वाली विन्डो में जाइये। [View post to Promote] वाला बटन अब [Promote This Post] हो जायेगा, अब इस बटन पर चटका लगाईये, तो वोट के नंबर बढ़ जायेंगे और [Promoted] लिखा हुआ आ जायेगा। बस हो गया आपका वोट।

    आप सीधे इन लिंकों पर चटका लगाकर भी साईन इन करने के बाद वोट दे सकते हैं।

प्यार में बहुत उपयोगी है ३ जी तकनीक (Use of 3G Technology in Love..)

पति की मुसीबत ३ जी तकनीक से (Problems of Husband by 3 G Technology)

आखिर हिन्दी ब्लॉगर वोट देने में इतने कंजूस क्यों हैं ?

   मैंने इंडिब्लॉगर में अपनी दो पोस्टें लगायी हैं, और सभी पाठकों और ब्लॉगरों से निवेदन किया था कि कृप्या पोस्ट पर वोटिंग करें, पर हमारे हिन्दी ब्लॉगर बहुत ही कंजूस हैं।

    अगर पोस्ट पसंद नहीं आई तो कम से कम टिप्पणी करके ये तो बता दीजिये कि भई आपकी पोस्ट अच्छी नहीं है, जरा अच्छा लिखिये, और यह प्रतियोगिता के काबिल नहीं है, आपने क्यों प्रतियोगिता में भाग लिया, इसलिये हमने वोटिंग नहीं की।

    हिन्दी ब्लॉग जगत से निवेदन है कि देखिये हमारी दो प्रविष्टियाँ हमने इंडिब्लॉगर “टाटा डोकोमो ३जी लाईफ़ प्रतियोगिता” में दी हैं, अगर आपको पसंद आती हैं तो इनको प्रमोट कीजिये, इस प्रतियोगिता में कुल ९५ प्रविष्टियाँ हैं, और हिन्दी ब्लॉग जगत से केवल ३ प्रविष्टियाँ हैं, जिसमें से दो मेरी हैं।

    यहाँ पर जिसको ज्यादा वोट होंगे उसके जीतने के ज्यादा अवसर होंगे। हिन्दी को आगे बढ़ाईये और हमारी दोनों प्रविष्टियों पर पसंद के चटके लगाईये। हर इंडिब्लॉगर सदस्य हर प्रविष्टी को दो वोट दे सकता है, मतलब कि दो बार प्रमोट कर सकता है।

    निम्न दो प्रविष्टियों हमने सम्मिलित की हैं, इन पर चटका लगाकर प्रविष्टी पढ़कर दो दो चटके लगाईये।

प्यार में बहुत उपयोगी है ३ जी तकनीक (Use of 3G Technology in Love..)

पति की मुसीबत ३ जी तकनीक से (Problems of Husband by 3 G Technology)

शायद हमारी बात झूठी हो जाये कि हिन्दी ब्लॉगर वोट देने में कंजूस हैं !

हम विरोध करने से पीछे क्यों हटते जा रहे हैं ?

    आज सुबह से बहुत सारी पोस्टें पढ़ीं, जिसमॆं सुरेश चिपलूनकर जी की पोस्ट ने बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर दिया। क्यों हम लोग विरोध करने से पीछे हटते जा रहे हैं ?

    यहाँ मैं केवल किसी एक मुद्दे के विरोध की बात नहीं कर रहा हूँ, यहाँ मैं बात कर रहा हूँ हर विरोध की, चाहे वह कहीं पर भी हो, गलत बात का विरोध, घर में, बाहर, कार्य स्थान पर कहीं पर भी ! क्यों ?

    मानसिकता क्यों ऐसी होती जा रही है कि हमें क्या करना है, जो हो रहा है होने दो, विरोध दर्ज करवाने से भी क्या होगा, वगैराह वगैराह, क्या यही हमारी भारतीय संस्कृति रही है !!

    या यह प्रवृत्ति हम धीरे धीरे पश्चिमी सभ्यता से उधार लेकर अपने जीवन में पूरी तरह से उतार चुके हैं, मन उद्वेलित है, कुछ समझ नहीं आ रहा है।

यह पोस्ट शायद १ नवंबर को लिखी थी, पर व्यस्तता और कुछ आलस्य के कारण छाप नहीं पाया।

बेटे की जन्मदिन की बातें.. मेरी यादें… विवेक रस्तोगी

17102010(063)     आज हमारे बेटे हर्षवर्धन रस्तोगी का जन्मदिन है, आज हमारे बेटेलाल ६ वर्ष के हो चुके हैं, समय कितनी जल्दी बीत जाता है, पता ही नहीं चलता है। आज से ठीक ६ वर्ष पूर्व सुबह १० बजे शल्य चिकित्सक ने शल्यकक्ष से बाहर आकर हमें बेटे के होने पर बधाई दी थी, और जच्चा और बच्चा स्वस्थ होने की सूचना दी थी।

    जन्म से ठीक दो दिन पूर्व हम अपने चिकित्सक के पास गये थे तो उन्होनें बताया कि बच्चे के साथ गर्भ में कुछ समस्या है और सामान्य रुप से बच्चा बाहर नहीं आ पायेगा, इसलिये जच्चा और बच्चा के लिये शल्यक्रिया ही ठीक है, और हमारे चिकित्सक ने बोला कि अगर चाहिये तो किसी और चिकित्सक के पास भी दिखा सकते हैं और दूसरा मत भी ले सकते हैं, तो हमने दूसरा मत एक और स्त्री विशेषज्ञ से लिया और सारे रिपोर्ट्स दिखाये, तो उन्होंने भी शल्य क्रिया ही ठीक बताई।

    यह तय हो चुका था कि आने वाले बच्चे का जन्म शल्यक्रिया के द्वारा ही उचित तरीका है, तो हमने अपने ज्योतिष दोस्त से सही जन्म समय पूछा, तो उन्होंने बोला कि ४ नवंबर को गुरु पुष्य नक्षत्र है, और सुबह का समय दिया। हमने एकदम अपने चिकित्सक के पास आकर ४ नवंबर को सुबह शल्यक्रिया करने के लिये आरक्षित कर लिया।

    ज्योतिष दोस्त का कहना था कि हम सारी ग्रह स्थितियों के अच्छे या अनुरुप होने तक रुक नहीं सकते हैं, तो जो भी जल्दी से जल्दी अच्छी मुहुर्त मिलता है उसी मुहुर्त पर केक कटवा लीजिये (शल्यक्रिया करवा लीजिये)।

    सुबह ६ बजे चिकित्सक ने अपने निजी चिकित्सालय में बुलवा भेजा था, और निर्देश भी दिये थे कि क्या खाना है कब खाना है, कौन सी दवाई लेनी है वगैराह वगैराह। सुबह ५ बजे  हम उठे कि जल्दी से नहा लेते हैं और तैयार होकर पूजा करने के बाद चिकित्सालय जायेंगे। तभी पास के घर से विलाप की आवाजें आने लगीं, पास के घर में आंटी जी का देहान्त हो गया था, हम लोग जल्दी से जल्दी घर से निकलकर चिकित्सालय जाने के लिये तैयार होने लगे। और मन में यह भी आया कि देखिये “प्रकृति का नियम कि एक तरफ़ एक जिंदगी पूरी हो गई और दूसरी तरफ़ एक नई जिंदगी इस दुनिया में आने वाली है।” कितना अनोखा नियम भगवान ने बनाया हुआ है, शायद इसीलिये कि अपने जीवन में सभी परोपकार की भावना से जियें पर इंसान सब भूलकर भौतिक कार्यकलापों में लिप्त रहते हैं। आप लोग भी सोच रहे होंगे कि कहाँ मैं प्रवचन देने लग गया।

    सुबह हम बिल्कुल समय पर ६ बजे चिकित्सालय पहुँच गये और वहाँ उपस्थित कर्मचारियों ने अपना कार्य शुरु कर दिया, जो भी इंजेक्शन और दवाईयाँ देनी थीं, दे दी गईं, बिल्कुल उसी समय तक शल्यकक्ष में ३ शल्यक्रिया हो चुकी थीं, और फ़िर हमारा नंबर आया तो एक चिकित्सक ने हमसे आकर बोला कि एक घंटे बाद शल्यक्रिया के लिये लेते हैं, १० बज रहे थे, हमारे मुहुर्त का समय हो रहा था, तो जिन चिकित्सक को हम दिखाते थे उन्हें कहा कि एक घंटॆ बाद का समय दिया जा रहा  है, और हमने तो समय दो दिन पहले ही आरक्षित करवा लिया था। तब वही चिकित्सक अपने साथ शल्यकक्ष में ले गयीं और उन चिकित्सक को बोलीं कि “इनका मुहुर्त समय है, और अभी ही शल्यक्रिया करनी है”।”, बस फ़िर क्या था, १० मिनिट बाद ही हमें शल्य चिकित्सक ने बताया कि बच्चा हो गया है और जच्चा बच्चा दोनों सकुशल हैं, पिता बनने की खुशी में कब हमारे आँख भर आयीं, पता ही नहीं चला, तभी पापा आ गये तो मैंने रुँधे गले से कहा “पापा मैं पापा बन गया।”

   जब जच्चा और बच्चा को बाहर लाया गया, तो मेरी घरवाली याने कि जच्चा कि आँखों में भी खुशी के आँसू थे, अपनी इतनी बड़ी शल्यक्रिया होने के बाबजूद उफ़्फ़ तक नहीं की, तब से तो मेरी नारी के लिये श्रद्धा और भी बढ़ गई।

    मेरा बच्चा मेरी गोद में था, जब अपने निजी कक्ष में पहुँचे तब पता चला कि लड़का है, उसके पहले मैंने जानने की कोशिश ही नहीं की थी, कि लड़का है या लड़की। बस बच्चे की चाहत थी, कि अच्छॆ से स्वस्थ हो।

    तो ये थी मेरे बेटे हर्ष के जन्मदिन की बातें, और फ़िर तो बधाई देने वालों का, मिलने वालों का तांता लगा हुआ था, और मैं खुद के लिये एक अजब सी अनुभूति महसूस कर रहा था।

दीवाली आते ही ए.टी.एम. खाली… क्या आर.बी.आई. को ए.टी.एम. के लिये नियम निर्देशिका नहीं बनानी चाहिये।

    out of service atm दीवाली का त्यौहार शुरु हो चुका है, और खरीदारी का दौर शुरु हो चुका है, वैसे तो प्लास्टिक करंसी का ज्यादा उपयोग हो रहा है पर बहुत सारे लोग क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से भुगतान नहीं लेते और बहुत सारे उपभोक्ता कार्ड का उपयोग करने से डरते हैं, इसलिये वे लोग नकद व्यवहार ही करते हैं।

    नकद व्यवहार के लिये उपभोक्ता ए.टी.एम. पर ज्यादा निर्भर है, क्योंकि आजकल अगर बैंक में जाकर पैसे निकालना हो तो ज्यादा समय लगता है, और ए.टी.एम. से बहुत ही कम। बैंक में जाकर नकद निकालने का समय १०-१५ मिनिट हो सकता है, और फ़िर चेकबुक साथ में ले जाना होती है, पर ए.टी.एम में अपना कार्ड स्वाईप किया और अपना कूटशब्द डालते ही नकद आपके हाथ में होता है।

    मंदी के बाद की यह पहली दीवाली है लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं, बाजार सजे हुए हैं और लोगों के चेहरे पर खुशी है। अक्सर देखा जा रहा है कि त्यौहार के समय ए.टी.एम. नकदी की समस्या से झूझ रहे होते हैं। ए.टी.एम. के बाहर एक बोर्ड लगा दिया जाता है “ए.टी.एम. अस्थायी तौर पर बंद है”, पर इसका कोई कारण नहीं लिखा होता है।

    जैसे बैंकों के लिये नकद संबंधी नियम हैं, या बैंके नकद कम न पड़े इसका ध्यान रखती हैं, तो उन्हें ए.टी.एम. का भी नकद प्रबंधन अच्छे से करना चाहिये। इसके लिये आर.बी.आई. को नियम निर्देशिका बनाना चाहिये कि नकद के अभाव में ए.टी.एम. बंद ना हों, नकद प्रवाह के लिये किसी को जिम्मेदार बनाना ही चाहिये, जिससे आम जनता को तकलीफ़ नहीं हो।

मेरे बेटे हर्ष का ब्लॉग आज से शुरु किया है।

 

    आज से मेरे बेटे हर्ष ने ब्लॉगिंग शुरु की है, हर्ष के ब्लॉग पर आप यहाँ चटका लगाकर जा सकते हैं। वैसे तो तकनीकी रुप से अभी मैं ही उसकी सहायता कर रहा हूँ, पर पोस्ट में जो भी लिखा है, वह उसने अपने आप लिखा है और अपनी मनमर्जी से लिखा है, मैंने उसकी फ़ार्मेटिंग करने में मदद की है।
   अब उसे धीरे धीरे तकनीकी चीजें भी सिखा दूँगा, जैसे कि ब्लॉग पर लॉगिन कैसे करें फ़िर नयी पोस्ट कैसे लिखें या पुरानी पोस्ट कैसे एडिट करें इत्यादि। मेरा बेटा अभी केवल ६ वर्ष का ४ नवंबर को होगा, परंतु ब्लॉगिंग शुरु करवाने के पीछे मेरा उद्देश्य छिपा है, उसकी लेखन क्षमता को उभारने के लिये, जो गप्पें या बातें वह सोचता है करता है वह खुद ही लिखे, जिससे उसे पता चले कि क्या सही है क्या गलत है, ब्लॉगिंग से उसकी सृजन क्षमता में भी विस्तार होगा और वह अपनी उम्र के बच्चों में थोड़ा अलग भी होगा।
आज जब हर्ष ने अपनी पहली पोस्ट लिखी तो उसके बाद उसकी खुशी देखते ही बनती थी, बार बार मुझे बोल रहा था “थैंक्यू डैडी, ब्लॉग के लिये, आज मैंने अपनी पहली पोस्ट लिखी है, मैंने अपना परिचय खुद लिखा, वाऊ डैडी”।
पहली पोस्ट लिखने के बाद वह अपने कार्टून, गेम्स, फ़िल्मों ….. और भी बहुत कुछ के बारे में लिखने को लालायित है, मैंने समझाया कि रोज एक टॉपिक पर कुछ लाईन लिखो और पोस्ट करो, कभी अपने होमवर्क के बारे में भी बताओ अपनी एक्टिविटीस के बारे में भी बताओ, अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताओ, आपने क्या पढ़ा वह भी बताओ। जो भी सबको बताने की इच्छा हो वह बताओ।
ब्लॉग लेखन से हर्ष के अंदर आत्मविश्वास आयेगा, कम्यूनिकेशन अच्छे से कर पायेगा और लिखने के लिये बहुत कुछ ठीक से करेगा।
अब मैं धीरे धीरे हर्ष को ब्लॉग के बारे में तकनीकी जानकारी भी देना शुरु करूँगा, जिससे वह स्वतंत्र रुप से लेखन कर पाये, हाँ उसका मेल बॉक्स और ब्लॉग मेरी कड़ी निगरानी में रहेगा।

 

३ जी तकनीकी पर मेरी लिखी हुई पोस्टों पर भी वोट दें

 

 

http://www.indiblogger.in/indipost.php?post=37482 [प्यार में बहुत उपयोगी है ३ जी तकनीक 
(Use of 3G Technology inLove..)]

 

http://www.indiblogger.in/indipost.php?post=37472 [पति की मुसीबत ३ जी तकनीक से(Problems of Husband by 3 G Technology)] 

प्यार में बहुत उपयोगी है ३ जी तकनीक (Use of 3G Technology in Love..)

यह पोस्ट 3G life blogger contest के लिये लिखी गई है, जो कि टाटा डोकोमो द्वारा आयोजित की गई है।
यह पोस्ट इंडीब्लॉगर प्रतियोगिता के लिये लिखी गई है, कृप्या अपनी वोटिंग करें । चटका लगायें।
इसके पहले की पोस्ट भी देखें  – [पति की मुसीबत ३ जी तकनीक से (Problems of Husband by 3 G Technology)] वोट जरुर दीजिये
    क्लास चल रही है, सामने प्रोफ़ेसर अंग्रेजी भाषा में अपना विषय इतिहास धड़ाधड़ पढ़ाये जा रहे हैं, राशि का पूरा ध्यान बोर्ड पर है और अकबर के बारे में पढ़ाया जा रहा, ध्यान लगाकर सुन रही है। साथ ही महत्वपूर्ण बिंदुओं को कॉपी पर नोट भी कर रही है, और संबंधित लाईनों को किताबों में चिन्हित भी कर रही है, तभी उसके मोबाईल में रोशनी आने लगती है और झुप्प से सामने एक बहुत ही जाना पहचाना नंबर और एक प्रिय नाम और फ़ोटो जो उसे बहुत ही पसंद है आने लगता है।
    कितनी बार मना किया है कि जब कॉलेज में हूँ तो फ़ोन न किया करे, पर एक ये हैं कि जब देखो फ़ोन खटखटा देते हैं, मोबाईल को स्टैंड पर लगाकर अपनी डेस्क पर सामने रख दिया और वीडियो कॉल पर एक्सेप्ट का बटन दबा दिया, अब सामने प्रिय दिखाई दे रहा था, और उधर प्रेमी की स्क्रीन पर राशि का चेहरा चमक रहा था। राशि ने मोबाईल म्यूट पर रखा था, कि कहीं कोई स्पीकर की आवाज क्लास में न आये।
    उधर प्रिय राशि को तरह तरह के इशारे करके डिस्टर्ब करने की कोशिश कर रहा था, राशि तरह तरह की मुख मुद्राएँ बनाकर तो कभी अंगूठा दिखाकर उसे चिढ़ा रही थी। पास में बैठी सीमा देखकर मुस्करा रही थी और राशि को बार बार कोहनी मार रही थी। सामने क्लॉस में अकबर जोधाबाई का लेक्चर चल रहा था और यहाँ क्लॉस में बैठी राशि और उससे दूर… बहुत दूर .. ऑफ़िस में बैठे प्रिय का नैन मटक्का चल रहा था।
    प्रिय है कि मानता ही नहीं, अब मैं यहाँ पढ़ाई पर ध्यान दूँ या प्रिय की तरफ़ ?, प्रिय का फ़ोन करने का समय निश्चित नहीं होता है, जब भी देखने की इच्छा हुई, वीडियो कॉल कर दिया। राशि गुस्सा होती तो कहता “अच्छा बाबा एक शब्द नहीं बोलूँगा, न ही चेहरे बनाकर तुमको डिस्टर्ब करूँगा, मैं तो तुमको केवल देखना चाहता हूँ, तुम इस समय मेरे पास नहीं हो सकतीं तो इतनी दूर से मैं देख तो सकता हूँ, आखिर टाटा डोकोमो की 3 G तकनीक का कुछ तो फ़ायदा मैं उठाऊँ”
    एक दो दिन ठीक रहता फ़िर वही तरह तरह के चेहरे बनाकर राशि को दिखाता तो राशि भी मुस्कराकर रह जाती, उधर क्लॉस में प्रोफ़ेसर को लगता कि राशि को विषय में ज्यादा ही रस आ रहा है।
    राशि और प्रिय Tata Docomo 3G तकनीक का अपने प्यार में भरपूर उपयोग कर रहे हैं। ये है 3 G life|
यह पोस्ट 3G life blogger contest के लिये लिखी गई है, जो कि टाटा डोकोमो द्वारा आयोजित की गई है।
यह पोस्ट इंडीब्लॉगर प्रतियोगिता के लिये लिखी गई है, कृप्या अपनी वोटिंग करें । चटका लगायें।

कुछ करना चाहता हूँ केवल अपने लिये … मेरी कविता .. विवेक रस्तोगी

मुक्ति चाहता हूँ

इन सांसारिक बंधनों से

इन बेड़ियों को

तोड़ना चाहता हूँ

रोज की घुटन से

निकलना चाहता हूँ

अब..

जीना चाहता हूँ

केवल अपने लिये

कुछ करना चाहता हूँ

केवल अपने लिये …