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सीधे हाथ के अंगूठे का महत्व और होने वाली तकलीफ़ें |

अंगूठे का महत्व तब समझ में आया जब अंगूठे में तकलीफ़ हुई, पता नहीं कितनी ही कामों में तकलीफ़ हो रही है, वह तो जब काम करने जाओ तो पता चलता है कि या तो हम यह कार्य नहीं कर सकते हैं या फ़िर बिना अंगूठे के काम करने में कितनी तकलीफ़ होती है।जब तक शरीर के सारे अंग अच्छे से चलते रहते हैं, हमें कोई फ़िक्र नहीं होती है, परंतु जैसे ही किसी भी अंग में परेशानी होती है या फ़िर हल्की चोट भी होती है तो हर समय दिमाग उधर ही लगा रहता है, क्योंकि हर समय शारीरिक त्रंत्र से दिमाग को सिग्नल मिलते रहते हैं, कहाँ तकलीफ़ है।

सीधे हाथ के अंगूठे में लगने के कारण कुछ तकलीफ़ें –

१. जेट चलाने में उल्टे हाथ का प्रयोग करना पड़ा।

२. मोबाईल उपयोग करने के लिये उल्टे हाथ का प्रयोग करना पड़ा।

३. बटन लगाने के लिये उल्टे हाथ के अंगूठे पर निर्भर होना पड़ा।

४. जिप बंद करने में भी अंगूठे का बहुत योगदान है।

५. हेलमेट के लॉक को बंद करने के लिये अंगूठे को छोड़ दूसरी ऊँगलियों पर निर्भर होना पड़ा। जो कि वाकई बहुत कष्ट्दायक है।

६. बेल्ट का लॉक लगाने के लिये भी अंगूठा बहुत मददगार होता है।

७. की-बोर्ड पर स्पेस बटन दबाने के लिये उल्टे हाथ के अंगूठे का प्रयोग करना पड़ रहा है।

८. खाना खाने के लिये भी उल्टे हाथ का प्रयोग करना पड़ रहा है, क्योंकि रोटी का कौर तोड़ने में सीधे हाथ के अंगूठे का बहुत बड़ा योगदान है।

८. पानी की बोतल का ढक्कन खोलने में भी अंगूठे का बहुत बड़ा योगदान है।

९. सुबह टूथब्रश भी उल्टे हाथ से करना पड़ रहा है।

१०. टीवी का रिमोट भी उल्टे हाथ से उपयोग करना पड़ रहा है।

११. ताला लगाने के लिये उल्टे हाथ के अंगूठे का प्रयोग करना पड़ रहा है।

१२. इलेक्ट्रिक प्लग में प्लग करने के लिये भी उल्टे हाथ का सहारा लेना पड़ रहा है।

१३. हमारे लेपटॉप में यू.एस.बी. सीधे हाथ की तरफ़ है तो अब पेन ड्राईव लगाने के लिये पहले लेपटॉप को पूरा घुमाना पड़ता है फ़िर पेन ड्राईव लगाना पड़ती है।

१४. फ़ीता बांधने में परेशानी होने के कारण बिना फ़ीते का जूता पहना या फ़िर चप्पल।

१५. सारे क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड पर्स में आगे जेब में होने से पर्स भी उल्टे हाथ से प्रयोग करना पड़ रहा है और कार्ड निकालने के लिये भी उल्टे हाथ का अंगूठा प्रयोग करना पड़ रहा है।

१६. जेब में भी सारी चीजों की जगह बदल गयी हैं, सारी दायीं तरफ़ की चीजें बायीं तरफ़ आ गई हैं।

१७. बाईक चलाने में एक्सलेटर के लिये केवल ऊँगलियों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, और थोड़ा अंगूठे के निचले हिस्से की मदद लेना पड़ रही है।

१८. घड़ी बांधने में भी अब मध़्यमा ऊँगली का सहारा लेना पड़ रहा है।

१९. दरवाजे के चिटकनी लगाने के लिये भी उल्टे हाथ का ही प्रयोग करना पड़ रहा है।

२०. कपड़े पर चिपकी लगाने के लिये भी उल्टे हाथ का प्रयोग करना पड़ रहा है।

अब हाथ में तकलीफ़ थोड़ी कम है, आगे के उपचार के लिये चिकित्सक महोदय के पास जाने के बाद कल पता चलेगा और कितने दिन लगेंगे ठीक होने में।

भयावह स्वप्न – ड्रेगन, बख्तरबंद ट्रक और पेड़ पर हरे पत्तों को ट्रांसप्लांट करना

उफ़्फ़ रात को भयावह स्वप्न आ रहे हैं पता नहीं किस बात का अंदेशा है ।
स्वप्न १
साड़ी में लिपटी हुई माता के ऊपर ड्रेगन की नजर है और ड्रेगन के मुँह से आग निकल रही है, आग निकालते हुए बड़े बड़े यंत्र बेरहमी से बड़ते जा रहे हैं, और माता के सैनिक अपने खटारा आग निकालने वाले यंत्रों के साथ चुपचाप खड़े हैं, उनके दोनों हाथ सफ़ेद टोपी और खादी पहने लोगों ने खादी के सूत से पीछे की और बाँध रखे हैं, इतना भयावह स्वप्न देख आँख खुल गई।
स्वप्न २
हमारी सशस्त्र सेना युद्ध के मैदान में ट्रकों से जा रही है, बड़े बड़े बख्तरबंद ट्रक हैं, जैसे ही पहाड़ी इलाका आया, ट्रकों की साँसें फ़ूलने लगीं और जवानों को पैदल ही युद्ध के मैदान की और बढ़ना पढ़ रहा है और दुश्मन अपने आधुनिक शस्त्रों के सहारे कबका सीमारेखा पार कर चुका है, दूसरी और सफ़ेद टोपी और खादी वाले लोग बड़े बड़े बक्से लेकर अपने चार्टड विमानों की और जा रहे हैं। यह तो सारी जनता को पता है तो ये स्वप्न आसानी से झेल गये।
स्वप्न ३
एक गोल महत्वपूर्ण इमारत में सेना मार्च करती हुई दाखिल हुई और कानून बनाने के लिये कब्जा कर लिया गया, सारे खादी खद्दर वालों को तोप के मुँह पर बाँधकर जनता के बीच ले जाया जा रहा है, बख्तरबंद गाड़ियाँ दौड़ी जा रही हैं और सशस्त्र सैनिक लोगों का खून पीने वाले विभागों के अफ़सरों के यहाँ धावा कर बख्तरबंद गाड़ियों में हरे हरे पत्ते भर रहे हैं, सारे पत्तों को वापिस पेड़ पर ट्रांसप्लांट करने के लिये वैज्ञानिकों की बहुत बड़ी फ़ौज लगी हुई है, और वहीं कुछ खाकी में लिपटे हुए लोग अपना डंडा लेकर डराने की कोशिश कर रहे हैं, एक सैनिक की फ़ूँक से ही सब हवा में उड़ते हुए अंतरिक्ष में अंतर्धान हो जाते हैं, पेड़ पर हरे पत्तों को ट्रांसप्लांट करना जारी है, साथ के सीमारेखा वाले हरे होते हुए पेड़ को देखकर थरथर काँपने लगते हैं।
पता नहीं ये स्वप्न कैसे हैं, कहते हैं कि कभी स्वप्न भी सच्चे हो जाते हैं।
नोट – यह हमारे सच्चे स्वप्नों पर आधारित है किसी और घटना से जोड़कर ना देखा जाये।

सावधान ! कहीं बैंक खाते से पैसा गायब ना हो जाये (Be Alert ! for your money in Bank..)

हमारे मित्र के साथ एक दिन बड़ा धोखा हुआ, रात को दो बजे एकाएक उनके बैंक से फ़ोन आया कि “क्या आपने कोई स्टैन्डिंग इंस्ट्रक्शनस दे रखा है”
हमारे मित्र ने कहा “नहीं, पर क्या हुआ, क्या बात है ?”
बैंक से जवाब मिला “आपके खाते से हर दो मिनिट में एक हजार रूपये ट्रांसफ़र हो रहे हैं।”
हमारे मित्र ने उसी समय नेटबैंकिंग से अपना एकाऊँट देखा तो वाकई तब तक एक हजार के लगभग २० ट्रांजेक्शन हो चुके थे, और हर दो मिनिट में एक हजार कहीं ट्रांसफ़र हो रहे थे। बैंक ने तत्काल हमारे मित्र को कहा कि बेहतर यह है कि हम इस एकाऊँट को बंद कर देते हैं, जिससे कम से कम यह ट्रांसफ़र तो रुक जायेगा।
और बैंक ने हमारे मित्र का एकाऊँट बंद कर दिया, तब तक एक हजार के ४२ ट्रांजेक्शन हो चुके थे, सुबह हमारे मित्र बैंक गये और तहकीकात की, पता चला कि कहीं से ए.टी.एम. चैनल से किसी ने हमारे मित्र के एकाऊँट को हैक कर दिया था। जो कि बैंक के निगरानी तंत्र में नहीं आता, वह ए.टी.एम. चैनल वीसा इंटरनेशनल चैनल के अंतर्गत आता है। बैंक ने हमारे मित्र से पूछा कि “क्या कहीं पर आपने अपना एकाऊँट नंबर की जानकारी दी थी ?”
उस समय तो हमारे मित्र को याद नहीं आया, बाद में हमारे मित्र सायबर पुलिस के पास एफ़.आई.आर. दर्ज करवाने गये और बैंक से पुलिस ने जरूरी जानकारी ली, तो आखिर आई.पी. एड्रेस यू.के. का निकला। पुलिस ने कहा कि पैसा तो मिल जायेगा परंतु इसमें लगने वाला समय कम से कम २-३ वर्ष होगा और इसी बीच आपको कई बार कई जगहों पर परेशान भी होना होगा। उस समय हमारे मित्र एक निजी समस्या से भी उलझ रहे थे तो मानसिक रूप से परेशान तो थे ही, सो उन्होंने निर्णय लिया कि इन ४२ ट्रांजेक्शनों का घाटा ही सहन कर लिया जाये, क्योंकि प्रोफ़ेशन में इतना समय तो होता नहीं कि कई बार कई जगहों पर चक्कर लगा लिये जायें।
परंतु हाँ सायबर पुलिस ने उन्हें यह जरूर बता दिया कि बैंक एकाऊँट की जानकारी कैसे हैकर्स को मिली, हुआ यूँ कि इस सब घटना के १-२ दिन पहले ही उनके जीमेल एकाऊँट पर कोई मेल आयी थी, जिसमें फ़्लिपकार्ट से कोई किताब खरीदने का ऑफ़र था, और हमारे मित्र को वह किताब भा गई, सो उन्होंने वहीं से लिंक पर क्लिक करके उस किताब का भुगतान कर दिया। वह ईमेल नकली था, और फ़्लिपकार्ट की मिरर साईट (डुप्लिकेट) पर जिसे कि अधिकतर हैकर्स जानकारी जुटाने के लिये उपयोग करते हैं, ले गया और वहाँ से उनके बैंक के एकाऊँट की सारी जानकारी उस हैकर्स तक पहुँच गई।
जरूरी बातें जो इस धोखे से हमें सीखनी चाहिये –
किसी भी ईमेल से सीधे क्लिक करके कभी भी भुगतान ना करें, अगर खरीदना है या भुगतान करना है तो पहले साईट पर जायें और फ़िर भुगतान करें।
इस हैक में दीगर बात यह है कि हैकर को केवल बैंक का नाम और एकाऊँट नंबर का पता होना चाहिये, जिससे वह सीधे ए.टी.एम. चैनल में अपने मैसेज भेजकर यह कारनामा कर सकते हैं, अधिकतर यह चैनल सुरक्षित होते हैं, परंतु हैकर कहीं ना कहीं से मौका ढूँढ़कर अपना काम कर ही जाते हैं।
फ़्लिपकार्ट से खरीदते वक्त ध्यान रखें कि आपका एड्रेस बार ऐसा हो –
flipkart safe address
और नीचे यह भी दिख रहा हो –
flipkart safe and security msg
अपनी सुरक्षा अपने ही हाथ है, कोशिश करें कि हमेशा सावधानी बरतें क्योंकि बैंक में रखा आपका पैसा आपकी गाढ़ी कमाई का है, और थोड़ी सी चूक से आप इसे गँवा सकते हैं। हमेशा पासवर्ड और कस्टमर नंबर लिखने के लिये वर्चुअल की बोर्ड का उपयोग करें।
virtual keyboard
मजे की बात यह रही कि हमारे मित्र को फ़्लिपकार्ट से किताब भी मिल गई।

भोरकालीन वातावरण और प्रकृति के अप्रितम रंग

ओस युक्त पत्तियाँसुबह जल्दी उठकर प्रकृति का आनंद लेना, मेरे जीवन का एक अहम हिस्सा है, प्रकृति के इस रम्य वातावरण को देख मन आह्लादित हो उठता है। जो प्रसन्नता मन को भोरकालीन वातावरण में मिलती है, वह अवर्णनीय है। सुबह पंक्षियों का कलरव, मंद गति से बहती शीतल हवा, बयार में शांत पेड़ पौधे अपने अप्रितम सौंदर्य का दर्शन देते हैं, दैनिक जीवन की शुरूआत से पहले बिल्कुल शांत और निर्वाण रूप होता है सुबह का।

पक्षी स्वच्छन्दता से अपने पंखों से उड़ रहे होते हैं और डैने फ़ैलाकरपक्षियों का कलरव आकाश में क्रीड़ा कर रहे होते हैं। पक्षियों की इस क्रीड़ा को देखने से मन ऊर्जास्फ़ुरित हो उठता है। कुछ पक्षी उड़ान के अपने नियम बनाते हैं और कुछ पक्षी अनुशासन में एक के पीछे एक पंक्ति में उड़ान भरते नजर आते हैं। इन पक्षियों को देखकर ही विचार मुखरित हो उठते हैं और हृदय को मिलने वाली प्रसन्नता शब्दों में कह पाना कठिन होता है।

पौधे अपने निर्विकार रूप में खडे होते हैं, पेड़ पौधों में जान होती है परंतु वे स्व से अपने पत्तियों को खड़का नहीं सकते, वे तो प्रकृति प्रदत्त वातावरण पर आश्रित होते हैं। भोर में पेड़ पौधों पर पड़ी ओस, मोती सा आभास देती है, और जलप्लवित पत्तियों से ऊर्जा संचारित होती है, वह ऊर्जा लेकर हम अपने जीवन की शुरूआत करते हैं।

कुछ समय पूर्व रंगों के त्यौहार पर इस बागीचों के शहर में पंक्तिबद्ध रंगबिरंगे फ़ूलों के बड़े बड़े पेड़ों को देखते ही बनता था, प्रकृति प्रदत्त इन रंगीन फ़ूलों को देखकर ही लगता था कि रंगों का त्यौहार आ चुका है, सड़क किनारे कच्ची पगडंडियों पर गिरे इन फ़ूलों का अप्रितम सौंदर्य देखते ही बनता है। विभिन्न रंगों के फ़ूल जीवन के विभिन्न रंगों को प्रदर्शित करते हुए, गीत गाते हुए जीवन को नया राग देते हैं।

प्रकृति की इस मौन भाषा को देखकर और अहसास से ही समझा जा सकता है, भोर के इस थोड़े से समय बाद जीवन की भागदौड़ में ये भोरकालीन मंच अपने आप पर पर्दा गिराकर फ़िर से दिनभर के लिये लुप्त हो जाता है। यह भोरकालीन मंच का आनंद लें और अपने जीवन को खुशियों में प्रकृति संग बितायें।

भोरकालीन कुछ और चित्र जिन्हें देखकर मन आनंद की सीमाओं के परे दौड़ पड़ता है।

पत्तियों का सौन्दर्य पत्तियों पर ओसभोरकालीन पत्ती मोर का अहसास करवाता फ़ूल

हड़ताल क्यों है ? (Strike..!)

कल कार्यालय में सुना कि “कल भारत बंद है” जिज्ञासा हुई कि भारत क्यों बंद है और कौन कर रहा है, कुछ ट्रेड यूनियनों का यह शौक रहा है, सो कही शौक के चलते तो यह हड़ताल नहीं कर दी, सो कल शाम को पान की दुकान पर भी पूछा “भई कल ये हड़ताल क्यों है ?” तो पानवाले ने भी मना कर दिया और कहा “हमें तो आपसे पता चल रहा है कि कल हड़ताल है”, पहले तो पानवाले से हमें पता चल जाता था कि हड़ताल क्यों है और कौन कौन भाग ले रहा है, यहाँ तक कि कब, कहाँ कितने बजे प्रदर्शन है सब कुछ। इसका मतलब कि पानवाले भी आजकल ज्यादा खबर नहीं रखते।
हमें तो आज तक यह समझ में नहीं आया कि हड़ताल से मिलता क्या है, शायद ज्यादातर लोगों को पता नहीं होगा कि सरकारी कर्मचारी अगर हड़ताल पर रहता है तो उसे उस दिन की तन्ख्वाह नहीं मिलती है, हड़ताली कर्मचारियों को एक दिन की तन्ख्वाह का घाटा उठाना पड़ता है। सबसे मजे की बात तो यह है कि कई हड़तालियों को पता ही नहीं होता कि वे हड़ताल किसलिये कर रहे हैं, और हड़ताल का मुद्दा क्या है।
आज सुबह अखबार में पढ़ा तो केवल एक लाईन पढ़ने को मिली कि सरकार की कथित श्रमिक विरोधी नीतियों के विरूद्ध हड़ताल है, अब पिछले कुछ वर्षों से तो सरकार की नीतियों में कोई बदलाव नहीं है, हमें तो नहीं दिखा अगर किसी को दिखा तो बताये कि सरकार ने कौन सी श्रमिक विरोधी नीतियों को बढ़ावा दिया है या नई नीति बनाई है। हमने तो यही देखा है कि श्रमिक काम से ज्यादा पैसा चाहते हैं और न मिलने पर सरकार के विरूद्ध हड़ताल करने में कोई कसर नहीं छोड़ते, हड़ताल का मुद्दा तो हवा हो जाता है।
कुछ कर्मचारी जो कि वाकई बेहद दुखी होते हैं, जिन्हें वाकई सरकार की नीतियों से परेशानी हो रही होती है, हड़ताल केवल उनका हथियार होना चाहिये, उन थोड़े से कर्मचारियों की आड़ में सारी ट्रेड यूनियनों का हड़ताल में उतरना किसी भी राष्ट्र के हित में नहीं है।
आज कार्यालय आते समय एक रैली से सामना हुआ, जो कि कम्यूनिस्ट पार्टी के झंडे लेकर चल रहे थे, वहीं लाल बत्ती हुई थी, हमने एक व्यक्ति जो कि रैली में शामिल था, से पूछ लिया कि
“रैली क्यों निकाल रहे हो”
जवाब मिला “हड़ताल है, और हड़ताल के समर्थन में रैली निकाल रहे हैं।”
हमने पूछा “हड़ताल !, बैंगलोर में है क्या ?”
जवाब मिला “नहीं आज भारत बंद है !”
हमने पूछा “हड़ताल क्यों है?”
फ़िर कोई जवाब नहीं मिला, हमारे प्रश्न पूछते ही वह झट से सरक लिया और वापिस रैली में शामिल हो चला।
तो इससे यह तो पता चल गया कि हर हड़ताली को यह पता नहीं होता कि हड़ताल क्यों है और न ही आम जनता को पता है कि हड़ताल क्यों है, अगर हड़ताल अच्छे मुद्दों के साथ है तो मुद्दे जनता में क्यों नहीं प्रचारित किये जाते, ताकि जनता भी साथ आये। जनता को मुद्दे ना बताने का मतलब और अखबारों में विस्तार से हड़ताल का कारण न बताना हमारी समझ से परे है।

आम आदमी बेबस और उसका लक्ष्य !

कल ऑफ़िस से वही देर से आये, रात्रिभोजन और टहलन के पश्चात १० मिनिट टीवी के लिये होते हैं और फ़िर शुभरात्रि का समय हो जाता है। कल जब टीवी देखना शुरू किया तो फ़िल्म “शूल” आ रही थी, और यह मेरी मनपसंदीदा फ़िल्मों में से एक है।

मनपसंदीदा फ़िल्म इसलिये है कि आदमी की बेबसी और उसके द्वारा तय किया गया लक्ष्य कैसे प्राप्त किया गया, इसका बेहतरीन चित्रण है।

आम आदमी बेबस और कमजोर नहीं होता, केवल परिवार के कारण भयभीत होता है, अगर आम आदमी भयभीत होना छोड़ दे तो सारा तंत्र एक दिन में सही हो जाये, परंतु आम आदमी बेबस ठहरा। कहीं भी हो किसी भी तरह की संस्था में हो, गलत का साथ देना या आँख मूँदकर गलत होने देना केवल बेबसी के कारण करता है, अगर गलत का विरोध करेगा तो जितना भय और गलत लोगों से उसे खतरा होगा वह आम आदमी टालना चाहता है।

इसके उदाहरण बहुत सारे हैं, जिन्होंने अपनी जान गँवाई है फ़िर वो किसी एनजीओ के कार्यकर्ता हों या फ़िर पत्रकार या फ़िर और कोई इंजीनियर, ये सब भी बेबस थे परंतु निर्भीक थे और तंत्र से लड़ना चाहते थे, सो तंत्र ने उन्हें गहरी नींद सुला दिया।

लक्ष्य अधिकतर फ़िल्मों में ही मिलता है, क्योंकि आम जीवन में तंत्र इतना प्रभावशील होता है कि उसमें रीटेक की कोई गुंजाईश ही नहीं होती।

बीबी को नई चप्पल

श्रीमतीजी याने की बीबी को नई चप्पल लेनी थी सो बाटा की बड़ी दुकान घर के पास है वहीं जाना हुआ, अब एक बार बड़ी दुकान में घुस जायें तो सारी चीजें न देखें मजा नहीं आता, और खासकर इससे थोड़ी सामान्य ज्ञान में वृद्धि होती है, खरीदें या ना खरीदें वो एक अलग बात है।

चप्पल तो ले ली और हम भी अपने लिये देखने लग गये, वैसे हमेशा यही ऐतराज होता है आते हमारे लिये हैं और खरीददारी खुद के लिये होती है, खैर शिकायतें तो कोई न कोई रहती ही हैं।

जब हम अपने लिये एक सैंडल देख  रहे थे तभी एक और व्यक्ति पास में से अपनी पत्नीजी को अंग्रेजी में बोलता हुआ गुजरा “तुम हमेशा मुझे वही चीज खरीदने पर मजबूर करती हो, जो मुझे नहीं खरीदनी है।”, हमारी जबान भी फ़िसल गई “अबे ढ़क्कन खरीदता क्यों है”, अब वो हमारे पीछे ही खड़ा था, और उसे हिन्दी भी समझ आती थी, उसके बाद वो हमें घूरने लगा। अनायास ही अपने एक बुजुर्ग मित्र बात समझ में आने लगी “जो व्यक्ति बीबी से डरता है, वही बाहर शेर बनकर दहाड़ता है, भले ही उसकी दहाड़ में दम हो या ना हो”।

और उधर ही एक विज्ञापन भी याद आ गया पुराना है मगर सबकी जबां पर था – “जो बीबी से करे प्यार वो प्रेस्टीज से कैसे करे इंकार”।

खैर फ़िर हमने उस दुकान में चमड़े के बैग देखे, पॉलिश और बेल्ट देखी, मगर एक निगाह अपने ऊपर घूमती हुई महसूस हुई, जो कुछ बोल नहीं पा रही थी। लगता है कि अपनी टिप्पणी केवल ब्लॉग के लिये है, जीवंत टिप्पणी किसी को अच्छी नहीं लगती है।

आज वैलंटाईन डे है, सबको प्यार भरी शुभकामनाएँ, यह वर्ष प्यार भरा रहे।

गूगल का वैलंटाईन डे पर डूडल देखिये –

रिलायंस डिजिटल – विज्ञापन में लुभावने ऑफ़र और दुकान में ऑफ़र में फ़ेरबदल, जनता के साथ धोखाधड़ी Reliance Digital – Differ offer then Ad in Newspaper in Store

शूक्रवार के टाइम्स ऑफ़ इंडिया का विज्ञापन में लुभावने ऑफ़र को रविवार को देखा, तो रविवार को ही तत्काल टीवी लेने का मन बनाया। ऑफ़र में लिखा था किसी भी सीटीवी के बदले इतनी छूट दी जायेगी, जिसमें कोई स्टार वगैरह नहीं था, और टीवी का ब्रांड भी नहीं लिखा था, तो हमने सोचा कि चलो पास वाले रिलायंस डिजिटल स्टोर पर जाकर पता लगा लिया जाये, पर उससे पहले हमने सोचा कि चलो पहले फ़ोन पर पता कर लेते हैं, तो शायद ज्यादा पता चल जाये और हमने पास वाले स्टोर पर फ़ोन लगाया तो पता लगा कि स्टोर तो १० बजे खुलता है परंतु सेक्शन के स्टॉफ़ ११ बजे तक आते हैं (तो ऐसा लगा कि रिलायंस भी अपने लोगों का कितना ध्यान रखती है, या फ़िर लोग रिलायंस की सुनते नहीं हैं, खैर जो भी है!)।

हमने कमनहल्ली के स्टोर पर फ़ोन लगाया तो किसी ने फ़ोन ही नहीं उठाया तब तो पक्का यकीन हो गया कि रिलायंस अपने लोगों का बहुत ध्यान रखती है, यह फ़ोन लगभग हमने सुबह १०.२५ पर लगाया था, फ़िर हमने ठान ली कि बैंगलोर के हर स्टोर पर फ़ोन लगाकर पता करते हैं, जिससे प्राथमिक जानकारी जुटाई जा सके और  तीसरे स्टोर कोरमंगला पर फ़ोन लगाया, यहाँ फ़ोन लगाकर खुशी हुई, जिस गर्मजोशी से यहाँ बात की गई और उत्पाद के बारे में भी प्राथमिक जानकारी प्रदान की गई, लगा कि रिलायंस में अच्छे कर्मचारी भी हैं। (वैसे यह सत्य है कि हरेक कंपनी में कुछ बहुत अच्छे कर्मचारी होते हैं, जो कंपनी का नाम बड़ाते हैं।)

reliance digital offer on LED TV हम वही पास वाले फ़िनिक्स माल के रिलायंस स्टोर गये और LED TV उत्पाद का पूरा निरिक्षण किया, वह LED TV 32 इंच का था और रिलायंस डिजिटल का खुद का ब्रांड था, (रिलायंस के खुद के LED TV Reconnect and ORZ कंपनियों के होते हैं), जिस पर क्रमश: २ एवं १ वर्ष की पूर्ण गारण्टी दी जा रही थी, हमने टीवी पसंद कर लिया और फ़िर खरीदने की बात आई तो जब हमने बताया कि हम इस ऑफ़र के तहत यह LED TV खरीदना चाहते हैं, तो हमें कहा गया कि आप ५ मिनिट का समय दें आपको सारी जानकारी जुटा देते हैं, उन १० मिनिटों में हमने iPhone 4S का निरिक्षण किया।

वह कर्मचारी फ़िर हमारे पास आया और बोला कि ’सर’ यह कंपनी की दूसरी टीम जो कि पुराने टीवी खरीदती है, वह आपके घर पर आकर टीवी देखेगी, हमने कहा कि ठीक है आज दोपहर तक यह भी करवा दो तो शाम को हम टीवी ले लेते हैं, घर पहुँचे दूसरी टीम का फ़ोन आया कि आपका टीवी २१ इंच का है और यह ऑफ़र केवल २९ इंच सीटीवी के लिये है, हमने कहा कि विज्ञापन में तो रिलायंस डिजिटल ने ऐसा कुछ लिखा नहीं है और अगर कभी भी इस तरह की शर्त होती है तो स्टॉर(*) लगाकर जरूर छोटे अक्षरों में लिख दिया जाता है, अगर कुछ लिखा नहीं है इसका मतलब कि आपको कोई भी सीटीवी स्वीकार्य है। परंतु वह कर्मचारी बोला कि ’सर’ यही ऑफ़र है, हमने कर्मचारी की मजबूरी समझते हुए कहा कि हमें अब LED TV लेने में अब कोई रूचि नही है, धन्यवाद।

हमें टीवी अगले दो वर्ष के लिये लेना था तो सोचा कि १९,९०० में 32 इंच LED TV under exchange offer with working CTV में बुरा नहीं है। परंतु रिलायंस डिजिटल विज्ञापने में कुछ और लिखती है और स्टोर पर कुछ और होता है जो कि जनता के साथ खुली धोखाधड़ी है। हम तो अपने पैसे की पूरी कीमत वसूलना जानते हैं, इसलिये अब तय किया गया कि अभी यही टीवी थोड़े दिन और देखी जाये।

प्राकृतिक संसाधनों के लिये जवाबदेही

प्राकृतिक संसाधन क्या होते हैं, जो हमें प्रकृति से मिलते हैं, प्रकृति प्रदत्त होते हैं। हमें इसका उपयोग बहुत ही सावधानीपूर्वक करना चाहिये, परंतु ऐसा होता नहीं है।

गाजर इस विषय के संबंध में कल अपने केन्टीन में एक पोस्टर देखा था जिसमें दिखाया गया था कि एक गाजर को तैयार होने में लगभग ६ माह लगते हैं और उसको जमीन से निकालकर पकाने तक मात्र कुछ ही मिनिट लगते हैं, और हम कई बार सलाद या सब्जी फ़ेंक देते हैं, जिसमें केवल कुछ सेकण्ड ही लगते हैं, यह प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग ही तो है जिसे केवल जिम्मेदारी से आम व्यक्ति ही रोक सकता है। गाजर तो केवल एक उदाहरण है ऐसी कई वस्तुएँ हैं जिनका हम धड़ल्ले से दुरुपयोग कर रहे हैं।

PTI12_14_2011_000112B इसके बाद एक ट्रेनिंग में जाना हुआ जो कि बैंकिंग की थी, उसमें भी बताया गया कि कैसे वित्तीय संस्थाएँ प्राकृतिक संसाधनों को बचाने में अहम योगदान कर रही हैं, जो कि हर राष्ट्र के लिये बहुत ही अहम है, वित्तीय संस्थाएँ एवं नियामक देश की विदेशी मुद्रा को जाने से रोकते हैं, जो कि राष्ट्र के लिये संसाधन है।

OLYMPUS DIGITAL CAMERA         आज सुबह अखबार में एक कहानी पढ़ रहे थे जो कि इस प्रकार थी – एक गुरूजी अपने शिष्यों को शिक्षा दिया करते थे और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिये प्रेरित करते थे परंतु शिष्य केवल सुनते थे उस पर अमल नहीं करते थे, एक दिन गुरू जी ने व्रत रखा और शाम को अपने एक शिष्य को कहा व्रत तोड़ने के लिये मुझे नीम की दो पत्तियों की जरूरत है जाओ ले आओ। थोड़ी देर बाद शिष्य आया और उसके हाथ में नीम की पूरी टहनी देखकर गुरूजी रुआंसे हो गये और उन्होंने कहा कि मुझे केवल दो पत्तियों की जरूरत थी पूरी टहनी की नहीं, यह आदेश मैंने तुम्हें दिया था तो इस प्राकृतिक संसाधन के दुरुपयोग का जिम्मेदार में हुआ इसलिये अब इसका प्रायश्चित स्वरूप आज मैं व्रत नहीं तोड़ूँगा। शिष्यों को बहुत दुख हुआ।

थैला काश कि सब प्राकृतिक संसाधनों के प्रति अपनी जवाबदेही समझें। जैसे सब्जी लेने जायें या बाजार कुछ भी समान लेने जायें तो अपने थैले साथ ले जायें जिससे पोलिथीन का कम से कम उपयोग करके हम प्रकृति को नुकसान से बचा सकें।

अब IRCTC की वेबसाईट अच्छा काम कर रही है।

कल काफ़ी दिनों बाद रेल्वे के आरक्षण के लिये IRCTC की वेबसाईट पर जाना हुआ। हालत यह थी की अपना यूजर आई डी और पासवर्ड भी याद करने में काफ़ी समय लगा। खैर IRCTC की वेबसाईट की रफ़्तार पहले जैसी तेज थी, बस जब तत्काल का समय होता है तभी या तो मंद हो जाती थी या फ़िर बंद हो जाती थी। परंतु कल आलम अलग था, हम तो पौने आठ से ही लॉगिन करके बैठे थे, पुरानी आदत जो थी 🙂 अब आदत इतनी जल्दी जाती भी नहीं है।

खैर जैसे ही आठ बजे वैसे ही IRCTC को जोर का झटका लगा और एक Error message हमारे सामने आ गया, सारे अरमान धूमिल होते नजर आये। खैर साथ में हम indianrail.gov.in साईट पर भी सीट की उपलब्ध संख्या पर नजर रखे हुए थे। पहले १८४ सीटें मात्र ३-४ मिनिट में ही खत्म हो लेती थीं परंतु जब कल देखा तो लगभग ८.१० तक मात्र १० सीट ही आरक्षित हुईं थीं। फ़िर भी वेबसाईट मंदगति से चलती रही और आखिरकार आरक्षण हो ही गया।

तत्काल में आरक्षण जब से एक दिन पहले हुआ है तब से लगता है कि सुविधाएँ अच्छी हुई हैं और Quick Book भी  8 – 10 सुबह बंद रहने लगा है, वरना तो पहले Quick Book ही सहारा था। खैर हमारे मित्र बहुत खुश हुए कि आरक्षण मिल गया क्योंकि मुंबई उज्जैन अवंतिका एक्सप्रैस में हमेशा मारा मारी रहती है। हमारे मित्र आज सुबह बाहर से प्रवास करके आज मुंबई लौटे हैं, बड़ी लंबी फ़्लाईट थी, लगभग २० घंटे की, तो कल सुबह उज्जैन पहुँच जायेंगे।

धन्यवाद रेल्वे को जो आम आदमी की उसे याद आई, और IRCTC को भी धन्यवाद कि अपना Infrastructure अच्छा किया जिससे कम से कम वेबसाईट चल रही है।