आप कैसा व्यवहार करते हैं

आप कैसा व्यवहार करते हैं और कैसे दूसरे से बातें करते हैं, यह आपका खुद का आईना होता है। कभी यह परवरिश का नतीजा होता है तो कभी यह हमारे प्रोफेशन में होने वाली कठिनाईयों का नतीजा होता है। हम व्यवहार में सामने वाले से कैसे बातें करते हैं, उसकी कितनी इज्जत करते हैं, किस तरह से बात करते हैं, किस तरह से हम बातों के सत को गृहण करते हैं, व्यक्ति व्यक्ति पर निर्भर करता है। पर इसके पीछे की जो सोच विकसित होती है उस प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। व्यवहार को 1-2 दिन में न सुधारा जा सकता है और न ही बिगाड़ा जा सकता है। व्यक्ति हमेशा ही अपने मूल व्यवहार से बहुत ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह सकता है।

कैसा व्यवहारयह बात कल के एक वाकये से आई, जब हम ऑफिस जा रहे थे तो एक वीवीआईपी मूवमेंट था, पूरा यातायात को रोक दिया गया था, दूसरी तरफ की सड़क से मूवमेंट होना था, हम उस समय एक अस्पताल के पास खड़े थे, तभी एक दम्पति बस से उतरे और दूसरी ओर के अस्पताल के लिये जाने के लिये सड़क पार करने कि लिये डिवाईडर पर खड़े थे, महिला गर्भवती नजर आ रही थी और शायद तकलीफ में थी। उसी समय वह मूवमेंट होने वाला था, तो सड़क के डिवाइडर पर किसी को भी खड़ा होने की इजाजत पुलिसवाले नहीं दे रहे थे, जैसे ही एक पुलिसकर्मी ने उस दम्पति को डिवाईडर पर खड़ा देखा, वह खीजकर चिल्लाते हुए कुछ कह रहा था, जो मुझे भी समझ नहीं आया और उन दम्पति को भी समझ नहीं आया, केवल हाथ से बार बार पीछे जाने का इशारा कर रहे थे। तभी एक ट्रॉफिक इंस्पेक्टर आया जो कि लगभग 50 वर्ष का रहा होगा और चिल्लाते हुए ही बोला कि यहाँ खड़े नहीं रह सकते, संभवतया दम्पति को पता ही नहीं था कि इतनी पुलिस क्यों है और वे क्यों चिल्ला रहे हैं, और कोई वीवीआईपी मूवमेंट है, जिसके लिये यह सारी तैयारी है। उन्हें तो अपनी तकलीफ से मतलब था और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि जब सामने अस्पताल है और एक मिनिट भी सड़क पार करने में नहीं लगेगा, तो ये इतना झमेला क्यों खड़ा कर रहे हैं। तभी एक नौजवान पुलिस इंस्पेक्टर आया और दम्पति को शांति से समझाया, कारण बताया, तब जाकर वे दम्पति वापिस सड़क के इस तरफ आ गये।

नौजवान पुलिस इंस्पेक्टर में अभी वह कड़वाहट नहीं आई है, पर जैसे जैसे वह भी अपराधियों से लगातार संपर्क में आयेगा, शायद उसका व्यवहार भी वैसा ही हो जायेगा, जैसा कि उस ट्रॉफिक इंस्पेक्टर का था। कई बार यह हमारे प्रोफेशन की मजबूरी होती है कि हम सख्त लहजे में बात करें, पर धीरे धीरे वह हमारे व्यवहार में शामिल हो जाता है और हमें पता भी नहीं चलता है।

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