Moving Average आखिर Chart पर खींची हुई ये टेढ़ी-मेढ़ी लाइन क्या बताती है?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 22

Moving Average आखिर Chart पर खींची हुई ये टेढ़ी-मेढ़ी लाइन क्या बताती है?

सोमवार की सुबह है।

सप्ताह की शुरुआत हो चुकी है और शेयर बाज़ार खुलने में अभी कुछ ही मिनट बाकी हैं।

मैं अपने स्टडी रूम में बैठा था। सामने PC Terminal खुला हुआ था। तीनों मॉनिटर पर अलग-अलग charts दिखाई दे रहे थे।

बेटेलाल आज सुबह से ही कुछ ज्यादा उत्साहित दिखाई दे रहे थे।

वे काफी देर से chart को घूर रहे थे।

फिर अचानक बोले —

“डैडी, candles समझ आ गईं।”

“अच्छी बात है।”

“Trend भी समझ आ गया।”

“और अच्छी बात।”

“लेकिन ये chart पर पीली, नीली और लाल लाइनें क्यों घूम रही हैं?”

मैं मुस्कुराया।

“अच्छा… आखिरकार तुम Moving Average तक पहुँच गये।”

Moving Average आखिर होता क्या है?

मैंने स्क्रीन की तरफ इशारा किया।

“देखो बेटेलाल।”

“हाँ।”

“Market रोज़ ऊपर-नीचे होता है।”

“यह तो मैंने देख लिया है।”

“कभी-कभी इतना ऊपर-नीचे होता है कि असली Trend समझना मुश्किल हो जाता है।”

“हाँ, कई बार chart देखकर लगता है जैसे किसी बच्चे ने पेंसिल से लाइनें बना दी हों।”

मैं हँस पड़ा।

“इसलिए लोगों ने Moving Average बनाया।”

आसान भाषा में

मैंने कहा —

“Moving Average का काम Noise कम करना है।”

“मतलब?”

“Market का शोर हटाकर दिशा दिखाना।”

Colony वाला उदाहरण

मैंने खिड़की से बाहर देखा।

“मान लो तुम हर दिन सुबह टहलने जाते हो।”

“हाँ।”

“पहले दिन 4000 कदम चले।”

“दूसरे दिन 6000।”

“तीसरे दिन 5000।”

“चौथे दिन 7000।”

“अब अगर कोई पूछे कि तुम रोज़ औसतन कितने कदम चलते हो?”

“तो Average निकालेंगे।”

“बस वही Moving Average है।”

SMA क्या होता है?

बेटेलाल बोले —

“अच्छा, अब ये SMA क्या होता है?”

मैंने chart खोला।

“SMA यानी Simple Moving Average।”

“मतलब?”

“पिछले कुछ दिनों का सीधा-सादा Average।”

“जैसे 20 Day SMA?”

“मतलब पिछले 20 दिनों के Closing Price का Average।”

EMA क्या होता है?

“और EMA?”

“Exponential Moving Average।”

“नाम से तो डर लग रहा है।”

मैं हँस पड़ा।

“असल में यह SMA का भाई है, बस तेज है।”

“मतलब?”

“यह हाल के दिनों को ज्यादा महत्व देता है।”

“यानी नई जानकारी को जल्दी पकड़ता है?”

“बिल्कुल।”

Traders EMA क्यों पसंद करते हैं?

“क्योंकि उन्हें तेजी से बदलती Market पकड़नी होती है।”

“और Investors?”

“वे SMA ज्यादा देखते हैं।”

20, 50, 100 और 200 Day Average

बेटेलाल बोले —

“डैडी, लोग 20, 50, 100, 200 ही क्यों लगाते हैं?”

मैंने कहा —

“क्योंकि पूरी दुनिया इन्हें देखती है।”

“मतलब?”

“कई बार indicator इसलिए काम करता है क्योंकि लाखों लोग उसे देख रहे होते हैं।”

20 Day MA
“Short Term Trend”

50 Day MA
“Medium Term Trend”

100 Day MA
“Stronger Trend View”

200 Day MA
“Long Term Trend का राजा।”

सबसे लोकप्रिय moving average

मैंने chart पर 200 Day Moving Average लगाया।

“देखो।”

“हाँ।”

“अगर शेयर 200 DMA के ऊपर है तो Long Term Trend मजबूत माना जाता है।”

“और नीचे?”

“तो सावधानी बढ़ जाती है।”

सबसे बड़ी गलती

बेटेलाल बोले —
“तो क्या Moving Average Cross होते ही खरीद लेना चाहिए?”

मैं हँस पड़ा।
“अगर इतना आसान होता तो सब करोड़पति होते।”

दोनों हँस पड़े।

Moving Average क्या नहीं पता चलता है?

“यह भविष्य नहीं बताता।”

“फिर?”

“यह पीछे देखकर वर्तमान की दिशा समझाता है।”

“मतलब Rear View Mirror?”

मैं मुस्कुराया।
“वाह! बिल्कुल सही।”

Price और Moving Average
मैंने chart पर इशारा किया।

“याद रखना।”

“Price राजा है।”

“Indicator नौकर।”

“मतलब?”

“कभी भी Indicator को Price से ज्यादा महत्व मत देना।”

असली सीख

बाजार खुल चुका था।

स्क्रीन पर candles बनना शुरू हो चुकी थीं।

Moving Average की लाइनें उनके बीच धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं।

मैंने कहा —
“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”
“Moving Average Market की दिशा दिखाता है।”

“लेकिन निर्णय अकेले नहीं देता।”

“मतलब?”

“Trend, Volume, Support, Resistance और Price Action के साथ मिलाकर देखो।”

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर बेटेलाल बोले —
“डैडी, अब समझ आया कि ये रंग-बिरंगी लाइनें सजावट नहीं थीं।”

मैं मुस्कुराया।

“और अगले भाग में समझोगे कि जब दो Moving Averages आपस में टकराते हैं, तो पूरा बाजार क्यों उत्साहित हो जाता है।”

“मतलब?”

“अगले भाग में — Golden Cross और Death Cross।”

क्रमशः…

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #financialbakwas

Golden Cross और Death Cross आखिर इतने प्रसिद्ध क्यों हैं?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 23

Golden Cross और Death Cross आखिर इतने प्रसिद्ध क्यों हैं?

मंगलवार की सुबह थी।
रात में अच्छी बारिश हुई थी। बाहर पेड़ों की पत्तियाँ धुलकर चमक रही थीं। स्टडी रूम की खिड़की से आती हल्की धूप मॉनिटर के किनारे पर पड़ रही थी।

मैं अपने PC Terminal के सामने बैठा था। तीन मॉनिटर पर अलग-अलग charts खुले हुए थे।

बेटेलाल पिछले अध्याय के Moving Average वाले chart को बार-बार zoom करके देख रहे थे।

अचानक उन्होंने पूछा —
“डैडी, ये 50 DMA और 200 DMA कभी-कभी एक-दूसरे को काटते क्यों हैं?”

मैं मुस्कुराया।
“अच्छा… आज Market के सबसे प्रसिद्ध Crossroads की बात करते हैं।”

Golden Cross आखिर होता क्या है?

मैंने chart खोला।
“याद है 50 DMA क्या बताता है?”

“Medium Term Trend।”

“और 200 DMA?”

“Long Term Trend।”

“बहुत बढ़िया।”

मैंने chart पर दोनों lines दिखाई।
“जब 50 DMA नीचे से ऊपर जाकर 200 DMA को पार कर जाता है…”

“हाँ।”

“तो उसे Golden Cross कहते हैं।”

बेटेलाल बोले —
“इतना ही?”

मैं हँस पड़ा।
“सिद्धांत इतना ही है।”

“लेकिन इसके पीछे psychology बहुत बड़ी है।”

Golden Cross क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?

मैंने कहा —
“कल्पना करो कि कोई शेयर कई महीनों तक कमजोर था।”

“हाँ।”

“धीरे-धीरे buyers आने लगे।”

“हाँ।”

“Trend मजबूत होने लगा।”

“और फिर?”

“इतना मजबूत हो गया कि 50 दिन का Average, 200 दिन के Average के ऊपर निकल गया।”

बेटेलाल बोले —
“मतलब हाल का Performance पुराने Performance से बेहतर हो गया।”

मैं मुस्कुराया।
“बिल्कुल।”

Colony का उदाहरण

मैंने कहा —
“मान लो हमारी कॉलोनी में एक पुरानी सड़क है।”

“हाँ।”

“कई महीनों तक वहाँ कम लोग आते थे।”

“हाँ।”

“फिर धीरे-धीरे वहाँ नया पार्क बन गया।”

“लोग आने लगे।”

“दुकानें खुल गईं।”

“भीड़ बढ़ गई।”

“एक समय ऐसा आया कि नई गतिविधि पुरानी स्थिति से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई।”

“बस वही Golden Cross है।”

Death Cross क्या है?

बेटेलाल बोले —
“तो Death Cross इसका उल्टा होगा?”

“बिल्कुल।”

मैंने दूसरा chart खोला।

“जब 50 DMA ऊपर से नीचे आकर 200 DMA को काटता है…”

“तो?”

“Death Cross बनता है।”

नाम इतना डरावना क्यों?

“डैडी, नाम तो किसी हॉलीवुड फिल्म जैसा लग रहा है।”

मैं हँस पड़ा।

“Market वालों को डरावने नाम रखने का शौक है।”

“लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कंपनी बंद होने वाली है।”

“फिर?”

“बस यह संकेत हो सकता है कि Long Term Trend कमजोर पड़ रहा है।”

सबसे बड़ी गलतफहमी

“अब एक जरूरी बात।”

“क्या?”

“Golden Cross बनते ही खरीदो और Death Cross बनते ही बेचो…”

“क्या यह सही नियम नहीं है?”

“नहीं।”

क्यों नहीं?

“क्योंकि Moving Average पीछे चलने वाला Indicator है।”

“मतलब?”

“जब तक Cross बनता है, तब तक Trend काफी हद तक बदल चुका होता है।”

“ओह।”

Volume यहाँ भी जरूरी है

मैंने chart पर Volume लगाया।

“अगर Golden Cross के समय Volume भी मजबूत हो…”

“तो Signal मजबूत हो सकता है।”

“और अगर Volume कमजोर हो?”

“तो सावधानी रखनी चाहिए।”

Time Frame का प्रभाव

बेटेलाल बोले —
“क्या Intraday में भी Golden Cross होता है?”

“हाँ।”

“लेकिन Daily और Weekly chart वाले Golden Cross ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं।”

“क्यों?”

“क्योंकि उनमें ज्यादा डेटा और ज्यादा भरोसा होता है।”

सामने मॉनिटर पर 50 DMA और 200 DMA एक-दूसरे के करीब आते दिखाई दे रहे थे।

मैंने कहा —
“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“Golden Cross कोई जादुई खरीदारी का बटन नहीं है।”

“और Death Cross कोई दुनिया खत्म होने का संकेत नहीं है।”

“फिर?”

“ये सिर्फ Trend में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत हैं।”

कुछ देर दोनों चुप रहे।

बेटेलाल अब chart को अलग नजर से देख रहे थे।

“मतलब Market हमेशा संकेत देता है…”

“हाँ।”

“बस उसे सुनना सीखना पड़ता है।”

मैं मुस्कुराया।

“और अगली बार हम सीखेंगे — RSI आखिर कैसे बताता है कि Market क्या कह रहा है, आगे मामला नर्म है या गर्म।”

क्रमशः…

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #financialbakwas

RSI आखिर कैसे बताता है कि Market ज्यादा गर्म हो गया है या ज्यादा ठंडा?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 24

RSI आखिर कैसे बताता है कि Market ज्यादा गर्म हो गया है या ज्यादा ठंडा?

 तीनों मॉनिटर पर अलग-अलग charts खुले हुए थे।

सामने बेटेलाल बैठे मोबाइल और मॉनिटर के बीच अपनी गर्दन ऐसे घुमा रहे थे जैसे किसी क्रिकेट मैच में थर्ड अंपायर का फैसला देख रहे हों।

कुछ देर बाद उन्होंने स्क्रीन की तरफ इशारा किया।

“डैडी, ये chart के नीचे जो एक अलग लाइन चल रही है, ये क्या है?”

मैंने मुस्कुराकर कहा —

“अच्छा… आखिरकार तुम RSI तक पहुँच ही गये।”

“हैं जी?”

“हाँ जी।”

“और आज हम Market का Thermometer समझेंगे।”

बेटेलाल तुरंत सीधे होकर बैठ गये।

“Market को भी बुखार होता है क्या?”

मैं हँस पड़ा।

“कई बार इतना तेज बुखार होता है कि लोग बिना सोचे-समझे खरीदने लगते हैं।”

“और कभी-कभी इतना डर जाता है कि लोग अच्छी कंपनियाँ भी बेच देते हैं।”

“बस यही RSI पकड़ने की कोशिश करता है।”

मैंने chart zoom किया।

“RSI का पूरा नाम है Relative Strength Index।”

बेटेलाल बोले —

“नाम तो किसी इंजीनियरिंग की किताब जैसा लग रहा है।”

“नाम भूल जाओ। काम समझो।”

मैंने स्क्रीन की तरफ इशारा किया।

“यह Indicator हमें बताता है कि हाल के दिनों में खरीदारी ज्यादा मजबूत रही है या बिकवाली।”

“मतलब Buyers और Sellers की ताकत?”

“बिल्कुल।”

मैंने चाय की चुस्की ली।

“देखो बेटेलाल, जब तुम्हें बुखार होता है तो डॉक्टर क्या करते हैं?”

“Thermometer लगाते हैं।”

“क्यों?”

“ताकि पता चल सके कि शरीर सामान्य है या नहीं।”

“बस RSI भी वही काम करता है।”

बेटेलाल अब ध्यान से सुन रहे थे।

मैंने कहा —

“RSI हमेशा 0 से 100 के बीच रहता है।”

“मतलब 150 नहीं जाएगा?”

“नहीं।”

“और -20 भी नहीं आएगा।”

दोनों हँस पड़े।

मैंने chart पर RSI की लाइन दिखाई।

“सामान्यतः लोग दो स्तर सबसे ज्यादा देखते हैं।”

“कौन से?”

“70 और 30।”

“अब ये नया झंझट क्या है?”

मैं मुस्कुराया।

“अगर RSI 70 के ऊपर चला जाए, तो Market को Overbought माना जाता है।”

“मतलब?”

“मतलब हाल में खरीदारी बहुत ज्यादा हो चुकी है।”

“और 30?”

“RSI अगर 30 के नीचे आ जाए तो उसे Oversold माना जाता है।”

“मतलब लोगों ने बहुत ज्यादा बेच दिया है।”

“बिल्कुल।”

बेटेलाल कुछ सेकंड सोचते रहे।

फिर बोले —

“तो RSI 70 के ऊपर गया नहीं कि बेच दो?”

मैं मुस्कुराया।

“यही गलती करके लोग अपना नुकसान करते हैं।”

“मतलब?”

“Strong Uptrend में RSI कई दिनों तक 70 के ऊपर रह सकता है।”

“ओह।”

“और Strong Downtrend में कई दिनों तक 30 के नीचे।”

मैंने मॉनिटर पर एक तेजी वाला chart दिखाया।

“देखो, यहाँ RSI लगभग दो हफ्ते 70 के ऊपर रहा।”

“अगर कोई पहले दिन ही बेच देता तो?”

“तो बाकी की पूरी तेजी मिस कर देता।”

बेटेलाल बोले —

“मतलब RSI अकेला फैसला नहीं करता।”

मैंने कहा —

“शाबाश।”

“यही बात समझनी है।”

“RSI अकेला Indicator नहीं है।”

“Trend भी देखो।”

“Volume भी देखो।”

“Support Resistance भी देखो।”

“और फिर RSI देखो।”

बेटेलाल ने फिर पूछा —

“डैडी, सब लोग 70 और 30 की बात करते हैं। लेकिन ये 50 बीच में क्यों बना रहता है?”

मैं मुस्कुराया।

“बहुत अच्छा सवाल।”

मैंने स्क्रीन पर RSI के 50 level की तरफ इशारा किया।

“50 को Market का Balance Point समझो।”

“मतलब?”

“50 के ऊपर Buyers थोड़े मजबूत।”

“50 के नीचे Sellers थोड़े मजबूत।”

“जैसे कुश्ती में कोई एक पहलवान थोड़ा भारी पड़ रहा हो।”

“बिल्कुल।”

बेटेलाल अब RSI को पहले से अलग नजर से देख रहे थे।

उन्होंने पूछा —

“तो बड़े Investors भी RSI देखते हैं?”

मैंने कहा —

“कुछ देखते हैं, कुछ नहीं देखते।”

“लेकिन समझदार Investors Indicator के पीछे की Psychology जरूर समझते हैं।”।

कुछ देर कमरे में शांति रही।

सिर्फ मॉनिटर पर बदलती candles और चाय की हल्की खुशबू थी।

फिर मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“RSI भविष्य नहीं बताता।”

“फिर?”

“यह सिर्फ बताता है कि Market इस समय कितना उत्साहित है या कितना डरा हुआ है।”

बेटेलाल ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।

शायद पहली बार उन्हें समझ आया था कि RSI कोई जादुई खरीदने-बेचने का बटन नहीं है, बल्कि Market की भावनाओं को मापने वाला एक उपकरण है।

फिर उन्होंने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैं मुस्कुराया।

“अगले भाग में समझेंगे — Divergence आखिर क्या होती है, और क्यों कई बार Price ऊपर जाता है लेकिन Indicator नीचे आने लगता है।”

क्रमशः…

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #financialbakwas

Trend Line आखिर होती क्या है, और लोग क्यों कहते हैं — Trend is Your Friend?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 21

Trend Line आखिर होती क्या है, और लोग क्यों कहते हैं — Trend is Your Friend?

सामने PC Terminal खुला हुआ था। मॉनिटर पर अलग-अलग charts दिखाई दे रहे थे।

बेटेलाल आज कुछ ज्यादा ही उत्साहित लग रहे थे।

काफी देर से chart पर तिरछी-तिरछी लाइनें खींच रहे थे।

फिर अचानक बोले —

“डैडी, ये Trend Line आखिर होती क्या है?

मैं मुस्कुराया।

“अच्छा… आज बाजार की सड़क समझते हैं।”

Trend आखिर होता क्या है?

मैंने chart खोला।

“सबसे पहले Trend समझो।”

“हाँ।”

“Market तीन ही काम करता है।”

“कौन से?”

“ऊपर जाता है।”

“हाँ।”

“नीचे जाता है।”

“हाँ।”

“या फिर कहीं नहीं जाता।”

बेटेलाल हँस पड़े।

“इतनी बड़ी खोज?”

“हाँ। लेकिन आधे लोग यही नहीं समझते।”

Uptrend

मैंने chart पर Higher High और Higher Low दिखाया।

“यह देखो।”

“हर नया High पिछले High से ऊपर है।”

“और हर नया Low भी ऊपर है।”

“मतलब?”

“Uptrend।”

पहाड़ी चढ़ाई वाला उदाहरण

मैंने कहा —

“मान लो तुम नंदी हिल्स चढ़ रहे हो।”

“हाँ।”

“रास्ते में थोड़ी-थोड़ी ढलान आएगी।”

“हाँ।”

“लेकिन कुल मिलाकर ऊपर ही जा रहे हो।”

“तो यही Uptrend है।”

Downtrend

मैंने दूसरा chart खोला।

“अब यह देखो।”

“हर नया High नीचे बन रहा है।”

“और हर नया Low भी नीचे।”

“मतलब Downtrend।”

Trend Line कैसे बनती है

बेटेलाल बोले —

“तो Trend Line खींचते कैसे हैं?”

मैंने chart पर दो Higher Lows को जोड़ा।

“बस ऐसे।”

“इतना आसान?”

“सिद्धांत आसान है।”

“कमाई कठिन है।”

दोनों हँस पड़े।

Trend Line क्या बताती है?

मैंने कहा —

“Trend Line market की दिशा दिखाती है।”

“मतलब?”

“जैसे सड़क पर lane marking होती है।”

“हाँ।”

“वैसे ही Trend Line market की lane है।”

Trend टूट जाए तो?

बेटेलाल ने पूछा —

“अगर Trend Line टूट जाए तो?”

मैंने कहा —

“तब सावधान हो जाओ।”

“मतलब trend खत्म?”

“जरूरी नहीं।”

“फिर?”

“लेकिन market तुम्हें बता रहा है कि कुछ बदल रहा है।”

Trend is Your Friend

मैंने कहा —

“Market का एक पुराना नियम है।”

“क्या?”

“Trend is Your Friend.”

“मतलब Trend के साथ रहो।”

“क्यों?”

“क्योंकि नदी के बहाव के साथ तैरना आसान है।”

“और उसके खिलाफ?”

“बहुत ऊर्जा लगती है।”

सबसे बड़ी गलती

मैंने कहा —

“नए traders क्या करते हैं पता है?”

“क्या?”

“गिरते हुए शेयर में bottom खोजते रहते हैं।”

“और?”

“चढ़ते हुए शेयर में top खोजते रहते हैं।”

“मतलब?”

“Trend से लड़ते रहते हैं।”

Time Frame फिर महत्वपूर्ण

बेटेलाल बोले —

“क्या Trend भी Time Frame के हिसाब से बदलता है?”

मैं मुस्कुराया।

“बहुत अच्छा सवाल।”

“5 Minute chart Downtrend में हो सकता है।”

“लेकिन Daily chart Uptrend में।”

“और Weekly chart Strong Uptrend में।”

“मतलब?”

“पहले तय करो कि तुम trader हो या investor।”

“फिर सही Time Frame देखो।”

Support, Resistance और Trend

मैंने chart पर तीनों एक साथ दिखाया।

“अब असली खेल शुरू होता है।”

“कैसे?”

“Trend बताता है दिशा।”

“Support बताता है कहाँ रुक सकते हैं।”

“Resistance बताता है कहाँ मुश्किल आ सकती है।”

“और Volume?”

“बताता है कि कितने लोग इस यात्रा में शामिल हैं।”

बेटेलाल अब मुस्कुरा रहे थे।

“मतलब धीरे-धीरे puzzle पूरा हो रहा है।”

“बिल्कुल।”

असली सीख

सामने स्क्रीन पर एक शेयर Uptrend में चल रहा था।

मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“Trend Line भविष्य नहीं बताती।”

“फिर?”

“वह सिर्फ वर्तमान की दिशा दिखाती है।”

“और ज्यादातर लोगों को दिशा ही नहीं पता होती।”

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर बेटेलाल बोले —

“डैडी, अब chart पहले से कम डरावने लगते हैं।”

मैं मुस्कुराया।

“क्योंकि अब तुम candles नहीं देख रहे।”

“तुम market की भाषा सीख रहे हो।”

फिर उन्होंने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने मॉनिटर पर एक Moving Average indicator लगाते हुए कहा —

“अगले भाग में समझेंगे — Moving Average आखिर क्या होता है, और क्यों लाखों traders इसे chart पर लगाकर रखते हैं।”

क्रमशः…

#sharemarket
#learnstock
#investment
#betelal
#financialbakwas

Volume आखिर Market का Attendance Register क्यों कहलाता है?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 20

Volume आखिर Market का Attendance Register क्यों कहलाता है?

शुक्रवार की सुबह मैं अपने स्टडी रूम में बैठा था। सामने PC Terminal खुला हुआ था। तीन मॉनिटर पर अलग-अलग charts चल रहे थे। एक स्क्रीन पर Nifty, दूसरी पर कुछ शेयर और तीसरी पर watchlist खुली हुई थी।

बेटेलाल बगल वाली कुर्सी पर बैठे स्क्रीन को बहुत ध्यान से देख रहे थे।

आज उनकी नजर candles पर नहीं थी।

वे नीचे दिख रही रंग-बिरंगी लंबे-छोटे बार को देख रहे थे।

कुछ देर बाद उन्होंने पूछा —

“डैडी, ये candles तो समझ आ गईं।”

“अच्छी बात है।”

“लेकिन इनके नीचे ये खंभे जैसे क्या बने हैं?”

मैं मुस्कुराया।

“आखिरकार तुम Volume तक पहुँच ही गये।”

Volume आखिर होता क्या है?

मैंने स्क्रीन पर zoom किया।

“देखो बेटेलाल।”

“हाँ।”

“Volume का मतलब है — किसी समय अवधि में कितने shares खरीदे और बेचे गये।”

“मतलब?”

“जितना ज्यादा Volume, उतने ज्यादा लोग उस शेयर में भाग ले रहे हैं।”

Attendance Register

मैंने कहा —

“Volume को मैं हमेशा Attendance Register कहता हूँ।”

बेटेलाल हँस पड़े।

“स्कूल वाला?”

“बिल्कुल।”

“क्यों?”

“मान लो स्कूल में कोई भाषण हो रहा है।”

“हाँ।”

“अगर सिर्फ पाँच बच्चे बैठे हैं तो उसका प्रभाव कितना होगा?”

“कम।”

“और अगर पूरा स्कूल मौजूद हो?”

“तो बात अलग होगी।”

“बस यही Volume है।”

Candle और Volume का रिश्ता

मैंने chart पर एक बड़ी हरी candle दिखाई।

“अगर बड़ी हरी candle के साथ Volume भी बड़ा हो?”

“तो?”

“मतलब बहुत सारे लोग खरीदारी में शामिल हैं।”

“और अगर बड़ी candle है लेकिन Volume कम है?”

“तो थोड़ा सावधान रहना चाहिए।”

Traffic वाला उदाहरण

“मान लो सुबह-सुबह सड़क खाली है।”

“हाँ।”

“और एक कार 100 की स्पीड से निकल जाए।”

“तो?”

“कोई बड़ी बात नहीं।”

“लेकिन वही स्पीड अगर भारी ट्रैफिक में दिखाई दे?”

“तो मामला अलग है।”

“बस यही Volume समझो।”

Breakout में Volume

बेटेलाल ने पूछा —

“डैडी, लोग Volume को इतना महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?”

मैंने एक chart खोला।

“मान लो कोई शेयर कई दिनों से 100 रुपये के ऊपर नहीं जा पा रहा।”

“हाँ।”

“फिर एक दिन 100 के ऊपर निकल गया।”

“तो Breakout।”

“सही।”

“लेकिन असली सवाल है।”

“क्या?”

“उस Breakout के समय Volume कितना था?”

दो प्रकार के Breakout

पहला

Breakout

कम Volume

“यह नकली भी हो सकता है।”

दूसरा

Breakout

High Volume

“यह ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।”

बेटेलाल बोले —

“मतलब भीड़ भी साथ आनी चाहिए।”

“Exactly.”

Volume और Panic

मैंने दूसरी स्क्रीन पर chart खोला।

“अब यह देखो।”

“अचानक भारी गिरावट।”

“हाँ।”

“और साथ में बहुत ज्यादा Volume।”

“मतलब?”

“कई लोग घबराकर बेच रहे हैं।”

Volume और Time Frame

बेटेलाल बोले —

“क्या Volume भी Time Frame के हिसाब से बदलता है?”

मैं मुस्कुराया।

“बहुत अच्छा सवाल।”

“5 Minute chart का Volume अलग कहानी सुनाता है।”

“Daily chart का अलग।”

“Weekly chart का अलग।”

“Long Term निवेशक Daily और Weekly Volume ज्यादा देखते हैं।”

Volume हमेशा सही नहीं होता

“लेकिन एक बात याद रखना।”

“क्या?”

“Volume भगवान नहीं है।”

दोनों हँस पड़े।

“मतलब?”

“सिर्फ Volume देखकर Trade नहीं करना चाहिए।”

“तो?”

“Candle.”

“Trend.”

“Support.”

“Resistance.”

“Time Frame.”

“और Volume.”

“सबको साथ देखना पड़ता है।”

असली सीख

PC Terminal पर candles लगातार बन रही थीं।

Volume bars ऊपर-नीचे हो रही थीं।

मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“Candle बताती है कि Price कहाँ गया।”

“हाँ।”

“लेकिन Volume बताता है कि उस यात्रा में कितने लोग साथ थे।”

कुछ देर दोनों चुप रहे।

बेटेलाल अब Volume bars को अलग नजर से देख रहे थे।

उन्हें वे सिर्फ रंगीन खंभे नहीं लग रहे थे।

वे market में शामिल लोगों की भीड़ दिखाई देने लगी थी।

फिर उन्होंने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने terminal पर Volume indicator बंद करते हुए कहा —

“अगले भाग में समझेंगे — Support और Resistance वास्तव में होते क्या हैं, और क्यों Market बार-बार कुछ खास स्तरों पर जाकर रुक जाता है।”

क्रमशः…

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #financialbakwas

एक ही शेयर अलग-अलग चार्ट में अलग क्यों दिखता है?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 19

एक ही शेयर अलग-अलग चार्ट में अलग क्यों दिखता है?

शुक्रवार की सुबह है।

रात की बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया था। मैं अपने स्टडी रूम में बैठा था। सामने डेस्क पर बड़ा मॉनिटर लगा था, जिसमें trading terminal खुला हुआ था।

स्क्रीन पर दर्जनों charts दिखाई दे रहे थे। कहीं हरी candles बन रही थीं, कहीं लाल।

सामने बेटेलाल अपनी कुर्सी खींचकर बैठ गये थे।

वे काफी देर से स्क्रीन को घूर रहे थे।

फिर अचानक बोले —

“डैडी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।”

मैं मुस्कुराया।

“शेयर बाजार में यह बहुत सामान्य स्थिति है।”

दोनों हँस पड़े।

बेटेलाल बोले —

“नहीं सच में।”

“क्या हुआ?”

“अभी मैंने इसी शेयर का 5 मिनट का chart देखा तो वह नीचे जा रहा था।”

“हाँ।”

“फिर Daily chart देखा तो ऊपर जा रहा था।”

“हाँ।”

“और Weekly chart में तो वह और भी मजबूत दिख रहा है।”

“तो आखिर सच कौन बोल रहा है?”

मैं मुस्कुराया।

“तीनों।”

Time Frame आखिर होता क्या है?

मैंने terminal पर एक chart खोला।

“देखो बेटेलाल, market वही है।”

“हाँ।”

“लेकिन तुम उसे किस खिड़की से देख रहे हो, यह बदल जाता है।”

मैंने खिड़की की तरफ इशारा किया।

“अगर तुम बारिश को एक मिनट देखो तो क्या दिखेगा?”

“कुछ बूंदें।”

“अगर एक घंटा देखो?”

“अच्छी बारिश।”

“और पूरा दिन देखो?”

“मौसम का अंदाजा लग जाएगा।”

“बस यही Time Frame है।”

1 Minute Chart

मैंने chart बदलते हुए कहा —

“यह सबसे छोटा और सबसे शोर वाला chart है।”

“मतलब?”

“यह market का heartbeat है।”

“कौन देखता है इसे?”

“Scalpers।”

“जो कुछ मिनटों में trade करते हैं।”

5 Minute Chart

“यह Intraday traders का पसंदीदा chart है।”

“क्यों?”

“क्योंकि इसमें noise थोड़ा कम हो जाता है।”

15 Minute Chart

“यह थोड़ा शांत स्वभाव का chart है।”

“मतलब?”

“यह trend को थोड़ा साफ दिखाता है।”

1 Hour Chart

मैंने अगला chart खोला।

“अब चीजें और स्पष्ट दिखने लगती हैं।”

“यह कौन देखता है?”

“Swing traders।”

Daily Chart

मैंने स्क्रीन पर Daily chart खोला।

“अब असली कहानी शुरू होती है।”

बेटेलाल ध्यान से देखने लगे।

“अरे! यह तो 5 मिनट वाले chart से बिल्कुल अलग दिख रहा है।”

मैंने कहा —

“क्योंकि Daily chart बाजार का मूड दिखाता है।”

“5 Minute chart बाजार का शोर।”

Weekly Chart

मैंने Weekly chart खोला।

बेटेलाल कुछ सेकंड तक उसे देखते रहे।

“यह तो और भी साफ दिख रहा है।”

“बिल्कुल।”

मैंने कहा —

“Weekly chart कई बार निवेशकों का सबसे अच्छा दोस्त होता है।”

Monthly Chart

मैंने अंतिम chart खोला।

“और यह?”

बेटेलाल हँस पड़े।

“यह तो पूरा इतिहास लग रहा है।”

मैंने कहा —

“Long Term Investors यही देखते हैं।”

पेड़ वाला उदाहरण

स्टडी रूम की खिड़की से बाहर आम का पेड़ दिखाई दे रहा था।

मैंने उसकी तरफ इशारा किया।

“अगर तुम एक घंटे तक पेड़ को देखो तो क्या दिखाई देगा?”

“हवा में हिलती शाखाएँ।”

“एक महीने तक देखो?”

“नई पत्तियाँ।”

“एक साल तक देखो?”

“पेड़ कितना बढ़ा।”

“बस यही Time Frame का खेल है।”

सबसे बड़ी गलती

बेटेलाल बोले —

“तो नए लोग कहाँ गलती करते हैं?”

मैंने कहा —

“Long Term निवेश करते हैं।”

“हाँ।”

“लेकिन दिन भर 5 Minute chart देखते रहते हैं।”

दोनों हँस पड़े।

मैंने कहा —

“फिर छोटी-सी गिरावट देखकर डर जाते हैं।”

कौन क्या देखे?

मैंने terminal पर एक नोट लिख दिया।

Intraday Trader

5 Minute

15 Minute

Swing Trader

1 Hour

Daily

Positional Investor

Daily

Weekly

Long Term Investor

Weekly

Monthly

कुछ देर दोनों चुप रहे।

स्क्रीन पर candles लगातार बनती रहीं।

मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“गलत chart नहीं होता।”

“गलत Time Frame होता है।”

“मतलब?”

“अगर तुम एक आम के पेड़ से पाँच मिनट में आम की उम्मीद करोगे…”

“तो निराश ही होगे।”

मैं मुस्कुराया।

“और यही गलती अधिकांश निवेशक करते हैं।”

बेटेलाल अब स्क्रीन को अलग नजर से देख रहे थे।

उन्हें पहली बार समझ आया कि एक ही शेयर अलग-अलग कहानी नहीं सुना रहा था।

वह बस अलग-अलग समय की कहानी सुना रहा था।

फिर उन्होंने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने terminal पर Volume indicator लगाते हुए कहा —

“अगले भाग में समझेंगे — Volume आखिर market का attendance register क्यों कहलाता है, और बिना Volume देखे trade करना कितना खतरनाक हो सकता है।”

क्रमशः…

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #financialbakwas

Piercing Pattern और Dark Cloud Cover आखिर बाजार में पलटवार की पहली चेतावनी क्यों माने जाते हैं?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 18

Piercing Pattern और Dark Cloud Cover आखिर बाजार में पलटवार की पहली चेतावनी क्यों माने जाते हैं?

बुधवार की शाम थी।

दिन भर बादल छाये रहे थे, लेकिन बारिश नहीं हुई थी। मौसम इतना अच्छा था कि हमने तय किया कि आज ड्राइंग रूम की बजाय घर की छत पर बैठा जाए।

हम दोनों छत पर रखी कुर्सियों पर बैठे थे।

सामने दूर तक पेड़ों की कतारें दिखाई दे रही थीं। कहीं-कहीं ऊँची इमारतों की खिड़कियों में रोशनी जलने लगी थी। सूरज डूबने की तैयारी कर रहा था और आसमान नारंगी तथा हल्के बैंगनी रंगों से भर गया था।

बेटेलाल के हाथ में मोबाइल।

और शेयर बाज़ार की शिक्षा अपने समय के अनुसार चल रही थी।

तभी बेटेलाल ने मोबाइल मेरी तरफ बढ़ाया।

“डैडी, आज ये Piercing Pattern और Dark Cloud Cover दिखाई दे रहे हैं।”

मैं मुस्कुराया।

“अच्छा… आज हम बाजार के पहले पलटवार की कहानी समझते हैं।”

Piercing Pattern क्या होती है?

मैंने कहा —

“यह दो candles से मिलकर बनने वाला pattern है।”

“Harami जैसा?”

“नहीं।”

“थोड़ा अलग है।”

मैंने chart की तरफ इशारा किया।

“पहले एक बड़ी लाल candle बनती है।”

“मतलब sellers मजबूत हैं।”

“हाँ।”

“फिर अगले दिन एक हरी candle बनती है।”

“तो buyers आ गये?”

“सिर्फ आये नहीं।”

“उन्होंने पलटवार किया।”

बेटेलाल ध्यान से सुन रहे थे।

मैंने कहा —

“लेकिन पूरी जीत नहीं हुई।”

“मतलब?”

“हरी candle लाल candle को पूरी तरह नहीं निगलती।”

“फिर?”

“लेकिन उसके शरीर के आधे से ज्यादा हिस्से तक घुस जाती है।”

“इसलिए इसे Piercing Pattern कहते हैं?”

“बिल्कुल।”

“जैसे किसी रक्षा पंक्ति में पहली सेंध लग गई हो।”

Market Psychology

छत पर हल्की हवा चल रही थी।

मैंने कहा —

“सोचो sellers कई दिनों से market को नीचे धकेल रहे हैं।”

“हाँ।”

“फिर अचानक buyers ताकत दिखाना शुरू करते हैं।”

“मतलब पहली बार उम्मीद दिखाई देती है।”

“Exactly।”

Dark Cloud Cover

बेटेलाल बोले —

“तो Dark Cloud Cover इसका उल्टा होगा?”

“बिल्कुल।”

मैंने कहा —

“पहले एक मजबूत हरी candle।”

“Buyers खुश।”

“फिर अगली candle लाल।”

“और?”

“वह पहली हरी candle के शरीर के आधे से ज्यादा हिस्से में घुस जाती है।”

बेटेलाल बोले —

“मतलब sellers पहली बार जोरदार वापसी कर रहे हैं।”

“अब तुम खुद समझने लगे हो।”

आसमान वाला उदाहरण

मैंने सामने डूबते सूरज की तरफ इशारा किया।

“देखो अभी सूरज दिख रहा है।”

“हाँ।”

“लेकिन धीरे-धीरे बादल उसके सामने आने लगें।”

“तो रोशनी कम होने लगेगी।”

“बस वही Dark Cloud Cover है।”

“मतलब अभी रात नहीं हुई है।”

“लेकिन संकेत मिल गया है कि अंधेरा आ सकता है।”

Time Frame की बात

बेटेलाल ने पूछा —

“डैडी, अगर Piercing Pattern 5 मिनट के chart में बने और Weekly chart में भी बने तो क्या दोनों समान हैं?”

मैं मुस्कुराया।

“नहीं।”

मैंने कहा —

“याद रखना।”

“जितना बड़ा Time Frame, उतना बड़ा महत्व।”

सामान्य नियम

5 Minute → Intraday traders

15 Minute → Intraday confirmation

1 Hour → Swing entry planning

Daily → सबसे ज्यादा देखा जाने वाला chart

Weekly → Positional investors

Monthly → Long-term investors

और यह नियम सभी कैंडल पैटर्न के लिए लागू होता है।

मैंने कहा —

“अगर Weekly chart पर Piercing Pattern बन रही है तो उसका महत्व Daily chart से ज्यादा हो सकता है।”

सबसे बड़ी गलती

“नए लोग pattern देखते हैं।”

“हाँ।”

“अनुभवी लोग pattern का context देखते हैं।”

“मतलब?”

“Trend क्या है?”

“Volume कैसा है?”

“Support और Resistance कहाँ है?”

“Time Frame कौन सा है?”

असली सीख

सूरज अब लगभग डूब चुका था।

छत पर हल्की ठंडक बढ़ने लगी थी।

मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“Piercing Pattern कहती है — Buyers वापस लड़ना शुरू कर रहे हैं।”

“और Dark Cloud Cover?”

“कहती है — Sellers मैदान में उतर चुके हैं।”

कुछ देर दोनों चुप रहे।

नीचे कॉलोनी की लाइटें जल चुकी थीं।

बेटेलाल मोबाइल की स्क्रीन को देखते हुए बोले —

“मतलब market में बदलाव अचानक नहीं आता।”

“पहले संकेत आते हैं।”

मैं मुस्कुराया।

“और candles उन्हीं संकेतों की भाषा हैं।”

फिर उन्होंने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैंने आसमान की तरफ देखते हुए कहा —

“अगले भाग में समझेंगे — अलग-अलग Time Frames आखिर एक ही शेयर की अलग-अलग कहानी क्यों सुनाते हैं, और निवेशक तथा trader को कौन सा chart देखना चाहिए।”

क्रमशः…

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #financialbakwas

Harami Pattern का नाम इतना अजीब क्यों है, और Traders इसे इतना ध्यान से क्यों देखते हैं?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 17

Harami Pattern का नाम इतना अजीब क्यों है, और Traders इसे इतना ध्यान से क्यों देखते हैं?

बुधवार की सुबह है। आज ऑफिस से छुट्टी किसी कारण से ली हुई है, तो कहीं जाना था, वहाँ से फ्री जल्दी हो गये, अब दिनभर आराम ही रहेगा।

रात की हल्की बारिश के बाद मौसम बड़ा सुहावना हो गया था। ड्राइंग रूम की बड़ी खिड़की से आती धूप फर्श पर एक सुंदर आकृति बना रही थी।

मैं अपने पसंदीदा recliner पर बैठा था। सामने छोटी मेज़ पर गर्म चाय रखी थी और साथ में Biscoff बिस्कुट का पैकेट खुला पड़ा था।

वैसे चाय के साथ Parle-G का मुकाबला कोई नहीं कर सकता, लेकिन कभी-कभी Biscoff भी अपने विदेशी स्वाद से भारतीय चाय के साथ दोस्ती करने की कोशिश कर लेता है।

सामने वाले recliner पर बेटेलाल मोबाइल में chart खोले बैठे थे।

टीवी पर बिजनेस चैनल म्यूट पर चल रहा था। स्क्रीन पर लाल-हरी candles नाच रही थीं और एंकर शायद बाजार में या तो महाभारत शुरू होने की घोषणा कर रहा था या फिर नया स्वर्ण युग आने वाला था। म्यूट होने की वजह से पता नहीं चल रहा था।

तभी बेटेलाल अचानक हँस पड़े।

मैंने पूछा —

“क्या हुआ?”

उन्होंने मोबाइल मेरी तरफ बढ़ाया।

“डैडी, ये Harami Pattern आखिर होता क्या है?”

मैं मुस्कुराया।

“अच्छा… आज नाम पर मत जाना।”

“मतलब?”

“क्योंकि इसका अर्थ वह नहीं है जो हिंदी में सुनकर तुम्हारे दिमाग में आया होगा।”

दोनों हँस पड़े।

Harami आखिर है क्या?

मैंने चाय की चुस्की लेते हुए कहा —

“यह शब्द जापानी भाषा से आया है।”

“ओह!”

“और जापानी भाषा में Harami का अर्थ होता है — गर्भवती।”

“हैं जी?”

मैं हँस पड़ा।

“नाम सुनकर मत घबराओ, chart देखकर समझो।”

मैंने मोबाइल हाथ में लिया।

“देखो, पहले एक बड़ी candle बनती है।”

“हाँ।”

“फिर उसके बाद एक छोटी candle बनती है।”

“हाँ।”

“और वह छोटी candle पहली बड़ी candle के शरीर के अंदर रहती है।”

बेटेलाल कुछ सेकंड chart को देखते रहे।

फिर बोले —

“अरे! सच में।”

Bullish Harami

मैंने कहा —

“मान लो market कई दिनों से गिर रहा है।”

“हाँ।”

“फिर एक बड़ी लाल candle बनती है।”

“मतलब sellers का दबदबा है।”

“बिल्कुल।”

“लेकिन अगले दिन एक छोटी हरी candle बनती है जो पहली candle के अंदर रहती है।”

बेटेलाल बोले —

“मतलब sellers की ताकत कम हो रही है?”

मैंने कहा —

“यही संभावना दिखाई देने लगती है।”

मैंने सामने रखा Biscoff उठाया।

“देखो, अगर कोई ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हो और अचानक 40 पर आ जाए…”

“तो?”

“ट्रेन रुकी नहीं है।”

“लेकिन गति कम हो गई है।”

“बस वही Harami का मूल विचार है।”

Bearish Harami

मैंने chart आगे scroll किया।

“अब इसका उल्टा देखो।”

“Market ऊपर जा रहा है।”

“हाँ।”

“एक बड़ी हरी candle बनी।”

“Buyers खुश हैं।”

“फिर उसके बाद एक छोटी लाल candle।”

“जो पहली candle के अंदर है।”

“बिल्कुल।”

बेटेलाल बोले —

“मतलब buyers का momentum कम हो रहा है?”

मैंने कहा —

“अब तुम pattern नहीं, psychology पढ़ रहे हो।”

सबसे बड़ी गलती

टीवी पर अचानक Breaking News की लाल पट्टी चमकी।

मैंने हँसते हुए कहा —

“देखो, market में सबसे ज्यादा नुकसान दो लोग करते हैं।”

“कौन?”

“एक जो कुछ सीखना नहीं चाहते।”

“और दूसरे?”

“जो एक pattern देखकर खुद को Warren Buffett और Rakesh Jhunjhunwala का संयुक्त अवतार समझ लेते हैं।”

दोनों हँस पड़े।

Harami क्या नहीं बताती?

बेटेलाल बोले —

“तो Harami बनते ही trade नहीं लेना चाहिए?”

“बिल्कुल नहीं।”

“क्यों?”

“क्योंकि Harami कोई भविष्यवाणी नहीं करती।”

“फिर?”

“सिर्फ संकेत देती है कि momentum कमजोर पड़ सकता है।”

Time Frame भी जरूरी है

बेटेलाल ने पूछा —

“डैडी, अगर यही Harami 5 मिनट के chart में बने और Daily chart में भी बने तो क्या दोनों बराबर हैं?”

मैं मुस्कुराया।

“अब तुम असली सवाल पूछ रहे हो।”

मैंने कहा —

“याद रखना, Time Frame pattern की ताकत बदल देता है।”

“मतलब?”

“5 Minute chart की Harami कुछ घंटों का असर दिखा सकती है।”

“हाँ।”

“Daily chart की Harami कई दिनों या हफ्तों का असर दिखा सकती है।”

“और Weekly?”

“वह कई बार महीनों की दिशा बदलने का संकेत भी दे सकती है।”

मैंने चाय का आखिरी घूंट लेते हुए कहा —

“जैसे मौसम का अनुमान एक घंटे देखकर नहीं लगाया जाता, वैसे ही निवेश सिर्फ छोटे Time Frame देखकर नहीं किया जाता।”

असली सीख

कमरे में कुछ देर शांति रही।

टीवी अब भी म्यूट था।

खिड़की से आती धूप थोड़ी और तेज हो गई थी।

मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“Marubozu ताकत दिखाती है।”

“हाँ।”

“Spinning Top अनिश्चितता दिखाती है।”

“हाँ।”

“और Harami?”

“Momentum कमजोर पड़ने का संकेत देती है।”

मैं मुस्कुराया।

“बहुत बढ़िया।”

बेटेलाल अब मोबाइल को अलग नजर से देख रहे थे।

उन्हें candles की आकृतियाँ नहीं, उनके पीछे छुपे buyers और sellers दिखाई देने लगे थे।

फिर उन्होंने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैं मुस्कुराया।

“अगले भाग में समझेंगे — Piercing Pattern और Dark Cloud Cover कैसे buyers और sellers के बीच होने वाली पहली बड़ी पलटवार की लड़ाई को दिखाते हैं।”

क्रमशः…

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #financialbakwas

छोटी सी Spinning Top Candle इतनी बड़ी बात क्यों बताती है?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 14

छोटी सी Spinning Top Candle इतनी बड़ी बात क्यों बताती है?

रविवार की सुबह थी। बेंगलुरु का मौसम वैसे भी देश के बाकी शहरों से थोड़ा अच्छा रहता है, लेकिन बारिश के बाद की सुबह हो तो बात ही कुछ और होती है।

मैं और बेटेलाल आज कॉलोनी की बजाय कबन पार्क आये हुए थे। चारों तरफ हरियाली थी। पुराने बरगद और रेन ट्री की विशाल शाखाएँ सड़क के ऊपर प्राकृतिक छत बना रही थीं।

कुछ लोग जॉगिंग कर रहे थे, कुछ योग कर रहे थे,

दूर से बच्चों की हँसी सुनाई दे रही थी।

एक तरफ कुछ लोग कैमरा लेकर पक्षियों की फोटो खींच रहे थे।

बेटेलाल ने चलते-चलते मोबाइल निकाला।

“डैडी, कल आपने Marubozu समझाई थी। आज chart में एक और candle दिखाई दी।”

“कौन सी?”

“ये देखिये।”

मैंने मोबाइल देखा।

“अच्छा… Spinning Top।”

बेटेलाल बोले —

“नाम सुनकर तो लगता है जैसे लट्टू हो।”

मैं हँस पड़ा।

“असल में है भी कुछ वैसा ही।”

हम दोनों धीरे-धीरे पेड़ों से घिरे रास्ते पर आगे बढ़ने लगे।

मैंने कहा —

“देखो बेटेलाल, Marubozu हमें confidence दिखाती है।”

“मतलब?”

“Buyers या Sellers में से किसी एक का पूरा दबदबा।”

“हाँ।”

“लेकिन Spinning Top उसका बिल्कुल उल्टा है।”

“कैसे?”

मैंने कहा —

“यह market की अनिश्चितता दिखाती है।”

Spinning Top आखिर होती क्या है?

हम एक बड़े बरगद के पेड़ के पास रुक गये।

मैंने कहा —

“इस candle की body छोटी होती है।”

“और wick?”

“ऊपर भी होती है और नीचे भी।”

“मतलब market ऊपर भी गया और नीचे भी गया?”

“बिल्कुल।”

“फिर?”

“फिर अंत में वहीं के आसपास आकर बंद हो गया।”

बेटेलाल बोले —

“मतलब पूरा दिन मेहनत की और हासिल कुछ नहीं हुआ?”

मैं हँस पड़ा।

“कुछ वैसा ही समझ लो।”

Market Psychology

पास से एक छोटा बच्चा लट्टू घुमाते हुए निकला।

मैंने उसकी तरफ इशारा किया।

“देखो उसे।”

“हाँ।”

“जब तक लट्टू घूम रहा है, तुम्हें लगता है बहुत कुछ हो रहा है।”

“हाँ।”

“लेकिन वह अपनी जगह से बहुत दूर नहीं जाता।”

बेटेलाल मुस्कुराये।

“अच्छा… इसलिए नाम Spinning Top है।”

“बिल्कुल।”

Buyers और Sellers क्या कर रहे होते हैं?

मैंने कहा —

“कल्पना करो कि buyers price ऊपर ले गये।”

“हाँ।”

“फिर sellers आये और नीचे धकेल दिया।”

“फिर?”

“फिर buyers वापस आ गये।”

“मतलब पूरे दिन रस्साकशी चली?”

“Exactly।”

क्या यह Reversal का Signal है?

बेटेलाल ने तुरंत पूछा —

“तो क्या Spinning Top बनते ही trend बदल जाएगा?”

मैं मुस्कुराया।

“यही गलती लोग करते हैं।”

“मतलब?”

“Spinning Top सिर्फ यह कहती है कि market सोच रहा है।”

“निर्णय नहीं ले पा रहा?”

“हाँ।”

Cubbon Park वाला उदाहरण

हम आगे बढ़े तो सामने एक बड़ा चौराहा आया।

चार दिशाओं में रास्ते जा रहे थे।

मैंने कहा —

“मान लो पहली बार कोई व्यक्ति Cubbon Park आया हो।”

“हाँ।”

“और इस चौराहे पर आकर रुक जाए।”

“फिर?”

“उसे समझ नहीं आ रहा कि किस रास्ते जाए।”

“तो?”

“यही Spinning Top है।”

“मतलब market भी दिशा चुनने से पहले रुककर सोचता है?”

“बिल्कुल।”

यह कैंडल सबसे ज्यादा कब और कहाँ दिखे तो महत्वपूर्ण होती है?

मैंने कहा —

“अगर Spinning Top किसी महत्वपूर्ण Support या Resistance के पास बने…”

“तो?”

“उसकी अहमियत बढ़ जाती है।”

“क्यों?”

“क्योंकि वहाँ market फैसला कर रहा होता है कि आगे बढ़ना है या वापस मुड़ना है।”

सबसे बड़ी सीख

हम अब पार्क के बीच वाले हिस्से में पहुँच चुके थे।

हल्की हवा चल रही थी।

ऊपर पेड़ों के बीच से छनकर आती धूप जमीन पर सुंदर आकृतियाँ बना रही थी।

मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“हर बड़ी candle ताकत नहीं दिखाती।”

“और?”

“हर छोटी candle कमजोरी भी नहीं दिखाती।”

“मतलब?”

“कई बार सबसे महत्वपूर्ण बात वही candle बताती है जो कहती है — ‘अभी फैसला बाकी है।'”

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर बेटेलाल ने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैं मुस्कुराया।

“अगले भाग में समझेंगे — Morning Star और Evening Star patterns आखिर trend बदलने का संकेत क्यों माने जाते हैं।”

क्रमशः…

#sharemarket #learnstock #investment #betelal #financialbakwas

Marubozu Candle आखिर इतनी ताकतवर क्यों मानी जाती है?

शेयर बाज़ार पर ज्ञान की बकवास — भाग 13

Marubozu Candle आखिर इतनी ताकतवर क्यों मानी जाती है?

सुबह का समय था। रात की बारिश के बाद हवा में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी। मैं और बेटेलाल रोज़ की तरह कॉलोनी में टहल रहे थे।

बेटेलाल मोबाइल में chart देखते हुए बोले —

“डैडी, कल मैंने एक candle देखी। न ऊपर wick, न नीचे wick। पूरी की पूरी हरी थी।”

मैं मुस्कुराया।

“अच्छा… तो आज Marubozu की बारी आ गई।”

“नाम तो किसी जापानी समुराई जैसा लग रहा है।”

मैं हँस पड़ा।

“जापानी ही है। और candle भी उतनी ही अनुशासित मानी जाती है।”

Marubozu आखिर होती क्या है?

मैंने कहा —

“Marubozu ऐसी candle होती है जिसमें wick बहुत छोटी होती है या बिल्कुल नहीं होती।”

“मतलब?”

“मतलब opening से closing तक एक ही पक्ष का दबदबा रहा।”

“हैं जी?”

मैंने कहा —

“अगर पूरी हरी Marubozu है तो buyers शुरू से अंत तक मैदान में छाये रहे।”

“और लाल?”

“तो sellers ने पूरे दिन किसी को मौका नहीं दिया।”

Cricket वाला उदाहरण

मैंने कहा –

“मान लो कोई बल्लेबाज 100 रन बनाकर नॉट आउट लौटे और पूरे मैच में गेंदबाजों को मौका ही न दे।”

“तो domination कहेंगे।”

“बस वही Marubozu है।”

Bullish Marubozu

मैंने मोबाइल पर chart दिखाया।

“यह देखो।”

“पूरी हरी candle।”

“हाँ।”

“मतलब buyers लगातार खरीदते रहे।”

“और sellers?”

“लगभग पूरे दिन दबाव में रहे।”

Bearish Marubozu

“और यह?”

बेटेलाल ने दूसरी candle की तरफ इशारा किया।

“पूरी लाल।”

“मतलब sellers का एकतरफा दबदबा।”

“तो buyers गायब थे?”

“गायब नहीं… लेकिन कमजोर थे।”

क्या Marubozu दिखते ही खरीद लेना चाहिए?

बेटेलाल हँसते हुए बोले —

“तो फिर तो यह सबसे बढ़िया candle हुई।”

मैंने कहा —

“यही सोचकर लोग फँसते भी हैं।”

“मतलब?”

“हर मजबूत दिखने वाली candle अच्छा trade नहीं बनाती।”

मैंने कहा —

“देखो, अगर कोई पेड़ एक दिन में बहुत तेजी से बढ़ने लगे तो क्या तुम उसे देखकर कहोगे कि यह हमेशा ऐसे ही बढ़ेगा?”

“नहीं।”

“बस market भी ऐसा ही है।”

Context सबसे जरूरी है

“मतलब?”

“Marubozu कहाँ बनी है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

“कैसे?”

“अगर Bullish Marubozu किसी महत्वपूर्ण resistance को तोड़कर बनी हो…”

“तो?”

“Signal ज्यादा मजबूत हो सकता है।”

“और अगर Bearish Marubozu support तोड़ दे?”

“तो market की कमजोरी दिख सकती है।”

Volume का महत्व

बेटेलाल बोले —

“आप हर बार volume की बात क्यों करते हैं?”

मैंने कहा —

“क्योंकि volume market का attendance register है।”

“हैं जी?”

“अगर बड़ी candle बनी लेकिन volume नहीं है, तो समझो मैदान खाली था।”

“और volume ज्यादा हो?”

“तो समझो बड़ी संख्या में लोग उस दिशा में खड़े हैं।”

सबसे बड़ी सीख

मैंने कहा —

“याद रखना बेटेलाल…”

“क्या?”

“Marubozu हमें ताकत दिखाती है।”

“और?”

“लेकिन ताकत हमेशा स्थायी नहीं होती।”

बेटेलाल अब chart को अलग नजर से देख रहे थे।

शायद पहली बार उन्हें समझ आ रहा था कि बड़ी candle का मतलब सिर्फ बड़ा move नहीं होता… उसके पीछे भीड़ की मानसिकता भी छिपी होती है।

हम धीरे-धीरे घर की तरफ लौटने लगे।

तभी बेटेलाल ने पूछा —

“डैडी, अगली बार क्या सीखेंगे?”

मैं मुस्कुराया।

“अगले भाग में समझेंगे — Spinning Top Candle आखिर market की अनिश्चितता कैसे दिखाती है, और क्यों कई बार छोटी candle बड़ी कहानी सुना जाती है।”

क्रमशः…


#sharemarket
#learnstock
#investment
#betelal
#financialbakwas