हर बढ़ने वाला स्टॉक क्वालिटी स्टॉक नहीं होता Operator driven stocks

किसी कंपनी का भाव 30 रूपये चल रहा है, और ऑपरेटरों ने प्रमोटरों के साथ साँठगाँठ करके बाज़ार में शेयरों का भाव बढ़ाने की बात की, कुछ ही दिनों में कंपनी का भाव 150 रूपयों तक चला गया, फिर 175 रुपये भी हो गया, यह भाव बढ़ने का कार्यकाल 6 महीने से 60 महीने या कुछ ओर भी बड़ा हो सकता है।

शेयर बाज़ार में हमेशा ही उठापटक होती रहती है, जहाँ निवेशक अनिश्चित रहते हैं कि कौन से स्टॉक में अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा लगायें। क्योंकि आपने भी यह लाईन जरुर पढ़ी होगी – शेयर बाज़ार में निवेश जोखिमों के अधीन है। पर क्या जोखिम है, यह कोई नहीं बताता, किस प्रकार से उन जोखिमों से बचा जाये, यह भी कोई नहीं बताता। इसलिये हम कहते हैं कि हर बढ़ने वाला स्टॉक क्वालिटी स्टॉक नहीं होता।

अब यही समझ लिया जाये कि क्वालिटी स्टॉक क्या होता है – क्वालिटी स्टॉक मतलब कि अच्छी कंपनी, जिसके उत्पाद बढ़िया हों, बाज़ार में आपको दिखते हों, या बाज़ार में उपयोग होने वाले उत्पादों में उनका रॉ मटेरियल के रूप में उनका प्रयोग होता हो। बहुत सी ऐसी कंपनियाँ भी होती हैं जहाँ आपको यह सब नहीं दिखेगा, परंतु वे क्वालिटी स्टॉक होते हैं, तो उसके लिये आपको बहुत पढ़ना होगा, समझना होगा। तभी आप पता लगा पायेंगे कि हाँ यह कंपनी वाक़ई काम क्या करती है। ये जो पढ़ाई का काम है, बहुत ज़रूरी है क्योंकि जितना ज़्यादा समय आप देंगे उतना ही ज़्यादा आपको कंपनी के कार्यों व भविष्य में यह कैसा प्रतिसाद देगी, पर आप कोई राय बना पायेंगे। बस समस्या यही है कि भारत में इसकी कोई औपचारिक पढ़ाई नहीं है, ख़ाली समय में टीवी या टाइमपास करने की जगह सीखने की जिज्ञासा रखना होगी।

स्टॉक का भाव बढ़ता कब है, यह भी समझना होगा, इसमें कई प्रकार की ख़बरें काम करती हैं। जैसे कंपनी को कोई बड़ा ऑर्डर मिला, जिससे कंपनी की वैल्युएशन १-२ वर्ष में अच्छी खासी बढ़ जायेगी या फिर कंपनी ने कोई ऐसा नया उत्पाद निकाला जिसकी बाज़ार में बहुत ज़रूरत है और बाज़ार उस उत्पाद को हाथोंहाथ लेगा, इससे भी कंपनी को बहुत फ़ायदा होगा। तो आपको हमेशा ही बिज़नेस न्यूज़ पर अपनी पैनी नज़र रखनी होगी। साथ ही यह भी सीखना होगा कि क्या वाक़ई इस ख़बर का कोई मतलब भी है या नहीं, या यह ख़बर ही झूठी है, जो कि कुछ ऐसे तत्त्वों के द्वारा फैलायी जा रही है जो इस कंपनी का भाव शेयर बाज़ार में कुछ समय के लिये बढ़ाना चाहते हैं।

किसी भी कंपनी का भाव बढ़ाने वाले लोग ऑपरेटर कहलाते हैं, जहाँ कोई ऐसी कंपनी जिसका न उत्पाद ही अच्छा है, और न ही प्रबंधन, परंतु अचानक ही बाज़ार में उससे संबंधित ख़बरें आपको हर तरफ़ दिखाई देने लगती हैं। धीरे धीरे वह कंपनी का नाम आपके लिये जाना पहचाना हो जाता है, तो आपको उस कंपनी के इर्दगिर्द बनाई कहानी वाली ख़बरों पर विश्वास होने लगता है। ऑपरेटर ये गेम बड़ा पैसा बनाने के लिये करते हैं, ऑपरेटर जब भी ये काम करते हैं तो वे कंपनी के प्रमोटरों के साथ मिले होते हैं, क्योंकि बिना प्रमोटरों की मिलीभगत के ऐसा होना बहुत मुश्किल है। प्रमोटर ऐसी स्थिति में अपना स्टैक बाज़ार से ख़रीदकर बढ़ा लेगा, या फिर दोस्तों के नाम या छद्म कंपनियों के नाम से शेयर ख़रीद लेगा, यही ऑपरेटर करेगा। जब वे अच्छी खासी मात्रा में शेयर ख़रीद लेंगे तब बाज़ार में ख़बरों को फैलाने का काम शुरू करेंगे। जब शेयर अपने उच्चतम स्तर पर होगा, तब प्रमोटर और ऑपरेटर अपने शेयर आम निवेशकों को बेचकर बाहर हो जायेंगे। अब चूँकि उस कंपनी में दम ही नहीं है और बाज़ार में वॉल्यूम अचानक से कम हो जायेगा तो शेयरों का भाव टूटना लाज़मी है।

मैं किसी कंपनी का नाम नहीं लूँगा, परंतु एक उदाहरण से समझाता हूँ किसी कंपनी का भाव 30 रूपये चल रहा है, और ऑपरेटरों ने प्रमोटरों के साथ साँठगाँठ करके बाज़ार में शेयरों का भाव बढ़ाने की बात की, कुछ ही दिनों में कंपनी का भाव 150 रूपयों तक चला गया, फिर 175 रुपये भी हो गया, यह भाव बढ़ने का कार्यकाल 6 महीने से 60 महीने या कुछ ओर भी बड़ा हो सकता है, जब कंपनी के प्रमोटरों और ऑपरेटरों ने देखा कि हाँ अब आम निवेशक उनकी फैलाई ख़बरों पर यक़ीन करने लगा है, तब वे बेचना शुरू करती हैं और जिस तेज़ी से शेयर का भाव ऊपर गया था, उससे ज़्यादा तेज़ी से नीचे आ जाता है, 175 रूपयों से 30 रूपयों तक वापिस शेयर का भाव आने में कुछ ही महीने लगेंगे। और हमारा आम निवेशक इतना भोला होता है कि वह उच्चतम क़ीमत पर शेयरों को ख़ुशी ख़ुशी ख़रीद लेता है, और कभी भी लॉस बुक करने की नहीं सोचता है, जब शेयर वापिस से 30 रूपये हो जाता है तो वह उस शेयर में लंबी अवधि का निवेशक बन जाता है, अपने आप का दिलासा देता है कि कभी न कभी तो इस कंपनी का भाव वापिस से 175 रूपये आयेगा, तब उसे बेच देगा।

इसलिये मैं कहता हूँ कि शेयर बाज़ार में एक्शन कम करना चाहिये, एक्शन के मुक़ाबले पढ़ाई कम से कम एक लाख गुना होनी चाहिये, तभी आपको अच्छे और ऐसे बुरे शेयर जो कि ऑपरेटर व प्रमोटर मिलकर चलाते हैं, समझ में आयेगा।

One comment

  1. बहुत सुन्दर और सार्थक ।

    ऐसे लेखन से क्या लाभ? जिस पर टिप्पणियाँ न आये।
    ब्लॉग लेखन के साथ दूसरे लोंगों के ब्लॉगों पर भी टिप्पणी कीजिए।
    तभी तो आपकी पोस्ट पर भी लोग आयेंगे।

Leave a Reply to Dr. ROOP CHANDRA SHASTRICancel Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *