हमने अभी अपना फ़्लैट अपने बेटे के स्कूल के पास ले लिया है और घर बदलना मतलब बहुत माथाफ़ोड़ी का काम ।
अब अपन तो कितनी भी दूरी तय कर लो ऑफ़िस के लिये पर बच्चे को ज्यादा दूर नहीं होना चाहिये इसलिये हमने आखिरकार अपना फ़्लैट बदल लिया और स्कूल के नजदीक ही फ़्लैट ले लिया। अब मेरे बेटे को स्कूल जाने में केवल पाँच मिनिट लगते हैं, और आने में भी, हम निश्चिंत हैं।
जब अपना फ़्लैट शिफ़्ट किया तो तरह तरह के लोगों से सामना हुआ, सबसे पहले अपने फ़्लैट के ब्रोकर का (इस पर अलग से पोस्ट लिखेंगे) जो कि पंजाबी निकले और बहुत ही प्रेमी लोग हैं, एक अंकल और एक आंटी हैं पर स्वभाव से बहुत ही अच्छे। फ़िर हमारे फ़्लैट के मालिक वो निकले इलाहाबाद के मतलब हमारे ससुराल के। फ़िर हमारे एक आल इन वन मैन हैं जो कि सब काम कर देते हैं प्लंबिंग, कारपेन्टर, इलेक्ट्रीशियन और भी बहुत कुछ वो भी उत्तरप्रदेश से। (ऐसे आदमी को ढूँढ़ना मुंबई में बहुत मुश्किल है।) फ़िर हमारे अलमारी को खोलने और लगाने वाला @होम से जो शख्स आया वो भी इलाहाबाद से। जो मजदूर था हमारा समान को जिसने शिफ़्ट किया और हमने उसके साथ बराबार हाथ बंटाया वो भी इलाहाबाद से। ट्रक ड्रायवर मुंबई का ही था खालिस मराठी।
अब हमने सबकी तुलना की उनके व्यक्त्तिव की तो हमने पाया जो मुंबई के बाहर के हैं उनमें काम करने की आग है और काम को अपने जिम्मेदारी से करते हैं और जो मुंबई के हैं वे काम को अहसान बताकर कर रहे हैं।
बाहर का आदमी यहाँ पैसा कमाने आया है मजबूरी में आया है पर इनकी कोई मजबूरी नहीं है, इनकी मजबूरी है कि इन्हें केवल बिना काम के दारु मिलना चाहिये और अगर कोई उस काम को करे तो उसका विरोध करें। सीधी सी बात है न काम करेंगे न करने देंगे। भाव ऐसे खायेंगे कि पैसे लेकर काम करने पर भी अहसान कर रहे हैं, और कोई थोड़ा सा कुछ बोल दो तो बस इनकी त्यौरियाँ चढ़ जायेंगी।
अरे दम है तो रोको प्राईवेट बैंको को, व्यावसायिक संस्थाओं को, सॉफ़्टवेयर कंपनियों को जिनमें बाहर के लोग याने कि अधिकतर उत्तर भारतीय या दक्षिण भारतीय लोग चला रहे हैं, वहाँ मराठियों का प्रतिशत देखो तो इनको अपनी औकात पता चल जायेगी। ये वहाँ टिक नहीं पायेंगे क्योंकि इन लोगों को काम नहीं करना है केवल हरामखोरी करना है सरकारी कार्यालयों में।
मैं इस विवादास्पद मुद्दे पर लिखने से बच रहा था पर क्या करुँ जो कसैलापन मन में भर गया है उसे दूर करना बहुत मुश्किल है। अगर ये लोग उत्तर भारत के लोगों को मार रहे हैं तो उत्तर भारत के लोगों को मराठी लोगों को मारना चाहिये जो वहाँ रह रहे हैं और उनको महाराष्ट्र भेज देना चाहिये। ऐसा लगता है कि राजनीति में ये लोग देश को भूल गये हैं और पाकिस्तान और हिन्दुस्तान की लड़ाई बना रहे हैं।
थू है मेरी ऐसे लोगों पर जो ये सब कर रहे हैं और जो इनको समर्थन कर रहे हैं। मैं अपना विरोध दर्ज करवाता हूँ।