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About Vivek Rastogi

मैं २००६ से हिन्दी ब्लॉगिंग कर रहा हूँ, और वित्त प्रबंधन मेरा प्रिय विषय है। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसे आप https://youtube.com/financialbakwas देख सकते हैं।

pesto. tech जो 15 लाख से 60 लाख तक सैलेरी दिलवाने में मदद कर रहे हैं ।

pesto.tech एक भारतीय स्टार्टअप है जो कि भारत के युवाओं को 15 लाख से 60 लाख रूपयों तक सैलेरी दिलवाने में मदद कर रहे हैं, अमेरिका को हमेशा ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की भारी जरूरत है, परंतु वहाँ जाकर काम करने में वीजा एक बड़ी समस्या है। इसका एक हल यह भी था कि अमेरिका की कंपनियों में भारतीय इंजीनियर भारत से ही काम करें और तकनीकी रूप से समस्या को हल करें। मेरे दिमाग में भी यही बात थी क्योंकि एक पड़ौसी हैं जो कि यहीं बैंगलोर से अमेरिका की सॉफ्टवेयर कंपनी में रिमोट एम्पलायी हैं और लगभग उनकी सैलेरी $5000 या $6000 है, जो कि भारतीय रूपयों में लगभग हर माह 3 लाख से 4.5 लाख रूपयों के बीच होती है , सालाना लगभग 36 से 51 लाख रूपये होती है । वे पहले अमेरिका में उसी कंपनी में काम करती थीं और कंपनी को उनके ऊपर भरोसा था, इसलिये उस कंपनी की वे एकमात्र रिमोट एम्पलॉयी हैं, परंतु उनको भी पता है कि उनको भारत में आधी से भी कम सैलेरी मिल रही है, पर वे खुश हैं , क्योंकि उनको घर से ही काम करना है, उनके लिये कोई भी ऑफिस बैंगलोर में नहीं है। हो सकता है कि इस तरह के और भी कर्मचारी बैंगलोर में हों जो कि रिमोटली काम करते हों।

पर यह सॉल्यूशन नहीं है, यह केवल उन लोगों के लिये ही सुविधा है जो कि पहले से ही अमेरीकी कंपनियों में काम कर चुके हैं और कंपनियों को उन कर्मचारियों पर भरोसा है। भारत में बहुत से इंजीनियर ऐसे हैं जो बहुत अच्छा काम तो कर सकते हैं, और अगर उनके पास अमेरीकी वीजा हो तो उनको एकदम अमेरिका में जॉब भी मिल जाये, परंतु वीजा ही सबसे बड़ी समस्या है, अमेरिका में अभी 50 लाख सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कमी है और 2020 तक यह नंबर 1.4 करोड़ हो जायेगा । अमेरिका में इंजीनियर की सैलेरी लगभग $80.000 से $1, 00000 होती है ।

इस समस्या का हल निकाला आयुष और एन्ड्रू ने उन्होंने देखा कि कोई भी व्यक्ति जिसके पास अच्छे कोडिंग स्किल्स हों वो रिमोटली ही लगभग $150 हर घंटे के कमा सकता है, परंतु इस तरह के काम मिलना रोज संभव नहीं होता है, तो उन्होंने कंपनियों से बात की कि हम आपको भारत से स्किल्ड रिसोर्स देंगे आप उसे सीधे काम दे देना और अमेरिकी मॉडल के हिसाब से सैलेरी दे देना, कई अमेरिकी कंपनियों को यह बात जँची और उन्होंने हाँ कर दी। तो बस saluran नया स्टार्टअप pesto. tech अस्तित्व में आ गया ।

अब आयुष और एन्ड्रू के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री वाले बहुत से इंजीनियर तो उपलब्ध हैं, परंतु उनको कोडिंग करना ही नहीं आती थी, वे केवल डिग्रीधारी इंजीनियर थे, तो उन्होंने पेस्टो कंपनी बनाई, जहाँ 3 महीने का कोर्स डिजाईन किया , जिसमें JavaScript, ES6, HTML5, CSS3, JSON, Jaringan, protokol, browser, node, Express, Mongo, api, pengujian, Layanan penyebaran, produksi, keprihatinan etis dari produksi dan rekayasa perangkat lunak, Tek soft skills की ट्रेनिंग देते हैं । इस कोर्स के दौरान इंजीनियर को दिल्ली में ही रहना होता है और 24 घंटे में कभी भी काम करना पड़ता है, क्योंकि आप अमेरीकी कंपनी के लिये काम कर रहे होते हैं तो उनके समय के हिसाब से भी आपको अपना काम करने का समय निकालना होता है। इस दौरान वे अमेरिकी कल्चर भी सिखाते हैं, जिससे आपको अपने अमेरिकी एम्पलॉयर के साथ काम करने में ज्यादा परेशानी न हो।

यह भी इतना आसान नहीं है, पहले आपको उनका open source kurikulum करना होता है dan seterusnya आपको ilmu komputer के बेसिक फंडामेंटल पता होने चाहिये । आपकी इंगलिश अच्छी होनी चाहिये । एक बार 3 महीने की ट्रेनिंग हो गई तो उसके बाद pesto.tech आपको अपने Hiring Partners के साथ सीधे काम करने का मौका देते हैं, सीधे कंपनी आपको रिमोट एम्पलॉयी ले लेती है।

यहाँ तक सब फ्री है, जब आप जॉब करने लगते हैं तो आपको 5 वर्ष के लिये कॉन्ट्रेक्ट साईन करना होता है और 36 महीने की सैलेरी में से हर महीने pesto.tech 17% हिस्सा फीस के रूप में लेते हैं। यह फीस भी वे तभी लेते हैं अगर कमाई 15 लाख रूपयों से ज्यादा हो और उनकी फीस की अधिकतम सीमा है 20 लाख रूपये, याने कि किसी भी इंजीनियर से वे 20 लाख रूपयों से ज्याादा फीस के रूप में नहीं लेंगे। अभी तक उनके यहाँ की औसत सैलेरी 31 लाख रूपये है और अधिकतम 60 लाख रूपये सैलेरी है।

जरूरी नहीं है कि आपके पास Computer Science में इंजीनियरिंग डिग्री ही हो, आपके पास कोई भी डिग्री हो या न हो, अगर आपके कोडिंग स्किल्स अच्छे हैं तो भी आप इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। 

البيستو. التكنولوجيا जो 15 लाख से 60 लाख तक सैलेरी दिलवाने में मदद कर रहे हैं ।

pesto.tech एक भारतीय स्टार्टअप है जो कि भारत के युवाओं को 15 लाख से 60 लाख रूपयों तक सैलेरी दिलवाने में मदद कर रहे हैं, अमेरिका को हमेशा ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की भारी जरूरत है, परंतु वहाँ जाकर काम करने में वीजा एक बड़ी समस्या है। इसका एक हल यह भी था कि अमेरिका की कंपनियों में भारतीय इंजीनियर भारत से ही काम करें और तकनीकी रूप से समस्या को हल करें। मेरे दिमाग में भी यही बात थी क्योंकि एक पड़ौसी हैं जो कि यहीं बैंगलोर से अमेरिका की सॉफ्टवेयर कंपनी में रिमोट एम्पलायी हैं और लगभग उनकी सैलेरी $5000 या $6000 है, जो कि भारतीय रूपयों में लगभग हर माह 3 लाख से 4.5 लाख रूपयों के बीच होती है , सालाना लगभग 36 से 51 लाख रूपये होती है । वे पहले अमेरिका में उसी कंपनी में काम करती थीं और कंपनी को उनके ऊपर भरोसा था, इसलिये उस कंपनी की वे एकमात्र रिमोट एम्पलॉयी हैं, परंतु उनको भी पता है कि उनको भारत में आधी से भी कम सैलेरी मिल रही है, पर वे खुश हैं , क्योंकि उनको घर से ही काम करना है, उनके लिये कोई भी ऑफिस बैंगलोर में नहीं है। हो सकता है कि इस तरह के और भी कर्मचारी बैंगलोर में हों जो कि रिमोटली काम करते हों।

पर यह सॉल्यूशन नहीं है, यह केवल उन लोगों के लिये ही सुविधा है जो कि पहले से ही अमेरीकी कंपनियों में काम कर चुके हैं और कंपनियों को उन कर्मचारियों पर भरोसा है। भारत में बहुत से इंजीनियर ऐसे हैं जो बहुत अच्छा काम तो कर सकते हैं, और अगर उनके पास अमेरीकी वीजा हो तो उनको एकदम अमेरिका में जॉब भी मिल जाये, परंतु वीजा ही सबसे बड़ी समस्या है, अमेरिका में अभी 50 लाख सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कमी है और 2020 तक यह नंबर 1.4 करोड़ हो जायेगा । अमेरिका में इंजीनियर की सैलेरी लगभग $80,000 से $1, 00000 होती है ال।

इस समस्या का हल निकाला आयुष और एन्ड्रू ने उन्होंने देखा कि कोई भी व्यक्ति जिसके पास अच्छे कोडिंग स्किल्स हों वो रिमोटली ही लगभग $150 हर घंटे के कमा सकता है, परंतु इस तरह के काम मिलना रोज संभव नहीं होता है, तो उन्होंने कंपनियों से बात की कि हम आपको भारत से स्किल्ड रिसोर्स देंगे आप उसे सीधे काम दे देना और अमेरिकी मॉडल के हिसाब से सैलेरी दे देना, कई अमेरिकी कंपनियों को यह बात जँची और उन्होंने हाँ कर दी। तो बस एक नया स्टार्टअप البيستو. التكنولوجيا अस्तित्व में आ गया ।

अब आयुष और एन्ड्रू के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री वाले बहुत से इंजीनियर तो उपलब्ध हैं, परंतु उनको कोडिंग करना ही नहीं आती थी, वे केवल डिग्रीधारी इंजीनियर थे, तो उन्होंने पेस्टो कंपनी बनाई, जहाँ 3 महीने का कोर्स डिजाईन किया ، जिसमें جافا سكريبت ، ES6 ، HTML5 ، CSS3 ، JSON ، الشبكة ، البروتوكولات ، المتصفحات ، العقدة ، اكسبرس ، Mongo ، واجات برمجه التطبيقات ، اختبار ، خدمات النشر ، الإنتاج ، المخاوف الاخلاقيه من إنتاج البرمجيات والهندسة ، التكنولوجيا المهارات الناعمة की ट्रेनिंग देते हैं । इस कोर्स के दौरान इंजीनियर को दिल्ली में ही रहना होता है और 24 घंटे में कभी भी काम करना पड़ता है, क्योंकि आप अमेरीकी कंपनी के लिये काम कर रहे होते हैं तो उनके समय के हिसाब से भी आपको अपना काम करने का समय निकालना होता है। इस दौरान वे अमेरिकी कल्चर भी सिखाते हैं, जिससे आपको अपने अमेरिकी एम्पलॉयर के साथ काम करने में ज्यादा परेशानी न हो।

यह भी इतना आसान नहीं है, पहले आपको उनका المصدر المفتوح مناهج करना होता है और علوم الحاسب الआपको سبيل बेसिक फंडामेंटल पता होने चाहिये । आपकी इंगलिश अच्छी होनी चाहिये । एक बार 3 महीने की ट्रेनिंग हो गई तो उसके बाद pesto.tech आपको अपने Hiring Partners के साथ सीधे काम करने का मौका देते हैं, सीधे कंपनी आपको रिमोट एम्पलॉयी ले लेती है।

यहाँ तक सब फ्री है, जब आप जॉब करने लगते हैं तो आपको 5 वर्ष के लिये कॉन्ट्रेक्ट साईन करना होता है और 36 महीने की सैलेरी में से हर महीने pesto.tech 17% हिस्सा फीस के रूप में लेते हैं। यह फीस भी वे तभी लेते हैं अगर कमाई 15 लाख रूपयों से ज्यादा हो और उनकी फीस की अधिकतम सीमा है 20 लाख रूपये, याने कि किसी भी इंजीनियर से वे 20 लाख रूपयों से ज्याादा फीस के रूप में नहीं लेंगे। अभी तक उनके यहाँ की औसत सैलेरी 31 लाख रूपये है और अधिकतम 60 लाख रूपये सैलेरी है।

जरूरी नहीं है कि आपके पास Computer Science में इंजीनियरिंग डिग्री ही हो, आपके पास कोई भी डिग्री हो या न हो, अगर आपके कोडिंग स्किल्स अच्छे हैं तो भी आप इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। 

pesto.tech जो 15 लाख से 60 लाख तक सैलेरी दिलवाने में मदद कर रहे हैं।

pesto.tech एक भारतीय स्टार्टअप है जो कि भारत के युवाओं को 15 लाख से 60 लाख रूपयों तक सैलेरी दिलवाने में मदद कर रहे हैं, अमेरिका को हमेशा ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की भारी जरूरत है, परंतु वहाँ जाकर काम करने में वीजा एक बड़ी समस्या है। इसका एक हल यह भी था कि अमेरिका की कंपनियों में भारतीय इंजीनियर भारत से ही काम करें और तकनीकी रूप से समस्या को हल करें। मेरे दिमाग में भी यही बात थी क्योंकि एक पड़ौसी हैं जो कि यहीं बैंगलोर से अमेरिका की सॉफ्टवेयर कंपनी में रिमोट एम्पलायी हैं और लगभग उनकी सैलेरी $5000 या $6000 है, जो कि भारतीय रूपयों में लगभग हर माह 3 लाख से 4.5 लाख रूपयों के बीच होती है, सालाना लगभग 36 से 51 लाख रूपये होती है।वे पहले अमेरिका में उसी कंपनी में काम करती थीं और कंपनी को उनके ऊपर भरोसा था, इसलिये उस कंपनी की वे एकमात्र रिमोट एम्पलॉयी हैं, परंतु उनको भी पता है कि उनको भारत में आधी से भी कम सैलेरी मिल रही है, पर वे खुश हैं, क्योंकि उनको घर से ही काम करना है, उनके लिये कोई भी ऑफिस बैंगलोर में नहीं है। हो सकता है कि इस तरह के और भी कर्मचारी बैंगलोर में हों जो कि रिमोटली काम करते हों।

पर यह सॉल्यूशन नहीं है, यह केवल उन लोगों के लिये ही सुविधा है जो कि पहले से ही अमेरीकी कंपनियों में काम कर चुके हैं और कंपनियों को उन कर्मचारियों पर भरोसा है। भारत में बहुत से इंजीनियर ऐसे हैं जो बहुत अच्छा काम तो कर सकते हैं, और अगर उनके पास अमेरीकी वीजा हो तो उनको एकदम अमेरिका में जॉब भी मिल जाये, परंतु वीजा ही सबसे बड़ी समस्या है, अमेरिका में अभी 50 लाख सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कमी है और 2020 तक यह नंबर 1.4 करोड़ हो जायेगा। अमेरिका में इंजीनियर की सैलेरी लगभग $80,000 से $1,00,000 होती है।

इस समस्या का हल निकाला आयुष और एन्ड्रू ने उन्होंने देखा कि कोई भी व्यक्ति जिसके पास अच्छे कोडिंग स्किल्स हों वो रिमोटली ही लगभग $150 हर घंटे के कमा सकता है, परंतु इस तरह के काम मिलना रोज संभव नहीं होता है, तो उन्होंने कंपनियों से बात की कि हम आपको भारत से स्किल्ड रिसोर्स देंगे आप उसे सीधे काम दे देना और अमेरिकी मॉडल के हिसाब से सैलेरी दे देना, कई अमेरिकी कंपनियों को यह बात जँची और उन्होंने हाँ कर दी। तो बस एक नया स्टार्टअप pesto.tech अस्तित्व में आ गया।

अब आयुष और एन्ड्रू के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री वाले बहुत से इंजीनियर तो उपलब्ध हैं, परंतु उनको कोडिंग करना ही नहीं आती थी, वे केवल डिग्रीधारी इंजीनियर थे, तो उन्होंने पेस्टो कंपनी बनाई, जहाँ 3 महीने का कोर्स डिजाईन किया, जिसमें JavaScript, ES6, HTML5, CSS3, JSON, Network, Protocols, Browsers, Node, Express, Mongo, APIs, Testing, Deployment Services, Production, Ethical Concerns of Software Production and Engineering, Tech Soft Skills की ट्रेनिंग देते हैं। इस कोर्स के दौरान इंजीनियर को दिल्ली में ही रहना होता है और 24 घंटे में कभी भी काम करना पड़ता है, क्योंकि आप अमेरीकी कंपनी के लिये काम कर रहे होते हैं तो उनके समय के हिसाब से भी आपको अपना काम करने का समय निकालना होता है। इस दौरान वे अमेरिकी कल्चर भी सिखाते हैं, जिससे आपको अपने अमेरिकी एम्पलॉयर के साथ काम करने में ज्यादा परेशानी न हो।

यह भी इतना आसान नहीं है, पहले आपको उनका Open Source Curriculam करना होता है और आपको Computer Science के बेसिक फंडामेंटल पता होने चाहिये। आपकी इंगलिश अच्छी होनी चाहिये। एक बार 3 महीने की ट्रेनिंग हो गई तो उसके बाद pesto.tech आपको अपने Hiring Partners के साथ सीधे काम करने का मौका देते हैं, सीधे कंपनी आपको रिमोट एम्पलॉयी ले लेती है।

यहाँ तक सब फ्री है, जब आप जॉब करने लगते हैं तो आपको 5 वर्ष के लिये कॉन्ट्रेक्ट साईन करना होता है और 36 महीने की सैलेरी में से हर महीने pesto.tech 17% हिस्सा फीस के रूप में लेते हैं। यह फीस भी वे तभी लेते हैं अगर कमाई 15 लाख रूपयों से ज्यादा हो और उनकी फीस की अधिकतम सीमा है 20 लाख रूपये, याने कि किसी भी इंजीनियर से वे 20 लाख रूपयों से ज्याादा फीस के रूप में नहीं लेंगे। अभी तक उनके यहाँ की औसत सैलेरी 31 लाख रूपये है और अधिकतम 60 लाख रूपये सैलेरी है।

जरूरी नहीं है कि आपके पास Computer Science में इंजीनियरिंग डिग्री ही हो, आपके पास कोई भी डिग्री हो या न हो, अगर आपके कोडिंग स्किल्स अच्छे हैं तो भी आप इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। 

ब्लॉग वेबसाईट को फ्री में https में बदलें dan seterusnya पुश नोटिफिकेशन भी लगायें

आज की छुट्टी का सदुपयोग किया गया अपने सारे ब्लॉग्स के मैंटेनेंस करने में, सभी ब्लॉग वेबसाईट अनसिक्योर्ड थे और गूगल ने कुछ महीने पहले ही चेता दिया था कि अगर SSL सिक्योरिटी नहीं होगी तो ब्लॉग वेबसाईट सर्च इंजिन में सर्च नहीं होगा। पर हमें तो समय मिल ही नहीं रहा था, आज अपने सारे ब्लॉग वेबसाईट को SSL सिक्योर्ड कर दिया है। तरीका हम यहाँ बता देते हैं, बहुत आसान है – हमारा होस्टिंग होस्टगैटर पर है, तो सबसे पहले हमने अपने ब्लॉग वेबसाईट के कंट्रोल पैनल पर लॉगिन किया और क्लाऊड फेयर में जाकर फुल सिक्योरिटी ऑन कर दी, तो वहाँ से नया नेमसर्वर मिल गया जिसे कि अपने डोमैन के नेमसर्वर पर लगा दिया। बस हो गई अपनी सारी ब्लॉग वेबसाईट सिक्योर । अब हमारी सारी वेबसाईट वेबसाईटें https से खुला करेंगी और उस पर ताला भी लगा दिखा करेगा, क्लाऊड फेयर में SSL फ्री है, जबकि और सारी वेबसाईटें जमकर शुल्क ले रही हैं। फिर हमें पुश नोटिफिकेशन भी डालना था, क्योंकि आजकल पुश नोटिफिकेशन का जमाना है, जब कोई भी आपकी वेबसाईट वेबसाईट ब्राऊजर में खोलता है तो उसे पुश नोटिफिकेशन मिलेगा कि कोई भी नया अपडेट वेबसाईट वेबसाईट पर आता है तो Allow और Deny के दो बटन आते हैं , क्योंकि आजकल कोई भी ब्लॉग सब्सक्राईब करने की जहमत नहीं उठाता । वापिस से अगर किसी को पढ़ने आना है तो सबसे बढ़िया तरीका है पुश नोटिफिकेशन। बस आपके ब्लॉग वेबसाईट विजिटर को Allow पर क्लिक करना है, तो जब भी आप नया ब्लॉग पब्लिश करेंगे, तो मोबाईल या ब्रॉउजर पर नोटिफिकेशन मिल जायेगा और वह आपके ब्लॉग पर पहुँच जायेगा। पर समस्या यह है कि पुश नोटिफिकेशन भी फ्री में उपलब्ध नहीं है, पर foxpush.com फ्री में पुश नोटिफिकेशन भी दे रही है, बस साईनअप करें और सेटअप करते जायें, जब आखिरी में कोड मिलेगा, वह कोड अपने ब्लॉग की सेटिंग में जाकर हैडर और फुटर सैटिंग्स के हैडर में कॉपी कर दें। आपका पुश नोटिफिकेशन चालू हो जायेगा, आजकल सबसे ज्यादा ट्रॉफिक पुश नोटिफिकेशन से आता है, बस हाँ इसमें एक लॉगिन से एक वेबसाईट पर ही नोटिफिकेशन आयेगा और मोबाईल नंबर भी देना होगा। चलिये फिर देर किस बात की है, आपने अगर अभी तक अपनी ब्लॉग सिक्योर नहीं की है तो कर लीजिये और पुश नोटिफिकेशन भी सैट कर लीजिये।

ब्लॉगवेबसाईटमेंमेंबदलेंऔरपुशनोटिफिकेशनलगायें

आज की छुट्टी का सदुपयोग किया गया अपने सारे ब्लॉग्स के मैंटेनेंस करने में, सभी ब्लॉग वेबसाईट अनसिक्योर्ड थे और गूगल ने कुछ महीने पहले ही चेता दिया था कि अगर SSL सिक्योरिटी नहीं होगी तो ब्लॉग वेबसाईट सर्च इंजिन में सर्च नहीं होगा।मिलनहींरहाथाआजअपनेसारेब्लॉगवेबसाईटकोसिक्योर्डदियाहै।तरीका हम यहाँ बता देते हैं, बहुत आसान है – हमारा होस्टिंग होस्टगैटर पर है, तो सबसे पहले हमने अपने ब्लॉग वेबसाईट के कंट्रोल पैनल पर लॉगिन किया और क्लाऊड फेयर में जाकर फुल सिक्योरिटी ऑन कर दी, तो वहाँ से नया नेमसर्वर मिल गया जिसे कि अपने डोमैन के नेमसर्वर पर लगा दिया।सारीब्लॉगवेबसाईटसिक्योर।बसहोगईअब हमारी सारी वेबसाईट वेबसाईटें https से खुला करेंगी और उस पर ताला भी लगा दिखा करेगा, क्लाऊड फेयर में SSL फ्री है, जबकि और सारी वेबसाईटें जमकर शुल्क ले रही हैं।फिर हमें पुश नोटिफिकेशन भी डालना था, क्योंकि आजकल पुश नोटिफिकेशन का जमाना है, जब कोई भी आपकी वेबसाईट वेबसाईट ब्राऊजर में खोलता है तो उसे पुश नोटिफिकेशन मिलेगा कि कोई भी नया अपडेट वेबसाईट वेबसाईट पर आता है तो Allow और Deny के दो बटन आते हैंसब्सक्राईबकरनेजहमतनहींउठाता।वापिस से अगर किसी को पढ़ने आना है तो सबसे बढ़िया तरीका है पुश नोटिफिकेशन।बस आपके ब्लॉग वेबसाईट विजिटर को Allow पर क्लिक करना है, तो जब भी आप नया ब्लॉग पब्लिश करेंगे, तो मोबाईल या ब्रॉउजर पर नोटिफिकेशन मिल जायेगा और वह आपके ब्लॉग पर पहुँच जायेगा।किपुशनोटिफिकेशनफ्रीमेंउपलब्धनहींहैपरफ्रीमेंपुशनोटिफिकेशनरहीहैबससाईनअपकरेंऔरसेटअपकरतेजायेंजबआखिरीमेंकोडमिलेगावहकोडअपनेब्लॉगसेटिंगमेंजाकरहैडरऔरफुटरसैटिंग्सहैडरमेंकॉपीदें।आपका पुश नोटिफिकेशन चालू हो जायेगा, आजकल सबसे ज्यादा ट्रॉफिक पुश नोटिफिकेशन से आता है, बस हाँ इसमें एक लॉगिन से एक वेबसाईट पर ही नोटिफिकेशन आयेगा और मोबाईल नंबर भी देना होगा।आपनेअगरअभीतकअपनीब्लॉग. सिक्योर. नहीं。

ब्लॉग वेबसाईट को फ्री में https में बदलें और पुश नोटिफिकेशन भी लगायें

आज की छुट्टी का सदुपयोग किया गया अपने सारे ब्लॉग्स के मैंटेनेंस करने में, सभी ब्लॉग वेबसाईट अनसिक्योर्ड थे और गूगल ने कुछ महीने पहले ही चेता दिया था कि अगर SSL सिक्योरिटी नहीं होगी तो ब्लॉग वेबसाईट सर्च इंजिन में सर्च नहीं होगा। पर हमें तो समय मिल ही नहीं रहा था, आज अपने सारे ब्लॉग वेबसाईट को SSL सिक्योर्ड कर दिया है।

तरीका हम यहाँ बता देते हैं, बहुत आसान है –

हमारा होस्टिंग होस्टगैटर पर है, तो सबसे पहले हमने अपने ब्लॉग वेबसाईट के कंट्रोल पैनल पर लॉगिन किया और क्लाऊड फेयर में जाकर फुल सिक्योरिटी ऑन कर दी, तो वहाँ से नया नेमसर्वर मिल गया जिसे कि अपने डोमैन के नेमसर्वर पर लगा दिया। बस हो गई अपनी सारी ब्लॉग वेबसाईट सिक्योर।

अब हमारी सारी वेबसाईट वेबसाईटें https से खुला करेंगी और उस पर ताला भी लगा दिखा करेगा, क्लाऊड फेयर में SSL फ्री है, जबकि और सारी वेबसाईटें जमकर शुल्क ले रही हैं।

फिर हमें पुश नोटिफिकेशन भी डालना था, क्योंकि आजकल पुश नोटिफिकेशन का जमाना है, जब कोई भी आपकी वेबसाईट वेबसाईट ब्राऊजर में खोलता है तो उसे पुश नोटिफिकेशन मिलेगा कि कोई भी नया अपडेट वेबसाईट वेबसाईट पर आता है तो Allow और Deny के दो बटन आते हैं, क्योंकि आजकल कोई भी ब्लॉग सब्सक्राईब करने की जहमत नहीं उठाता। वापिस से अगर किसी को पढ़ने आना है तो सबसे बढ़िया तरीका है पुश नोटिफिकेशन। बस आपके ब्लॉग वेबसाईट विजिटर को Allow पर क्लिक करना है, तो जब भी आप नया ब्लॉग पब्लिश करेंगे, तो मोबाईल या ब्रॉउजर पर नोटिफिकेशन मिल जायेगा और वह आपके ब्लॉग पर पहुँच जायेगा। पर समस्या यह है कि पुश नोटिफिकेशन भी फ्री में उपलब्ध नहीं है, पर foxpush.com फ्री में पुश नोटिफिकेशन भी दे रही है, बस साईनअप करें और सेटअप करते जायें, जब आखिरी में कोड मिलेगा, वह कोड अपने ब्लॉग की सेटिंग में जाकर हैडर और फुटर सैटिंग्स के हैडर में कॉपी कर दें।

आपका पुश नोटिफिकेशन चालू हो जायेगा, आजकल सबसे ज्यादा ट्रॉफिक पुश नोटिफिकेशन से आता है, बस हाँ इसमें एक लॉगिन से एक वेबसाईट पर ही नोटिफिकेशन आयेगा और मोबाईल नंबर भी देना होगा।

चलिये फिर देर किस बात की है, आपने अगर अभी तक अपनी ब्लॉग सिक्योर नहीं की है तो कर लीजिये और पुश नोटिफिकेशन भी सैट कर लीजिये।

1971 के युद्ध की बात और पाक एयर फोर्स का भारत में घुस आऩे की खबर से शेयर बाजार गिरा

कल एक कलीग से बात हो रही थी, वो बता रहे थे कि उनकी माताजी बताती हैं 1971 के युद्ध में जब उनके पिताजी भी हिस्सा लेने गए, वे नेवी में थे और नेवी की कॉलोनी में रहते थे। किसी को पता नहीं था कि वे कहाँ जा रहे हैं।

कुछ दिनों बाद समाचार आया कि पाक के तारपीडो ने हमारे एक जहाज को उड़ा दिया है और वो समुद्र में डूब गया है, तो पूरी कॉलोनी शोक में डूब गई गई थी, किसी के घर 2 दिन तक चूल्हा तक नहीं जला था।

जब तीसरे दिन खबर आई कि आईएनएस खुखरी डूबा है, तब जाकर इनके यहाँ मातम शोक कम हुआ, पर खुखरी पर सवार जवानों के घर पर मातम गहरा गया था।

युद्ध का उन्माद केवल जनता के लिये रोमांच है, पर वे खुद लड़ना नहीं चाहते, अगर इतना ही लड़ने की इच्छा है तो आप प्रण कीजिये कि अपने घर से कम से कम एक बच्चे को युद्ध के लिये सेना में भेजेंगे।

केवल जानकारी के लिये बता दूँ कि ये मुस्लिम मित्र हैं, पर जब भारत ने पाक के ऊपर नभ से कार्यवाही की, तो उनकी खुशी देखते नहीं बन रही थी, ऐसा लग रहा था कि वो खुद एक जंग जीतकर आ रहे हैं, कल जब पाकिस्तान ने नभ से आक्रमण किया तो बहुत खिन्न थे, और केवल एक वाक्य था कि इनको तो नक्शे से मिटा देना चाहिये, पर इसमें भारत फिर से 1947 की वित्तीय परिस्थितियों में पहुँच जायेगा, क्योंकि वे खुद एक बड़े वित्तीय विश्लेषक हैं।


कल शेयर बाजार बहुत अच्छा कर रहा था, और निफ्टी 125 अंक ऊपर तथा बैंक निफ्टी ३५० अंक ऊपर लगभग 27180 के आसपास था, जैसे ही सवा ग्यारह की पाकिस्तानी हवाईजहाजों के भारत में घुसने की खबर आई, और पुष्टि हुई, अचानक से बाजार में बिकवाली आ गई, और निफ्टी 175 अंक नीचे तथा बैंक निफ्टी 450 से ज्यादा अंकों से नीचे था।और 12 बजे से ही नो ट्रेड के मैसेज भी आने लगे, कि डन फॉर द डे। चित्र में देख सकते हैं कि कैसे बैंक निफ्टी लुढ़का और फिर लगभग बाजार में नो ट्रेड डे ही रहा।

खुद सोचिये कि वित्तीय बाजार इतनी सी घटना को इतना गंभीरता से लेता है तो युद्ध की परिस्थितियों में क्या होगा, हालांकि हमारे कई मित्र कल कराँची स्टॉक एक्सचेंज के 1700 अंक नीचे याने कि लगभग 4% नीचे था, उसकी काफी खुशियाँ मना रहे थे।

बैंक निफ्टी 27-Feb-2019

फेसबुकवीरों को पाक से युद्ध चाहिये

आज कई फेसबुकवीरों को भद्दे वाक्य कहते सुन रहा हूँ, कि तुम तो कुत्तों की मौत मरोगे, कीड़े की मौत मरोगे, कांग्रेसी हो, अरे भई सबका अपना मत है। भले आप कितना चाहो पर सीमा पर लड़ाई करने की अपनी एक क्वालिफिकेशन है, जो तुम्हारे पास नहीं है, तुम्हारी क्वालीफिकेशन नहीं होने के कारण ही तो तुम जो हो, वही काम कर रहे हो।

ये बंदूकें बहुत रोमांच पैदा करती हैं, जब २४ घंटे ३६५ दिन जब सैनिक बिना थके अपनी ड्यूटी करता है, तो वे सारे हालात उस सैनिक को ही पता होते हैं। कुर्सी पर टिककर ८ घंटे बैठ नहीं सकते, औऱ चले हैं सीमा पार युद्ध करने की बात करने।

सैनिकों को तपाकर सीमा पर लड़ाई के लिये तैयार किया जाता है, यह मैंने सीधे NCC के आर्मी अटैचमैंट कैंप में देखा था, ग्रेनेडियर्स के साथ बहुत कुछ सीखऩे का मौका मिला था। इन फेसबुक वीरों को ग्रेनेडियर्स क्या होता है औऱ उनकी रेजीमेंट ने कितने परमवीर चक्र जीते हैं, क्यों उनको इतने परमवीर चक्र मिले, ये सब पता नहीं होगा।

बस इनको तो उचकने से मतलब है, युद्ध उन्माद है, और हर क्षैत्र में तबाही लाता है, केवल एक दिन का युद्ध पूरे राष्ट्र को दस वर्ष पीछे ले जाता है। सोशल मीडिया के दौर में यह देखने को मिल रहा है कि जनता सरकार के ऊपर युद्ध थोपना चाह रही है। और उस युद्ध से न पाकिस्तान खत्म होगा न नेस्तनाबूद होगा, केवल दोनों पक्षों का भारी नुक्सान होगा, औऱ चीन चुपचाप नहीं बैठा रहेगा, उसका भारी निवेश पाकिस्तान में है व हम भी चीन से एक सीमा पर सामना करते हैं।

उऩ्माद में मत आईय़े, बहकाने में न आईय़े, अपनी अक्ल लगाईये, सरकार और सेना को अपना काम करने दीजिये। आपसी संबंध मधुर रखिये। यह पोस्ट केवल इसलिये लिखी गई है कि आप अपने दोस्तों से युद्ध न करिये, क्योंकि आपको सीमा पर लड़ाई का मौका नहीं मिल रहा है।

अमेरिका का व्यापार जो अब बाहर जा रहा है केवल H1B वीजा न देने के कारण

दुनिया में बहुत कुछ बदल रहा है, पर उस बदलाव का लोगों को अहसास ही नहीं होता है, जो जोर शोर से बाहर आता है, केवल वही पता चलता है।
 
ट्रम्प ने H1B के लिये बहुत सी सख्तियाँ की हैं, तो असर सीधे उनके व्यापार पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका के नंबर एक बैंक के पास काम करने के लिये तकनीकी और विषय विशेषज्ञ लोगों की भयंकर कमी है, और जो हैं वे काम को सँभाल नहीं पा रहे हैं। कंपनियों या बैंकों का मुख्य काम होता है व्यापार बढ़ाना और उनके मालिक लोग यह सुनिश्चित भी करते हैं।

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जीवन बहुत अनिश्चितताओं से भरा है और मृत्यु अटल है

जीवन बहुत अनिश्चितताओं से भरा है, कब जीवन की साँस रुक जाए और स्वर्गीय हो जायें पता ही नहीं।

इस जीवन को भरपूर ऊर्जा के साथ जियें और अच्छे लोगों में अपना नाम दर्ज करवायें कि लोग आपसे मिलना पसन्द करें।

एक बार इस दुनिया से चले गए तो कोई याद करने वाला भी नहीं होता। बस जब तक इस जहान में उपस्थिति है, तब तक ही लोग पूछ रहे हैं।

गाड़ी घोड़ों, घरबार, धन्धापानी का ज्यादा टेंशन न पालें, कुछ समय आत्मकेंद्रित भी रहें, स्वार्थी बनें, और केवल अपने लिये कुछ समय अपने आपको और अपने परिवार को दें।

न किसी को बुरा बोलें और न ही ऐसे बोल बोलें कि किसी का दिल दुखे। बस इस बात का ख्याल करें, अच्छी बातें बच्चों को पढ़ायें, बच्चे बात सुने न सुने, पर उन्हें टोका मारना न भूलें, एक दिन आयेगा, वे जरूर सुनेंगे।

ऐसे ही दिलोदिमाग में कुछ विचार घुमड़ आये जिनका शब्दांकन यहाँ कर दिया।

ध्यान रखिये कि –

मृत्यु अटल है
यकीन मानिये
जीवन इसीलिये ही आह्लादित है।

जब तक साँसें चल रही हैं तब तक आनंदित रहें, प्रसन्न रहें, स्वस्थ रहें। भरपूर जीवन का मजा लें।

उपरोक्त पैरा पर फेसबुक पर सुरेश चिपलूनकर जी ने टिप्पणी दी थी कि –

आज श्मशान घाट गए थे क्या??

ऐसे विचार वहीं पर आते हैं…
और घर आते ही खत्म भी हो जाते हैं… 😀

और हमने प्रतिउत्तर में कहा –

नहीं चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर के अलावा शायद कहीं और जाना ही नहीं हुआ। परन्तु आज मन खिन्न था और मैं उसकी गहराई में उतरा हुआ था, एक 7 साल पहले के किसी के दर्दनाक स्टेटस को पढ़कर। और भी बहुत से कारण थे।

उदासी के बहुत से कारण होते हैं, व्यक्ति कब दार्शनिक हो जाये कुछ पता नहीं, कब किस बात से मन खिन्न हो जाये, उसका भी पता नहीं। बस किसी भी दशा में हमें नकारात्मक नहीं होना है, हमेशा ही सकारात्मक ऊर्जा से जीवन में आगे बढ़ते जाना है। अपनी दृष्टि हमेशा ही ऐसे लक्ष्य पर रखना है जिसे सुनकर दुनिया आप पर हँसे, ऐसे स्वप्न देखिये, तभी आप इस दुनिया में कोई चमत्कार कर पायेंगे। मन में बस बातों को ठान लें और उसके लिये जी जान लगा दें, रात दिन एक कर दें तो आप भी देखेंगे कि वह लक्ष्य आपके लिये कोई बहुत ज्यादा कठिन नहीं होगा।

अच्छी सेहत के लिये कम से कम १०,००० कदम चलिये, पैर में तकलीफ न हो तो धीरे धीरे दौड़िये, जब पसीन बहेगा तो उसका आनंद केवल आप उठा पायेंगे, उस पसीने के सुख की अनुभूति के लिये आप दौड़िये। रक्तचाप, मधुमेह और मोटापा तो अपने आप ही भाग जायेंगे। पर यह सब करने के पहले आप मन से स्वस्थ रहें।

रोज एक घंटा अच्छी किताब पढ़ने की आदत डालें, या आजकल तो बहुत अच्छे पॉडकॉस्ट आ रहे हैं, उन्हें सुनें, वे भी किताबों के समान ही हैं। बस जीवन को सरल और सरस रखें।