Category Archives: विश्लेषण

शादी में माँ के प्राकृतिक काले रंगे बाल

मैं माँ को बचपन से ही देखता आ रहा हूँ, हमेशा माँ अपने बालों का ख्याल बहुत अच्छे से ऱखती आती है, पहले शिकाकाई और आँवला के पावडर से बाल धोती थी, फिर शिकाकाई का साबुन आने लगा तो शिकाकाई के साबुन का उपयोग करने लगी, और फिर धीरे धीरे माँ के बालों का कालापन जाता रहा, और उम्र अपना रंग धीरे धीरे छोड़ने लगी, बाल भी पकने लगे, और फिर बालों में लगने वाली चीजों में भी बदलाव आने लगा। कभी जंगली मेंहदी तो कभी काली मेंहदी, और फिर हमेशा ही रिसर्च की जाने लगी कि बालों के लिये अच्छा क्या है।

मेंहदी लगाने से बालों का रंग काला तो नहीं होता था, परंतु लाल जरूर हो जाता था, जो कि देखने में ही अच्छा नहीं लगता था, फिर माँ ने बालों पर मेंहदी लगाना बंद कर दी और सफेद बाल माँ की उम्र को और बढ़ाकर बताने लगे, हम भी माँ को सफेद बालों में ही देखते रहते।

छोटे भाई की शादी के पहले ही हमने कह दिया था कि माँ अब तुमको बालों को रंगना ही होगा, तो मेंहदी लगाने के लिये तैयार हुईं, तो हमने मना कर दिया कि माँ हम लाल बालों में आप को देख नहीं पायेंगे, और मेंहदी से प्राकृतिक रंग भी नहीं आ पायेगा, तो अब आप कलर लगा लो, कलर से बिल्कुल प्राकृतिक रंग आ जायेगा और सबको भायेगा, आप सबके साथ फोटो में बहुत जँचोगी, जिससे यह शादी सबके लिये यादगार हो जायेगी, वैसे भी शादी का मौका बारबार कहाँ आता है, और फिर कब कहाँ फोटो खिंचाने वाले हैं, बस अब आप जल्दी से प्राकृतिक रंग जैसे काले बाल कर लो, मेरी पत्नी जी ने जैसे ही आज्ञा मिली, वैसे ही रंग लगाना शुरू कर दिया, इससे पहले कि माँ का मूड बदल जाये, और मात्र आधे घंटे में ही माँ का बुढ़ापा छिप गया था, माँ वापिस से अपनी उम्र से बहुत कम लगने लगी थी, हम सब बहुत खुश थे।

रिश्तेदारी से लोग आने लगे थे, माँ को देखकर सब बहुत ही खुश हो रहे थे, हमको भी माँ पर बहुत लाड़ प्यार आ रहा था, माँ ने हमारी बात जो मानकर अपने बालों को प्राकृतिक रंग में रंग लिया था, हमारा मान रख लिया था। हम हमेशा ही माँ के प्यार में रंगे रहते हैं, पर उस दिन माँ प्राकृतिक काले रंग के बालों में रंगी अलग ही आभा बिखेर रही थी ।

शादी के सारे कार्यक्रम अच्छे से हो गये, और माँ को भी काले बालों में अच्छा लगने लगा, माँ हमेशा ही अब अपने बालों का प्राकृतिक काले रंगों में रंगे रखती है, जिससे माँ को हम अपने आँखों से ही बुढ़ापे से वापिस आते देख रहे हैं। जब भी माँ अब कलर लगाने के लिये बैठती है, तो हमें वह शादी का दिन याद आ जाता है।

आजकल काले घने बालों के लिये एकबार का कलर भी आने लगा है, जो कि आप http://godrejexpert.com/single_used_pack.php यहाँ भी देख सकते हैं ।

कपिल देव की EKNAYILEAGUE

भारत में त्योहार तो बहुत होते हैं, पर क्रिकेट एक ऐसा त्योहार है जो कि भारत में लगभग हरेक दिन मनाया जाता है और भारत में क्रिकेट और कपिल देव के दीवानों की कमी नहीं है, भारत में क्रिकेट हर गली मोहल्ले में मिल जाता है। हर भारतीय का सपना होते है कि वह भारत की टीम के लिये क्रिकेट खेले, खैर हर किसी का सपना भी पूरा नहीं होता है। पर जब से अब IPL और ICL शुरू हुए हैं, तब से अधिक खिलाड़ियों को मौका मिलने लगा है। क्रिकेट की दीवानगी इस हद तक है कि लोग क्रिकेट के लिये कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं।कपिल देव भारत के एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने भारत को क्रिकेट विश्वकप जिताकर हर भारतीय को जैसे एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचा दिया था। भारत के लिये कपिल देव पहले ऐसे कप्तान थे, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट का परचम पूरे विश्व में फैला दिया था। कपिल देव हाल ही में ट्विटर पर आये हैं और http://www.eknayileague.com/ वेबसाईट शुरू की है जिसमें कपिल ने अपने वीडियो के माध्यम से मैसेज भी दिया है कि उनके ट्विटर हैंडल को फॉलो करें और ज्यादा से ज्यादा नई लीग के बारे में जानकारी पायें, कपिल देव ने ट्विटर पर कप्तान धोनी को बधाई दी है, सानिया मिर्जा, मार्टिना हिंगिस से भी ट्विटर पर मैसेज संप्रेषित किया है और बधाई भी दी है, वैसे ही भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को भी उनके नेपाल भूकंप में सराहनीय मदद के लिये बधाई दी है।कपिल देव ने वीडियो में कहा भी है कि यह लीग दिल से खेलोगे तो हिट विकेट हो जाओगे, तो वे साफ बता रहे हैं कि यहाँ दिल से नहीं खेलना है, इस लीग में दिमाग से खेलना है, इस लीग में ट्विटर में उनके हैंडल और एक नई लीग के ट्विटर हैंडल #EKNAYILEAGUE @eknayileague का महत्वपूर्ण रोल होगा, शायद इस लीग में ट्विटर के जरिये हम यह लीग खेल पायेंगे, जिसमें कुछ सवालों के जबाब माँगे जायेंगे, और पूरे विश्व को उसमें खेलने की छूट होगी, यह एक तरह की ऑनलाईन लीग होनी चाहिये जिसमें कि लोग अपने रन अपने जबाबों से बना पायेंगे और जो जितने ज्यादा रन बनायेगा वह उस मैच में जीत जायेगा, यह रन उनके सवालों के जबाब पर निर्भर होना चाहिये।

कपिल देव ने कहा है कि क्रिकेटर कभी रिटायरमेंट नहीं लेता है, वह हमेशा खेलता रहता है, इससे भी लगता है कि वे और भी रिटायर्ड क्रिकेटरों को अपने साथ लेंगे और यह एक मजेदार खेल के रूप में पूरे विश्व की जनता के सामने आना चाहिये। हम तो केवल अंदाजा लगा सकते हैं अब तो कपिल देव ही बतायेंगे कि वाकई @eknayileague लीग क्या है, क्योंकि उन्होंने लगभग हर वीडियों में चुटीले अंदाज में कहा है, कि अगर आप दिल से खेलेंगे तो आप निश्चित ही हिट विकेट हो जायेंगे। हम भी इस नई लीग के लिये तैयार हैं और एक नई लीग के वेबसाईट पर जाकर अगर बता दे कि इस लीग में वाकई क्या होगा तो वह एक लाख रूपया जीत सकता है, कल ही कपिल देव से पाँच लोगों के मिलने का मौका मिला है, और साथ ही डिनर का भी, ऐसे मौके अविस्मरणीय होते हैं।

धर्म वैज्ञानिकों की मशीनों से मधुमेह को काबू में किया गया

धर्म वैज्ञानिकों के द्वारा किये जा रहे मधुमेह, कोलोस्ट्रोल, उच्च रक्तचाप की पिछली पोस्ट के बाद मुझसे कई मित्रों और पाठकों ने द्वारका आश्रम का पता और फोन नंबर के बारे में पूछा, मैं आश्रम गया जरूर था पर पता मुझे भी पता नहीं था, आज हमारे पास पता भी आ गया है और फोन नंबर भी उपलब्ध है।

 

उसके पहले एक बात और मैं साझा करना चाहूँगा कि हमारे मित्र मधुमेह के लिये आश्रम नियमित तौर से जा रहे थे और उन्हें काफी आराम भी है, पहले उनकी शुगर 180 के आसपास रहती थी, और कई बार की कोशिश के बाद ज्यादा से ज्यादा 145-148 तक आती थी, साधारणतया शुगर की मात्रा 140 होती है, आज उनकी शुगर 132 आयी तो वे भी बहुत खुश थे, हालांकि अभी दवाई भी जारी है, जहाँ तक मुझे याद है गुरू जी ने बताया था कि धीरे धीरे दवाई की मात्रा कम करते जायेंगे। फेसबुक पर भी एक टिप्पणी थी कि अगर कोई इंसुलिन वाला मरीज ठीक हुआ हो तो उसके बारे में बतायें, तो मैं मेरे मित्र चित्तरंजन जैन से आग्रह करूँगा कि वे इस बारे में पता कर सूचित करें।

 

इसी बाबद मेरे ऑफिस में एक सहकर्मी से स्लिप डिस्क की बात हो रही थी, कि उनकी बहिन को यह समस्या लगभग 2 वर्ष से है और पहले तो वे बिल्कुल भी पलंग से उठ भी नहीं पाती थीं, पर फिर उन्हें किसी से पता चला कि सोहना (हरियाणा में, गुड़गाँव से 40 कि.मी.) में कोई व्यक्ति देशी दवा से इलाज करता है और वो पैर की कोई नस वगैराह भी दबाता है, तो उनकी बहिन को कुछ ही दिन में बहुत आराम मिल गया, वे बता रही थीं कि उनकी बहिन अब घर में अपने सारे काम खुद ही कर लेती हैं, उनके लिये भी हमने पता किया था, तो हमें मित्र द्वारा सूचना दी गई कि स्लिप डिस्क वाली समस्या में भी किसी मरीज को काफी लाभ हुआ है।

 

बात यहाँ मानने या न मानने की तो है ही, क्योंकि जो लोग ईश्वर को नहीं मानते वे इसे वैज्ञानिक पद्धति का इलाज मानकर करवा सकते हैं, और जो ईश्वर को मानते हैं वे इस ईलाज के लिये बनाई गई मशीनों के लिये अपने वेद और पुराणों में वर्णित प्राचीन पद्धति को धन्यावाद दे सकते हैं।

 

द्वारका आश्रम का पता इस प्रकार से है –

 

धर्म विज्ञान शोध ट्रस्ट

द्वारिका”, नीलगंगा रोड,

लव-कुश कॉलोनी,

नानाखेड़ा,
उज्जैन (म.प्र)

Phone – धर्म वैज्ञानिक उर्मिला नाटानी 0734 42510716

 

Dharma Vigyan Shodh Trust

Dwarika”, Neelganga Road,

Lav-Kush Colony,

Nanakheda, Ujjain (M.P.)

Phone – Religious Scientist 0734 – 42510716

धर्म वैज्ञानिक जो बिना किसी दवा के मधुमेह, कोलोस्ट्रोल, उच्च रक्तचाप को ठीक कर रहे हैं

धर्म वैज्ञानिक नाम ही कुछ अजीब लगता है न, लगना भी चाहिये हमारे पूर्वज, ऋषि, महर्षियों ने जो भी नियम हमारे लिये बनाये थे, उन सबके पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण जरूर होता है, बस उन कारणों को लोगों को नहीं बताया गया, केवल रीत बना दी गई और डर भी बैठा दिया गया कि अगर ऐसा नहीं करोगे तो अच्छा नहीं होगा। जो धर्म पर अध्ययन कर उसके पीछे वैज्ञानिक तथ्यों को ढ़ूँढ़ते हैं, इस बार के उज्जैन प्रवास के समय हमारे मित्र चित्तरंजन जैन ने हमें इस नई संस्था से अवगत करवाया, हम उन्हें बहुत ही अच्छी तरह से जानते हैं, जब तक कि वे खुद किसी चीज से संतुष्ट नहीं होते जब तक वे न तो किसी को कुछ बताते हैं और न ही दिखाते हैं।
इस बार हम शाम के समय उनकी दुकान पर बैठे हुए थे, तो उन्होंने हमसे पूछा कि अगर आप एक घंटा फ्री हों तो हम आपको नई जगह ले चलते हैं, जहाँ मैंने भी पिछले 7 दिन से जाना शुरू किया है, इस जगह आश्रम का नाम है द्वारिका, हम उनके साथ चल दिये, कि चलो हमारे पास एक घंटा है, और हम भी कुछ ज्यादा जानें इस आश्रम के बारे में। जाते जाते हमें हमारे मित्र ने बताया कि आपको तो पता ही है कि हमें मधुमेह की बीमारी है और यहाँ पर मात्र 30 दिन में मधुमेह को हमेशा के लिये खत्म करने की बात कही जाती है, कि उसके बाद कभी भी आपको मधुमेह के लिये दवाई लेनी ही नहीं होगी। उनके ईलाज की पद्धति चार चीजों पर आधारित है, चुँबक, प्रकाश, आकृति और मंत्र। आश्रम में खाने के लिये कोई दवाई नहीं दी जाती है, केवल उपरोक्त चार चीजों पर ही बीमारियों का ईलाज किया जाता है।
हमारे मित्र के साथ हम आश्रम में पहुँचे, वहाँ प्रथम तल पर सामने ही गुरू जी बैठे हुए थे, उनके पास ही हमारे पुराने मित्र मुन्नू कप्तान भी बैठे हुए थे, हमने सबको राम राम की, हमारे मित्र ने हमें कहा कि हम तो ईलाज के लिये जा रहे हैं, आपको भी अगर आजमाना है तो आ जाओ, हमें आजमाना तो नहीं था, परंतु देखना जरूर था, हम उनके साथ कमरे में गये वहाँ तीन पलंग लगे हुए थे, हरेक पलंग की छत पर कुछ आकृतियाँ बनायी हुईं थीं, जैसे कि पिरामिड, त्रिकोण इत्यादि और साथ ही वहाँ विभिन्न तरह के बल्ब लगाकर प्रकाश की व्यवस्था की गई थी, हमारे मित्र ने वहीं पर दीदी जी जो कि वहाँ सेवा देती हैं, उनसे एक थाली ली, जिसमें से कुछ काला सा तिलक अपनी नाभि मे लगाया और 7 तुलसा जी की पत्ती खाईं और फिर चुँबकीय बेल्ट अपनी कमर पर नाभि के ऊपर कस कर लेट गये, उन्हें 15-20 मिनिट अब उसी अवस्था में लेटे रहना था, पूरे आश्रम में मंत्र ध्वनि गुँजायमान थी। तो हम बाहर आकर गुरू जी के पास बैठ गये और उनसे बातचीत कर अपनी जिज्ञासा शांत करने की कोशिश करने लगे।
गुरूजी ने हमें पूरे आश्रम की मशीनों से अवगत करवाया, जिन्हें उन्होंने 31 वर्षों के शोध के बाद खुद ही तैयार किया था, और लगभग सभी मशीनें लकड़ी की ही बनी हुई था, जिसमें छत पर अलग अलग आकृतियाँ थीं, गुरूजी ने हमें मधुमेह, कोलोस्ट्रोल, उच्च रक्तचाप जैसी मशीनों के बारे में जानकारी दी, कि ये सब बीमारी हम केवल एक महीने में ठीक कर देते हैं, एक बार ठीक होने के बाद उन्हें कभी भी जीवनभर किसी दवाई का सेवन भी नहीं करना होगा। किसी को बुखार हो तो हम उसे केवल 15 मिनिट में ठीक कर देते हैं। किसी को तनाव है तो उसके लिये भी उनके लिये अलग मशीन है और उसके लिये भी मात्र 15 मिनिट लगते हैं। दोपहर बाद हमें भी तनाव तो था ही, परंतु वहाँ के माहौल से और मंत्रों से हमारा तनाव 5 मिनिट में ही दूर हो गया। 
हीमोग्लोबीन अगर कम है तो उसके लिये भी एक अलग यंत्र है, जिसके बारे में हमें बताया गया कि उसमें भी रोगी को रोज 15 मिनिट बैठना होता है और आश्चर्यजनक रूप से 2-4 दिन में ही लाभ दिखने लगता है, इसके पीछे गुरूजी ने बताया कि हमारी अस्थिमज्जा को ब्रह्मंडीय ऊर्जा के संपर्क से ठीक करते हैं, और उनकी सारी मशीनें व यंत्र इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
ईलाज के लिये कोई फीस नहीं है, बिल्कुल निशुल्क है, आश्रम की यह सुविधा मुख्य रूप से उज्जैन में ही उपलब्ध है, उज्जैन के अलावा उनके आश्रम इंदौर और इलाहाबाद में भी हैं। पिछले सप्ताह ही मित्र से बात हुई तो उन्होंने हमें बताया कि मधुमेह की जाँच में पता चला कि 15 प्रतिशत का फायदा है, और अब मानसिक शांति पहले से ज्यादा है, साकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह ज्यादा है।

कृपया पते के लिये इस पोस्ट को देखें ।

आसुस जेनफोन 2 से अपने स्मार्टफोन के अनुभव को चार चाँद लगायें

जब से स्मार्टफोन उपयोग करना शुरू किया है तब से अब तक हमने बहुत कुछ अनुभव किया और ऐसा लगता रहा कि काश हमारा यह अनुभव ओर अच्छा होता, हम जो भी चीज चाहें वह हमारे हिसाब से ही काम करे, कम्पयूटर की दुनिया में यह संभव है कि कुछ चीजों को अलग से लगाकर आप अपने अनुभव को अपने कार्य करने के तरीके को उत्कृष्ट बना सकते हैं, पर छोटे से मोबाईल की दुनिया में यह कठिन ही नहीं हमेशा मुझे नामुमकिन लगा, और अभी भी असंभव ही लगता है, कई बार ऐसा लगा कि काश मेरा विन्डोज फोन को मैं ऑपरेटिंग सिस्टम एन्ड्रॉयड भी संस्थापित कर पाता, हालांकि अभी तक यह मेरी सोच ही है, अभी तक यह हार्डवेयर डिपेन्डेन्ट होने के कारण संभव भी नहीं हो पाया है।

 

स्मार्टफोन में सबसे बड़ी समस्या है बैटरी बहुत ही जल्दी खत्म होती है, और 3जी चलाने पर तो ऐसा लगता है कि किसी ने बैटरी के पानी के सारे नल एकसाथ खोल दिये हैं, और फिर से बैटरी चार्ज करने में लगने वाला ज्यादा समय और ज्यादा परेशानी का सबब है। हमारा स्मार्टफोन हमेशा ही बहुत सारी एप्प से भरा रहता है और हम हमेशा कई सारी एप्प का उपयोग एक साथ करते हैं, तो हमारा स्मार्टफोन का उपयोग करने का अनुभव हमेशा ही खराब रहता है और हम देखते हैं कि हमारा स्मार्टफोन या तो धीमा काम करने लगा है या फिर हैंग हो गया है और हमेशा ही यह अनुभव तकलीफदेह होता है। हमेशा ही मेरा बेटा फोन पर गेम्स खेलने का शौकीन रहा है और हमेशा ही मुझे शिकायत करता है कि डैडी यह स्मार्टफोन बेकार है, हमेशा ही मेरे गेम्स खेलने के बीच में ही हैंग हो जाता है या फिर इसका वीडियो खराब हो जाता है, इसका वीडियो गड़बड़ा जाता है, क्योंकि इसकी रैम बहुत कम है।

 

मोबाईल के जमाने में सेल्फी तो बनती ही है, और अगर फ्रंट कैमरा ठीक न हो तो सेल्फी भी अच्छे नहीं आते हैं, और अब अलग से कैमरा ले जाने का जमाना भी नहीं है, अगर कहीं घूमने भी गये तो पूरा ट्रिप हम अब कैमरे से ही शूट करते हैं, इस काम के लिये हमारे मोबाईल का कैमरा भी अच्छा होना चाहिये, जिससे हमारी यादें आगे के लिये हम सहेज सकें।

 

मुझे ऐसा लगता है कि आसुस जेनफोन 2 मेरे स्मार्टफोन के अनुभव को एक नया ही अवतार देने में सक्षम है और इसके लिये ये पाँच मुख्य फीचर आसुस जेनफोन 2 के हैं –

 

  1. आसुस जेनफोन 2 में 4 जीबी रेम है तो मेरा गेमिंग अनुभव और वीडियो का अनुभव बहुत ही अच्छा होगा।
  2. बैटरी खत्म होने के बाद केवल 39 मिनिट में ही 60 प्रतिशत बैटरी चार्ज हो जायेगी। जिससे मेरी जिंदगी ज्यादा आसान हो जायेगी।
  3. अब मैं बिना फ्लेश के भी अँधेरे में साफ फोटो ले सकता हूँ, क्योंकि यह 400 प्रतिशत ज्यादा ब्राईटन के साथ रात में फोटो खींच सकता है।
  4. 2.3 GHz के प्रोसेसर से मेरे सारे एप्प बहुत ही तेज रिस्पाँस देंगे और मेरा स्मार्टफोन अनुभव बहुत ही उम्दा होगा। मेरा वीडियो भी अच्छा दिखेगा।
  5. रियर कैमरा 13 मेगा पिक्सल और फ्रंट कैमरा 5 मेगा पिक्सल होने से मेरे सेल्फी बहुत ही अच्छे और मेरे ट्रिप के सारे फोटो अच्छे आयेंगे।

 

तो बस अब मुझे है इंतजार आसुस जेनफोन 2 के लांच होने का, और मैं अपने स्मार्टफोन के अनुभव को और परिष्कृत कर सकूँगा।

स्पोर्ट शूज कैसे चुनें (How to select sport shoes)

    जीवन में स्वास्थ्य का अपना ही महत्व है, कहते हैं कि सुबह घूमने से हमेशा ही स्वास्थ्य अच्छा रहता है और सुबह घूमने से फेफड़ों को ताजी प्राणवायु मिलती है उसके लिये पता होना चाहिये कि How to select Sport Shoes। सुबह के समय की प्राणवायु में प्रदूषण की बहुत ही कम मात्रा होती है, जिससे हमारे फेफड़े सही तरीके से काम करते हैं। सुबह घूमने का उपर्युक्त समय साधारणतया: 5 बजे होता है, और सुबह की वायु में फूलों की खुश्बू वातावरण को सुगंधित भी कर देती है।
    घूमने के लिये हमेशा ही उपर्युक्त है कच्ची जमीन या घास, आजकल लगभग हर बगीचे में मिल ही जाती है, इससे हमारे पैरों के तलवों में ज्यादा दर्द नहीं होता है, अगर सीमेंट की पगडंडी बनी होती है तो हमारे पैरों के तलवों में दर्द होने लगता है और हम ज्यादा देर नहीं चल पाते हैं। चलने के लिये भी हमारे जूते बेहतरीन क्वालिटी के होने चाहिये जिससे हमारे तलवों में दर्द न हो। चलते चलते हमारे जूतों का शेप बिगड़ जाता है पर फिर भी हम जूते बदलना नहीं चाहते हैं। खेलने वाले जूते भी अलग अलग तरह के आते हैं, जिसमें रोज साधारण चलने के लिये, 5-8 कि.मी. रोज चलने के लिये, 10-12 कि.मी. चलने के लिये, सप्ताह में 3 दिन चलने के लिये, रोज 2-4 कि.मी., 5-8 कि.मी., 10-12 कि.मी., 15-18 कि.मी., 18-21 कि.मी. और मैराथन वाले 41 कि.मी. के दौड़ने के जूते उपलब्ध होते हैं और हमें पता ही नहीं होता है कि कौन सा जूता हमें पहनना चाहिये। साधारणतया हमें 10-12 कि.मी. चलने वाला जूता लेना चाहिये जिससे हम उस जूते को पहनकर थोड़ा दौड़ भी लें तो कोई फर्क नहीं पड़े।
    जूते का सोल केवल रबर वाला नहीं होना चाहिये, नहीं तो जूता बहुत ही जल्दी घिस जायेगा और फिर हमें नया जूता लेने की जरूरत होगी, तो हमेशा ध्यान रखें कि जूते का सोल नीचे से चारों और से बाईंड हो जिससे जूता आपको पूरा कम्फर्ट देगा और जल्दी खराब भी नहीं होगा। मैंने हमेशा स्पोर्ट शूज नेट वाले पहने पर इस बार मैंने सोचा कि बिना नेट ला जूता लूँगा। क्योंकि स्पोर्ट शूज को हमें हर छ महीने में बदल लेना चाहिये,
हमें जूते लिये हुए 6 महीने से ज्यादा हो गये थे और फिर तभी स्नैपडील पर प्यूमा के अच्छे जूतों को देखा तो हमने अपने आप को प्यूमा का स्पोर्ट शूज गिफ्ट कर दिया, अब हमारा प्रात भ्रमण हमारे नये जूते के साथ होता है। हमारे पैरों के तलवों को फिर से वही कम्फर्ट लेवल मिल गया है जो कि 6 महीने पहले हमें नये जूतों में मिला था। तो ताजा प्राणवायु लेना हमारे दिल की बात है जिसे पूरा किया स्नैपडील ने । दिल की डील स्नैपडील से।
I am participating in the #DilKiDealOnSnapdeal activity at BlogAdda in association with SnapDeal.

केलोग्स वाले गुप्ताजी का नाश्ता

दीपो भक्षयते ध्वान्तं कज्जलं च प्रसूयते |
यदन्नं भक्षयेन्नित्यं जायते तादृशी प्रजा ||

जैसे दीप का उजाला अँधेरे को खा जाता है, और काजल को उत्पन्न करता है, वैसे ही जिस तरह का भोजन हम ग्रहण करते हैं, वैसे ही हम उसी तरह का व्यवहार करते हैं।

 उपरोक्त श्लोक आज भी पुरातनकाल की बात को सत्य साबित करता है। अगर हम गैस्ट्रिक भोजन खायेंगे तो हमें पेट की समस्या होगी और अगर सात्विक भोजन करेंगे तो हम तन मन से प्रसन्न रहेंगे। हमें अपने दैनिक जीवन में दूध एवं दही का भरपूर उपयोग करना चाहिये, इससे हमारे शरीर की बहुत सारी जरूरतें पूरी हो जाती हैं।
केलोग्स वाले गुप्ताजी का नाश्ता बहुत ही प्रसिद्ध है, उनके घर का नाम गट्टू है, घरवाली यानी कि श्रीमती गुप्ता का नाम शालू है, बेटे का नाम रोहन जिसे प्यार से घर में रोहू बुलाते हैं और बेटी का नाम रितिका जिसे प्यार से रितु बुलाते हैं। गट्टू याने कि गुप्ताजी केलोग्स के डिस्ट्रीब्यूटर हैं और आम पति की तरह उनको भी भूलने की बीमारी है, हालांकि उनके भी दिल में पहुँचने का रास्ता एक ही है, वह है पेट जिसका रास्ता जबान के जरिये होता है और उनकी पत्नि शालू उनके ही केलोग्स से विभिन्न तरह के व्यंजन बनाकर उनको खिलाती रहती हैं, जो कि सामान्यत किसी को भी पता नहीं होते हैं। तो उनकी पत्नि शालू गट्टू याने कि अपने पति के दिल में ही रहती हैं।
बेटी रितु हरेक बात को शॉर्ट फॉर्म में ही कहती है, जिससे गट्टू याने कि रितु के पापा हमेशा ही नाराज से होते हैं और बेटा रोहू पापा और दीदी की बात की नकल करते हैं। रोहू तो मम्मी की नकल करने से भी नहीं चूकता है।  शालू याने कि मम्मी भी नकल उतारने में माहिर हैं, और किसी की भी नकल हुबहू उतारती हैं और परिवार हँसी खुशी रहता है।
केलोग्स केनाश्ते का पहले हमें तो केवल दूध में ही भिगोकर खाने का पता था, पर केलोग्स वाले गुप्ता जी के घर की तो बात ही और है, कभी चॉकलेट मिलाकर शेक बना कर परिवार का मूड ठीक रखना तो कभी जल्दी जल्दी अगर बेटे को स्कूल के लिये मिठाई बना कर देना है तो केलोग्स से कैसे लड्डू बनाने हैं या फिर दही मिलाकर भी केलोग्स के व्यंजन बनाये जा सकते हैं।
खैर मुझे तो सबसे बढ़िया बात लगी कि नाश्ते के प्रकारों की जैसे कि पार्सल वाला नाश्ता, नखरे वाला नाश्ता, फर्स्ट क्रश वाला नाश्ता, जगह बनाने वाला नाश्ता, मूवी वाला नाश्ता, होमवर्क वाला नाश्ता, बेस्ट फैमिली वाला नाश्ता, चुप कराने वाला नाश्ता, रिमोट वापिस लेने वाला नाश्ता जब इतने सारे प्रकार के नाश्ते उपलब्ध हों तो कौन केलोग्स वाले गुप्ताजी के यहाँ नाश्ता नहीं करना चाहेगा, सुबह ही अच्छा नाश्ता हो जाये तो दिनभर अच्छा जाये।
So,
Eat good, keep the body and generations healthy.
Be good, keep the mind and generations healthy.
Do good, keep the society and generations healthy.

हर चीज में प्रसन्नता खुशी पायी जा सकती है

     खुशी मतलब कि जब हम दिल से, आत्मा से, अंतरतम से प्रसन्न होते हैं, जिसके मिलने से हमारे रोयें रोयें खड़े हो जाते हैं और ऐसा लगता है कि दुनिया का सारा आनंद हमें मिल गया है। हम इस अवस्था को तभी प्राप्त होते हैं जब ऐसी कोई चीज हमें मिल जाये जिसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं हो या फिर जितनी उम्मीद हो उससे ज्यादा मिल जाये। आजकल हर चीज में प्रसन्नता ढ़ूँढ़ी जा सकती है। फिर भले ही वह चीज पैसे से खरीदी जा सकती हो या न खरीदी जा सकती हो या फिर कोई अपना जो बहुत दूर हो वह एकदम से हमारे सामने आकर हमें अकस्मात ही झटका दे दे।

    ऐसी खुशी चेहरे से ही बयां हो जाती है, और भाव चेहरे के ऐसे होते हैं कि हम उस ताज्जुब, विस्मय, आश्चर्य, अचरज, अचम्भे, घबराहट और हैरत भरे चेहरे को एकदम से पहचान सकते
हैं, जब हम किसी को भी आश्चर्यजनक परिस्थितियों में डालते हैं तो खुद हमें ही पता नहीं होता है कि इस वातावरण को कैसे बदला जाये, खुद हम भी उस आनंद के अतिरेक के क्षण में आनंदित हो पता नहीं किसी नये अनुभव की सैर करते हैं। वातावरण में इतनी ऊर्जा होती है कि उस क्षण को हम कई बार तो गई वर्षों तक याद कर करके जीते हैं, और हमेशा यह क्षण हमारे तात्कालिक वातावरण को ऊर्जावान बना देते हैं। और वह क्षण हम कई वर्षों तक जीवित रखते हैं, इस प्रकार एक लम्हे की उम्र हम कई गुना बड़ा देते हैं।
    जब मैं भारत के बाहर मासिक ट्रिप पर रहता था तो भारत आने में मुझे लगभग 12 घंटों की यात्रा करनी होती थी, और मैं हर बार अपने बेटेलाल के लिये कोई न कोई ऐसी चीज ले जाता था कि वह मेरे आने का हमेशा इंतजार करता रहता था, हालांकि मेरे आने जाने की तारीखें बिल्कुल ही निश्चित होती थीं पर मैंने कभी भी पहले नहीं बताया कि मैं आ रहा हूँ और हमेशा घरवाली को भी बोल रखा था कि मेरे आने की तारीखों का बेटेलाल से जिक्र न करे, क्योंकि अगर बेटेलाल को पता रहता था तो वह फोन कर करके दम निकाल देता था, कि डैडी अब और कितनी देर लगने वाली है, आपका प्लेन थोड़ी और तेजी से नहीं उड़ सकता क्या या फिर टैक्सी वाले भैया को बोलो कि और तेज चलाये।
    मेरे घर पहुँचने का समय हमेशा ही सुबह होता था और तब वह सोकर उठा नहीं होता था, और मैं बेटेलाल के बगल में ही लेटकर धीरे से उसको प्यार करता था, तो बेटेलाल आनंदातिरेक
हो उठते थे, उनकी ऊर्जा स्फूर्ति और ताजगी देखते ही बनती थी, बिल्कुल वैसी ही ताजगी जैसे कि कोको कोला पीने के बाद आ जाती है, मन खुशियों से झूम उठता है, हमारे बेटेलाल को भी कोको कोला बहुत पसंद है, और हम आते समय हमेशा ही उनके लिये एक कोको कोला ले आते थे, बेटेलाल की खुशी दोगुना हो जाती थी।

नई शुरूआत मोटो ई के साथ

    हमेशा दुनिया में आदमी को नया सीखने की चाहत होती है, और हर कोई नई तकनीक को अपनाना चाहता है जिससे वह भी सभ्य समाज में जाना जाये और उसकी समाज में अच्छी पहचान बने । समाज में उसे जाना जाये और कोई भी नई तकनीक में विशेषज्ञता हासिल हो तो समाज हमेशा से ही उन व्यक्तियों को अलग ही पहचान देता है। जब से मोबाईल आम हाथों में आया है या यूँ कहें कि विलासिता की श्रेणी से मोबाईल हर व्यक्ति के जीवन की जरूरत बन गई है तब से मोबाईल क्षैत्र मे क्रांति आ गई है। पहले मोबाईल फोन कुछ ज्यादा ही भारी होते थे, जो कि केवल मैसेज और कॉल करने तक ही सीमित थे। पर जब इसी मोबाईल में कुछ और सुविधाएँ आ गईं तब से मोबाईल में एक से एक फीचर आने लगे।

    मेरे पास 13 वर्ष पहले एक मोटोरोला का फोन था जिसमें कुछ ज्यादा फीचर नहीं थे परंतु हाँ उसकी बैटरी जबरदस्त थी, फिर तो मैंने कई मोबाईल बदले जिसमें इंटरनेट तक की सुविधा थी, पर उसमें सारा मजा इसलिये किरकिरा हो जाता था कि किसी भी मनचाही जगह पर हम क्लिक नहीं कर सकते थे। अब हमने सोचा कि कीपैड के साथ वाले मोबाईल को त्याग कर मोटोरोला का नया मोटो ई स्मार्टफोन से टचस्क्रीन की दुनिया में प्रवेश करने का फैसला किया, इसमें हमें टच का मजा लेने को मिलेगा जो कि आज हर दूसरे व्यक्ति के पास होता है और हमें लगा था कि हम तकनीक की दुनिया में पिछड़ने लगे हैं।
    हम अपने मोबाईल पर एन्ड्रॉयड के नये एप्प के मजे ले पायेंगे, नये नये गेम्स के मजे ले पायेंगे, फिल्में देख पायेंगे और सबसे मजे की बात कि हम ये सब केवल टच करके कर पायेंगे, जीपीएस का बेहतरीन उपयोग कर पायेंगे और बड़ी स्क्रीन का मजा ले पायेंगे, रंग तो मोबाईल की स्क्रीन पर बेहतरीन दिखेंगे ही, मैं तो यह सब सोचकर ही रोमांचित हूँ कि मेरे पास टच स्क्रीन का फोन होगा। जिस पर मैं घर पर वाई फाई को भी कनेक्ट कर पाऊँगा, बहुत सारे गेम्स जो दूसरे लोग अपने टच स्क्रीन वाले मोबाईल पर खेलते हैं, और मैं उनको देखकर लालायित होता रहता था, अब मैं भी खेल पाऊँगा। अब मुझे किसी भी तरह की सुविधा के लिये तरसना नहीं  पड़ेगा। 
    इसमें 8 जीबी आँतरिक मैमोरी है और इसमें दो सिम लग सकती हैं, जिससे मैं दो फोन रखने की असुविधा से भी बच पाऊँगा।  5 मेगापिक्सल के कैमरा होने से कम से कम अब मुझे अपना कैमरा साथ में नहीं रखना होगा, गाने या वीडियो रखने
के लिये 32 जीबी की बाहरी मैमोरी तक का समर्थन है। इसमें 1 जीबी रैम होने से मुझे हर एप्प में अधिकतम रफ्तार मिलेगी और फोन हैंग भी नहीं होगा और मैं इससे वीडियो भी रिकार्ड कर पाऊँगा। इसमें एक्सेलेरोमीटर, लाईट सेन्सर और प्रोक्सीमिटी सेन्सर होने से मेरे इस टच स्क्रीन फोन का मजा दोगुना हो जायेगा। फोन का वजन मेरे पहले वाले फोन से बहुत कम है और इसकी बनावट भी बहुत अच्छी है।
    इतने बेहतरीन फीचर्स वाला फोन अगर मिल जाये तो इससे बेहतर बात क्या हो सकती है। जिंदगी में हमें बदलाव के लिये हमें प्रयास करने चाहिये और मैं बदलाव लाऊँगा अपनी जिंदगी में मोटो ई टच स्क्रीन फोन से।  #ChooseToStart with the new Moto E!

जीवन का पेड़ धड़धड़ाती बेपरवाह बहती सी नदी के बीच कहीं बियाबान जंगल में

अपने ही बनाये हुए सपनों के महल में ऐसा घबराया सा घूम रहा हूँ, कब कौन से दरवाजे से मेरे सपनों का जनाजा निकल रहा होगा, भाग भाग कर चाँद तक सीढ़ीयों से चढ़ने की कोशिश भी की, पर मेरे सपनों की छत कांक्रीट की बनी है किसी विस्फोट से टूटती ही नहीं। दम भी घुटता है पर कहीं से निरंतर ही ठंडी बयार आने से हमेशा ही सपनों के सच होने का भरोसा दिला देते हैं। इस जंजाल से निकलने के लिये कई बार छुप्पा में, कभी अक्षरों तो कभी शब्दों के पीछे, पर इन्होंने भी मेरा साथ न दिया, जब कोई और बुलाये तो झट से ये उधर चले गये, कभी मैंने तुम पर इसीलिये ऐतबार न किया।
ढ़ूँढ़ता ही रह जाऊँगा जीवन की कुछ सीढ़ियाँ, कभी सीढ़ियाँ ही टूटी मिलीं तो कभी रास्ते टूटे मिले, कभी छत नहीं मिली और अगर मिली भी तो आसमां में चाँद तारे न मिले, जिसने जैसा आसमां दिखाया बस हमेशा वैसा ही आसमां हमने देखा, हम अपना आसमां कब बनायेंगे, कब हम अपनी छत पर अपनी ही सीढ़ियों से जायेंगे, और कब हम शब्दों को अपना बना पायेंगे, सदियों तक इंतजार करेंगे, पर यह भी सत्य है कि इंतजार से कुछ नहीं मिलता, केवल और केवल हमें यही लगता है कि अपने लिये अपनी दुनिया खुद ही गढ़नी होगी।
जब दुनिया गढ़ने भी बैठे और जिसको हमने उस दुनिया का खुदा बनाने की ठानी, उसने हमारी दुनिया का खुदा बनने के लिये पहले तो राजीनामा कर लिया पर अब वह खुद ही अनिश्चितता के दौर से निकल रहा दिखाई देता, किसी दूसरी दुनिया से आने पर भी वहीं की टीस उसे इस दुनिया को मिटाने पर मजबूर कर रही है। जब खुदा खुद ही खुदी के राह पर निकल पड़े तो जीवन के पेड़ धड़धड़ाती बेपरवाह बहती सी नदी के बीच कहीं बियाबान जंगल में खड़ा दिखाई देता है, जहाँ दूर उसे दुनिया तो दिखती है, दुनिया को वह भी दिखता है, पर नदी नहीं, दुनिया तो इधर से उधर जाने के लिये पुलिया का इस्तेमाल करती है, पेड़ के पास खड़े होकर अपनी शक्ल के साथ कई जगह वाहवाही भी लूटते हैं, पर पेड़ के संघर्ष का कोई भी कहीं भी जिक्र नहीं करता, न उसकी भावनाओं को समझता।
बस खुश हूँ तो यूँ कि कुछ पक्षियों ने मेरी शाख पर घोंसले बना रखे हैं, केवल उनके लिये मैं इस प्रकृति से संघर्षरत हूँ, उनके शाख पर खेलने से जीवन की कुछ चीजों पर पड़े जालों को कभी झाड़ने की जरूरत ही नहीं आन पड़ी, जाले तो तब ही झाड़े जाते हैं जब वस्तु को या तो उपयोग करना हो या वह उपयोगहीन हो गई हो। जीवन में आगे बढ़ने की सीढ़ियाँ अब भी ढ़ूँढ़ रहा हूँ, जब कोई मेरी सीढ़ी को सहारा दे तो शायद मैं ज्यादा जज्बे से बेपरवाह होकर मंजिल पर चढ़ाई कर पाऊँगा, नहीं तो सपनों के महल को भरभराते देर ही कितनी लगती है।