Category Archives: विश्लेषण

खटमल को कैसे मारें, फ़ॉलोअप पोस्ट (How to remove Bed bugs, followup post)

मई में एक पोस्ट लिखी थी

खटमल को कैसे मारें, खटमल को कैसे खत्म करें..? सहायता करें !(How To remove Bed Bugs, How to finish Bed Bugs ? Help !)

    जिसमें कुछ सहायता भी मिली थी टिप्पणियों के माध्यम से और खटमलों को मारने के लिये क्या किया जाये यह रणनीति समझने में सहायता मिली।

    तो हमने बाजार में जितने भी कीड़े मारने की जहरीली दवाओं के स्प्रे थे सब ले आये और एक स्प्रे था रेंगने वाले कीड़े के लिये जिसे हम झट से उठा लाये और उसमें बाद में देखा तो काकरोच का ही फ़ोटू बना हुआ था। खैर बहुत दवाई छिड़की और उससे बहुत सारे खटमलों का नाश हो गया।

    सोते जागते बस पेंचकस से खटमलों का मारना जारी था। पता नहीं कितने खटमल और कितने उनके अंडे हमने मारे, खैर घर में से ३-४ दिनों में ही खटमलों का सफ़ाया हो गया। हमने चैन की सांस ली।

    इसी बीच उज्जैन जाना हुआ था तो हम वहाँ से खटमल मारने की एक तरल और एक पॉवडर दवाई ले आये। कुछ एक्का दुक्का खटमल दिख रहे थे जो कि अपना वंश बड़ाना चाहते थे, तो हमने इन दवाओं का प्रयोग किया और खटमलों का पूरा सफ़ाया कर दिया।

    उस समय हमारे फ़्लेट से लगा हुआ फ़्लेट में ताला था, जैसे ही उस फ़्लैट मॆं कोई आया हमारे घर में फ़िर से खटमल आने लगे, वो भी बड़े बड़े, समझ में आ गया कि पड़ौसी फ़्लेट से खटमल घुसपैठ कर रहे हैं तो बीच की बाऊँड्री वाल पर और बाहर की तरफ़ तुरत उज्जैन से लाया गया पॉवडर लगा दिया गया।

    अब जाकर कुछ चैन है और कभी कभी एक दो खटमल दिख जाते हैं, जिन्हें हम शहीद कर देते हैं। जाने क्यों खटमलों की प्रजाति भारत सरकार से प्रेरित लगती है, जिसमें अन्ना का जहरीला कीटनाशक दवा बहुत जरूरी है।

आरक्षण फ़िल्म को सरकार बना रही है विवादास्पद.. (Reservation Film… Controversial)

    आरक्षण फ़िल्म को लेकर आजकल बहस चल रही है, आजकल न्यूज चैनल पर सबसे ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। ब्रेकिंग न्यूज में आ रहा है कि मायावती ने फ़िल्म देखने की इच्छा जाहिर की और उत्तरप्रदेश में रिलीज पर रोक लगा दी है, तो प्रकाश झा ने मायावती को उत्तर दिया है कि ९ अगस्त से पहले प्रिंट देना उनके लिये संभव नहीं है।

    इधर प्रकाश झा, अमिताभ बच्चन, मनोज वाजपेयी और दीपिका पादुकोण हर न्यूज चैनल पर टॉक शो भी कर रहे हैं और न्यूज रूम में जाकर आरक्षण फ़िल्म के बारे में बातें भी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में पहले ही विरोध जारी है, कतिपय लोग कानून को अपने हाथ में लेकर आरक्षण फ़िल्म के पोस्टरों को फ़ाड़ रहे हैं, कालिख पोत रहे हैं।

    आरक्षण इस तरह इस फ़िल्म को अब ज्यादा पब्लिकसिटी की जरूरत ही नहीं रह गई है और आरक्षण के विषय में लगभग हर विद्यार्थी परिचित है, यह प्रकाश झा का अपना एक दृष्टिकोण है और एक कलाकार के नाते उन्हें अपने दृष्टिकोण रखने का हक बनता है ताकि जनता भी उस दृष्टिकोण को देख सके। पर पता नहीं सरकार और राजनैतिक पार्टियाँ क्यों इतनी डरी हुई हैं, वैसे भी आरक्षण एक संवेदनशील मुद्दा है और इस पर सुलझे हुए तरीके से बहस करने की जरूरत है।

    आरक्षण केवल फ़िल्म नहीं है एक मुद्दा है, और इसे स्वस्थ्य तरीके से लिया जाना चाहिये ना कि कुछ किराये के गुंडे लेकर जनता को गुमराह करना चाहिये।

    आज के आरक्षण के नियमों से कम से कम सामान्य वर्ग के लोग तो खुश नहीं हैं, बस यह समझ लीजिये कि चिंगारी दबी हुई है, और हवा देने की देर है, पर इतना भी यकीन से कह सकते हैं कि एक फ़िल्म चिंगारी को हवा नहीं दे सकती, केवल एक नयी विचारधारा नौजवानों को दे सकती है, जिससे शायद सरकार भी प्रेरित हो।

    खैर अब इंतजार है आरक्षण फ़िल्म का … फ़िल्म अच्छी ही होगी आखिर इतनी बड़ी स्टॉर कॉस्ट जो है ।

एक ब्लॉगर मीट बैंगलोर में जो कि बारिश के कारण नहीं हो पाई ।

    शाम को लगभग ५ – ५.३० बजे विभाजी से मिलना तय हुआ था और हमने फ़ोन करके प्रवीण पांडे जी को भी खबर कर  दी थी। अभिषेक से बात हुई परंतु अभीषेक ने बताया कि उनका कार्यक्रम व्यस्त है।  घर से बराबर समय पर निकले और जैसे ही वोल्वो में बैठे, जोरदार बारिश होने लगी। आधे रास्ते पहुँचते पहुँचते बारिश अपने पूरे उफ़ान पर थी और इस बारिश और हममें केवल वोल्वो के खिड़की पर लगे काँच का फ़ासला था।

    अंदर हम सीट पर बैठे बारिश का मजा ले रहे थे और बाहर काँच की खिड़की के उस तरफ़ बारिश का झर झर जल बहता जा रहा था, जैसे मन की बातें कभी रुकती नहीं हैं, मन के घोड़े दौड़ते ही रहते हैं, इस बारिश में हमने आगे न जाने का निर्णय लिया, क्योंकि बारिश तेज थी और भले ही छतरी पास हो पर भीग तो जाते ही हैं, और आज कुछ ऐसा था कि हम अपने को  भिगो नहीं सकते थे।

    त्वरित निर्णय लेते हुए फ़ोन पर बात करके आगे जाना निरस्त किया गया, क्योंकि बारिश होने के बाद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दम तोड़ देती है।

    प्रवीण जी को जैसे ही फ़ोन किया उन्होंने कहा कि इस बारिश का जरूर कुछ आपके साथ संबंध है, जब भी हम लोगों के मिलने का होता है यह बारिश जरूर होती है और मिलना नहीं हो पाता है। पहले भी एक बार ऐसा हो चुका है।

    तो यह था विवरण उस ब्लॉगर मीट का जो कि बैंगलोर में हो न सकी, जल्दी ही जब ब्लॉगर मिलेंगे तो उसका विवरण दिया जायेगा।

आयकर रिटर्न की ईफ़ाईलिंग और नियोक्ता द्वारा कटा हुआ कर फ़ॉर्म 26A S से देखें। (E-filing of Income Tax Return and Check deducted Tax from employer in form 26A S)

    क्या आपने आयकर रिटर्न भर दिया है, अगर नहीं तो कैसे भरने वाले हैं, हमने इस बार से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भरना शुरू किया है और बहुत ही आसान लगा।
    आयकर की ईफ़ाईलिंग की वेबसाईट पर जाकर अपने पान नंबर से रजिस्टर करें, और अपनी निजी जानकारियाँ भरें। डाऊनलोड में जाकर संबंधित फ़ॉर्म डाऊनलोड कर लें, जैसे अगर आप केवल नौकरी करते हैं तो आपको आई.टी.आर. १ सहज भरना है, सहज की एक्सेल फ़ाईल डाऊनलोड करें, और जब एक्सेल में फ़ाईल खोलें तो मेक्रो को इनेबल करें नहीं तो एक्सेल फ़ाईल के पुश बटन काम नहीं करेंगे।
एक्सेल में अपनी सही जानकारी भरें जो कि फ़ॉर्म १६ में दी गई है, इसमें तीन टैब दिये हैं –
1. Income Details – इस शीट में फ़ॉर्म १६ के अनुसार आय की जानकारियाँ, नाम और   पता भरिये। Valideate  करिये और Next बटन पर क्लिक कीजिये।
2. TDS – इस शीट में नियोक्ता द्वारा काटे गये टैक्स की जानकारी, सैलेरी के अलावा अगर कहीं TDS कटा है और अग्रिम कर की जानकारी Transaction wise दें।
3. Taxes paid and verification – इस शीट पर अपने बैंक का खाता नंबर और माइकर कोड टंकित करें साथ ही यहाँ पर आपका टैक्स के बारे में पता चलता है कि टैक्स सही है या और जमा करना है या रिफ़ंड है। अगर यह नहीं आ रहा है तो पहली शीट Income Details पर जाकर Calculate Tax बटन पर क्ल्कि करें।
    अब तीसरी शीट पर दिये गये Generate बटन को दबायें तो यह आपकी एक्सेल फ़ाईल की .xml फ़ाईल बना देगा। जो कि Submit Return – Select Assessment Year में जाकर अपना वर्ष चुन लें, अपना फ़ॉर्म चुनें और अगर आपके पास डिजिटल सिग्नेचर है तो Yes करें नहीं तो No ही रहने दें। Next पर क्ल्कि करें, अब Choose file पर क्लिक करें और .xml फ़ाईल को चुनें। और अगर डिजिटल सिग्नेचर हैं तो इसके लिये जावा का संस्थापित होना आवश्यक है और अपनी .pfx फ़ाईल का पता दें। अब Upload बटन दबाकर फ़ाईल को Upload कर दें। जैसे ही फ़ाईल upload हो जायेगी, वैसे ही आपको फ़ॉर्म V की PDF लिंक मिल जायेगी, जिसे डाऊनलोड करके उसका प्रिंट निकालकर उसे आयकर बैंगलोर स्थित स्पेशल सैल के पते पर भेज दें। १२० दिनों के अंदर आपको फ़ॉर्म V आयकर विभाग को भेजना होता है जिसकी रसीद आयकर विभाग द्वारा आपके ईमेल पते पर भेज दी जायेगी। और इसका ऑनलाईन स्टेटस भी आयकर की साईट पर देख सकते हैं। अगर रसीद नहीं मिले तो फ़ॉर्म V वापिस से भेजें और ध्यान रखें कि फ़ॉर्म V केवल साधारण डाक या स्पीडपोस्ट से भेजें, रजिस्टर पोस्ट और कूरियर से डाक स्वीकार नहीं करते हैं। ज्यादा जानकारी के लिये आयकर विभाग की साईट पर देखें।
    अगर आपने डिजिटल सिग्नेचर भी अपलोड किये हैं तो फ़ॉर्म V भरकर भेजने की आवश्यकता नहीं है। सबसे सस्ता डिजिटल सिग्नेचर ईमुद्रा द्वारा दिया जाता है, मैंने भी सोचा था कि डिजिटल सिग्नेचर लूँ परंतु जब मात्र २० रूपये खर्च करने से काम चल जाता है तो उसके लिये ४०० रूपये का खर्चा क्यों किया जाये और डिजिटल सिग्नेचर का आयकर रिटर्न भरने के अलावा कहीं ओर व्यावहारिक उपयोग भी नहीं है।
    याद रखें पासवर्ड कभी भी कहीं भी नहीं लिखें, जैसे बैंक का पासवर्ड महत्वपूर्ण है वैसे ही आयकर की साईट का पासवर्ड महत्वपूर्ण है। कोई भी जानकारी अपलोड की जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल उस लॉगिन की ही है।
    अब आपको अपने नियोक्ता द्वारा जमा किये गये आयकर का विवरण देखना है तो आप पिछले वर्षों का भी विवरण यहाँ ऑनलाईन देख सकते हैं, फ़ॉर्म 26AS के द्वारा।
    My Account – View Tax Assessment ( Form 26A S), पूछी गई जानकारियों को भरें और View Form 26A S पर क्ल्कि करें। यह वेबसाईट एन.एस.डी.एल की साईट से कनेक्ट होकर सारी जानकारी आपको मुहैया करवा देता है।
    तो भूल जाईये ऑफ़लाईन आयकर रिटर्न भरना और भरिये ऑनलाईन रिटर्न, हाँ अगले वर्षों में अगर डिजिटल सिग्नेचर अगर सस्ता होता है या फ़िर उसका कहीं और भी व्यवहारिक उपयोग होता है तो डिजिटल सिग्नेचर भी ले लिया जायेगा।

दो वयस्क फ़िल्में “देहली बेहली” और “मर्डर २”, हमारी अपनी समीक्षा (Two Adult Movies “Delhi Belly” and “Murder 2” My Review)

    पिछले दो दिनों में दो वयस्क फ़िल्में देख लीं, जो कि बहुत दिनों से देखने की सोच रहे थे और ऐसे महीनों निकल जाते हैं फ़िल्में देखे हुए।  पहली “देहली बेहली” और दूसरी “मर्डर २”। दोनों ही फ़िल्में अलग अलग कारणों से वयस्क दी गई होंगी। जहाँ “देहली बेहली” एक व्यस्क हास्य फ़िल्म है वहीं “मर्डर २” में  गरम दृश्य, थोड़ी बहुत गालियाँ और हिंसक दृश्य हैं ।

    अगर गरम दृश्यों की बात की जाये तो “देहली बेहली” में कुछ दृश्य ऐसे हैं जो कि लोगों को आपत्तिजनक लग सकते हैं मगर आजकल की पीढी इसे आपत्तिजनक नहीं मानती और इसे हास्यदृश्य ही मानेगी, तो यहाँ पीढ़ियों के अंतर की बात आ जाती है, और वहीं “मर्डर २” में गरम दृश्यों की जरूरत न होने पर भी ठूँसा गया है जो कि बोझिल से लगते हैं, परंतु उत्तेजना पैदा करने में कामयाब हुए हैं।

 मर्डर २

    अगर गालियों की बात की जाये तो “मर्डर २” में शायद ३-४ गालियों से ज्यादा नहीं हैं, और वे भी बिल्कुल सही तरीके से उपयोग की गई हैं, कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि गालियों को जबरदस्ती ठूँसा गया है या कम गालियों में काम चला लिया गया है। अब जब वयस्क फ़िल्म का सर्टिफ़िकेट लिया ही था तो कुछ गालियों का उपयोग तो कर ही सकते थे, और वह उन्होंने किया।

देहली बेहली के लिये मैंने फ़ेसबुक पर नोट लिखा था वही यहाँ चिपका रहा हूँ।

देहली बेहली

कल “डैली बैली” ए सर्टीफ़िकेट फ़िल्म देखी, तो लगा कि कई जगह जान बूझकर गाली कम दी गई है, जहाँ ज्यादा गालियाँ होनी चाहिये वहाँ केवल एक ही गाली से काम चला लिया गया है, अगर सही तरीके से गालियों का विज्ञान समझ लिया जाता तो यह संभव था, इसके लिये विशेष रूप से स्कूल और कॉलेज में जाकर समझा जा सकता है। या फ़िर वे लड़के जो होस्टल में रहते हैं, या अपने घर से अलग रहते हैं, उनका रहन सहन और गालियों का उपयोग बकायदा व्याकरण के तौर पर किया जाता है। वैसे आजकल हमारा गालियाँ देना काफ़ी कम हो गया है, परंतु हाँ अपने पुराने मित्रों के साथ आज भी बातें करते हैं तो बिना गालियों के बातें करना अच्छा नहीं लगता है, उसमें आत्मीयता लगती है। हालांकि किसी तीसरे सुनने वाले को यह गलत लग सकती है परंतु अगर व्याकरण का उपयोग नहीं किया जाये तो बात का मजा ही नहीं आता।

अब एक बात और है, जो सभ्य (मतलब कहने के लिये नहीं वाकई सभ्य, जिन लोगों ने अपने जीवन में कभी गालियाँ नहीं दीं) हैं, तो यह फ़िल्म वाकई उन लोगों के लिये नहीं है। यह हम जैसे सभ्यों (हम ऐसे सभ्य हैं, कि समय पड़ने पर इतनी गालियाँ दे सकते हैं और ऐसी ऐसी गालियाँ दे सकते हैं, कि अच्छे अच्छों के पसीने छूट जायें, पर देते नहीं हैं) के लिये है। खासकर युवावर्ग इसे बहुत पसंद करेगा।

    हिंसक दृश्यों की बात की जाये तो “मर्डर २” में हिंसक दृश्य अपना पूर्ण प्रभाव नहीं छोड़ पाये, वयस्क सर्टिफ़िकेट था तो हिंसक दृश्य को और बेहतर बनाया जा सकता था, हालांकि प्रशांत नारायन ने अपनी और से कोई कसर नहीं छोड़ी है, हिजड़ा बनने का दृश्य बहुत प्रभावी हैं और जो दृश्य पूर्व में आशुतोष राणा ने निभाये हैं, उनकी टक्कर के हैं। वैसे भी महेश भट्ट की फ़िल्म में अगर हिजड़ा ना हो तो उनकी फ़िल्म पूरी नहीं होती।

    “देहली बेहली” में हिंसक दृश्य प्रभावी बन पड़े हैं, जैसे कि अमूमन दृश्य में संवाद बनाये हैं, उससे वे दृश्य प्रभावी बन पड़े हैं, परंतु कुछ दृश्य हास्य पैदा करते हैं।

    कुल मिलाकर “देहली बेहली” बहुत अच्छी फ़िल्म लगी और “मर्डर २” ठीक ठाक, मतलब बहुत अच्छी नहीं। अच्छी बात यह है कि दोनों ही फ़िल्मों की पटकथा अच्छी कसी हुई है और अपने से दूर नहीं होने देती है।

अब जल्दी ही “चिल्लर पार्टी” देखने की इच्छा है।

प्रवीण पाण्डे जी के ब्लॉग पोस्ट का फ़ायदा और xBox काइनेक्ट

    ब्लॉग से नुकसान तो शायद कम ही होंगे पर फ़ायदे बहुत हैं। प्रवीण पांडे जी ने अपने ब्लॉग में कुछ दिनों पहले xBox काइनेक्ट का विवरण लिखा था और मैं पिछले तीन वर्षों से लगभग इसी तरह की चीज ढूँढ़ रहा था, जब मुंबई में था तो Wii का गेमिंग कन्सोल देखा था परंतु उसमें खेलने के लिये एक रिमोट को पकड़ना होता था, जो कि मुझे पसंद नहीं था।

    हाथ में रिमोट न चाहने का कारण था हमारे बेटेलाल, क्यूँकि अगर फ़ेंक दिया बज गया बैंडबाजा महँगे गेमिंग कन्सोल का, इसलिये कुछ ऐसी तकनीक वाला कन्सोल चाहिये था जिसमें बिना रिमोट पकड़े खेल सकें, इसी बीच माइक्रोसॉफ़्ट ने xBox के साथ काइनेक्ट बाजार में उतारा परंतु इसके बारे में हमने कहीं सुना नहीं था। सुना तो प्रवीण जी के ब्लॉग से, ब्लॉग का हमारे लिये एक फ़ायदा ।

    प्रवीण जी से xBox के बारे में पूरी जानकारी ली और एक शोरूम में जाकर डेमो भी देख लिया, बस हमको भा गया, कीमत हालांकि कुछ ज्यादा थी परंतु जैसी चीज अपने को चाहिये हो मिल जाये तो कीमत मायने नहीं रखती है।

    इसी बीच हमारे छोटे भाई का अमेरिका जाना हो गया, और हमने ऑनलाईन वहाँ का भाव देखा तो लगभग ४० प्रतिशत रुपयों की बचत हो रही थी तो हमने अपने भाई को बोला कि हमारे लिये एक xBox ले आओ, हमारा xBox मई के दूसरे सप्ताह में हमारे पास आ गया। पर अब समस्या यह थी कि xBox का पॉवर एडॉप्टर अमेरिका वाला था जो कि 110 – 130 वोल्ट होता है और यह भारत में नहीं चल सकता था।

    अमेरिका का पॉवर एडॉप्टर भारत में कैसे चलेगा गूगल में बहुत ढूँढ़ा, कई प्रकार के समाधान मिले, कि अमेरिका से भारत का पॉवर कन्वर्टर ले लो जिसमें एक ट्रांसफ़ॉर्मर लगा होता है और चल जायेगा, हम लेकर भी आये परंतु काम नहीं बना, फ़िर गूगल पर ढूँढ़ा गया, तो पता चला कि इस समस्या से केवल हम ही दो-चार नहीं हो रहे हैं, इस समस्या से बहुत सारे लोग ग्रसित हैं।

    इस बाबत हमने एक बड़े शोरूम पर भी पूछताछ की तो उन्होंने हमें एक मोबाईल नंबर दिया और कहा कि आपकी समस्या का समाधान यहाँ हो जायेगा, हमने फ़ोन किया तो पता चला कि ये किसी निजी दुकान का नंबर था जो कि चीन निर्मित थर्ड पार्टी पॉवर एडॉप्टर बेचते हैं और उसकी केवल टेस्टिंग वारंटी है, और उसकी कीमत हमें लगभग ३२०० रूपये बताई गई और बताया गया कि लगभग ३०० लोग उनसे खरीद चुके हैं।

    ऐसे ही एक और समाधान मिला कि स्टेप अप / स्टेप डाऊन ट्रासफ़ॉर्मर का उपयोग करें, हमने अपने पास की इलेक्ट्रिक दुकान को इसे लाने के लिये बोल भी दिया।

    जब xBox के अंतर्जाल पर घूम रहे थे तो भारत का उपभोक्ता सेवा का फ़ोन नंबर मिला और हमने माइक्रोसॉफ़्ट को फ़ोन किया तो उन्होंने xBox से संबंधित जानकारी ली और हमने पॉवर एडॉप्टर संबंधी समस्या माइक्रोसॉफ़्ट के सामने रखी तो उपभोक्ता सेवा अधिकारी ने हमसे कहा कि आप चिंता न करें हम आपकी समस्या का समाधान करेंगे। आपने अमेरिका से xBox खरीदा है तो क्या हुआ, हम आपको भारत का पॉवर एडॉप्टर कंपनी की गुड विल के लिये कॉम्लीमेंटरी देंगे, और आप अपना अमेरिका वाला पॉवर एडॉप्टर भी अपने पास रखें जब अमेरिका जायें तब उसका उपयोग करें, उनका इस बाबत ईमेल भी तुरंत ही मिल गया और ५ दिनों में ही हमें माइक्रोसॉफ़्ट से पॉवर एडॉप्टर भी मिल गया, हमने चलाकर भी देख लिया, और इस प्रकार माइक्रोसॉफ़्ट ने हमारी समस्या का समाधान कर दिया।

जय हो प्रवीण जी की और जय हो माइक्रोसॉफ़्ट वाले बिल्लू भैया की।

स्पीकएशिया कैसे अपना उल्लू साध रहा है और कितना रुपया ये कमा चुके हैं सर्वे के नाम पर

    स्पीकएशिया वाले अभी भी जनता को उल्लू बना रहे हैं, अभी आज तारक बाजपेयी जो कि स्पीकएशिया के सी.ओ.ओ. हैं उन्होंने अपना वीडियो जारी किया है, और यह वीडियो गुप्त रूप से उनके खास बनाये गये शब्द स्पीकएशियन लोगों के लिये है। जिसमें तारक बाजपेयी अभी भी जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं और कह रहे हैं कि हम बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट बाजार में लाये हैं और इसलिये कोई भी इसको पचा नहीं पा रहा है। और खासकर स्पीकएशियन लोगों से निवेदन किया गया है कि जो ११ हजार रुपये आपसे लिये जा रहे हैं, वह निवेश नहीं है इसके बारे में आप अपने जान पहचान और आसपास के लोगों को बताते जाईये कि यह निवेश नहीं है यह तो आपकी सदस्यता शुल्क है।
    अगर हम इतनी तेजी से बड़े हैं तो केवल इसलिये कि हमारा कॉन्सेप्ट बिल्कुल नया है, पहले सैंकड़ों और हजारों में थे और अब लाखों में हैं और इस वर्ष के अंत तक करोड़ हो जायेंगे।
    अब हम अगर हिसाब लगायें तो पता लगेगा कि इन लोगों ने कितना बड़ा घोटाला करने की ठानी है, क्या आप सोच सकते हैं कि कोई कंपनी महीने में कितने सर्वे करवायेगी और अगर करवायेगी भी तो क्या उस कंपनी को हर सप्ताह सर्वे के लिये इतने लाख या करोड़ लोग चाहियेंगे। अगर १९ लाख लोगों के हिसाब से ही देखा जाये तो हर सप्ताह दो सर्वे देते हैं और अगर मान लिया जाये कि एक कंपनी एक सर्वे देती है तो उस एक सर्वे की कीमत उस कंपनी को लगभग १० करोड़ रुपये चुकाना पड़ रही है।
    अब खुद ही सोचिये कि जैसे जैसे लोग बड़ते जायेंगे वैसे वैसे सर्वे की कीमत कंपनी के लिये बढ़ती जायेगी, तो ऐसी कितनी कंपनियाँ हैं जो हर सप्ताह सर्वे करवाना पसंद करेंगी, शायद एक भी नहीं।
   पहले तो यह जानते हैं कि सर्वे क्यों किया जाता है –
  • जब किसी कंपनी को अपना नया उत्पाद बाजार में उतारना होता है।
  • जब कंपनी को अपने जमा जमाये उत्पाद की बिक्री और बढ़ानी हो।
  • जब कंपनी को अपने प्रतियोगी उत्पाद से कड़ी टक्कर मिल रही हो।
  • जब कंपनी को अपने द्वारा दी जा रही सेवाओं से संतुष्टि ना हो।
    और भी ऐसे बहुत सारे कारण होते हैं, परंतु इनमें से कोई ऐसा कारण नहीं है कि कंपनी हर सप्ताह इतनी बड़ी संख्या में सर्वे करवाये। इस तरह के सर्वे होते भी हैं तो शायद वर्ष भर में एक या एक भी नहीं।
    स्पीकएशिया एक फ़ूलता गुब्बारा है जो कि तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा जनता को बरगलाकर उस गुब्बारे में भर रहा है, और जिस दिन ये बुद्धिजीवी वर्ग इसको उठा नहीं पायेगा, उस दिन करोड़ों रुपयों का चूना लगाकर गायब हो जायेगा।
    इसके प्रबंधन में जितने भी लोग हैं वे तो अपनी मलाई लेकर चट हो जायेंगे और बेचारा फ़ँसेगा वो बेचारा आम बेरोजगार आदमी जो इनके झोल में फ़ँसा हुआ है। प्रबंधन के लोगों ने तो आसानी से १० करोड़ से ज्यादा बना लिये होंगे और अब मजे करेंगे अगर कानून के खेल में फ़ँस भी गये तो आसानी से निकल लेंगे। सभी जानते हैं कि कानून व्यवस्था बनाये रखने में राजनैतिक स्वार्थ हैं और इच्छाशक्ति की कमी है।
    यह ईमेल जो कि स्पीकएशिया के लोगों द्वारा बाजार में फ़ैलाया जा रहा है।
खैर स्पीकएशिया के सी.ओ.ओ.तारक बाजपेयी का वीडियो इस लिंक पर जाकर देख सकते हैं।

अब स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का क्या होगा ? लालच की पराकाष्ठा कर दी ।

पहली पोस्ट – स्पीक एशिया ऑनलाईन संभावित बड़ा घोटाला तो नहीं (Probable Scam SpeakAsiaOnline.com !!)

    मेरी पहली पोस्ट स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com पर १७ अप्रैल को थी, इससे पहले तो मैंने इस कंपनी के बारे में कुछ सुना भी नहीं था। खैर अब मछली मगरमच्छ हो गई है और अब सब उसका क्रेडिट लेने में लगे हैं।

    जबकि अक्टूबर में मनीलाईफ़ पत्रिका ने इनके व्यवसाय के बारे में आपत्ति जताते हुए लिखा था कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया, आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो क्या सो रहे हैं ?

    खैर अब तो सबके सामने सच आ ही गया है, १ महीने पहले इस कंपनी के पास ९ लाख लोग थे और १ महीने में ही १० लाख लोगों को जोड़ लिया है। सोचिये अब यह संख्या बढ़कर १९ लाख हो गई है।यह तो लालच और बिना कुछ करे कमाने की हम भारतियों की पराकाष्ठा है।

    कई ऐसे लोगों को देखा जो कि ४-५ हजार की निजी नौकरी कर रहे थे और जैसे तैसे अपना घर चला रहे थे, उन्होंने लाख रुपये स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com में लगाकर ४० हजार कमाने के ख्बाब देखे और अब कंपनी के ऊपर मीडिया और सरकार का दबाब पड़ने लगा है, अगर स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com गायब हो गई तो इन लोगों के लाख रुपये कौन लौटायेगा और सबसे बड़ी बात क्या इनको आसानी से वापिस नौकरी मिल पायेगी। आज यह घोटाला लगभग 1900 करोड़ रुपये का हो चुका है।

    और जो लोग इससे कमा रहे हैं, वे मीडिया और सरकार का विरोध कर रहे हैं, कि स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक तो भारत के बेरोजगारों को रोजगार दे रहा है और सभी लोग उसे बंद करवाने के पीछे पड़े हैं, और इन बेरोजगारों और लालची लोगों को क्या यह बात समझ में नहीं आती है,  कि ये मीडिया और सरकार केवल स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के पीछे ही क्यों पड़े हैं, और किसी कंपनी के पीछे क्यों नहीं। अगर स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com बताये कि उनकी आमदनी का क्या जरिया है, और अपनी बैलेन्स शीट सबके सामने रखे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।

    अगर नेट और सर्वे से पैसे कमाना इतना ही आसान होता तो शायद नेट का उपयोग करने वाले लोग करोड़पति अरबपति हो चुके होते।

    अभी कुछ दिन पहले २ लाख लोगों को स्टॉकगुरुइंडिया ५०० करोड़ का चूना लगाकर गायब हो चुकी है, उनका व्यापार भी कुछ इनकी तरह से ही था।

    वैसे भी हिन्दुस्तान टाईम्स सिंगापुर जाकर स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के ऑफ़िस की पड़ताल आज कर चुका है, और वहाँ कुछ भी नहीं मिला है। और अब आयकर विभाग की भी आँख खुली है (चलो देर से ही सही, जब जागो तब सवेरा)।

सभी अपनी हसरतें और चाहतें केवल देखकर ही मिटाना चाहते हैं।

    लगभग नौ के ऊपर तीस मिनिट पर घर से निकला क्योंकि बाहर गाँव जाने की बस रात को बारह में कम पंद्रह मिनिट पर थी। पीठ पर अपना लैपटॉप बैग टाँग रखा था, जीन्स टीशर्ट और नीले रंग की फ़टफ़टाती हुई चप्पल, जो कि मनपसंद थी और थोड़ी कपड़ों के साथ जँचकर श्टाईलिश भी लग रही थी।

    चल पड़ा लोकल बस पकड़ने बस अड्डे जाने के लिये, बस के लिये बने स्टैंड पर पहुँचा तो वहाँ एक कपल जो कि दोस्त लग रहे थे, शादीशुदा तो नहीं लग रहे थे, परंतु आजकल वैसे भी कपल को देखकर बोलना बहुत मुश्किल होता है कि दोनों मियाँबीबी हैं या नहीं, और तो और आजकल लड़कियाँ न बिंदी लगाती हैं, न माँग भरती हैं, न चूड़ियाँ पहनती हैं और न ही मंगलसूत्र और अगर पहना भी होगा तो मजाल कि वह दिख भी जाये।

     कुछ एक दो लड़के और खड़े थे, पास में ऑटो खड़ा था और बस का इंतजार हो रहा था, पास ही कुछ चार पाँच लड़के खड़े हुए बातें कर रहे थे, वे केवल अपना समय सड़क पर खड़े होकर बिता रहे थे। जितने भी लड़के खड़े थे सबकी नजरें केवल उस लड़की पर ही थीं, लड़की ने सभ्य कपड़े पहने हुए थे और पूरे अंग ढ़ंके हुए थे। लिबास से अच्छे घर की लग रही थी और लड़के से आंग्लभाषा में बात कर रही थी।

    एक लड़का सामने से फ़ोन पर बात करता हुआ सड़क से आ रहा था और निगाहें गिद्ध की तरह केवल लड़की पर, सारे साले मर्द ना कुत्ते ही होते हैं जहाँ लड़की दिखी नहीं बस वहीं फ़ैल लिये, दोपहर में ही फ़िलिम देखकर आया था उसका डॉयलाग याद आ गया (थैंकयू) ।

    मोटरसाईकिल वाला यू टर्न ले रहा था और लड़की देखकर केवल उसे ही देखता रह गया और टकराने ही वाला था कि उसके पहले ही उसके लालच पर जोखिम सवार हो गया था और चुपचाप चलाने पर ध्यान देने लगा।

    लफ़्फ़ाज ऐसे देखते हैं जैसे कि लड़की देखी ही नहीं, बीबी साथ में चल रही है, मगर मजाल कि उसे देखे बिना निकल जायें, अगर विपरीत दिशा से आ रहे हैं तो बहुत ही बढ़िया और अगर पीछे से आ रहे हैं और केवल पीछे से दर्शन हो रहे हैं तो फ़िर लंगूर मुड़कर जरूर देखेंगे। फ़िर भले ही वह पंद्रह साल का नौजवान हो या पचपन साल का जवान।

    बस का इंतजार करते करते दस में पंद्रह मिनिट कम रह गये थे और बस थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही थी, लड़की लड़के पर झल्ला रही थी, पर दोनों को पता था कि झल्लाने से कुछ नहीं होगा, थोड़ी देर में ही बस आ गई। कपल और लेपटॉप बैग लिये वह भी चढ़ गया। यह अलग बात है कि बैग में लैपटॉप नहीं था केवल एक दिन के कपड़े मात्र थे। कपल ने उसे ध्यान से देखा फ़िर वह सीट पर जाकर अपनी ही मुद्राओं में लीन हो गया।

    सोच रहा था कि फ़िलिम का डॉयलाग कितना सही है समाज पर, सच्चाई तो है, मगर कितने लोग इसको मानते हैं, पता नहीं !!

    वैसे एक बात तो सच है कि लड़्की को देखने के लिये उम्र से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है, सभी अपनी हसरतें और चाहतें केवल देखकर ही मिटाना चाहते हैं।

स्पीक एशिया ऑनलाईन संभावित बड़ा घोटाला तो नहीं (Probable Scam SpeakAsiaOnline.com !!)

कुछ दिनों पहले इंदौर से भाई का फ़ोन आया कि क्या आपने स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का नाम सुना है, हमने कहा कि नहीं भई बताओ हमें भी क्या है यह ?

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जैसा हमारा भाई स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के सेमिनार में सुनकर आया था, वह यह था –

स्पीक एशिया ऑनलाईन  SpeakAsiaOnline.com के बारे में –

  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी पिछले ५-६ वर्ष से सर्वे में है।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी पहले मानविक सर्वे करवाती थी।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी मानविक सर्वे से अच्छे परिणाम न आने के कारण ऑनलाईन सर्वे करवाने बाजार में आयी है।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com मानविक सर्वे में पहले अपने अधिकारी को प्रति सर्वे फ़ॉर्म ५०० रुपये तक देती थी, परंतु आम आदमी अपनी जानकारी नहीं देता था, तो जो कंपनी स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.comको सर्वे के लिये अनुबंधित करती थी, वह बाजार से सही जानकारी नहीं ले पाती थी, क्योंकि अधिकारी अपने मनमर्जी से किसी की भी जानकारी दे देता था।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अधिकारी को पहले महीने में ६-८ फ़ॉर्म देती थी जिससे केवल वह अधिकारी कड़ी धूप में कड़ी मेहनत करके ही ४,००० रुपये तक कमा पाता था।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने बाद में फ़ैसला किया कि अब अधिकारियों को फ़ॉर्म देने की जगह अब सीधे उपभोक्ता से जुड़कर सीधे उनसे ही सर्वे करवाया जाये।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने लगभग ११ महीने पहले ऑनलाईने सर्वे की शुरुआत की जिसका अंतर्जाल पता है www.speakasiaonline.com
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अपना नया सर्वर लगा रही है जो कि फ़ेसबुक और गूगल से भी बड़ा होगा।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक नया टीवी चैनल शूरु करने जा रही है।

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के रजिस्ट्रेशन के बारे में –

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के विज्ञापन के बारे में –

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com संभावित घोटाला क्यों हो सकता है –

  •  स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी सिंगापुर में व्यापार करने के लिये सिंगापुर सरकार द्वारा क्यों प्रतिबंधित है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com जब से घटित की गई है, तब से ३ बार अपना नाम क्यों बदला ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी का नाम सर्वे कंपनियों में क्यों नहीं आता है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के बारे में कुछ लोग कहते हैं कि यह पिछले १५ वर्षों से बाजार में है, पर वेबसाईट पर स्पीक एशिया ऑनलाईन के रजिस्ट्रेशन के बारे में यह क्यों बताया गया है कि यह २००६ में रजिस्टर्ड है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने अपने किसी भी ग्राहक के बारे में क्यों जानकारी नहीं दी है जो कि उनके सर्वे का उपयोग करते हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अपने कमाई का जरिया क्यों नहीं बताता है, वह क्यों छिपाकर रखा है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com क्यों अभी तक डॉलर में पैसा दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com पैनल को देने वाली रकम जो कि कमाई है भारत सरकार को कर क्यों नहीं दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे से क्या पैसे कमाना क्या इतना आसान है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com केवल बुधवार को मात्र एक घंटे काम करने पर कैसे १,००० रुपये पैनल को देती है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे जैसी और भी ऑनलाईन सर्वे कंपनियाँ बाजार में क्यों नहीं हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे कंपनी से अगर वाकई पैसे कमाना इतना आसान है तो केवल एक ही सर्वे कंपनी बाजार में क्यों है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कह रही है कि उनकी कमाई इस वर्ष में ११५ मिलियन डॉलर से ज्यादा हो जायेगी तो हरेन्द्र कौर (सीईओ) और तारक बाजपेयी (भारत प्रमुख) के नाम शीर्ष प्रमुखों की सूची में कहीं भी क्यों नहीं हैं।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का नाम कहीं भी बिजनैस टाइकून्स में क्यों नहीं है, जबकि वैश्विक स्तर पर इतनी तेजी से बड़ती हुई कंपनी है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का अभी तक भारत में कोई कार्यालय क्यों नहीं है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के वेबसाईट पर कोई भी वैधानिक दस्तावेज प्रदर्शित क्यों नहीं है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी अगर बंद हो जाती है तो भारत में कोई भी अधिकृत व्यक्ति नहीं है क्यों ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कमाई से टीडीएस क्यों नहीं काटती है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com पर सीईओ और एम.डी. के संदेश क्यों नहीं हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com क्यों एक जैसे सर्वे प्रति बुधवार दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक जैसे सर्वे देने से क्या इनको वाकई कमाई हो रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक डॉलर के ५० रुपये कैसे दे रहा है जबकि इसका असली बाजार मूल्य ४६ रुपये के आसपास है ?

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के जैसे घोटाले पहले भी भारत में हो चुके हैं –

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के बारे में क्या ज्यादा जानकारी के लिये भारत सरकार कुछ कर रही है ? अभी तक लगभग ९ लाख लोगों से ये लोग पैसे ऐंठ चुके हैं और लगातार भोले भाले लोगों को फ़ँसा रहे हैं, क्या साईबर क्राईम पुलिस इस बारे में संज्ञान लेकर इसकी तह तक जाने की कोशिश करेगी ? क्या रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया इतने बड़े फ़ोरेक्स ट्रांजेक्शनों से अनभिज्ञ है ?

आज जब मैंने कंपनी की वेबसाईट पर जाकर डेमो सर्वे करने की कोशिश की तो एरर मैसेज आ गया –

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अपनी प्रतिक्रिया बतायें – वैसे मुझे तो लगता है कि कंपनी अगस्त २०११ में सब माल असबाब लपेटकर गायब होने वाली है। बाकी तो समय ही बतायेगा कि क्या सही है और क्या गलत !!