Category Archives: अनुभव

फ़्री में फ़िल्में कैसे डाऊनलोड करें (How to download films ..)

अभी कुछ दिनों से कुछ मित्रों और सहयोगियों ने Download Films फ़िल्म डाऊनलोड संबंधित कुछ सवाल पूछे –

Download Films

– फ़्री में फ़िल्में कैसे डाऊनलोड करें
– टोरंट से फ़िल्म कैसे डाऊनलोड करें
– फ़िल्म कितनी देर में डाऊनलोड होती है
– फ़िल्में कौन अपलोड करता है
और भी बहुत कुछ …. तो मैंने सोचा कि चलो इस पर ही लिख देते हैं।

वित्तगुरु वित्तीय जानकारियाँ हिन्दी भाषा में

    फ़िल्म डाऊनलोड करने के लिये मैं isohunt.com का उपयोग करता हूँ, वैसे यहाँ केवल फ़िल्म ही नहीं बहुत सारी चीजें जैसे किताबें, ऑडियो, टीवी शो, गेम्स, फ़ोटो, एनिमेशन, कॉमिक्स, एप्लिकशन्स और भी बहुत सारी चीजें उपलब्ध हैं। साधारणतया: यहाँ फ़्री और सभी तरह के क्रेक्ड वर्शन्स उपलब्ध होते हैं। जिससे आपको लायसेंस न खरीदना पड़े, हाँ यह सही नहीं है, परंतु अगर फ़्री में अच्छी चीज मिल रही हो तो क्या फ़र्क पड़ता है। डाऊनलोड करने के पहले देख लें कि फ़्री है तो ठीक और अगर क्रेक्ड वर्शन है और अगर आप पायरेटेड सॉफ़्टवेयर नहीं उपयोग करते हैं, तो डाऊनलोड न करें।
    डाऊनलोड करने के लिये टोरंट एपलिकेशन डाऊनलोड कर संस्थापित करना होगी, जो कि यहीं इसी साईट पर फ़्री में उपलब्ध है। या आप इसे फ़ाईलहिप्पो से भी डाऊनलोड कर सकते हैं।
    एक बार टोरंट एपलिकेशन संस्थापित हो जाये, फ़िर आप कुछ भी डाऊनलोड कर सकते हैं जो कि इस साईट पर उपलब्ध है, बस आपको अपना कीवर्ड सर्च में डालना होगा, और सर्च करना होगा, फ़िर एक नया पेज खुलेगा, तो वहाँ एक तालिका बनी आ जायेगी। उसमें कैटेगरी, ऐज, टोरंट टेग नाम, साईज, सीडर्स और लीचर्स होंगे। कैटेगरी में अगर फ़िल्म डाऊनलोड करना हो तो Video/Movies होना चाहिये, इसका प्रिंट अच्छा होगा। टीवी शो ढूँढ़ना हो तो टेलिविजन में ढूँढिये। ऐज (उम्र) वह  फ़ाईल कितने दिन पहले अपलोड की गई थी। साईज फ़ाईल का साईज बताता है, इसके बाद कितने सीडर्स और लीचर्स है।
    अब टोरंट नाम पर क्लिक करके चुन लें तो एक नया पेज खुलेगा, वहाँ पर डाऊनलोड का बटन दिखायी देगा और बड़े फ़ोंट में Download .torrent लिखा होगा, इस पर क्ल्कि करेंगे तो एक छोटी सी फ़ाईल डाऊनलोड होगी जिसका एक्सटेंशन .torrent होगा। अब इस .torrent फ़ाईल को डबल क्लिक करेंगे तो टोरंट प्रोग्राम में खुल जायेगी और डाऊनलोड होने लगेगी। सेटिंग्स में जाकर डाऊनलोड फ़ोल्डर जरुर दे दें नहीं तो साधारणतया: यह My Downloads में आ जाती है।
    ध्यान रखने की बात – यह डाऊनलोड और अपलोड डाटा ज्यादा मात्रा में करता है, अमूमन जो साईज है, इसलिये पहले अपने ब्रॉडबेंड प्लॉन को देख लें, जितनी ज्यादा ब्रॉडबेन्ड की रफ़्तार होगी उतनी ही रफ़्तार से फ़िल्म डाऊनलोड होगी।
750 mb की फ़ाईल डाऊनलोड मॆं लगने वाला समय, यह कम और ज्यादा भी हो सकता है।
128 kbps – 8-12 घंटे
1 mbps – 40 min. – 1 घंटा

बेनरगट्टा राष्ट्रीय उद्यान, बैंगलोर की सैर (Banerghatta National Park)

    बेनरगट्टा राष्ट्रीय उद्यान घूमने की बहुत दिनों से इच्छा थी, फ़िर एकाएक बैंगलोर मिरर में खबर आई कि कर्नाटक के सारे राष्ट्रीय उद्यानों के प्रवेश शुल्क और सफ़ारी शुल्क १ फ़रवरी से बेइंतहां बढ़ाये जा रहे हैं, तो हमने सोचा कि चलो १ फ़रवरी के पहले ही उद्यान का भ्रमण कर आया जाये।
  बेनरगट्टा नेशनल पार्क मेरे घर से लगभग ३३ किमी है, और मैं बैंगलोर में नया नया हूँ इसलिये बस रूट्स की ज्यादा जानकारी भी नहीं थी, तो बैंगलोर महानगर परिवहन विभाग के अंतर्जाल से जानकारी ली, परंतु वहाँ पर बहुत लंबा रूट दर्शाया जा रहा था। फ़िर हमने अपने भाई की मदद ली, वह भी आजकल बैंगलोर में ही है और अभी २ सप्ताह पहले ही घूम कर आये थे।
    तो पता चला कि हम जिस रूट से जाने की सोच रहे थे वह ५५ किमी लंबा था और उन्होंने हमें ३२ किमी वाला बस रूट बताया, जिसमें हमें एक जगह बस बदलनी थी।
    सुबह लगभग सवा आठ बजे हम घर से निकल लिये, क्योंकि उद्यान का समय सुबह ९ बजे से ६ बजे तक है, हमने सोचा कि जल्दी पहुँचेंगे तो भीड़ कम मिलेगी और सुबह सुबह वैसे भी ताजगी रहती है। माराथल्ली पहुँचकर पहले सुबह का नाश्ता किया, नाश्ते में था इडली, मसाला डोसा और काफ़ी। फ़िर से वोल्वो पकड़कर पहुँचे, बीटीएम लेआऊट जहाँ से हमें बेनरगट्टा नेशनल पार्क जाने वाली बस मिलनी थी, वहाँ जब हम बस स्टॉप पर पहुँच ही रहे थे कि उस रूट की बस हमारे सामने ही निकल गई, और अब अगली बस आधा घंटे के बाद का समय था। उस समय ऐसा लग रहा था कि काश अपनी गाड़ी होती तो इतना इंतजार न करना पड़ता, परंतु जो मजा इस इंतजार में था वह अपनी गाड़ी होने पर थोड़े ही न आता।
    जब तक भ्रमण में रोमांच न हो तो यात्रा का आनंद नहीं होता है, इंतजार यात्रा के आनंद को दोगुना करता है, क्योंकि बहुत सी ऐसी चीजें और लोगों से मुलाकात होती है, जो शायद अपनी गाड़ी होने पर नहीं होती है।
     बैंगलोर में एक अच्छी बात है कि वोल्वो एसी बस में दिनभर का गोल्ड पास ८५ रुपये का बनता है जिसमें वायु वज्र जो कि अंतर्राष्टीय हवाई अड्डे की सेवा है और दैनिक बैंगलोर दर्शन बस में नहीं बैठ सकते हैं, बाकी हरेक BMTC की बस में बैठ सकते हैं। बेनरगट्टा राष्टीय उद्यान पहुँचने के लिये मेजेस्टिक बस स्टैंड से एसी वोल्वो बस 365 मिलती है, और यह सेवा लगभग हर आधा घंटे में उपलब्ध है।
    बेनरगट्टा राष्ट्रीय उद्यान पहुँचकर ऐसा लगा कि बहुत दिनों बाद साँस ले रहे हैं, इतनी शुद्ध हवा, अहा मन में ताजगी भर आई।
    सबसे पहले टिकिट खिड़की पहुँचे वहाँ वयस्क का टिकिट १६० रुपये और बच्चों का टिकिट ८५ रुपये था, जिसमें ग्रांड सफ़ारी (भालू, शेर, चीता, सफ़ेड चीता,हाथी) और चिडियाघर का शुल्क था।
    जैसे ही हम चिडियाघर में दाखिल हुए वहीं लाईन लगी हुई थी, ग्रांड सफ़ारी की, उस समय लाईन लंबी नहीं थी, क्योंकि हम जल्दी पहुँचे थे (वैसे भी जंगल में जाने का मजा सुबह ६ बजे के आसपास ही होता है, पर यहाँ सुबह ६ बजे शायद कोई नहीं होता होगा।)।
    ग्रांड सफ़ारी यात्रा शुरु हुई, पहले हाथी दिखा फ़िर चीतल, बारहसिंघा, नीलगाय इत्यादि जानवर दिखने लगे। अब बस पहुँची भालू वाले जंगल में, बहुत सारे भालू बस के पास ही बैठे हुए दिखे, काफ़ी लंबे लंबे नाखून थे। बहुत फ़ोटो खींचे गये। इसी प्रकार शेर, चीता और सफ़ेद चीते के जंगल में बस गई और बिल्कुल पास से दिखाया गया, बस के एकदम बगल में या बिल्कुल सामने, बेहद करीब।

 

 

     एक जगह तो ५-६ शेर एकसाथ बैठे थे तो लगा कि इनकी ब्लॉगरी मीट चल रही है, और वहीं एक शेर पिजरे के ऊपर चढ़ लिया था तो दूसरा शेर अपने पैर से उसकी टांग खींचकर नीचे उतारने की कोशिश कर रहा था, ऐसा लग रहा था कि जंगल में भी शेर दिल्ली वाली बातों को समझने लगे हैं।
    ग्रांड सफ़ारी के बाद हम पहुँचे तितलियों के उद्यान में, जहाँ का शुल्क २५ रुपये अलग था, तितलियों के बारे में बहुत ही अच्छी और उपयोगी जानकारियाँ मिलीं। इस उद्यान में इतनी शुद्ध हवा थी कि आत्मा प्रसन्न हो गई।
    उसके बाद फ़िर चिड़ियाघर के प्रवेश द्वार पर पहुँचे और वहाँ पहले भुट्टे खाये, फ़िर चिड़ियाघर के जानवर देखे, सबसे अच्छा लगा तेंदुआ, बिल्कुल पोज बनाकर बैठा हुआ था, जैसे उसे पता हो कि आज बहुत सारे लोग उसे ही देखने आनेवाले हैं।
   वहीं पास ही क्रोकोडायल पड़ा था, मुँह खुला है तो खुला ही है, बहुत ही आलसी जानवर जान पड़ता है, परंतु जब शिकार सामने आता है तो इससे फ़ुर्तीला भी कोई नहीं है। बहुत दिनों बाद उल्लू देखे।
    हाथी की सवारी भी थी, परंतु उन हाथियों की दुरदर्शा देखकर उन पर बैठकर देखने की इच्छा ही नहीं हुई। बिल्कुल मरियल से लग रहे थे, ऐसा लग रहा था कि जंगल विभाग ने हाथी को बंधुआ मजदूर बनाकर रखा है, वह केवल कमाऊ पूत है।
    वहीं राष्ट्रीय उद्यान में एक अच्छी बात लगी कि प्लास्टिक प्रतिबंधित थी, और अगर आप प्लास्टिक पोलिथीन में चिप्स खा रहे हैं, तो वहीं कर्मी कागज के पैकेट में आपके चिप्स करके आपको दे देंगे। पर फ़िर भी आखिर हैं तो हम भारतीय ही, अंदर जगह जगह प्लास्टिक बैग्स देखकर मन खिन्न भी हुआ।
    आखिरकार हम लोग २.३० बजे दोपहर को वापिस निकल पड़े घर के लिये। दिन भर आनंद रहा, पर शेरों के शासन से वापिस अपने मानव निर्मित शासित जगह जाने में बड़ा अजीब लग रहा था।
     इसके पहले भी हम कई राष्ट्रीय उद्यान घूम चुके हैं परंतु अब तक सबसे बढ़िया हमें सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान ही लगा है।

आओ पैसा कमायें “शेयर बाजार में निवेश” – भाग १

    जब आप निवेश करते हैं, तो उसे सरल ही रखें। वही करें जो बिल्कुल सरल और स्पष्ट है, बफ़ेट सलाह देते हैं – जटिल प्रश्नों के लिये जटिल उत्तर देने की कोशिश मत करिये।

    अधिकतर लोगों की यह धारणा है कि शेयर बाजार में निवेश करना बहुत जटिल, रहस्यों से भरा और जोखिम भरा होता है इसलिये इसे इसके पेशेवरों को ही करना चाहिये। यह हम सबकी मानसिकता और एक आम धारणा है कि आम आदमी सफ़ल निवेशक नहीं बन सकता क्योंकि निवेश में सफ़लता के लिये उन्नत व्यावसायिक डिग्री, कठिन गणितीय सूत्रों में महारत, जटिल कम्पयूटर प्रोग्राम का आपके पास होना जो कि शेयर बाजार का हाल बतायें और इतना सारा समय कि आप शेयर बाजार, चार्ट, मात्रा, आर्थिक रूझान आदि पर ध्यान दे पायें।

    वारेन बफ़ेट ने बता दिया कि यह सब मात्र मिथक है।

    बफ़ेट ने शेयर बाजार में सफ़लता के लिये जो राह खोजी वह बहुत जटिल नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो सामान्य बुद्धि रखता हो वह सफ़ल निवेशक बनने की काबिलियत रखता है, किसी भी पेशेवर की सहायता के बिना, क्योंकि निवेश के सिद्धांत समझने के लिये बहुत ही आसान हैं।

    बफ़ेट केवल ऐसे व्यापारों के शेयरों में निवेश करते हैं, जो आसानी से समझा जा सके, मजबूत, ईमानदार और टिकाऊ व्यापार हो, जिसकी सफ़लता की व्याख्या बहुत सरल हो, और वे कभी भी ऐसे व्यापार में निवेश नहीं करते हैं जिसे वे नहीं समझते हैं।

    बफ़ेट के निवेश सिद्धांतों का सार और अच्छी बात केवल सरलता ही है।  इसके लिये आपको जटिल गणित, वित्तीय पृष्ठभूमि, अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी और शेयर बाजार भविष्य में कैसे होंगे, इनकी जानकारी होना आवश्यक नहीं है। यह सामान्य बुद्धि से आदर्श, धीरज और साधारण मूल्यों पर आधारित है, जो कि कोई भी निवेशक आसानी से समझ कर अपना सकता है। जबकि बफ़ेट की धारणा है कि निवेशक गणितीय सूत्रों, शार्टटर्म बाजार के भविष्य और चाल, बाजार और वोल्यूम पर आधारित चार्ट्स को देख कर अपने को ही मुश्किल में डालते हैं।

    वस्तुत:  बफ़ेट कहते हैं कि जटिलता आपको सफ़लता से दूर करती है। खुद को निवेश के नये सिद्धांतो में उलझाने की कोशिश न करें, जैसे कि ऑप्शन्स प्राईसिंग या बीटा। बहुत सारे मामलों में आप नयी तकनीकी में खुद को बेहतर स्थिती में नहीं पायेंगे। बफ़ेट ने अपने गुरु से एक बात सीखी कि “आपको असाधारण नतीजों के लिये असाधारण साहस की जरुरत नहीं होती है”।

    हमेशा खुद को साधारण रखें। लक्ष्य कैसे चुनें –  अच्छी कंपनी के शेयर खरीदें, जो कि ईमानदार और काबिल लोगों द्वारा चलायी जा रही हो। आप अपने शेयर के लिये कम भुगतान कीजिये, भविष्य में उसकी अर्जन क्षमता को पहचानें। फ़िर उस शेयर को लंबे समय तक अपने पास रखें और बाजार को आपके द्वारा किये गये निर्णय पर मुहर लगाने दीजिये।

    बफ़ेट के निवेश सिद्धांत में सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत “सरलता” है। जो बफ़ेट की अविश्वसनीय उपलब्धियों के बारे में बताती है। इसी से पता चलता है कि कैसे बफ़ेट ने वाशिंगटन पोस्ट शेयर के निवेश में १.६ करोड़ से १ अरब बनाये, कैसे कोका-कोला में १ अरब के निवेश से ८ अरब बनाये, और उन्होंने ४.५ करोड़ के गीको बीमा कंपनी के शेयर खरीदे और आज उसकी कीमत १ अरब से ज्यादा है।

जिस व्यापार को आप समझते नहीं है, उसमें कभी भी निवेश न करें।

बफ़ेट ने अपने साधारण नियम्र और सिद्धांतों से बार्कशायर हाथवे को १०० करोड़ से ज्यादा की कंपनी बना दिया। जब भी शेयर बाजार में निवेश करना होता, तो वे अपना धन ऐसे व्यापार में लगाते जो कि समझना आसान हो, ठोस और मजबूत व्यापार, स्थायी और नीतिपरक प्रबंधन हो। वे बहुत सारे शेयर लॉट में खरीद लेते हैं, जब बाजार में लोग सस्ते दामों में बेच रहे होते हैं। संक्षेप में कहें तो यही उनकी सफ़लता का राज है।

    शेयर का भविष्य बताने वाले सॉफ़्टवेयरों के बारे में भूल जायें जो कि शेयर की कीमतों का इतिहास, अस्थिरता और बाजार की चाल बताते हैं। बफ़ेट कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं, परंतु ब्रिज खेलने के लिये न कि शेयर का उतार चढ़ाव देखने के लिये। आपके निवेश का लक्ष्य भी बफ़ेट के जैसा ही होना चाहिये, उन्हीं व्यापार में निवेश करना चाहिये जो कि आपको समझने में आसान हो, जिस व्यापार को आप समझते हैं, और आपको लगता हो कि भविष्य में यह कंपनी बहुत अच्छा करेगी, तो मुनसिब समय का इंतजार करें और यथोचित भाव आने पर खरीदें।

हमेशा अपने निवेश पर फ़ैसलों के लिये तीन सिद्धांतों पर चलें –

१. हमेशा निवेश सरल रखें – कभी भी अपने निवेश को जटिल न बनायें, और हमेशा अपनी जानकारी के अनुसार खरीदे गये व्यापार को ही खरीदें और उस पर अड़िग रहें। जिस निवेश में जटिलता हो, उसमें निवेश करने से बचें।

२. अपने निवेश के फ़ैसले खुद लें – अपने निवेश के सलाहकार खुद बनें। उन ब्रोकर्स और बेचने वाले लोगों से बचें जो कि किसी एक शेयर या म्यूच्यल फ़ंड को तरजीह देकर खरीदने के लिये प्रेरित करते हैं, क्योंकि उस पर उन्हें मोटी कमाई होती है। स्पष्टत: ये लोग दिल से आपको अच्छे निवेश नहीं दिलवाते हैं।

३. उसे पढ़ो जिसने बफ़ेट को पढ़ाया – वह आदमी जिसका जबरदस्त प्रभाव बफ़ेट पर है उनके पिता के अतिरिक्त, वह हैं हार्वर्ड के बेंजामिन ग्राहम, जिन्हें नीति निवेश का पितामह भी कहा जाता है। जिन्होंने वर्षों पहले बफ़ेट को पढ़ाया कि निवेश में सफ़लता सरलता में है जटिलता में नहीं। और वाकई ग्राहम को पढ़ना बहुत अच्छा है।

बफ़ेट के साधारण कूटनीतियों को मत भूलिये जो कि उन्हें असाधारण नतीजों की ओर ले गया।

बफ़ेट के निवेश सिद्धांत “जटिलता की जगह सरलता को चुनें”

     जब आप निवेश करते हैं, तो उसे सरल ही रखें। वही करें जो बिल्कुल सरल और स्पष्ट है, बफ़ेट सलाह देते हैं – जटिल प्रश्नों के लिये जटिल उत्तर देने की कोशिश मत करिये।

    अधिकतर लोगों की यह धारणा है कि शेयर बाजार में निवेश करना बहुत जटिल, रहस्यों से भरा और जोखिम भरा होता है इसलिये इसे इसके पेशेवरों को ही करना चाहिये। यह हम सबकी मानसिकता और एक आम धारणा है कि आम आदमी सफ़ल निवेशक नहीं बन सकता क्योंकि निवेश में सफ़लता के लिये उन्नत व्यावसायिक डिग्री, कठिन गणितीय सूत्रों में महारत, जटिल कम्पयूटर प्रोग्राम का आपके पास होना जो कि शेयर बाजार का हाल बतायें और इतना सारा समय कि आप शेयर बाजार, चार्ट, मात्रा, आर्थिक रूझान आदि पर ध्यान दे पायें।
 
    वारेन बफ़ेट ने बता दिया कि यह सब मात्र मिथक है।
 
    बफ़ेट ने शेयर बाजार में सफ़लता के लिये जो राह खोजी वह बहुत जटिल नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो सामान्य बुद्धि रखता हो वह सफ़ल निवेशक बनने की काबिलियत रखता है, किसी भी पेशेवर की सहायता के बिना, क्योंकि निवेश के सिद्धांत समझने के लिये बहुत ही आसान हैं।
 
    बफ़ेट केवल ऐसे व्यापारों के शेयरों में निवेश करते हैं, जो आसानी से समझा जा सके, मजबूत, ईमानदार और टिकाऊ व्यापार हो, जिसकी सफ़लता की व्याख्या बहुत सरल हो, और वे कभी भी ऐसे व्यापार में निवेश नहीं करते हैं जिसे वे नहीं समझते हैं।
 
    बफ़ेट के निवेश सिद्धांतों का सार और अच्छी बात केवल सरलता ही है।  इसके लिये आपको जटिल गणित, वित्तीय पृष्ठभूमि, अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी और शेयर बाजार भविष्य में कैसे होंगे, इनकी जानकारी होना आवश्यक नहीं है। यह सामान्य बुद्धि से आदर्श, धीरज और साधारण मूल्यों पर आधारित है, जो कि कोई भी निवेशक आसानी से समझ कर अपना सकता है। जबकि बफ़ेट की धारणा है कि निवेशक गणितीय सूत्रों, शार्टटर्म बाजार के भविष्य और चाल, बाजार और वोल्यूम पर आधारित चार्ट्स को देख कर अपने को ही मुश्किल में डालते हैं।
 
    वस्तुत:  बफ़ेट कहते हैं कि जटिलता आपको सफ़लता से दूर करती है। खुद को निवेश के नये सिद्धांतो में उलझाने की कोशिश न करें, जैसे कि ऑप्शन्स प्राईसिंग या बीटा। बहुत सारे मामलों में आप नयी तकनीकी में खुद को बेहतर स्थिती में नहीं पायेंगे। बफ़ेट ने अपने गुरु से एक बात सीखी कि “आपको असाधारण नतीजों के लिये असाधारण साहस की जरुरत नहीं होती है”।
 
    हमेशा खुद को साधारण रखें। लक्ष्य कैसे चुनें –  अच्छी कंपनी के शेयर खरीदें, जो कि ईमानदार और काबिल लोगों द्वारा चलायी जा रही हो। आप अपने शेयर के लिये कम भुगतान कीजिये, भविष्य में उसकी अर्जन क्षमता को पहचानें। फ़िर उस शेयर को लंबे समय तक अपने पास रखें और बाजार को आपके द्वारा किये गये निर्णय पर मुहर लगाने दीजिये।
 
    बफ़ेट के निवेश सिद्धांत में सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत “सरलता” है। जो बफ़ेट की अविश्वसनीय उपलब्धियों के बारे में बताती है। इसी से पता चलता है कि कैसे बफ़ेट ने वाशिंगटन पोस्ट शेयर के निवेश में १.६ करोड़ से १ अरब बनाये, कैसे कोका-कोला में १ अरब के निवेश से ८ अरब बनाये, और उन्होंने ४.५ करोड़ के गीको बीमा कंपनी के शेयर खरीदे और आज उसकी कीमत १ अरब से ज्यादा है।
 
जिस व्यापार को आप नहीं समझते हैं, उसमें कभी भी निवेश न करें।
 
    बफ़ेट ने अपने साधारण नियम और सिद्धांतों से बार्कशायर हाथवे को १०० करोड़ से ज्यादा की कंपनी बना दिया। जब भी शेयर बाजार में निवेश करना होता, तो वे अपना धन ऐसे व्यापार में लगाते जो कि समझना आसान हो, ठोस और मजबूत व्यापार, स्थायी और नीतिपरक प्रबंधन हो। वे बहुत सारे शेयर लॉट में खरीद लेते हैं, जब बाजार में लोग सस्ते दामों में बेच रहे होते हैं। संक्षेप में कहें तो यही उनकी सफ़लता का राज है।
 
    शेयर का भविष्य बताने वाले सॉफ़्टवेयरों के बारे में भूल जायें जो कि शेयर की कीमतों का इतिहास, अस्थिरता और बाजार की चाल बताते हैं। बफ़ेट कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं, परंतु ब्रिज खेलने के लिये न कि शेयर का उतार चढ़ाव देखने के लिये। आपके निवेश का लक्ष्य भी बफ़ेट के जैसा ही होना चाहिये, उन्हीं व्यापार में निवेश करना चाहिये जो कि आपको समझने में आसान हो, जिस व्यापार को आप समझते हैं, और आपको लगता हो कि भविष्य में यह कंपनी बहुत अच्छा करेगी, तो मुनसिब समय का इंतजार करें और यथोचित भाव आने पर खरीदें।
 
हमेशा अपने निवेश पर फ़ैसलों के लिये तीन सिद्धांतों पर चलें –
 
१. हमेशा निवेश सरल रखें – कभी भी अपने निवेश को जटिल न बनायें, और हमेशा अपनी जानकारी के अनुसार खरीदे गये व्यापार को ही खरीदें और उस पर अड़िग रहें। जिस निवेश में जटिलता हो, उसमें निवेश करने से बचें।
 
२. अपने निवेश के फ़ैसले खुद लें – अपने निवेश के सलाहकार खुद बनें। उन ब्रोकर्स और बेचने वाले लोगों से बचें जो कि किसी एक शेयर या म्यूच्यल फ़ंड को तरजीह देकर खरीदने के लिये प्रेरित करते हैं, क्योंकि उस पर उन्हें मोटी कमाई होती है। स्पष्टत: ये लोग दिल से आपको अच्छे निवेश नहीं दिलवाते हैं।
 
३. उसे पढ़ो जिसने बफ़ेट को पढ़ाया – वह आदमी जिसका जबरदस्त प्रभाव बफ़ेट पर है उनके पिता के अतिरिक्त, वह हैं हार्वर्ड के बेंजामिन ग्राहम, जिन्हें नीति निवेश का पितामह भी कहा जाता है। जिन्होंने वर्षों पहले बफ़ेट को पढ़ाया कि निवेश में सफ़लता सरलता में है जटिलता में नहीं। और वाकई ग्राहम को पढ़ना बहुत अच्छा है।
 
बफ़ेट के साधारण कूटनीतियों को मत भूलिये जो कि उन्हें असाधारण नतीजों की ओर ले गया।

भारत का गणतंत्र सिसक सिसक कर रो रहा है… और मैं अंदर बैठकर उसके बारे में लिख रहा हूँ (Republic India !)

आदतन आज सुबह नित्यकर्म के पहले घर का दरवाजा खोला, अखबार के लिये और जैसा कि रोज होता है अखबार नहीं आया। आदत है तब भी रोज देखने की आत्मसंतुष्टि के लिये, तो छज्जे पर थोड़ा सा बाहर निकल कर देख लिया, वहाँ किसी के सिसक सिसक कर रोने की आवाज आ रही थी, थोड़ा ध्यान से देखा तो वहीं बिजली के खंभे के पास तिरंगे में लिपटा गणतंत्र था जो कि शायद कोहरा घना होने का इंतजार कर रहा था।

मैं चुपचाप अंदर अपने घर में आ गया, कि कहीं गणतंत्र मेरे पास आकर मेरे पास आकर रोना ना सुनाना शुरु कर दे, मेरी घिग्घी बँधी हुई है, और गणतंत्र के सिसक सिसक कर रोने के कारणों के बारे में सोच रहा हूँ, अगर आप को पता चले कि भारत का बूढ़ा गणतंत्र क्यों सिसक सिसक कर रो रहा है.. तो मुझे अवश्य बताईये।

एक कहानी “दूध की बोतल” जिसने मुझे हिला दिया.. बोधिपुस्तक पर्व

    बोधिपुस्तक पर्व की एक कहानी की पुस्तक, नाम है “गुडनाईट इंडिया” और लेखक हैं प्रमोद कुमार शर्मा, इसमें लेखक ने एक से एक बढ़कर कहानियाँ दी हैं, जो कि भारत के सामाजिक तानेबाने की गहन तस्वीरें दिखाती हैं, अमूमन तो पढ़ने का समय मिल नहीं पाता, परंतु रोज घर से कार्यस्थल आते समय बस में मिलने वाला समय अब पढ़ने में लगाते हैं, पहले सोचा था कि पतली सी किताब है जल्दी ही खत्म हो जायेगी, परंतु एक कहानी के बाद दूसरी कहानी में जाना सरल नहीं, उस कहानी के मनोभाव में डूबकर नयी कहानी के मनोभावों में जाना बहुत ही कठिन प्रतीत होता है, कल यह कहानी पढ़ी थी कहने को तो छोटी कहानी है। लेखक ने अपने पात्रों को सुघड़ और सामाजिक परिवेश में रचा बसा है कि ऐसा लगता ही नहीं कि यह मुझसे दूर कहीं ओर की कहानी है।
    “दूध की बोतल” जैसा कि कहानी के नाम से ही प्रतीत होता है, कि यह कहानी दूध की बोतल पर लिखी गई है, इसमें एक छोटा सा परिवार पात्र है जो कि ग्राम्य परिवेश में रहता है और घर में बच्ची होने के बाद अपनी कुलदेवी को धोक देने कुलदेवी के स्थान जा रहा है। परिवार में माता पिता पुत्र बहू और छोटी सी पोती जो कि कुछ ही माह की है, बड़ी मुश्किल से पोती हुई है उसके लिये जातरा बोली थी, इसलिये वो कुलदेवी के स्थान जा रहे हैं।
    परिवार मध्यमवर्गीय है, पर बहू भारत की आधुनिक विचारों वाली नारी है जो कि अच्छे और बुरे का अंतर अपने हिसाब से करती है, शादी के कुछ दिन बाद ही उसके पैर भारी हो जाते हैं, तो वह अपने पति से कहती है कि वह बच्चे को दूध नहीं पिलायेगी, बच्चे को ऊपर का दूध दूँगी। नहीं तो मेरी छातियाँ लटक जायेंगी, पति उसे बहुत समझाने की कोशिश करता है कि बच्चे के लिये तो माँ का दूध अमृत समान होता है और माँ को दूध पिलाने पर अद्भुत संतोष मिलता है, परंतु वह अपने आधुनिक विचारों में पढ़े लिखे होने और अपनी परवरिश का हवाला देकर बिल्कुल जिद पकड़ लेती है, पति भी अपनी आधुनिक युग की सोच वाली पत्नी को मना नहीं पाता।
    बच्चा मुश्किल से होता है, जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, पर माँ को दूध ही नहीं उतरता। कुलदेवी की जातरा जाने के लिये पिताजी ने जीप कर ली है, और चल पड़े हैं कुलदेवी को धोक देने के लिये, बीच में बच्ची रोती है तो पिताजी कहते हैं कि बेटा जरा पोती को दूध पिला दो, तो बेटा थैलों में बोतल ढूँढ़ता है पर बोतल नहीं मिली, वह कहता है कि बोतल तो घर पर ही छूट गई, तो ड्राईवर कहता है कि कुलदेवी के स्थान पहुँचने में और १ घंटा लगेगा, वहाँ कटोरी चम्मच से दूध पिला देना। पिताजी कहते हैं कि बच्ची भूख से बेहाल है और गरमी भी इतनी हो रही है, थोड़ा पानी ही पिला दो, थोड़ा पानी पिलाने के बाद बच्ची चुप हो जाती है, रास्ता खराब है, पर थोड़ी देर के बाद ही हाईवे आ जाता है, थोड़ी आगे जाने के बाद ही जीप खराब हो जाती है, और ड्राईवर और बेटा पास के गाँव में पार्ट लेकर ठीक करवाने जाते हैं। पीछे बच्ची की हालत भूख और गर्मी के मारे खराब होती जा रही थी, पर वह मन ही मन अपने को दिलासा भी देती जा रही थी कि अरे मरेगी थोड़े ही.. (माँ ऐसा भी सोच सकती है !!) तभी उसकी ममता जाग उठती है और वह जोर से अपनी छाती से बच्ची को लगा लेती है, तो उसे अचानक महसूस होता है कि उसकी छातियों में दूध उतर आया है, वह पिलाने ही जा रही होती है कि तभी उसके मन में विचार आया कि “क्या कर रही है, अभी जो बच्ची को दूध पिला दिया तो रोज की आफ़त हो जायेगी”, बच्ची रोते रोते सो गई।
    डेढ़ घंटे बाद ड्राईवर बेटे के साथ आ गया तो बोला कि बड़ी मुश्किल से बोतल मिली है, लो निपल लगाओ बच्ची के मुँह में, पर बच्ची निपल मुँह में नहीं ले रही, जबरदस्ती मुँह में निपल को ठूँसा तो देखा कि धार मुँह से बाहर निकलने लगी, पिताजी जोर से चिल्लाये कि “अरे बच्ची ठीक तो है !! देखो दूध क्यों नहीं पी रही”, अन्तत: ड्राईवर बोला “साहब वापस चलते हैं, बच्ची अब नहीं रही।” ड्राईवर की बात सुनते ही बहू चीख मारकर बेहोश हो गई। पूरा परिवार शोकाकुल हो गया, केवल ड्राईवर ही होश में था और उसे पूरा विश्वास था कि वह दुख की इस घड़ी में परिवार की मदद कर सकेगा।
संवाद जो बहुत दिन बाद पढ़े –
“प्रविसे नगर कीजै सब काजा, ह्रदय राखी कौसलपुर राजा…।”
“देखो… मैं अपने पापा के यहाँ स्वतंत्र विचारों से पली-बढ़ी हूँ। मुझे ये दकियानूसी तरीके ठीक नहीं लगते।”
    इस कहानी को पढ़ने के बाद मुझे भी अवसाद ने जकड़ लिया, और उसके बाद कुछ भी सोचने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी, लेखक ने अपने पात्रों के साथ बराबर न्याय किया और पाठक तक बात पहुँचाने में सक्षम भी रहा। लेखक ने अवसाद को अपनी कलम से खूब लिखा है। मैंने घर पहुँचकर अपनी घरवाली को बोला कि आज एक कहानी पढ़ी थी तो उसके बाद से मुझे अवसाद ने घेर लिया, और जैसे ही मैंने कहानी का नाम लिया “दूध की बोतल”, तो बोली हाँ मैंने भी पढ़ी थी और उस कहानी के बाद उसके आगे की कहानियाँ पढ़ने की हिम्मत ही नहीं हुई, और अभी तक कोई किताब पढ़ भी नहीं पाई। लेखक के लेखन से मैं मुग्ध हूँ।
    आप भी ये किताबें मँगा सकते हैं, मात्र १०० रुपये में बोधिपुस्तक पर्व की किताबें उपलब्ध हैं, जिसमें हिन्दी की १० किताबें हैं। सब एक से बढ़कर एक।
१०० रुपये का मनीऑर्डर भेजने पर वे घर पर भेज देते हैं –
पता – बोधि प्रकाशन, एफ़- ७७, सेक्टर ९, रोड नं ११, करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, बाईस गोदाम ,जयपुर, – ३०२००६
दूरभाष – 0141 – 2503989, 98290-18087

बैंगलोर में ४ ब्लॉगरों और एक पाठक का मिलन (4 Blogger’s and 1 Blog Reader Meet at Bangalore)

आज की ताजा खबर बैंगलोर में ४ ब्लॉगर्स और एक पाठक का मिलन हुआ ।

४ ब्लॉगर थे –

देव कुमार झा

मनीषा जी

विवेक रस्तोगी

हर्ष रस्तोगी

१ पाठक – हमारी धर्मपत्नी वाणी

बहुत सारे ज्वलंत मुद्दों पर बातें हुईं, और सौहार्दपूर्ण तरीके से बैंगलोर में ब्लॉगर मिलन संपन्न हुआ।

ज्वलंत मुद्दों में शामिल थे –

भाजपा द्वारा कर्नाटक बंद और आम जनता की तकलीफ़

भ्रष्टाचार

मुंबई

उड़नतश्तरी समीर लाल जी की कृति – “देख लूँ तो चलूँ”

दक्षिण भारत में हिन्दी

ए.टी.एम. से पैसे निकालने में हुई गड़बड़ी

ब्लॉग वार्ता

जिन ब्लॉगर्स का जिक्र हुआ इस छोटे से मिलन में वे हैं –

उड़नतश्तरी समीर लाल जी, घुघुती बासुती जी, प्रवीण पाण्डे जी, प्रशांत प्रियदर्शी जी PD, अभिषेक कुमार।

फ़ोटो कल देवकुमार झा जी द्वारा प्रकाशित किया जायेगा तब इस पोस्ट में भी लगा देंगे 🙂

बैंगलोर का भारी पानी और बिना मतलब का एक्वागार्ड (Hard Water and Aquaguard Fail…)

बैंगलोर में आकर बहुत सारा सामान्य ज्ञान बढ़ा, जिसमें से एक है हार्ड वाटर याने कि भारी पानी।
    मुंबई से बैंगलोर शिफ़्ट होने के बाद अपना एक्वागार्ड लगवाने का समय नहीं मिल पाया, एक प्लंबर को बुलाकर एक्वागार्ड संस्थापित तो करवा लिया, परंतु मुंबई से परिवहन के दौरान उसमें कुछ समस्या हो गई थी इसलिये वह शुरु ही नहीं हो रहा था। एक्वागार्ड के ग्राहक सेवा केन्द्र को फ़ोन लगाकर अपनी शिकायत भी दर्ज करवाई, जब ७ दिन तक एक्वागार्ड वाला नहीं आया तो वापिस से उनको फ़ोन करके कहा कि बैंगलोर में क्या सारी कंपनियाँ ऐसी ही हैं, जो कि अपने ग्राहकों का ध्यान नहीं रखती हैं। तो हमें कहा गया कि ठीक करने वाला बंदा २ दिन में पहुँच जायेगा। खैर हम तो एक्वागार्ड की घटिया सेवा से परेशान हो चुके थे।
    इसी दौरान एक सुबह एक्वागार्ड बेचने वाले ने हमारे घर पर दस्तक दी, तो हमने पहले पूछा कि ठीक करने आये हो, उसने जबाब दिया “नहीं”, हम तो बेचने आये हैं, पहले तो हमने जबरदस्त फ़टकार लगाई कि क्या ग्राहकों को सेवाएँ देते हो, ७ दिन पूरे होने के बाबजूद अभी तक कोई ठीक करने नहीं आया, क्या बकबास कंपनी है, और भी बहुत कुछ उसे गरिया दिया।
    पर वह भी पक्का बेचनेवाला था, बोला कि अगर आप इजाजत दें तो मैं आपके यहाँ का पानी जाँच लूँ, मैंने कहा कि चलो भई देख लो, क्योंकि हमने भी सुना था कि यहाँ बैंगलोर का पानी भारी है। उसने जाँच की और हमें बताया कि देखिये ४८५ है और बिसलरी का ७२, पीने लायक पानी होता है ५०-१०० अब क्या मानदण्ड होता है, पता नहीं । उससे हमने पूछा कि भारी पानी पीने से क्या नुक्सान होता है वह हमें बता नहीं पाया पर बोला कि RO वाला मॉडल आपको खरीदना होगा तभी यह भारी पानी पीने लायक होगा, हमने कहा अभी तो हम बिसलरी पी रहे हैं, पर जल्दी ही कुछ तो लेना ही होगा अगर हमारा साधारण एक्वागार्ड काम नहीं आयेगा।
    उस समय हमारे पास इंटरनेट था नहीं, और ऑफ़िस में थोड़ा बहुत पढ़ा तो सब सिर के ऊपर से निकल गया, तो पास के एक मॉल में गये जहाँ Water purifier के सभी कंपनियों के उत्पाद थे, हमने पहले उससे कहा कि पहले हमें जानकारी दीजिये कि भारी पानी से क्या होता है, तो वह भी हमें केवल इतना ही बता पाया कि जब बहुत प्यास लगती है तभी पी पायेंगे, ज्यादा पानी पीने की इच्छा नहीं होगी। नुक्सान कुछ भी नहीं है। हमें वहाँ व्हर्लपूल कंपनी का RO वाला उत्पाद अच्छा लगा, और हम तय कर चुके हैं कि एक्वागार्ड जैसी घटिया ग्राहक सेवा देने वाली कंपनी से तो उनका उत्पाद नहीं खरीदेंगे वह भी कम से कम बैंगलोर में तो बिल्कुल नहीं।
    अगर आप में से किसी के पास इस बारे में जानकारी हो तो लिंक साझा करें या फ़िर टिप्पणी में ज्ञान प्रदान करें, तो हम नया RO Water Purifier ले पायें।
१. भारी पानी के नुक्सान क्या हैं ?
२. RO वाला कौन सा Water purifier लें ?
३. भारी पानी के उपचार के और कौन से तरीके हैं ?

ब्लॉगरी में भी विकृत मानसिकता… (Blogger’s Distorted mindset..)

    विकृत मानसिकता जिसे मैं साधारण शब्दों में कहता हूँ मानसिक दिवालियापन या पागलपन, वैसे विकृत मानसिकता के लिये कोई अधिकृत पैमाना नहीं है, अनपढ़ और पढ़ेलिखे समझदार कोई भी हो जरूरी नहीं है कि उनकी मानसिकता विकृत नहीं हो।

    और ऐसे ही कुछ उदाहरण मैंने हिन्दी ब्लॉगजगत में देखे पोस्ट पढ़कर पहली बार में ही विकृत मानसिकता का दर्जा मैंने दे दिया। अब यहाँ ब्लॉगर भी बहुत पढ़े लिखे हैं, और जिनके पास बड़ी बड़ी डिग्री है, वे हिन्दी ब्लॉगिंग की प्रगति में महति योगदान निभाने में अपनी जीवन ऊर्जा लगा रहे हैं। धन्य हैं वे ब्लॉगवीर और वीरांगनाएँ जो यह सोचते हैं कि वे हिन्दी लिख रहे हैं तो हिन्दी समृद्ध हो रही है, वाह ब्लॉगरी विकृत मानसिकता।

    जितना समय दूसरे ब्लॉगर की टांग खींचने उनकी टिप्पणियों में अनर्गल पोस्ट लिखने में लगा रहे हैं उतना समय अगर किसी अच्छे विषय पर या अपनी दिनचर्या से कोई एक अच्छा सा पल लिखने में लगाते तो शायद उससे पाठक ज्यादा आकर्षित होते। परंतु कैसे स्टॉर ब्लॉगर बनें और कैसे ब्लॉगरों की टाँग खींचे ये सब प्रपंच कोई इन विकृत मानसिकता वाले ब्लॉगर्स से सीखें।

    अपन तो अपने में ही मगन हैं, किसी की दो और दो चार में अपना कोई योगदान नहीं है, फ़िर भले ही वे दो और दो पाँच ही क्यों हो रहे हों, पर फ़िर भी पढ़े लिखों की विकृत मानसिकता नहीं देखते बनती। इससे अच्छा है कि … (अब भला मैं ये क्यों लिखूँ, वे खुद ही समझ लें।)

इंडिब्लॉगर मीट बैंगलोर ब्लॉगरों की ताकत – 2 (IndiBlogger.in Meet Bangalore – 2)

इंडिब्लॉगर मीट बैंगलोर ब्लॉगरों की ताकत (IndiBlogger.in Meet Bangalore)

दोपहर के भोजन के बाद सभी ब्लॉगर्स इस्कॉन मंदिर के फ़ोटो लेने में लग गये, वैसे एक बात गौर करने लायक थी कि लगभग सभी ब्लॉगर्स के पास DSLR कैमरे थे, कुछ फ़ोटो ब्लॉगर्स भी थे, जो पूरी ब्लॉगर मीट के दौरान फ़ोटो खींचने में ही व्यस्त रहे।

श्री मधु दास     अक्षयपात्र फ़ाऊँडेशन के चैयरमेन श्री मधु दास हमारे सम्मुख थे, और उन्होंने ब्लॉगर्स के योगदान को सराहा और लोगों को इस बारे में बताने के लिये अपने ब्लॉग पर लिखने की अपील की। ब्लॉगर्स के प्रश्नों के उत्तर भी दिये।

    सभी ब्लॉगर्स वापिस से MVT हॉल में आ चुके थे, फ़िर शुरु हुआ एक दूसरे को टिप्पणी देने का सिलसिला, सभी को एक ड्राँईंग शीट अपनी पीठ पर लगाने को दे दी गई, और जैसे हम ब्लॉग पर टिप्पणी देते हैं, वैसे ही एक दूसरे से मिलकर, कैसा लगा और अपने ब्लॉग का पता साझा करने के लिये यह दौर बनाया गया था। बहुत सारे ब्लॉगर्स से मुलाकात हुई, जिसमॆं भारतीय भाषा के एक और ब्लॉगर से मिले जो कि कन्न्ड़ में ब्लॉग लिखते हैं। हमने ब्लॉगर्स को बताया कि हम हिन्दी में ब्लॉग लिखते हैं, तो सबने बहुत सराहा। प्रतिक्रियाएँ भी आई कि हिन्दी कम्प्यूटर पर लिखना क्या इतना आसान है ? हिन्दी में लिखने के कारण फ़िर तो आपके पाठक और पेजलोड भी ज्यादा होंगे इत्यादि बातें हुईं। कुछ ब्लॉगर्स ने बताया कि हिन्दी पढ़ना उन्हें अच्छा लगता है परंतु हिन्दी में यहाँ ज्यादा कुछ उपलब्ध नहीं है, उन्होंने वादा किया कि अब हम हिन्दी ब्लॉग पढ़ा करेंगे, उन्होंने बताया कि हम तो हिन्दी को केवल हिन्दी दिवस के कारण ही जानते हैं, क्योंकि तब विद्यालय में कार्यक्रम होते थे। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि हिन्दी दिवस पर आप लोग तो उत्सव मनाते होंगे, कुछ विशिष्ट कार्यक्रम आयोजित होते होंगे, हमने उन्हें बताया कि हिन्दी लिखने वालों के लिये तो रोज ही हिन्दी दिवस है, पर हिन्दी दिवस पर बहुत सारे साहित्यिक आयोजन किये जाते हैं।

    बहुत सारी टिप्पणियाँ लेने और देने के बाद पूछा गया कि सबसे ज्यादा टिप्पणियाँ किसके पास हैं, और इस प्रकार ज्यादा टिप्पणी पाने वालों को अक्षयपात्र फ़ाऊँडेशन ने बच्चों की तस्वीरें उपहार स्वरूप प्रदान की।

    टिप्पणियों के दौर के बाद अब था बहस का दौर, जिसमें चार समूहों में सारे ब्लॉगर्स को बाँटा गया, पहला समूह मोबाईल ब्लॉगिंग और टिप्स, दूसरा समूह ऑनलाईन उत्पीड़न online harassment, तीसरा समूह ब्लॉग के सामाजिक दायित्व और चौथा समूह इंडिब्लॉगर के बारे में जानकारी का था।

    इसके बाद आखिरी दौर था इंडिब्लॉगर की टीशर्ट वितरण का जिसमें सभी को अपने साईज के अनुसार टीशर्टें दी गई।

    फ़िर वापिस से दिन भर की इस मधुर ब्लॉगर मीट के बाद हम लौट चले अपने घर की ओर..