Category Archives: अनुभव
बेनरगट्टा राष्ट्रीय उद्यान, बैंगलोर की सैर (Banerghatta National Park)
![]() |
आओ पैसा कमायें “शेयर बाजार में निवेश” – भाग १
जब आप निवेश करते हैं, तो उसे सरल ही रखें। वही करें जो बिल्कुल सरल और स्पष्ट है, बफ़ेट सलाह देते हैं – जटिल प्रश्नों के लिये जटिल उत्तर देने की कोशिश मत करिये।
अधिकतर लोगों की यह धारणा है कि शेयर बाजार में निवेश करना बहुत जटिल, रहस्यों से भरा और जोखिम भरा होता है इसलिये इसे इसके पेशेवरों को ही करना चाहिये। यह हम सबकी मानसिकता और एक आम धारणा है कि आम आदमी सफ़ल निवेशक नहीं बन सकता क्योंकि निवेश में सफ़लता के लिये उन्नत व्यावसायिक डिग्री, कठिन गणितीय सूत्रों में महारत, जटिल कम्पयूटर प्रोग्राम का आपके पास होना जो कि शेयर बाजार का हाल बतायें और इतना सारा समय कि आप शेयर बाजार, चार्ट, मात्रा, आर्थिक रूझान आदि पर ध्यान दे पायें।
वारेन बफ़ेट ने बता दिया कि यह सब मात्र मिथक है।
बफ़ेट ने शेयर बाजार में सफ़लता के लिये जो राह खोजी वह बहुत जटिल नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो सामान्य बुद्धि रखता हो वह सफ़ल निवेशक बनने की काबिलियत रखता है, किसी भी पेशेवर की सहायता के बिना, क्योंकि निवेश के सिद्धांत समझने के लिये बहुत ही आसान हैं।
बफ़ेट केवल ऐसे व्यापारों के शेयरों में निवेश करते हैं, जो आसानी से समझा जा सके, मजबूत, ईमानदार और टिकाऊ व्यापार हो, जिसकी सफ़लता की व्याख्या बहुत सरल हो, और वे कभी भी ऐसे व्यापार में निवेश नहीं करते हैं जिसे वे नहीं समझते हैं।
बफ़ेट के निवेश सिद्धांतों का सार और अच्छी बात केवल सरलता ही है। इसके लिये आपको जटिल गणित, वित्तीय पृष्ठभूमि, अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी और शेयर बाजार भविष्य में कैसे होंगे, इनकी जानकारी होना आवश्यक नहीं है। यह सामान्य बुद्धि से आदर्श, धीरज और साधारण मूल्यों पर आधारित है, जो कि कोई भी निवेशक आसानी से समझ कर अपना सकता है। जबकि बफ़ेट की धारणा है कि निवेशक गणितीय सूत्रों, शार्टटर्म बाजार के भविष्य और चाल, बाजार और वोल्यूम पर आधारित चार्ट्स को देख कर अपने को ही मुश्किल में डालते हैं।
वस्तुत: बफ़ेट कहते हैं कि जटिलता आपको सफ़लता से दूर करती है। खुद को निवेश के नये सिद्धांतो में उलझाने की कोशिश न करें, जैसे कि ऑप्शन्स प्राईसिंग या बीटा। बहुत सारे मामलों में आप नयी तकनीकी में खुद को बेहतर स्थिती में नहीं पायेंगे। बफ़ेट ने अपने गुरु से एक बात सीखी कि “आपको असाधारण नतीजों के लिये असाधारण साहस की जरुरत नहीं होती है”।
हमेशा खुद को साधारण रखें। लक्ष्य कैसे चुनें – अच्छी कंपनी के शेयर खरीदें, जो कि ईमानदार और काबिल लोगों द्वारा चलायी जा रही हो। आप अपने शेयर के लिये कम भुगतान कीजिये, भविष्य में उसकी अर्जन क्षमता को पहचानें। फ़िर उस शेयर को लंबे समय तक अपने पास रखें और बाजार को आपके द्वारा किये गये निर्णय पर मुहर लगाने दीजिये।
बफ़ेट के निवेश सिद्धांत में सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत “सरलता” है। जो बफ़ेट की अविश्वसनीय उपलब्धियों के बारे में बताती है। इसी से पता चलता है कि कैसे बफ़ेट ने वाशिंगटन पोस्ट शेयर के निवेश में १.६ करोड़ से १ अरब बनाये, कैसे कोका-कोला में १ अरब के निवेश से ८ अरब बनाये, और उन्होंने ४.५ करोड़ के गीको बीमा कंपनी के शेयर खरीदे और आज उसकी कीमत १ अरब से ज्यादा है।
| जिस व्यापार को आप समझते नहीं है, उसमें कभी भी निवेश न करें। |
बफ़ेट ने अपने साधारण नियम्र और सिद्धांतों से बार्कशायर हाथवे को १०० करोड़ से ज्यादा की कंपनी बना दिया। जब भी शेयर बाजार में निवेश करना होता, तो वे अपना धन ऐसे व्यापार में लगाते जो कि समझना आसान हो, ठोस और मजबूत व्यापार, स्थायी और नीतिपरक प्रबंधन हो। वे बहुत सारे शेयर लॉट में खरीद लेते हैं, जब बाजार में लोग सस्ते दामों में बेच रहे होते हैं। संक्षेप में कहें तो यही उनकी सफ़लता का राज है।
शेयर का भविष्य बताने वाले सॉफ़्टवेयरों के बारे में भूल जायें जो कि शेयर की कीमतों का इतिहास, अस्थिरता और बाजार की चाल बताते हैं। बफ़ेट कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं, परंतु ब्रिज खेलने के लिये न कि शेयर का उतार चढ़ाव देखने के लिये। आपके निवेश का लक्ष्य भी बफ़ेट के जैसा ही होना चाहिये, उन्हीं व्यापार में निवेश करना चाहिये जो कि आपको समझने में आसान हो, जिस व्यापार को आप समझते हैं, और आपको लगता हो कि भविष्य में यह कंपनी बहुत अच्छा करेगी, तो मुनसिब समय का इंतजार करें और यथोचित भाव आने पर खरीदें।
हमेशा अपने निवेश पर फ़ैसलों के लिये तीन सिद्धांतों पर चलें –
१. हमेशा निवेश सरल रखें – कभी भी अपने निवेश को जटिल न बनायें, और हमेशा अपनी जानकारी के अनुसार खरीदे गये व्यापार को ही खरीदें और उस पर अड़िग रहें। जिस निवेश में जटिलता हो, उसमें निवेश करने से बचें।
२. अपने निवेश के फ़ैसले खुद लें – अपने निवेश के सलाहकार खुद बनें। उन ब्रोकर्स और बेचने वाले लोगों से बचें जो कि किसी एक शेयर या म्यूच्यल फ़ंड को तरजीह देकर खरीदने के लिये प्रेरित करते हैं, क्योंकि उस पर उन्हें मोटी कमाई होती है। स्पष्टत: ये लोग दिल से आपको अच्छे निवेश नहीं दिलवाते हैं।
३. उसे पढ़ो जिसने बफ़ेट को पढ़ाया – वह आदमी जिसका जबरदस्त प्रभाव बफ़ेट पर है उनके पिता के अतिरिक्त, वह हैं हार्वर्ड के बेंजामिन ग्राहम, जिन्हें नीति निवेश का पितामह भी कहा जाता है। जिन्होंने वर्षों पहले बफ़ेट को पढ़ाया कि निवेश में सफ़लता सरलता में है जटिलता में नहीं। और वाकई ग्राहम को पढ़ना बहुत अच्छा है।
बफ़ेट के साधारण कूटनीतियों को मत भूलिये जो कि उन्हें असाधारण नतीजों की ओर ले गया।
बफ़ेट के निवेश सिद्धांत “जटिलता की जगह सरलता को चुनें”
जब आप निवेश करते हैं, तो उसे सरल ही रखें। वही करें जो बिल्कुल सरल और स्पष्ट है, बफ़ेट सलाह देते हैं – जटिल प्रश्नों के लिये जटिल उत्तर देने की कोशिश मत करिये।
| जिस व्यापार को आप नहीं समझते हैं, उसमें कभी भी निवेश न करें। |
भारत का गणतंत्र सिसक सिसक कर रो रहा है… और मैं अंदर बैठकर उसके बारे में लिख रहा हूँ (Republic India !)
आदतन आज सुबह नित्यकर्म के पहले घर का दरवाजा खोला, अखबार के लिये और जैसा कि रोज होता है अखबार नहीं आया। आदत है तब भी रोज देखने की आत्मसंतुष्टि के लिये, तो छज्जे पर थोड़ा सा बाहर निकल कर देख लिया, वहाँ किसी के सिसक सिसक कर रोने की आवाज आ रही थी, थोड़ा ध्यान से देखा तो वहीं बिजली के खंभे के पास तिरंगे में लिपटा गणतंत्र था जो कि शायद कोहरा घना होने का इंतजार कर रहा था।
मैं चुपचाप अंदर अपने घर में आ गया, कि कहीं गणतंत्र मेरे पास आकर मेरे पास आकर रोना ना सुनाना शुरु कर दे, मेरी घिग्घी बँधी हुई है, और गणतंत्र के सिसक सिसक कर रोने के कारणों के बारे में सोच रहा हूँ, अगर आप को पता चले कि भारत का बूढ़ा गणतंत्र क्यों सिसक सिसक कर रो रहा है.. तो मुझे अवश्य बताईये।
एक कहानी “दूध की बोतल” जिसने मुझे हिला दिया.. बोधिपुस्तक पर्व
“प्रविसे नगर कीजै सब काजा, ह्रदय राखी कौसलपुर राजा…।”
“देखो… मैं अपने पापा के यहाँ स्वतंत्र विचारों से पली-बढ़ी हूँ। मुझे ये दकियानूसी तरीके ठीक नहीं लगते।”
बैंगलोर में ४ ब्लॉगरों और एक पाठक का मिलन (4 Blogger’s and 1 Blog Reader Meet at Bangalore)
आज की ताजा खबर बैंगलोर में ४ ब्लॉगर्स और एक पाठक का मिलन हुआ ।
४ ब्लॉगर थे –
देव कुमार झा
मनीषा जी
विवेक रस्तोगी
हर्ष रस्तोगी
१ पाठक – हमारी धर्मपत्नी वाणी
बहुत सारे ज्वलंत मुद्दों पर बातें हुईं, और सौहार्दपूर्ण तरीके से बैंगलोर में ब्लॉगर मिलन संपन्न हुआ।
ज्वलंत मुद्दों में शामिल थे –
भाजपा द्वारा कर्नाटक बंद और आम जनता की तकलीफ़
भ्रष्टाचार
मुंबई
उड़नतश्तरी समीर लाल जी की कृति – “देख लूँ तो चलूँ”
दक्षिण भारत में हिन्दी
ए.टी.एम. से पैसे निकालने में हुई गड़बड़ी
ब्लॉग वार्ता
जिन ब्लॉगर्स का जिक्र हुआ इस छोटे से मिलन में वे हैं –
उड़नतश्तरी समीर लाल जी, घुघुती बासुती जी, प्रवीण पाण्डे जी, प्रशांत प्रियदर्शी जी PD, अभिषेक कुमार।
फ़ोटो कल देवकुमार झा जी द्वारा प्रकाशित किया जायेगा तब इस पोस्ट में भी लगा देंगे 🙂
बैंगलोर का भारी पानी और बिना मतलब का एक्वागार्ड (Hard Water and Aquaguard Fail…)
ब्लॉगरी में भी विकृत मानसिकता… (Blogger’s Distorted mindset..)
विकृत मानसिकता जिसे मैं साधारण शब्दों में कहता हूँ मानसिक दिवालियापन या पागलपन, वैसे विकृत मानसिकता के लिये कोई अधिकृत पैमाना नहीं है, अनपढ़ और पढ़ेलिखे समझदार कोई भी हो जरूरी नहीं है कि उनकी मानसिकता विकृत नहीं हो।
और ऐसे ही कुछ उदाहरण मैंने हिन्दी ब्लॉगजगत में देखे पोस्ट पढ़कर पहली बार में ही विकृत मानसिकता का दर्जा मैंने दे दिया। अब यहाँ ब्लॉगर भी बहुत पढ़े लिखे हैं, और जिनके पास बड़ी बड़ी डिग्री है, वे हिन्दी ब्लॉगिंग की प्रगति में महति योगदान निभाने में अपनी जीवन ऊर्जा लगा रहे हैं। धन्य हैं वे ब्लॉगवीर और वीरांगनाएँ जो यह सोचते हैं कि वे हिन्दी लिख रहे हैं तो हिन्दी समृद्ध हो रही है, वाह ब्लॉगरी विकृत मानसिकता।
जितना समय दूसरे ब्लॉगर की टांग खींचने उनकी टिप्पणियों में अनर्गल पोस्ट लिखने में लगा रहे हैं उतना समय अगर किसी अच्छे विषय पर या अपनी दिनचर्या से कोई एक अच्छा सा पल लिखने में लगाते तो शायद उससे पाठक ज्यादा आकर्षित होते। परंतु कैसे स्टॉर ब्लॉगर बनें और कैसे ब्लॉगरों की टाँग खींचे ये सब प्रपंच कोई इन विकृत मानसिकता वाले ब्लॉगर्स से सीखें।
अपन तो अपने में ही मगन हैं, किसी की दो और दो चार में अपना कोई योगदान नहीं है, फ़िर भले ही वे दो और दो पाँच ही क्यों हो रहे हों, पर फ़िर भी पढ़े लिखों की विकृत मानसिकता नहीं देखते बनती। इससे अच्छा है कि … (अब भला मैं ये क्यों लिखूँ, वे खुद ही समझ लें।)
इंडिब्लॉगर मीट बैंगलोर ब्लॉगरों की ताकत – 2 (IndiBlogger.in Meet Bangalore – 2)
इंडिब्लॉगर मीट बैंगलोर ब्लॉगरों की ताकत (IndiBlogger.in Meet Bangalore)
दोपहर के भोजन के बाद सभी ब्लॉगर्स इस्कॉन मंदिर के फ़ोटो लेने में लग गये, वैसे एक बात गौर करने लायक थी कि लगभग सभी ब्लॉगर्स के पास DSLR कैमरे थे, कुछ फ़ोटो ब्लॉगर्स भी थे, जो पूरी ब्लॉगर मीट के दौरान फ़ोटो खींचने में ही व्यस्त रहे।
अक्षयपात्र फ़ाऊँडेशन के चैयरमेन श्री मधु दास हमारे सम्मुख थे, और उन्होंने ब्लॉगर्स के योगदान को सराहा और लोगों को इस बारे में बताने के लिये अपने ब्लॉग पर लिखने की अपील की। ब्लॉगर्स के प्रश्नों के उत्तर भी दिये।
सभी ब्लॉगर्स वापिस से MVT हॉल में आ चुके थे, फ़िर शुरु हुआ एक दूसरे को टिप्पणी देने का सिलसिला, सभी को एक ड्राँईंग शीट अपनी पीठ पर लगाने को दे दी गई, और जैसे हम ब्लॉग पर टिप्पणी देते हैं, वैसे ही एक दूसरे से मिलकर, कैसा लगा और अपने ब्लॉग का पता साझा करने के लिये यह दौर बनाया गया था। बहुत सारे ब्लॉगर्स से मुलाकात हुई, जिसमॆं भारतीय भाषा के एक और ब्लॉगर से मिले जो कि कन्न्ड़ में ब्लॉग लिखते हैं। हमने ब्लॉगर्स को बताया कि हम हिन्दी में ब्लॉग लिखते हैं, तो सबने बहुत सराहा। प्रतिक्रियाएँ भी आई कि हिन्दी कम्प्यूटर पर लिखना क्या इतना आसान है ? हिन्दी में लिखने के कारण फ़िर तो आपके पाठक और पेजलोड भी ज्यादा होंगे इत्यादि बातें हुईं। कुछ ब्लॉगर्स ने बताया कि हिन्दी पढ़ना उन्हें अच्छा लगता है परंतु हिन्दी में यहाँ ज्यादा कुछ उपलब्ध नहीं है, उन्होंने वादा किया कि अब हम हिन्दी ब्लॉग पढ़ा करेंगे, उन्होंने बताया कि हम तो हिन्दी को केवल हिन्दी दिवस के कारण ही जानते हैं, क्योंकि तब विद्यालय में कार्यक्रम होते थे। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि हिन्दी दिवस पर आप लोग तो उत्सव मनाते होंगे, कुछ विशिष्ट कार्यक्रम आयोजित होते होंगे, हमने उन्हें बताया कि हिन्दी लिखने वालों के लिये तो रोज ही हिन्दी दिवस है, पर हिन्दी दिवस पर बहुत सारे साहित्यिक आयोजन किये जाते हैं।
बहुत सारी टिप्पणियाँ लेने और देने के बाद पूछा गया कि सबसे ज्यादा टिप्पणियाँ किसके पास हैं, और इस प्रकार ज्यादा टिप्पणी पाने वालों को अक्षयपात्र फ़ाऊँडेशन ने बच्चों की तस्वीरें उपहार स्वरूप प्रदान की।
टिप्पणियों के दौर के बाद अब था बहस का दौर, जिसमें चार समूहों में सारे ब्लॉगर्स को बाँटा गया, पहला समूह मोबाईल ब्लॉगिंग और टिप्स, दूसरा समूह ऑनलाईन उत्पीड़न online harassment, तीसरा समूह ब्लॉग के सामाजिक दायित्व और चौथा समूह इंडिब्लॉगर के बारे में जानकारी का था।
इसके बाद आखिरी दौर था इंडिब्लॉगर की टीशर्ट वितरण का जिसमें सभी को अपने साईज के अनुसार टीशर्टें दी गई।
फ़िर वापिस से दिन भर की इस मधुर ब्लॉगर मीट के बाद हम लौट चले अपने घर की ओर..





