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कुछ खरीदारी मैगी मसाला पास्ता, सी.एफ़.एल., पेस्ट्री, पढ़ने के लिये बच्चों को रिश्वत ? [एक सवाल]

   कल ऐसे ही घर से दोपहर के वक्त सामान लेने के लिये निकला अब हँसिये मत घर के लिये समान तो सब ही लाते हैं, बस एक दूसरे को बताते हुए शर्म खाते हैं, नहीं लाओ तो वीकेंड बर्बाद और पूरा वीक भी वीकेंड जैसा ही रहता है।

    सबसे पहले गये किराना दुकान पर, हमें बोला गया था कि मैगी का पास्ता मसाला मैनिया लाना है, हमने दुकानदार को वही बोला तो जबाब मिला कि मसाला मैनिया कुछ नहीं आता, मसाला  और कुछ अजीब सा नाम बोला तो हमने कहा कि यही दे दो २ पैकिट, ऐसा लग रहा था कि हमें ये सब चीजें पता न होने से यह लग रहा है कि हम आऊटडेटेड होते जा रहे हैं। फ़िर जेब से एकॉर के फ़ूड कूपन निकाले और कुछ चिल्लर निकालकर पेमेन्ट किया। वैसे तो और भी किराना स्टोर हैं परंतु यह सुपरबाजार जैसा है और अपने कस्बे के जैसा भी है, अगर ऑर्डर दो तो समान निकाल भी देता है, नहीं तो खुद नये जमाने के हिसाब से शॉपिंग कर लो अपनी बास्केट उठाकर।

    वहाँ से निकले तो हमें सी.एफ़.एल. लेनी थी, किराना पर पूछा तो बोला नहीं पास की दुकान पर मिलेगी, हम चल दिये अपना झोला उठाये, जी हाँ अपना झोला क्योंकि मुंबई में प्लास्टिक की पोलिथीन को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

————— सी.एफ़.एल. के लिये हार्डवेयर की दुकान पर ———————————–

भैया, एक सी.एफ़.एल. देना,

“कितने वोल्ट की दूँ ?”,

हम बोले दे दो १२ वोल्ट की, पर ये बताईये कि इस पर कितनी गारंटी है,

“छ: महीने की”,

फ़िर हम बोले ओह मतलब जो फ़्यूज हुई है हम उसका आलरेडी ९ महीने ज्यादा इस्तेमाल कर चुके थे, मतलब १५०% का फ़ायदा।

“नहीं सा..ब वैसे तो यह ३००० घंटे चलती है और कई बार ३-४ साल भी चल जाती है, पर गारंटी छ: महीने की ही है”

ओह, अब हम याद करने लगे कि ये ३००० घंटे क्या हमारा परिवार पिछले १५ महीने में नहाता ही रहा होगा क्या ?

“वैसे आपको बाथरुम में लगानी है तो १२ वोल्ट की जगह ८ वोल्ट की लीजिये, लोग तो ५ वोल्ट की भी लगाते हैं”

हमने कहा चलो ८ वोल्ट की ही दे दो।

“टेस्ट कर देता हूँ”

फ़िर उसने सी.एफ़.एल. के ऊपर ही आज की तिथि और गारंटी खत्म होने की तिथि दोनों ही अंकित कर दीं।

——————————— मोजिनीज पर ———————————————-

    वहाँ से निकले किसी ओर दुकान के लिये परंतु वहीं मोजिनीज पेस्ट्री की दुकान दिख गई तो सोचा चलो कोई चॉकलेट वाली पेस्ट्री बेटेलाल के लिये ले लेता हूँ, क्योंकि कई दिनों से हमने पेस्ट्री नहीं खिलाई है, एक चॉकलेट फ़ुल्ली लोडेड वाली पेस्ट्री घर के लिये पैक करवा ली।

——————————स्टेशनरी की दुकान पर —————————————–

    मुंबई में लगभग सभी दुकानें मल्टी टास्किंग करती हैं, अपने नाम के अन्रुरुप तो समान मिलता ही है परंतु और भी समान मिल जायेगा, मसलन स्टेशनरी की दुकान पर प्लास्टिक का समान, फ़ोटोकॉपी, गेम्स सीडी और भी बहुत कुछ…

    हमारे बेटेलाल के एग्जामस शुरु होने वाले हैं सोमवार से और स्कूल में फ़ाईल को फ़्लोरोसेंट रेड कलर में कवर करके मंगाया गया है, तो कवर लेना था, खुद के लिये एक फ़ाईल लेनी थी, और जिलेटिन लेनी थी बेटेलाल की किताबों के लिये, स्कोर शीट में किताबें मैंटेन करने के भी ५ नंबर जो हैं।

    सड़क से ही एक लड़के ने दुकानदार से कुछ पूछा, दुकानदार ने कहा “है आ जाओ”, तो लड़के की मम्मी ने वहीं से कहा कि बेटा नहीं मिलेगा चलो कल देखेंगे । लड़का बोला नहीं मम्मी है चलो …. और वो जबरदस्ती खींचता हुआ मम्मी को दुकान में ले आया । लड़्के को गेम्स की सीडी चाहिये थी।

    दुकानदार ने ४-५ सीडी निकालकर दे दी और बोला कि सील मत खोलना, अगर सील खुल गई तो आपने खरीद ली है यह मान लिया जायेगा, हमने सोचा वाकई यहाँ पर सभी लोग कितने प्रोफ़ेशनल हैं, नहीं तो खरीददार का क्या है वो तो खोलकर देख ही लेगा । साथ में दुकानदार चेता भी रहा था, एक एक सीडी महँगी है, जिस गेम की लेनी हो वही लेना, ऐसा नहीं हो कि दूसरे गेम की ले जाओ और आपके पैसे फ़ालतू में खर्च हो जायें।

बात तो एकदम सही कह रहा था।

एक गेम की सीडी खरीद ली गई, और दुकानदार ने ३८० रुपये दाम बताया तो वे बोलीं कि इस पर तो ३९० लिखा है आपने बस इतना ही कम किया।

“नहीं मैंने कुछ कम नहीं किया है, देखिये ३८० रुपये ही लिखा है”

कुछ तो कम कीजिये ना अपनी तरफ़ से कुछ तो डिस्काऊँट दीजिये ??

“मैडम ये डिस्काऊँटेड प्राईस ही है”

तो वे अपने पर्स में खुल्ले तलाशने लगीं।

“५०० का नोट दे दीजिये मैं पूरी ईमानदारी से बाकी पैसे लौटाता हूँ”

उसका इतना बोलते ही हमें भी हँसी छूट गई।

    साथ में वे बोलती भी जा रही थीं – आज इसने पूरे ४ घंटे पढ़ाई की है, परसों से एग्जाम है, फ़िर अपने बेटे से भाव कर रही थीं कि यू गेट वन गेम सी.डी. एस आई प्रामिस्ड, नाऊ यू हैव टू रीड २ होवर्स मोर, ओनली ऑफ़्टर देट यू विल प्ले गेम  ओन कम्पयूटर ।

बेटा भी कुछ आरग्यूमेंट करता जा रहा था।

और वे माँ बेटे चले गये।

    फ़िर मैं दुकानदार से मुखतिब हुआ कि बताओ आजकल बच्चों को पढ़ाने के लिये भी रिश्वत देना पड़ती है, और हमारे जमाने में पूरा पढ़ लो तब भी जूते ही पढ़ते थे, ऐसे पढ़ाई करते हैं, याद तो पूरा है नहीं, ये सब करने से क्या फ़र्क पड़्ता है और भी बहुत कुछ [ मैं याद नहीं करना चाहता ..]

और आजकल बस कैसे भी करके पढ़ लें सिलेबस पूरा कर लें, याद है या नहीं, क्वालिटी है या नहीं उससे किसी को कोई मतलब नहीं है।

हमने भी अपना पेमेन्ट किया और घर चल दिये।

    सोच रहे थे कि हमारे बेटे ने भी तो आज जितना पढ़ाया उतना पढ़ लिया और ये पेस्ट्री कहीं हम भी रिश्वत के लिये ही तो नहीं ले जा रहे हैं, या फ़िर ये केवल पिता का प्यार है कि बेटेलाल ने बहुत दिनों से पेस्ट्री नहीं खाई है, पेस्ट्री देखकर ही खुश हो जायेगा, और बोलेगा –

“अरे वा डैडी, आप तो बहुत ही प्यारे हो, मैंने तो बहुत दिनों से पेस्ट्री नहीं खाई थी, मजा आ गया डैडी…”

सोच रहा हूँ…

होली अपने बेटे के साथ -[ कुछ मेरे बारे में ]- यायावर सी जिंदगी से थक गया हूँ – मेरी कविता …. विवेक रस्तोगी

यह होली मेरी दूसरी होली होगी जो मै अपने बेटे के साथ मनाऊँगा| इसके पहले होली हमने मनाई थी साथ में ३ साल पहले आज मेरा बेटा ५ साल का हो चुका है| इस वर्ष पता नहीं कि वह होली खेल भी पायेगा कि नहीं क्योंकि अभी अभी बुखार से उठा है पिछले २०-२५ दिनों से उसकी तबियत ज्यादा ही खराब थी| अभी भी उसकी तबियत ठीक नहीं है और मुझे उसकी बहुत ही चिंता हो रही थी| पर मैं इधर चेन्नई मैं था और मजबूरी का मारा इधर ही काम कर रहा था, सोच रहा हूँ कि ऐसा कब तक चलेगा, कब तक नौकरी करता रहूँगा और इस तरह घूमता रहूँगा |

बस अब मैं सेवानिवृत्ति चाहता हूँ, और अपना जीवन आध्यात्मिक गतिविधियों में समर्पित करना चाहता हूँ | अपने खुद के लिए कुछ करना चाहता हूँ कब तक इन सांसारिक मोह माया के पीछे भागता रहूँगा|

यायावर सी जिंदगी से थक गया हूँ
आओ देखो अभी तक कैसे
मैं जी रहा हूँ
मेरे जीने के लिये
और भी मकसद हैं
केवल भूख मारना ही नहीं
और भी बहुत कुछ जो
मैं पाना चाहता हूँ
देना चाहता हूँ |

खैर अभी तक जो सोचा वो नहीं हुआ अब देखते हैं शायद हो जाये और हर वर्ष होली अपने बेटे के साथ खेल पायें| बाबा महाकाल के साथ होली खेल पायें और मन में बड़ी इच्छा है कि बांके बिहारी जी के यहाँ खेल पायें होली |

तो ये था अभी का चिट्ठा, अब शुरू होगा धमाल “होली” का |

पोर्टेबल माइक्रोसोफ़्ट ऑफ़िस २००७ (Portable MS Office 2007)

आपकी पेनड्राईव के लिये अब लीजिये पोर्टेबल माइक्रोसोफ़्ट एन्टरप्राइज ऑफ़िस २००७। इसके लिये आपको ऑफ़िस २००७ का संस्थापन नहीं करना पड़ेगा, केवल .exe फ़ाइल से चल जायेगा।

इस पेनड्राईव (यू.एस.बी.) में निम्न सोफ़्टवेयर उपलब्ध हैं –

१. वर्ड २००७
२. एक्सेल २००७
३. पावरपाइंट २००७
४. ऑफ़िस पिक्चर मैनेजर
५. क्लिप ऑरगेनाइजर
६. ऑफ़िस डायगोनेसटिक २००७

आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं |

चेतावनी – इस Download साइट पर अश्लील (porn) विज्ञापन हैं, कृप्या ध्यान रखें। इससे मेरा व मेरे ब्लाग का कोई संबंध नहीं है।

दिल्ली को इन चरसियों से मुक्त करवाने के लिये कृप्या सहयोग करें और दिल्ली को सुँदर बनाने में योगदान दें।

मैं रोज आटो से करोलबाग से कनाटप्लेस अपने ओफ़िस जाता हूँ तो पंचकुइयां रोड और कनाटप्लेस की रोड जहाँ मिलती है, उसके थोड़े पहले ही चरसियों की भीड़ फ़ुटपाथ पर लगी रहती है। खुलेआम भारत की राजधानी दिल्ली में चरस का सेवन कर रहे हैं पर कोई भी किसी भी तरह की कार्यवाही करने को तैयार नहीं, कारण शायद यह कि उनसे कमाई नहीं हो सकती !!

वैसे तो रास्ते में बहुत सारी ओर भी चीजें पड़ती हैं रास्ते में, हनुमानजी का बहुत बड़ा मंदिर, थोड़ी ओर आगे जाने पर कबूतरों को दाने खिलाते लोग और कोने में श्मशानघाट और भी बहुत कुछ। पर बरबस ही निगाहें रुक जाती हैं चरसियों को देखकर जब कनाटप्लेस की रेडलाईट पर आटो रुकता है। ये लोग भिखारी, कचरा बीनने वाले जैसे लगते हैं, परंतु ये खुलेआम चरस का सेवन करते हुए दिख जायेंगे कानून का मजाक बनाते हुए। किसी भी कानून पालन करवाने वाले व्यक्ति को ये लोग नहीं दिखते ?

ये लोग वहाँ मैली कुचैली चादर ३-४ के झुँडों में ओढ़कर चरसपान करते रहते हैं और जैसा कि आटो वाले बताते हैं कि यही लोग रात के अँधेरे का फ़ायदा उठाकर लूटपाट भी करते हैं और पुलिस वाले इनको इसलिये पकड़ के नहीं ले जाते हैं कि इनसे उन्हें कोई भी (धन संबंधी) फ़ायदा नहीं होता है। उल्टा उनकी सेवा करना पड़ती है।

दिल्ली को इन चरसियों से मुक्त करवाने के लिये मेरा ब्लाग पढ़कर कोई बंधु जो यह अधिकार रखता हो या मीडिया में हो तो कृप्या सहयोग करें और दिल्ली को सुँदर बनाने में योगदान दें।

मन का ब्लागर होना बहुत जरुरी है ब्लाग लिखने के लिये, ब्लागर मन आखिर क्या चाहता है कुछ विश्लेषण

अब तो मेरा मन भी ब्लागर हो चला है, क्योंकि मन का ब्लागर होना बहुत जरुरी है ब्लाग लिखने के लिये, ब्लागर मन आखिर क्या चाहता है कुछ विश्लेषण –

१.आज कौन से नए विषय पर लिखा जाये कि पाठकों का असीम स्नेह मिले और ब्लागर मन की तड़पन को शांति मिल सके।
२.आसपास और अपनी जिंदगी में झांककर, घटी हुई घटनाओं को शब्दों के जादू से बुनकर अपनी जिंदगी के रंग सब को दिखा
दूँ।
३.साहित्यिक भाषा का उपयोग करुँ, जिससे ब्लागर मन के किसी कोने में बैठे साहित्यकार को दुनिया को दिखा सकूँ। (पहले
मैं कविताएँ लिखता था परंतु कार्य की व्यस्तता में सब खत्म हो गया।)
४.तंत्रजाल पर बहुत कुछ नया उपलब्ध है उसके बारे में खोजबीन कर अपने ब्लाग पर जानकारी प्रकाशित करुँ।
५.हिन्दी में अपने प्रोफ़ेशन के बारे में कुछ लिखूँ । ( लिखा था पर न ज्यादा हिट्स आये और न ही प्रतिक्रिया)
६.घरवाली ब्लाग लिखने पर काश झगड़ा न करे और यह भी सुनने को न मिले कि तुम मेरा समय चिठ्ठाकारी को दे देते हो।
(कई बार तो बड़े और तगड़े झगड़े हो चुके हैं। अब घरवाली को भी चिठ्ठाकारी के लिये राजी कर लिया है। अब वह भी जल्दी
ही चिठ्ठाजगत में प्रवेश करने वाली है।)
७.रिटायरमेंट के बाद फ़ुल टाईम ब्लागिंग करुँ।

भीखाजी का फ़ूड़ जंक्शन

भीखाजी (बीकानेर वाले) ने अभी एक नया रेस्टोरेंट आधुनिक स्टाईल मे शुरु किया है नाम है फ़ूड़ जंक्शन। मलाड, लिंक रोड पर साथ में वैलेट पार्किंग की सुविधा भी है। स्वाद बिल्कुल उत्तर भारतीय और साथ में कुछ राजस्थानी व्यंजन भी रखे हैं जैसे बेड़ई पूरी, प्याज की कचोरी। दिल्ली के छोले कुल्चे और मुम्बई की भेल और भी बहुत कुछ। पर कुल मिलाकर मेनू में समान कम है पर वाकई में मिठाई में टेस्ट है। खाने में थाली भी है जिसका टेस्ट वाकई बहुत अच्छा है।

3000 चैनल देखिये फ्री – उपग्रह टीवी पीसी के लिये ।

अभी हाल ही में नई तकनीक आई है, अब आप कम्प्यूटर पर (लेपटाप पर भी) टीवी देख पायेंगें। इस के कुछ फायदे इस प्रकार हैं –
1) महीने की फीस नहीं चुकानी पड़ेगी, यानि के बिल्कुल मुफ्त वो भी जिंदगी भर उपग्रह टीवी पीसी पर ।
2) इतने सारे चैनल – 3000 चैनल देख सकते हैं आप अपने पीसी या लेपटाप पर।
3) टीवी आपके साथ हमेशा – आप विश्व के किसी भी हिस्से में हों पर आप अपने लेपटाप पर टीवी देख सकते हैं।
4) अपने मनपसंदीदा कार्यक्रम डाउनलोड करके बाद में भी देख सकते हैं।
5) दुनियाभर के सभी प्रसिद्ध चैनल जैसे – फोक्स, बीबीसी, इएसपीएन, सीएनएन और भी बहुत सारे।
6) 78 देशों के चैनल उपलब्ध।
7) सभी प्रकार के श्रेणियों के चैनल उपलब्ध।
8) सभी लाईव कार्यक्रम संपूर्ण विश्व से।
9) प्राकृतिक आपदाओं से सेवा प्रभावित नहीं होती है इसलिए यह बहुत विश्वसनीय सेवा है।
10) कोई अलग से हार्डवेयर लगाने की जरूरत नहीं है . केवल एक छोटे से सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता है और ब्राडबेंड की।

इस सॉफ्टवेयर को कहा जाता है उपग्रह टीवी पीसी के लिये (Satellite TV for PC). उपग्रह टीवी पीसी के लिये सॉफ्टवेयर 7 वर्षों से अधिक समर्पित अनुसंधान और विकास का नतीजा है जो कि कानूनी तौर पर हजारों की संख्या में टेलीविजन चैनलों को पूरे विश्व में भेजता है आपके कंप्यूटर के लिये, इंटरनेट के माध्यम से।

आप इस सॉफ़्टवेयर को संस्थापित करने के बाद 3000 से ज्यादा चैनल देख सकते हैं वो भी डीवीडी फिल्म गुणवत्ता के साथ ।

केवल एक बार भुगतान करना हैं| वह भी मात्र 2500/- रुपये / 45.95$.

ज्यादा जानकारी के लिये कि टीवी पीसी के लिए कैसे काम करता है व आप किधर से सॉफ़्टवेयर डाउनलोड कर सकते हैं चटका लगायें उपग्रह टीवी पीसी के लिये

लेख :
PC TV – How To Watch Free Online TV In Your Computer
Satellite TV For PC – Watch TV Online In Your PC

बहुत दिनों के बाद हिन्दी….

आज बहुत दिनों के बाद हिन्दी टाईप करने के लिये सिस्टम मिला है नहीं तो क्लाइंट साईट पर या तो टाईम नहीं होता या फिर सिस्टम में नया साफ्टवेयर संस्थापित करने के लिये पर्याप्त राइट्स नहीं होते हैं।

हमें यह‍ दिल्ली में पडे़ हुए पूरे 4 महीने होने आये हैं ओर अगले दो महीने और बाकी हैं मुंबई जाने के लिये। अच्छा यह रहा कि दिल्ली में ज्यादा गरमी नहीं पड़ रही है थोड़ा मौसम ठीक है, क्योंकि पहले ही बेमौसम बरसात हो चुकी है। पर वह्‍ मुंबई में बरसात अपना रंग दिखा रही है और हम वह लुत्फ़ नहीं ले पा रहे हैं।

यह्‍ तो दिनभर काम करने के बाद बस बिस्तर ही नजर आता है और ताजा समाचार या तो फोन पर घ़रवाली बताती है या फिर सुबह समाचार पत्र ।

रोज सुबह होटल में या तो बटर टोस्ट खा लो या फिर आलू परांठा, दोपहर में कनाट प्लेस में बनाना लीफ में साउथ इंडियन, पंजाबी ढाबे का प्योर तेल वाला पंजाबी खाना या फिर राजमा चावल। अब तो हालत यह हो गयी है कि घर का खाना खाने से हाजमा खराब हो जाता है। पर हां शाम को करोलबाग या चांदनीचौक चले जाओ तो दिल्ली की चाट का आनंद ले लो नहीं तो दिन मे छोले कुल्चे, दही भल्ले भी बुरे नहीं हैं।

दुनिया में बड़ी बड़ी खबरें हो गयीं पर हम उन पर चिंतन नहीं कर पाये वैसे भी चिंतन करके हम कर क्या लेते। जैसे कि कच्चे तेल का भाव 145 $ हो गया, शेयर मार्केट अपने निम्नतम स्तर पर, सोने का दाम आसमान पर, महंगाई और न्यूक्लियर मुद्दे पर लेफ्ट का बबाल, सरकार पर खतरा, अमरनाथ श्राईन बोर्ड भूमि विवाद इत्यादि । किंतु हां हम दुनिया से थोडे बहुत जुडे हुए हैं।

बहुत दिनों बाद लिखा है आज ही कैफे हिन्दी से डाउनलोड किया है, पहली बार लिख रहा हूं मात्राओं की गल्ती के लिये क्षमा चाहता हूं।

पारिवारिक फिल्म टेक्सी नं. ९ २ ११ ?

आज बहुत दिनों बाद फिल्म देखने का मूड बना और हम केबल पर शुरु होने वाली फिल्म टेक्सी नं. ९ २ ११ देखने बैठ गये फिल्म शुरु हुई, १५ मिनिट तक तो नाना पाटेकर का चरित्र ही दिखाते रहे कि अब वो टेक्सी ड्राइवर का काम कर रहा है लेकिन घर पर उसकी पत्नी यही जानती है कि वो इंश्योरेंस कंपनी में पॉलिसी बेचता है, टेक्सी घर से २ किलोमीटर दूर पार्क कर घर पैदल ही जाता है, जिससे घर पर पता न चले, और फिर बिना जरुरत के एक अपारिवारिक दृश्य नाना पाटेकर अपनी वही पुरानी स्टाईल में अपनी बीबी के ब्लाउज में घुस जाते हैं, वैसे नाना का यह सिलसिला बहुत पुराना है याद करें तो वो मनीषा कोईराला, मधु ओर भी बहुत सी हीरोइनों के ब्लाउज में घुस चुके हैं, पता नहीं ये फिल्मवाले क्यों नहीं समझते कि उनकी फिल्में आज भी परिवार साथ में बैठकर देखता है, बस फिर क्या था हमने झट से एक माहिर दर्शक की तरह चैनल चेंज कर आज की ताजा खबर देखने लगे, क्या हम नई फिल्में परिवार के साथ बैठकर नहीं देख सकते …..