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गपोड़ी बेटेलाल की गप्प के किस्से ३१०७२०१०

    बेटेलाल को सुबह स्कूल के लिये बस पर छोड़ने जाते हैं तो कल उनकी एक मारक गप्प वहीं सुनी, लगभग ५ मिनिट मिलते हैं रोज जब मैं और मेरा बेटा बिल्कुल पास होते हैं, तो अभी दो दिन से स्कूल बस की जगह वीडियोकोच बस आ रही है, मैंने पूछा कि स्कूल बस कहाँ गई और ये वीडियोकोच बस क्यों आ रही है।
    तो बोले कि दो दिन पहले जब हम स्कूल से घर की ओर आ रहे थे तो हमारे स्कूल के ग्राऊँड में से अचानक धुआँ आने लगा तो पता चला कि बस जल गई, हमने कहा ऐसा क्या, चलो फ़िर तो बस अभी आयेगी तो पूछ लेंगे, तो बोलते हैं
“नहीं डैडी, मत पूछना प्लीज”
मैंने कहा “नहीं उससे पूछना पड़ेगा, कि कैसी बसें चलाते हो स्कूल के लिये”
बेटेलाल बोले “डैडी स्कूलबस नहीं जली थी, मैं तो बस ऐसे ही बोल रहा था” “उल्लू बनाया चरखा चलाया”
पर वीडियोकोच बस में बैठे हुए सारे बच्चे बहुत खुश नजर आते हैं।
 

गपोड़ी बेटेलाल की गप्प के किस्से १८०७२०१०

शाम को पार्क में घुमाने ले गये तो बेटेलाल की गप्प सुनिये –

हमारे स्कूल में रोज कराटॆ करवाते हैं और कराटे करवाते हुए २ किमी दौड़ते हैं।

मैंने पूछा और कराटॆ मॆं फ़र्स्ट कौन आता है, तो बोले “कराटे में नहीं दौड़ में, हमेशा मैं फ़र्स्ट आता हूँ, और हमारे सर इतना तेज दौड़ते हैं, तब भी मेरे पीछे रह जाते हैं”

“फ़िर दौड़ ४० किमी की हो जाती है और ४० किमी की दौड़ खत्म होते ही ७० किमी की हो जाती है, फ़िर नदी आ जाती है, तो सर कहते हैं कि उड़ के पार कर लो”

मैंने पूछा “उड़के !”

तो बेटेलाल बोले “हाँ सर कहते हैं कि दोनों हाथों को पंख बनाकर उड़ाते हैं, और पैर से किक मारते हैं, तो उड़ने लगते हैं”

आज से गपोड़ी किस्से शुरु किये हैं। जिससे बचपन के किस्से जो हम भूल जाते हैं, वो लिखित में हमेशा मेरी पास यादें बनकर मेरे पास और आपके पास रहें।

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